गुरनूर की शादी किसी और से होने वाली थी, ये बात सुनकर श्रेयांश बहुत ज्यादा हैरान हो गया था क्योंकि पिछले दिनों में उसने जब भी गुरनूर से बात की थी, गुरनूर ने उसे ऐसा कुछ भी नही बताया था। गुरनूर की किसी और से शादी के बारे में सोचते ही श्रेयांश के दिल में बेहद तकलीफ हुई लेकिन उसने भी खुद को समझा रखा था की उसे गुरनूर के लिए सीरियस नही होना है। उसने गुस्से में गुरनूर से कहा, “तुम दिल की जगह दिमाग से क्यों नही सोचती हो कभी। पागल हो क्या। बिना सोचे समझे घर से भाग आई।”
गुरनूर ने अपने आँसू पोंछकर श्रेयांश को हैरानी से देखते हुए कहा, “वो जबरदस्ती मेरी शादी कहीं और करवा रहे थे।”
“तो कर लेती शादी। यहाँ क्यों आ गई?” श्रेयांश ने कहा जिसे सुनकर गुरनूर को एक झटका सा लगा। वो ये देखकर हैरान हो गई थी की श्रेयांश ने कितनी आसानी से उसे किसी और के साथ शादी करने के लिए कह दिया। उसने गुस्से और बेबसी से श्रेयांश को देखते हुए कहा, “कैसे कर लेती जब मैं तुमसे प्यार करती हूँ और तुम मुझसे।”
वहाँ आसपास आते जाते हुए लोग उन्हें देख रहे थे। श्रेयांश ने उसे देखा और कहा, “तो तुम इस उम्मीद में यहाँ आ गई हो कि मैं तुमसे शादी कर लूँगा। अगर ये सोचकर यहाँ आई हो तो अभी के अभी वापिस लौट जाओ क्योंकि ऐसा कभी नहीं होगा, गुरनूर। मुझे नहीं है प्यार तुमसे और वैसे भी, मैं दो महीने बाद तेरह तारीख को जा रहा हूँ यहाँ से।”
“तुम ये क्या कह रहे हो, श्रेयांश। तुम्हारी आँखों में दिखता है प्यार मेरे लिए।” गुरनूर ने श्रेयांश का हाथ पकड़कर कहा तो श्रेयांश ने अपना हाथ उसके हाथ से छुड़वाते हुए कहा, “नहीं, यकीन मुझे किसी प्यार में और न ही मुझे कभी प्यार हो सकता है। तुम्हारे साथ जो कुछ भी था, वो बस टाइमपास था।”
“तुम अपने करियर की वजह से ये सब कह रहे हो ना क्योंकि तुम तीन साल के लिए जा रहे हो। देखो अगर ऐसा है तो मैं तुम्हारा इंतजार करूॅंगी श्रेयांश। तुम्हारे करियर में प्रॉबलम कभी नहीं बनूंगी मैं। मेरे साथ रहकर भी तुम अपना करियर बना सकते हो।” गुरनूर ने श्रेयांश की बातों पर यकीन न करते हुए कहा। उसे अभी भी उम्मीद थी की श्रेयांश कह देगा की ये सब कुछ झूठ है लेकिन श्रेयांश ने अगले ही पल उसकी सारी उम्मीदों पर पानी फेरते हुए कहा, “मैंने तुम्हें सच बता दिया है, गुरनूर। वो सब सिर्फ टाइमपास था।”
गुरनूर ने अपने दोनों हाथों से श्रेयांश की कॉलर पकड़कर उसकी आँखों में देखते हुए कहा, “तुम मेरे साथ इतना बड़ा फरेब नहीं कर सकते। मैंने तुम्हें अपनी जिंदगी में वहाँ जगह दी है जहाँ मेरे लिए सब कुछ मेरे सपने थे। क्यों…क्यों इतना बड़ा झूठ बोला तुमने मुझसे कि तुम मुझसे प्यार करते हो।”
“तुमने भी तो मुझसे झूठ कहा था कि तुम्हारा बॉयफ्रेंड है। मैंने भी हिसाब बराबर करने के लिए ये कह दिया कि मुझे तुमसे प्यार है क्योंकि मुझे नही पसंद की कोई मुझसे झूठ बोले।” श्रेयांश ने गुरनूर के हाथों से अपनी कॉलर छुड़वाते हुए कहा।
