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Friday, 10 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 24


 

अयांश के घर से निकलकर आहना रोने लगी। जो आँसू उसने अयांश के सामने रोककर रखे थे वो अब उसकी आँखों से बहने लगे थे। आहना को कुछ समझ नही आ रहा था बस उसके मन में एक ही सवाल था की उसके साथ ही ये सब क्यों हुआ। कहाँ उसने अयांश के साथ जिंदगी भर साथ रहने के सपने सजाए थे और कहाँ एक पल में सब कुछ बदल गया। वो वहीं खड़े खड़े आसमान की ओर देखने लगी। उसकी आँखों से आँसू लगातार बहे जा रहे थे। 


कुछ वक्त बाद, उसे अपने कंधे पर किसी का हाथ महसूस हुआ। उसने साइड में देखा। राकेश उसकी तरफ ही देख रहे थे। उन्होंने आहना के आँसूओं को अपनी उँगलीयों से पोंछते हुए कहा, “जिसके लिए तुम ये आँसू बहा रही हो न बेटा वो ये डिजर्व नही करता।” 


“मैं भी धोखा डिजर्व नही करती थी। मेरी क्या गलती थी, अंकल?” आहना ने रोते हुए पूछा। 


“रो मत आहना बेटा। चलो तुम्हें घर छोड़ आता हूँ। मैं आता हूँ गाड़ी लेकर।” राकेश ने आहना के गाल को छूते हुए कहा और गाड़ी लेने चले गए। 


राकेश गाड़ी घर से बाहर लेकर आए। आहना बिना कुछ कहे गाड़ी में बैठ गई। हमेशा खुश रहने वाली और ज्यादा बातें करने वाली आहना के चेहरे पर आज कोई मुस्कान नही थी क्योंकि उस मुस्कान और खुशी की जगह आज दर्द, तकलीफ और खामोशी ने ले ली थी। 


राकेश ने गाड़ी आहना के घर के सामने रोकी और आहना को देखकर कहा, “अयांश के बारे में मत सोचना, बेटा।” 


आहना ने कुछ नही कहा और गाड़ी से उतरकर अंदर चली गई। कबीर भी अब तक घर आ चुके थे। जैसे ही उन्होंने आहना को अंदर आते हुए देखा, उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा, “तुम बड़ी जल्दी वापिस आ गई, आहना बेटा? मुझे तो लगा था तुम अयांश के साथ थोड़ा वक्त बिताओगी। अच्छा, अयांश कैसा है?” 


आहना ने कबीर के किसी भी सवाल का जवाब नही दिया। उसने अपने कमरे के अंदर जाकर दरवाजा जोर से बंद कर लिया और बेड पर लेटकर रोने लगी। कबीर को आहना के इस बर्ताव की उम्मीद नही थी। वो समझ गए की आहना के साथ कुछ तो हुआ है। उन्होंने आहना के कमरे का दरवाजा खटखटाकर उसे बाहर आने के लिए कहा पर आहना ने दरवाजा नही खोला इसलिए कबीर ने थोड़ी देर के लिए आहना को अकेले छोड़ना सही समझा। 


***


आहना को घर छोड़कर राकेश जब वापिस आए तो उन्हें लिविंग रूम में से नुपुर और रिद्धिमा के हँसने की आवाजें आई। वो लिविंग रूम में गए तो देखा अयांश खामोशी से सोफे पर बैठा है और रिद्धिमा और नुपुर बातें कर रही है। 


राकेश अयांश से नाराज़ थे इसलिए वहाँ से ऊपर अपने कमरे में जाने के लिए मुड़ गए पर रिद्धिमा ने उन्हें बुलाते हुए कहा, “राकेश, अंदर आओ ना। तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है।” 


“पर मुझे किसी से भी कोई बात नही करनी।” राकेश ने गुस्से में कहा। 


“तुम्हें करनी बात पड़ेगी राकेश। इंपोर्टेंट है।” रिद्धिमा ने कहा। राकेश अंदर आकर सोफे पर बैठ गए। 


रिद्धिमा मुस्कुराई और कहा, “राकेश, मैं सोच रही थी की अयांश और नुपुर की शादी ऐसे ही जल्दी जल्दी हो गई है। हमें कोई भी सेलिब्रेशन करने का मौका ही नही मिला तो क्यों न नेक्स्ट संडे इनके लिए वेडिंग रिसेप्शन पार्टी रखे और उसमें हम अपने सभी रिलेटिव्स, फ्रेंड्स और बिज़नेस पार्टनर्स को भी इनवाइट करेंगे जिससे उन्हें भी पता चल सके की अयांश ने शादी कर ली है।” 


“ऐसा कुछ भी नही होगा। जब इसने शादी बिना किसी को बताए कर ही ली है तो अब क्या फायदा है इन सब का।” राकेश ने अयांश को देखते हुए कहा। 


“वेडिंग रिसेप्शन तो होकर रहेगा, राकेश और तुम आओगे वहाँ। आफ्टर ऑल, मैं हमारे होटल में ही इनका रिसेप्शन ऑर्गेनाइज करूंगी।” रिद्धिमा ने कहा। नुपुर भी मुस्कुरा रही थी। राकेश बिना कुछ कहे वहाँ से ऊपर अपने कमरे में चले गए। 


