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Friday, 2 October 2026

आर्ज-ए-इश्क - 26

 



शुभम ने रावी को पानी लाने के लिए कहकर गुरनूर को सोफे पर बैठाते हुए कहा, “तुम्हें घबराना बिल्कुल नहीं है, बेटा। सब ठीक हो जाएगा। विक्रम से मैं बात करूँगा। डरना नहीं है तुम्हें। तुमने बिल्कुल सही फैसला किया है। जबरदस्ती शादी करके खुश रहने का नाटक करने से अच्छा है उस शादी से बचना।” 


रावी ने पानी का गिलास लाकर शुभम को दे दिया। शुभम ने गुरनूर को पानी पिलाया। 


“रावी, तुम गुरनूर को कमरे में लेकर जाओ। ये फ्रेश हो जाएगी तो ठीक महसूस करेगी।” शुभम को गुरनूर की हालत ठीक नही लग रही थी इसलिए उसने रावी से कहा और फिर मधु को देखकर कहा, “गुरनूर जब फ्रेश हो जाए तो इसे अच्छे से और प्यार से नाश्ता करवा देना।” 


रावी गुरनूर को ऊपर अपने कमरे में ले आई। विक्रम और नील भी अपना नाश्ता खत्म कर अपने अपने ऑफिस जाने के लिए निकल गए। 


रावी गुरनूर से सब कुछ जानना चाहती थी कि वो भागी कैसे और श्रेयांश से उसकी मुलाकात हुई या नही लेकिन गुरनूर की हालत देखते हुए उसने उससे कुछ भी पूछना ठीक नही समझा। गुरनूर नहाकर आई तो अभी भी उसके चेहरे पर काफी उदासी थी। रावी को लगा कि शायद वो विक्रम की वजह से परेशान है इसलिए उदास है। उसने गुरनूर को गले लगाते हुए कहा, “तुम टेंशन मत लो। सब ठीक हो जाएगा।” 


“अब कुछ ठीक नहीं होगा, रावी।” गुरनूर ने उसके गले लगे हुए ही मन ही मन में कहा। 


रावी ने उसे बेड पर बैठा दिया। गुरनूर इतने लंबे सफर में बैठे हुए आई थी इसलिए काफी ज्यादा थक चुकी थी। मधु उसके लिए कमरे में ही नाश्ता ले आई। गुरनूर का मन नही था फिर भी रावी और मधु ने मिलकर उसे नाश्ता करवाया और फिर गुरनूर को सुला दिया। थकावट की वजह से गुरनूर को जल्दी नींद आ गई। 


***


दिल्ली में नीत ने गुस्से से विक्रम से कहा, “तुम्हारी बेटी की वजह से हमें कितनी शर्मिंदगी उठानी पड़ी है लड़के वालों के सामने और वो भागकर टेंशन फ्री होकर घूम रही होगी कहीं।” 


“मुझे पता है वो कहाँ गई है।“ विक्रम ने नीत के सवाल को नज़रअंदाज़ करते हुए कहा और फिर शीतल को देखकर कहा, “तैयारी करो जाने की।” 


***


गुरनूर जब से उठी थी, वो एक बार भी कमरे से बाहर ही नहीं आई थी। वो बस रोए जा रही थी। शुभम ने ऑफिस से आकर रावी से उसके बारे में पूछा तो रावी ने कहा, “वो तो बस रोए जा रही है, पापा। डरी हुई भी है।” 


शुभम फ्रेश होकर रावी के साथ उसके कमरे में आए तो देखा की गुरनूर बेड पर लेटकर रो रही थी। शुभम ने पीछे से उसके पास जाकर उसके सिर पर हाथ रखा तो गुरनूर ने मुड़कर अपनी आँसूओं से भरी हुई आँखों से उन्हें देखा। शुभम ने उसे बेड पर बैठने के लिए कहा और फिर प्यार से उसे समझाते हुए कहा, “क्यों रो रही हो, बेटा? मैंने कहा न तुमने कुछ गलत नहीं किया है। तुम किसी से भी मत डरो। विक्रम आएगा तो उससे मैं बात करलूॅंगा।” 