गुरनूर ने खीचकर एक थप्पड़ श्रेयांश के गाल पर मारा और कहा, “पहले जब मुझे तुमसे मतलब नहीं था तो तुम मेरे इतने करीब आए कि मुझे तुम्हारी आदत लग गई, और अब जब मुझे तुम्हारी इतनी आदत लग गई है तो तुम दूर जाना चाहते हो मुझसे। किसी की फीलिंग्स के साथ भी खेलना सीखा है क्या तुमने। प्यार जैसी इतनी प्योर फीलिंग का मज़ाक बना दिया तुमने।”
“वापिस चली जाओ जहाँ से आई हो। भुला दूॅंगा आसानी से मैं तुम्हें।” कहकर श्रेयांश वहाँ से जाने लगा।
“नहीं जाऊॅंगी। जब तक तुम यहाँ हो, मैं भी यहीं रह कर तुम्हें अपने प्यार का एहसास दिलाने की कोशिश करूँगी और जहाँ तक बात है मुझे भुलाने की तो तुम मुझे कभी भूला नहीं पाओगे। हर जगह तुम मुझे देखोगे और हर किसी में मेरी तलाश करोगे तुम।” गुरनूर ने उसे जाते हुए देखकर कहा तो श्रेयांश मुड़ा और उसके करीब आकर कहा, “कोई कोशिश मत करना मुझे एहसास दिलाने की क्योंकि इसका कोई फ़ायदा नहीं होगा।”
श्रेयांश गुरनूर को वहाँ छोड़कर चला गया। गुरनूर बेबसी से बस उसे जाते हुए देखती रही। उसके दिल में इस वक्त बहुत तकलीफ हो रही थी। गुरनूर के पास पैसे थे इसलिए थोड़ी देर वहाँ ऐसे ही खड़े रहने के बाद वो ऑटो में बैठकर रावी के घर जाने के लिए निकल गई।
रावी सबके साथ बैठकर नाश्ता कर रही थी की तभी उनके घर की डोरबेल बजी। रावी ने उठते हुए कहा, “आप सब नाश्ता कीजिए। मैं देखती हूँ।”
रावी ने दरवाज़े की तरफ आकर जैसे ही दरवाज़ा खोला, वो अपने सामने गुरनूर को देखकर हैरान रह गई। गुरनूर को देखकर लग रहा था की वो इस वक्त बहुत डरी हुई है और पूरे रास्ते रोते हुए आई है। रावी ने गुरनूर को देखते हुए कहा, “गुरनूर, तुम यहाँ क्या कर रही हो और ये क्या हाल बना रखा है तुमने अपना?”
श्रेयांश की वजह से गुरनूर पूरे रास्ते रोते हुए आई थी जिसकी वजह से उसकी आँखें और नाक लाल हो चुकी थी। गुरनूर ने बिना कुछ कहे रावी को गले लगा लिया और रोने लगी।
गुरनूर का नाम सुनकर शुभम और मधु ने एक दूसरे को देखा और फिर उठकर गुरनूर के पास आ गए। नील भी उनके पीछे आ गया। मधु मन ही मन में गुरनूर को अपने पास देखकर खुश हो रही थी लेकिन उसे हैरानी भी थी की गुरनूर ऐसे अकेले यहाँ कैसे आ गई। नील और रावी भी काफी हैरान थे। मधु खुश तो बहुत थी लेकिन जब उसने गुरनूर को रोते हुए देखा तो उसे तकलीफ होने लगी।
शुभम ने गुरनूर के सिर पर हाथ रखा तो उसने रावी से अलग होकर उसे देखा। शुभम ने गुरनूर के हाथ से उसका बैग लेकर नील को दिया और उसके आँसू पोंछे। शुभम ने प्यार से उसके कंधे पर हाथ रखा और उसे अंदर ले आया। उसे गुरनूर के यहाँ आने से ज्यादा हैरानी बिल्कुल भी नही हुई थी क्योंकि शायद उन्हें मालूम था की गुरनूर घर से भागकर यहाँ आएगी।
Continued In आर्ज-ए-इश्क - 25

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