***


शाम हो चुकी थी पर आहना अभी तक अपने कमरे से बाहर नही आई थी। अब कबीर को आहना की चिंता होने लगी थी और वो सोचने लगे की ऐसा क्या हुआ है आहना के साथ। सोचते हुए उन्होंने राकेश को फोन लगाया। 


राकेश ने फोन उठाया तो उन्होंने जल्दी से पूछा, “राकेश, आहना को क्या हुआ है? वो जब से घर आई है तब से ही खुदको अपने कमरे के अंदर बंद करकर बैठी है।” 


राकेश ने एक गहरी सांस ली और कबीर को सब कुछ बता दिया। कबीर को ये सब जानकर एक झटका सा लगा। उन्हें यकीन ही नही हुआ की अयांश आहना के साथ ऐसा कर सकता है। उन्होंने फोन काटा और फिर से आहना के कमरे के बाहर आकर दरवाजा खटखटाया। 


इस बार आहना ने दरवाजा खोला और कबीर के गले लगकर रोने लगी। कबीर आहना को हॉल में लेकर आए। उन्होंने आहना को सोफे पर बैठाकर उसे पानी पिलाया। 


“अयांश ने मेरे साथ ऐसा क्यों किया, पापा?” आहना ने पूछा और फिर रोने लगी। 


“क्योंकि तुम उससे भी अच्छा लाइफ पार्टनर डिजर्व करती हो।” कहते हुए कबीर ने उसके आँसू पोंछे। 


कबीर ये समझ रहे थे की आहना सिर्फ इसलिए रो रही है क्योंकि अयांश ने उसे धोखा दिया पर इस वक्त आहना पर क्या बीत रही थी और उसका मन कितनी उलझनों में फंसा हुआ था ये सिर्फ वो ही समझ सकती थी। 


आहना ने ऑफिस जाना छोड़ दिया और अब रोज सारा दिन खुदको कमरे में बंद रखने लगी। कबीर को डर था की आहना बीमार न हो जाए इसलिए वो भी ऑफिस न जाकर घर ही रुकते। राकेश भी रोज ऑफिस खतम होने के बाद आहना से मिलने आते। 


जहाँ सब आहना का ख्याल रख रहे थे वहीं अयांश अकेले ही अंदर ही अंदर खुदसे लड़ रहा था।  वो भी सारा दिन खुदको कमरे में बंद रखता, घर में किसी से भी बिल्कुल भी बात नही करता और सिर्फ खाने के वक्त बाहर आता। राकेश से तो उसकी पूरी तरह से दूरियां बन चुकी थी। नुपुर ने बहुत बार उसके करीब आने की कोशिश की पर हर बार वो नुपुर को खुद से दूर कर देता। नुपुर को इन सब से गुस्सा तो आता था पर वो चुप रहती क्योंकि वो अयांश को पसंद करती थी और उसे यकीन था की अयांश एक दिन उसे अपनी मर्जी से अपना बना ही लेगा। वो बेफिक्र होकर रिद्धिमा के साथ मिलकर अपने रिसेप्शन की तैयारियां कर रही थी। 


रिद्धिमा ने नुपुर के घरवालों को भी उनके घर जाकर इनवाइट किया। नुपुर के पिता, अंबर थोड़ा नाराज़ थे क्योंकि अयांश नही आया था पर उन्हें इस बात की बहुत खुशी थी की उनकी बेटी को इतना अच्छा परिवार मिल गया है। 


रिसेप्शन की सभी तैयारियां अच्छे से हो चुकी थी। रिसेप्शन से ठीक एक दिन पहले रिद्धिमा आहना के घर आई। उसने डोरबेल बजाई तो दरवाजा कबीर ने खोला। रिद्धिमा को सामने खड़ा देखकर कबीर ने पूछा, “आप यहां क्यों आई है?” 


रिद्धिमा हल्का सा मुस्कुराई और कहा, “अंदर तो आने दो या यहीं सारी बातें करनी है।” 


“मुझे नही लगता अयांश ने आहना के साथ जो कुछ भी किया उसके बाद बात करने के लिए कुछ बचा है।” कबीर ने कहा। 


कबीर की बात सुनकर रिद्धिमा को गुस्सा आ गया और उन्होंने कहा, “मुझे कोई शौंक नही है यहाँ आने का। वो तो मैं तुम्हें…” 


रिद्धिमा ने इतना ही कहा था की उनकी नजर कबीर के पीछे खड़ी आहना पर गई। कबीर ने भी पीछे मुड़कर देखा। वो नही चाहते थे की रिद्धिमा आहना को कुछ भी कहे इसलिए उन्होंने आहना के पास आकर उसे अंदर जाने के लिए कहा पर आहना वहीं खड़ी रिद्धिमा को देखती रही। 


रिद्धिमा आहना के पास आई और कहा, “आहना बेटा, अच्छा हुआ तुम मिल गई। मैं तुम्हें इनवाइट करने आई थी। वो कल नुपुर और अयांश का वेडिंग रिसेप्शन है। तुम जरूर आना।” 