गुरनूर को समझाने के बाद शुभम वहाँ से चले गए। उनके जाने के बाद गुरनूर ने मन ही मन में सोचा, “गलत तो मैंने किया है, अंकल। मैंने एक ऐसे इंसान से प्यार किया जो  बस अपनी इगो की वजह से मेरे दिल के साथ खेल रहा था।” 


विक्रम शीतल और नीत के साथ इंदौर पहुँच गया। गुरनूर रावी, शुभम और नील के साथ लिविंग रूम में बैठी हुई थी जब दरवाजे की घंटी बजी। मधु ने जाकर दरवाज़ा खोला तो देखा कि सामने विक्रम शीतल और नीत के साथ खड़ा था। उसने उन्हें अंदर बुलाया। गुरनूर को देखते ही विक्रम को गुस्सा आ गया और वो उसे थप्पड़ मारने ही वाला था कि तभी शुभम ने उसका हाथ पकड़कर उसे रोक दिया। विक्रम ने शुभम को देखते हुए कहा, “शुभम भाई, मेरा हाथ छोड़ दीजिए। इस लड़की ने इतना भी सोचना या समझना ठीक नहीं समझा की इसके भागने से मुझ पर क्या बीतेगी।” 


“तुमने गुरनूर को समझने की कोशिश की। नहीं ना। बस किसी की बातों में आकर उसकी जबरदस्ती शादी कराने लग गए तुम। इतने खुले विचारों वाले हो तुम। तुमसे ये उम्मीद नहीं थी मुझे।” शुभम ने विक्रम का हाथ छोड़ते हुए कहा। 


“मैं अच्छा सोच रहा था, इसका।” विक्रम ने कहा जिसे सुनकर शुभम ने उन्हें देखते हुए कहा, “अगर तुम्हें गुरनूर का अच्छा सोचना है तो इसे इसके पैरों पर खड़े होने दो पहले और अगर अपने पैरों पर खड़ी नहीं भी होती तो एकलौती बेटी है, जबरदस्ती नहीं करो इसके साथ। शादी एक ज़िम्मेदारी है। जब इसे लगेगा की ये तैयार है इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए तो कर लेगी ये शादी अपने आप। हर जगह तुमने इसे समझा है तो जब इसकी जिंदगी का इतना बड़ा फैसला लेने की बारी आई तो तुम टिपिकल इंडियन फादर बन गए। इसकी बातें छोड़कर दूसरो की सुनने लग गए तुम। कहता नहीं था पर शुरू से ही तुम ओपन माइंडेड के साथ-साथ टिपिकल फादर भी रहे हो। तुम हल्का सा चिल्ला भी देते थे तो वो बच्ची अंदर तक सहम जाती थी। कभी सोचा जहाँ इसे भेजने की तैयारी कर रहे थे वहाँ इसके साथ ऐसा होता तो कैसे रहती ये।” 


विक्रम ने पास शुभम की बातों का कोई जवाब नही था। उसे खामोश देखकर शुभम ने आगे कहा, “गुरनूर को उसका लाइफ पार्टनर खुद चुनने दो। अरेंज मैरिज में भी। ऐसे जबरदस्ती मत करो। भागकर आई वो क्योंकि तुमने उसकी बात ना सुनकर उसे मजबूर कर दिया था।” 


गुरनूर की आँखें ये सब सुनकर आँसुओं से भरी हुई थी। विक्रम को अपनी गलती का एहसास हो गया। नीत और शीतल, दोनों ही अब तक खामोश खड़ी थी। विक्रम ने गुरनूर के पास आकर उसके सिर पर हाथ रखकर कहा, “आई एम सॉरी, बेटा। अपने पापा को माफ करदो।” 


गुरनूर ने उनसे कुछ नही कहा और ना ही उनकी तरफ देखा। मधु सबको बैठने का कहकर सबके लिए चाय बनाने चली गई। गुरनूर बस खामोशी से विक्रम के पास बैठी हुई थी। शीतल इसी बात से परेशान हो रही थी की गुरनूर ने अभी तक कुछ नही कहा था। उसके चेहरे पर अभी भी उदासी ही थी।


Continued In आर्ज-ए-इश्क - 27

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