रिद्धिमा ने आहना के गाल को थपथपाया और वहाँ से चली गई। आहना अपने कमरे में चली गई। कबीर को आहना के लिए बुरा लग रहा था और साथ ही रिद्धिमा पर गुस्सा आ रहा था पर वो चाहकर भी कुछ नही कर सकते थे। 


अगले दिन, 


अयांश बे मन से रिसेप्शन के लिए तैयार हो रहा था। उसने बहुत ही प्यारा थ्री पीस सूट पहना हुआ था और वो लग भी बहुत प्यारा रहा था पर उसके चेहरे पर कोई खुशी नही थी। नुपुर दूसरे कमरे में तैयार हो रही थी। रिद्धिमा ने उसे तैयार होकर अयांश के साथ जल्दी से रिसेप्शन हॉल पहुँचने के लिए कहा और फिर रिसेप्शन में जाने के लिए घर से निकल गई।


तैयार होकर नुपुर उस कमरे में गई जहाँ अयांश तैयार हो रहा था। उसने देखा अयांश तैयार है और बेड पर बैठे हुए अपने फोन में कुछ देख रहा है। वो अयांश के करीब गई तो उसे गुस्सा आने लगा क्योंकि अयांश फोन में आहना की तस्वीरों को देख रहा था। वो इतना खोया हुआ था की उसे ये अहसास तक नही हुआ की नुपुर उसके पास ही खड़ी है। 


नुपुर के उसके हाथ से फोन छीन लिया तो अयांश ने उसकी तरफ देखा। वो खड़ा हुआ और अपना फोन वापिस छीनते हुए कहने लगा, “तुम इसे मेरी जिंदगी से निकाल सकती हो बस। मेरे दिल और दिमाग से नही।” 


“आज जितना प्यार करते हो न तुम उस आहना से अयांश, एक दिन उतनी ही नफरत करोगे तुम उससे।” नुपुर ने कहा। 


“जैसे शादी जबरदस्ती की थी मुझसे वैसे ही जबरदस्ती नफरत भी करवाओगी तुम अब मुझसे। करवा लेना, क्योंकि मेरी नफरत आहना के लिए कभी हो ही नही सकती, तुम्हारे लिए होगी।” कहकर अयांश हँसने लगा। 


“तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है हाँ? क्या तुम्हें मेरा प्यार नही दिखता?” नुपुर ने अयांश की आँखों में देखकर पूछा। 


“जो कुछ भी तुमने मेरे साथ किया उसे तुम प्यार कहती हो तो आई एम सॉरी क्योंकि यह प्यार नही सजा है मेरे लिए जो मेरे साथ साथ मेरी आहना को भी मिल रही है।” अयांश ने कहा। 


“आहना, आहना, आहना। क्यों इतनी इंपोर्टेंट है वो तुम्हारे लिए। वो तुम्हारे सामने भी नही रहती फिर भी तुम उसके बारे में ही सोचते रहते हो और मैं तुम्हारे साथ रहती हूँ फिर भी तुम मुझे इग्नोर करते हो।” नूपुर गुस्से में चिल्लाई। 


“वो इंपोर्टेंट है क्योंकि वो प्यार है मेरा। तुम मुझे खुद से जबरदस्ती प्यार करवा नही सकती और आहना के लिए मेरा प्यार खतम नही कर सकती।” कहकर अयांश कमरे से बाहर निकल गया। 

नुपुर अयांश के साथ रिसेप्शन पार्टी में पहुँची। सभी मेहमानों की नजरें उन दोनों पर ही थी इसलिए नुपुर ने अयांश का हाथ पकड़ लिया। वो दोनों स्टेज पर लगे सोफे पर बैठ गए। सबसे पहले रिद्धिमा और राकेश ने उनके साथ एक तस्वीर खिंचवाई। राकेश अयांश से कोई बात नही करना चाहते थे इसलिए तुरंत ही स्टेज से नीचे उतर गए और अपने ऑफिस की तरफ से आए लोगों से बातें करने लगे। 


टीना और अंबर भी अयांश और नुपुर से मिले। अयांश ने उनके पैर छुने चाहे तो अंबर ने उसे रोककर गले से लगा लिया। धीरे धीरे करके सभी मेहमान उन दोनों को मुबारक बाद देने लगे पर अयांश का मन इन सब में कहाँ था। वो जबरदस्ती सबके सामने मुस्कुराने को कोशिश कर रहा था जबकि अंदर ही अंदर उसे बेहद तकलीफ हो रही थी। 


आहना का घर


कबीर हॉल में बैठे हुए कुछ सोच ही रहे थे की तभी आहना वहाँ आई। कबीर आहना को देखकर हैरान हो गए क्योंकि आहना ने डिजाइनर अनारकली सूट पहना हुआ था। ऐसा लग रहा था कि वो कहीं जा रही है। कबीर सोफे से खड़े हुए और उन्होंने पूछा, “आहना बेटा, तुम ऐसे तैयार होकर कहाँ जा रही हो?” 


“मैं अयांश के वेडिंग रिसेप्शन में जा रही हूँ, पापा।” आहना ने कहा। 


“ये तुम क्या कह रही हो, बेटा। तुम वहाँ नही जा सकती।” कबीर ने कहा। 


आहना ने एक गहरी सांस ली और कहा, “मुझे जाने दीजिए, पापा। मैं अपनी आँखों से देखकर अपने दिल और दिमाग को ये यकीन दिला देना चाहती हूँ की अयांश मेरा नही रहा अब और मुझे उसे अपने दिल और दिमाग से निकालना पड़ेगा अब।”



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Thursday, 9 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 23


नुपुर को अयांश के साथ देखकर सभी हैरान थे सिवाय रिद्धिमा के। अयांश नुपुर के साथ उन सबके पास आया और नुपुर का हाथ छोड़कर राकेश के गले लग गया। रिद्धिमा की तरफ उसने देखा तक नही।


“कैसे हो बेटा।” राकेश ने उसे पूछा।


“मैं ठीक हूँ, पापा।” कहते हुए उसने राकेश के पीछे खड़ी आहना को उदासी से देखा। आहना भी उसे देखे जा रही थी। इस वक्त उसके मन में बहुत से सवाल चल रहे थे जिसके जवाब सिर्फ उसे अयांश से ही मिल सकते थे। 


राकेश जैसे ही अयांश से दूर हुए, उन्होंने उसके पीछे खड़ी नुपुर को देखा और अयांश से पूछा, “अयांश, तुम तो अकेले गए थे न। नुपुर तुम्हारे साथ क्या कर रही है, बेटा?” 


“पापा, वो ये…!!”, अयांश ने जैसे ही कहना चाहा, नुपुर आगे आई और उसने आहना को देखते हुए कहा, “मैं बताती हूँ। मैं अयांश के साथ इसलिए हूँ क्योंकि हमने शादी कर ली है।” 


आहना ने जैसे ही ये सुना, उसके हाथों में पकड़े गुलाब के फूलों का गुलदस्ता उसके हाथों से छूटकर नीचे जा गिरा और बिखर गया। उसकी आँखों में आँसू आ गए जिन्हें उसने बहने से रोक लिया। उसकी आँखों में आँसू देख अयांश के दिल में दर्द हुआ क्योंकि उन आँसूओं की वजह वो खुद था। वो दूसरी ओर देखने लगा और उसने खुद से ही कहा, “कहाँ मैं इसे हमेशा हँसने की वजह देना चाहता था और कहाँ आज मेरी ही वजह से इसके चेहरे पर उदासी और आँखों में आँसू है। समीर ने सही कहा था, ये फैसला लेकर मैंने आहना को सबसे बड़ी तकलीफ दी है।” 


राकेश को नुपुर की बात पर यकीन नही हुआ तो उन्होंने अयांश को  देखा जो खामोश खड़ा था। अयांश को कुछ न कहता देख राकेश समझ गए की नूपुर सच कह रही है। उन्होंने रिद्धिमा पर भी एक नजर डाली जो की मुस्कुरा रही थी। राकेश जानते थे की रिद्धिमा अयांश की शादी नूपुर से करवाना चाहती थी इसलिए उन्हें यकीन था की इन सब में रिद्धिमा भी शामिल होगी। उन्हें गुस्सा आने लगा तो उन्होंने अयांश और रिद्धिमा को देखते हुए कहा, “घर चलो, सब। तुम सबसे घर पहुँचकर ही बात करूंगा मैं।” 


आहना अब तक खामोशी से खड़ी अपनी आँसूओं से भरी आँखों के साथ बस अयांश को देखे जा रही थी। उसे बहुत ही तकलीफ हो रही थी क्योंकी उसे ये यकीन ही नही हो रहा था की वो अयांश जो उससे कहता था कि वापिस आकर वो उससे शादी कर लेगा, उस अयांश ने किसी और से शादी कर ली है। राकेश ने उसके पास आकर उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, “चलो आहना।” 


आहना राकेश के साथ चलने लगी। अयांश, नूपुर और रिद्धिमा भी उनके पीछे चलने लगे। 


घर पहुँचकर राकेश ने आहना को सोफे पर बैठाया और फिर अयांश से कहा, “कोई इधर उधर की बातें नही। बस इतना बताओ तुमने नूपुर से शादी क्यों की जब तुमने आहना को प्रोपोज किया हुआ था।” 


“पापा, मैं नही बता सकता आपको इस बारे में।” अयांश ने कहा। 


“तुम नही भी बताओ फिर भी इतना तो मुझे पता ही है की इन सबमें तुम्हारी माँ भी शामिल है क्योंकि वो तो चाहती ही थी की आहना तुम्हारी लाइफ में न रहे पर अगर मुझे ये पता चला की तुमने ये शादी अपनी खुशी से की है तो तुम्हारे लिए मुझसे बुरा कोई नही होगा।” राकेश ने कहकर रिद्धिमा की तरफ देखा जो की आराम से बैठी थी जैसे उसे इन सब से कुछ फर्क ही नही पड़ रहा हो।


“डैड, ये हमारी फैमिली का पर्सनल मैटर है। बाहर वालों के सामने इसे डिस्कस करना ठीक है इसलिए मुझे लगता है कि आहना को यहाँ से जाना चाहिए।” नूपुर ने आहना को देखते हुए कहा। 


“जाना तुम्हें चाहिए यहाँ से। आहना को नही। वो मेरी बेटी है।” राकेश की बात सुनकर नुपुर को गुस्सा आ गया और उसने कहा, “पर मैं अब आपकी बहू हूँ।” 


“मैं नही मानता तुम्हें अपनी बहु।“ राकेश ने जैसे ही कहा, रिद्धिमा खड़ी हुई और उसने कहा, “तुम्हारे मानने या ना मानने से क्या होगा, राकेश। नुपुर अब हमारी बहु है।” 


“ये सब सच में तुमने ही किया है ना। बताओ क्या प्लैनिंग की इस बार तुमने।” राकेश ने रिद्धिमा से गुस्से में पूछा। 


“मुझे जितनी प्लानिंग्स करनी थी ना वो मैंने बहुत पहले ही कर ली थी और उसमें से एक प्लैनिंग को फेल किया था तुमने पर अफ़सोस, तुम मेरे दूसरे प्लैन को फेल नही कर पाए और देखो, जो मैं चाहती थी वो हो गया।” रिद्धिमा ने हँसते हुए कहा। 


“तुम ऐसी भी सकती हो ये मैंने कभी नही सोचा था।” राकेश ने गुस्से से रिद्धिमा को कहा और फिर अयांश की ओर देखा। 


“अयांश, रिद्धिमा की बातों से मैं जान चुका हूँ की ये फैसला तुम्हारा नही है पर सच मैं तुमसे सुनना चाहता हूँ। ये फैसला तुम्हारा नही है ना।” राकेश ने उससे आराम से पूछा। नुपुर और रिद्धिमा थोड़ा सा घबरा गई की अयांश कही ये न बता दे की नुपुर ने उसके साथ क्या किया था और उसे कैसे ब्लैकमेल किया था। 


अयांश ने आहना को देखा जो उम्मीद भरी नजरों से उसे देख रही थी की वो ये कह दे की ये फैसला उसका नही था पर अगले ही पल उसकी सारी उम्मीदें टूट गई जब अयांश ने कहा, “ये मेरा…मेरा खुद का फैसला था, पापा।” 


उसकी आवाज में तकलीफ थी जिसे सिर्फ आहना ही महसूस कर पा रही थी। आहना ने उसे देखा तो उसकी आँखों में भी उसे तकलीफ दिखाई दी। वो जानती थी कि अयांश झूठ बोल रहा था और उसने ये फैसला किसी मजबूरी में लिया है। उसने अयांश की तरफ देखा और फिर राकेश से कहा, “अंकल, मैं अयांश से अकेले में बात करना चाहती हूँ।” 


ये सुनते ही नुपुर ने कहा, “क्या अकेले में बात हाँ? तुम शायद भूल चुकी हो की ये अब तुम्हारा बॉयफ्रेंड नही है, मेरा हसबैंड है। तो तुम्हें अयांश से जो भी बात करनी है मेरे सामने ही करोगी तुम।” 


“नुपुर, वेट। आई थिंक मुझे इससे अकेले में बात करनी चाहिए एक बार इसे समझाने के लिए।” अयांश ने कहा तो नूपुर गुस्से से सोफे पर बैठ गई। अयांश आहना के साथ घर से बाहर आया और उसके साथ गार्डन में लगी कुर्सियों पर बैठ गया। 


कुछ वक्त तक दोनो एक दूसरे को खामोशी से देखते रहे और फिर आहना ने कहा, “तुमने अंदर सबके सामने झूठ बोला ना, अयांश।” 


“नही, आहना। मैंने सच कहा था सबके सामने।” अयांश ने कहा।


“तुम झूठ बोलते हो, अयांश पर तुम्हारी आवाज़ और आँखों में जो तकलीफ है, वो सच बोलती है।” आहना की बात सुनकर अयांश बिना कुछ कहे दूसरी तरफ देखने लगा तो आहना ने पूछा, “अयांश, मुझे तो बता सकते हो न क्यों किया ये सब तुमने।” 


“तुम्हारे लिए।” अयांश ने उसकी आँखों में देखकर कहा। 


“मेरे लिए।” कहते हुए आहना ने हैरानी से अयांश को देखा तो अयांश ने आहना को वो सब कुछ बता दिया जो उसके साथ अमेरिका में हुआ। “मुझे डर था आहना की कहीं तुम उन तस्वीरों पर भरोसा करके उनको सच न मान लो और ये डर भी की कहीं नुपुर तुम्हें मेरी वजह से कोई नुकसान न पहुँचा दे। बस इसलिए मुझे उस वक्त जो सही लगा मैंने वो किया।” 


आहना को ये सब जानकर एक झटका सा लगा और उसने कहा, “अगर इतना सब कुछ हो गया था तुम्हारे साथ तो तुम्हें एक बार तो मुझे ये सब बताना चाहिए था ना इतना बड़ा फैसला लेने से पहले। मुझे न सही तो अंकल को बता देते और तुमने ये कैसे सोच लिया की तुम्हारी आहना तुम्हारे ऊपर भरोसा न करके कुछ तस्वीरों पर भरोसा कर लेगी।” 


“आहना, मैं…”, अयांश ने जैसे ही कहना चाहा आहना ने उसकी बात को बीच में ही काटते हुए कहा, “तुम पहुँचाने देते नुपुर को मुझे नुकसान। तुम साथ होते तो नूपुर जो कुछ भी करती मेरे साथ, मैं हँसते हँसते सह लेती वो सब पर अब जो तकलीफ तुमने मुझे दी है मुझे धोखा देकर नूपुर से शादी करके वो नही सह पाऊंगी मैं।” 


“आहना प्लीज, तुम ये समझने की कोशिश करो की मुझे उस वक्त कुछ समझ नही आ रहा था।” अयांश ने कहा। 


“बताते तो सही एक बार, अयांश। तुम्हारा साथ देती मैं पर तुमने तो ठीक से बात तक करना भी छोड़ दिया था। कभी न दूर जाने के लिए वापिस आने वाले थे न तुम मुझसे पर तुम तो मुझसे बहुत दूर होकर वापिस आए हो।” आहना ने कहा। उसकी आँखों में आँसू आ गए जिन्हें उसने बहने से रोक लिया। 


अयांश ने आहना का हाथ पकड़ा और कहा, “मैंने ये सब तुम्हारी खुशी के लिए ही किया है, आहना।” 


आहना ने अपना हाथ छुड़वाया और कहा, “मेरी खुशी तुम्हारे साथ है तुमसे दूर रहकर नही।” 


“आहना, आई प्रॉमिस मैं सब ठीक कर दूंगा।” अयांश ने कहा।


“टूटी हुई चीजों को जोड़ना और ठीक करना आसान होता है, अयांश पर टूटे हुए रिश्तों को जोड़ना और ठीक करना बहुत मुश्किल होता है। सच्चा प्यार किया था तुमसे मैंने और निभाया भी पर सच्चे प्यार का बदला अगर धोखा होता है तो नही था कभी भी मुझे सच्चा प्यार तुमसे।” कहकर आहना कुर्सी से खड़ी हो गई। उसने अयांश को देखा और फिर वहाँ से चली गई। अयांश भी आहना को बाहर जाते हुए देखता रहा और फिर कुछ देर बाद घर के अंदर चला गया।


Continued In जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 24

Wednesday, 8 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 22


 समीर की बातों से अयांश को अहसास हुआ की उससे बहुत बड़ी गलती हो चुकी है। वो आहना को कोई तकलीफ में नही देख सकता था इसलिए उसने आहना से दूर होने का फैसला किया और नुपुर से शादी की पर उसने ये तो सोचा ही नही की उसके इस फैसले से तो आहना को सबसे ज्यादा तकलीफ होगी। उसने अपना सिर पकड़ लिया और कहा, “मुझसे जल्दी में बहुत बड़ी गलती हो गई यार। मैंने ये कैसे नही सोचा की आहना को आने वाली तकलीफों से बचाने के लिए मैं नुपुर से शादी करने का फैसला लेकर आहना को सबसे ज्यादा तकलीफ देने जा रहा हूँ। इतनी तकलीफ जितनी उसे नुपुर भी नही दे पाती मेरे होते हुए।” 


“तुझे इतना बड़ा फैसला इतनी जल्दी नही लेना चाहिए था। ये फैसला लेने से पहले एक बार किसी से बात करनी चाहिए थी तुझे। मुझसे ही बात कर लेता एक बार।” समीर ने कहा तो अयांश ने उसे देखा और कहा, “मैं बहुत डर गया था यार। कुछ समझ नही आ रहा था। बस कुछ समझ आ रहा था तो वो ये था की मैं अपनी आहना को दर्द में नही देख सकता।” 


“इस नुपुर को तो मैं छोडूंगा नही। तूने इसकी इतनी मदद की और इसने ये सब किया तेरे साथ।” समीर ने गुस्से में कहा और कमरे से बाहर लिविंग रूम में आया जहाँ नुपुर आराम से अमीषा के साथ बैठी हुई थी। अयांश भी उसके पीछे पीछे आ गया। 


समीर नुपुर के पास आया और कहा, “तुम्हें शर्म नही आई उस इंसान के साथ इतना सब कुछ करते हुए जिसने तुम्हारी इतनी हेल्प की।” 


नुपुर मुस्कुराई और कहा, “मेरी क्या गलती है इसमें? मैं अयांश को पसंद करती थी और इसे अपना बनाना चाहती थी। मैंने तो बस वही किया जो इसके लिए मुझे सही लगा। रही बात हेल्प की तो अयांश को इतना भी अच्छा नही होना चाहिए था। आफ्टर ऑल, लोग अच्छाई का फायदा तो उठाते ही है और तुम मुझे अकेले ब्लेम नही कर सकते इन सब के लिए। इन सब में रिद्धिमा आंटी भी मेरे साथ है।” 


ये सुनते ही अयांश ने हैरानी से नुपुर को देखा। उसे यकीन नही हो रहा था या जैसे उसका दिल ये मानने को तैयार नही था की रिद्धिमा उसके साथ ऐसा कर सकती है इसलिए उसने कहा, “तुम झूठ बोल रही हो। आई नो मॉम आहना को पसंद नही करती पर वो मेरे साथ ऐसा कभी नही करेंगी। वो आहना को मुझसे दूर करने की कोशिश नही करेंगी।” 


अयांश को ऐसे देखकर नुपुर ने फैसला किया की वो उसे ये यकीन दिलाने के लिए की रिद्धिमा उसके साथ ऐसा कर सकती है, वो सब कुछ बता देगी जो रिद्धिमा ने एक साल पहले आहना के साथ करना चाहा था। वो उठकर अयांश के करीब आई और कहने लगी, “अगर वो तुम्हारे साथ ऐसा नही कर सकती तो उन्होंने एक साल पहले आहना को किडनैप करवाने की कोशिश क्यों की थी और ये सब जो मैंने तुम्हारे साथ किया है, ये भी तुम्हारी मॉम की ही प्लानिंग थी। अब भी तुम्हें लगता है की वो ये सब तुम्हारे साथ नही कर सकती।” 


ये सुनकर अयांश चौंक गया और उसने कहा, “मेरी मॉम ऐसा…ऐसा नही कर सकती। तुम झूठ…झूठ बोल रही हो।” 


नुपुर हँसने लगी और बोली, “अच्छा ठीक है। मैं झूठ बोल रही हूँ पर तुम्हारी वो आहना, वो तो सच बताएगी न सब कुछ तुम्हें। तो उसी से क्यों नही पूछ लेते तुम की एक साल पहले उसके साथ क्या हुआ था।” उसने कुछ सोचा और फिर कहा, “जानना चाहोगे किसके साथ मिलके किया था तुम्हारी मॉम ने ये सब कुछ।” 


अयांश ने कुछ नही कहा तो नूपुर ने वापिस सोफे पर बैठकर कहा, “तुम्हारे बेस्टफ्रेंड निखिल के साथ मिलकर किया उन्होंने ये सब कुछ। उनका प्लान था की निखिल आहना को किडनैप करके उससे शादी करके वहाँ से और तुम्हारी जिंदगी से दूर ले जाए पर उस आहना की किस्मत अच्छी निकली और तुम्हारे डैड ने उसे बचा लिया।” आखिरी शब्द उसने नफरत भरे लहजे में कहे। 

अयांश को ये सब जानकर बहुत गुस्सा आ रहा था साथ ही उसे दुख भी था। उसे गुस्सा इसलिए आ रहा था क्योंकि उसकी गैर मौजूदगी में रिद्धिमा और निखिल ने आहना के साथ इतना सब कुछ करने की कोशिश की और दुख इस बात का था की आहना और राकेश ने उससे ये बात छुपाई। उसने किसी से कुछ भी नही कहा बस चुपचाप वहाँ से अपने कमरे के अंदर चला आया और दरवाजा अंदर से बंद करके रोने लगा क्योंकि उसके लिए ये यकीन कर पाना मुश्किल था की गैरों से ज्यादा दर्द उसके अपनों ने उसे दिया था।


***


आहना अयांश के घर में कबीर के साथ डिनर के लिए आई हुई थी। वो सब लिविंग रूम में बैठे बातें कर रहे थे। रिद्धिमा भी वहीं बैठी चुपचाप उनकी बातें सुन रही थी। राकेश ने आहना को देखा जो उनके पास ही बैठी थी और फिर कबीर से कहा, “कबीर, एक हफ्ते बाद अयांश वापिस आ रहा है। उसके आने की खुशी में मैं एक पार्टी रखने वाला हूँ तो मैं सोच रहा था की क्यों ना उसी पार्टी में हम आहना और अयांश की सगाई कर दें।” 


ये सुनकर कबीर मुस्कुराए और कहा, “ये तो बहुत ही अच्छा होगा। मुझे भी लगता है की हमें अब इनकी सगाई करवा देनी चाहिए।” 


आहना ये जानकर बहुत खुश थी की बहुत जल्दी अयांश आने वाला है और फिर उसकी सगाई भी हो जाएगी अयांश से। रिद्धिमा ने साथ बैठे आहना और राकेश को देखा और सोचा, “तुम्हें जितना खुश होना है हो सकती हो आहना क्योंकि अयांश के आने के बाद तुम्हारी ये सारी खुशियां दर्द में बदल जाएंगी। पता नही क्या होगा उस वक्त तुम्हारा जब तुम्हे पता चलेगा की अयांश तुम्हारा नही रहा और तुम राकेश, पार्टी तो तुम रखोगे पर आहना और अयांश की सगाई की नही बल्कि नुपुर और अयांश की रिसेप्शन पार्टी।” 


अयांश ने पिछले एक हफ्ते से खुदको कमरे में ही कैद रखा हुआ था। नुपुर को इस बात से ज्यादा फर्क नही पड़ा पर समीर को अयांश की फिक्र रहती क्योंकि अयांश खाने के लिए भी बाहर नही आता था पर फिर भी समीर उसे कमरे में ही जाकर जबरदस्ती थोड़ा बहुत खिला देता था जिससे अयांश की तबियत खराब न हो। 


इस वक्त वो सब एयरपोर्ट पर खड़े थे क्योंकि आज अयांश को वापिस जाना था। नुपुर जहाँ खुश थी वहीं अयांश का मन उलझनों से घिरा हुआ था की वो घर पहुँचकर आहना और राकेश से क्या कहेगा की उसने नुपुर से शादी क्यों की और क्या आहना उसे समझेगी। अयांश के पास बस ये सब सवाल जिनके जवाब उसे घर पहुँचकर ही मिल सकते थे। 


समीर अयांश से गले मिला और कहा, “तू टेंशन मत लियो। मुझे पूरा भरोसा है की आहना तुझे समझेगी।” 


अयांश बस हल्का सा मुस्कुरा दिया और फिर अपना सामान लेकर नुपुर के साथ एयरपोर्ट के अंदर चला गया। फ्लाइट में बैठकर नुपुर ने उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की तो उसने अपने दोनों हाथों में किताब पकड़ ली। नुपुर ने उसे वहाँ कुछ नही कहा और अपने फोन में गाने सुनने लग गई। 


एक लंबे सफर के बाद उनकी फ्लाइट दिल्ली एयरपोर्ट पहुँची। अपना सामान लेने के बाद अयांश नुपुर के साथ एयरपोर्ट से निकलने के लिए जैसे ही आगे बढ़ता है, नूपुर उसका हाथ पकड़ लेती है। वो अपना हाथ छुड़वाने की कोशिश करता है तो नूपुर कहती है, “मत करो कोशिश अयांश। तुम शायद भूल चुके हो की अब तुम मेरे हो।” 


“और तुम शायद ये भूल रही हो की तुमसे शादी मैंने सिर्फ आहना को बचाने के लिए की है।” अयांश ने कहा तो नूपुर मुस्कुराने लगी और बोली, “आहना, उसे कैसे भूल सकती मैं। अब तो मैं तुम्हारा हाथ बिल्कुल भी नही छोड़ने वाली क्योंकि तुम्हारी आहना बाहर ही खड़ी होगी। जरा देखे तो सही की उसे कितनी तकलीफ होती है तुम्हारा हाथ मेरे हाथ में देखकर।” 


नुपुर की बात सुनकर अयांश परेशान हो गया। उसे तो इस बात का ध्यान ही नही था की आहना उसे लेने एयरपोर्ट आएगी। उसने एक बार फिर अपना हाथ नुपुर के हाथ से छुड़वाने की कोशिश की पर नुपुर ने अपनी पकड़ और मजबूत कर ली और उसे बाहर चलने के लिए कहा। अयांश अब खुदको आहना का सामना करने के लिए तैयार करने लगा। 


राकेश आहना को अपने साथ एयरपोर्ट ले जाने के लिए उसके घर पहुँचे। कबीर को कुछ जरूरी काम था इसलिए वो उनके साथ नही जा रहे थे। रिद्धिमा भी वहीं बैठी हुई थी पर आज उसे गुस्सा नही आ रहा था बल्कि वो तो आहना को आज खुद अपने साथ ले जाना चाहती थी जिससे वो देख सके की आहना की क्या हालत होगी जब वो अयांश को नुपुर के साथ देखेगी।


“आहना बेटा, कितना टाइम लगेगा। अंकल और आंटी वेट कर रहे है तुम्हारी।” कबीर ने जैसे ही कहा आहना अपने कमरे से बाहर आ गई। आज उसने बहुत ही खूबसूरत हल्के पर्पल रंग का अनारकली सूट पहना हुआ था जिसके दुप्पटे को उसने अपने कंधे पर पिन अप किया हुआ था। कानों में झुमके, माथे पर छोटी सी बिंदी और खुले बालों में वो बहुत ही प्यारी लग रही थी। 


राकेश उसे और रिद्धिमा को लेकर एयरपोर्ट के लिए निकल गए। आहना का दिल जोर से धड़क रहा था क्योंकि वो पूरे दो साल बाद अयांश को सामने से देखने वाली थी। आहना ने रास्ते में से अयांश के लिए लाल गुलाबों का एक खूबसूरत गुलदस्ता खरीदा और एयरपोर्ट पहुँचकर वो दरवाजे की तरफ देखते हुए बेसब्री से अयांश के आने का इंतजार करने लगी। 


कुछ वक्त बाद उसे अयांश बाहर आता हुआ दिखाई दिया। अयांश को देखकर वो मुस्कुराने लगी पर अगले ही पल उसकी मुस्कान गायब हो गई जब उसकी नजर अयांश के साथ उसका हाथ थामे चल रही नुपुर पर गई।


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Tuesday, 7 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 21




अयांश कैब लेकर अपने अपार्टमेंट में पहुँचा। समीर उस वक्त घर पर नही था। अयांश कमरे में आकर रोने लगा। वो आहना से बात करना चाहता इसलिए उसने आहना का नम्बर मिलाया। 

“हेलो, अयांश।” आहना की आवाज सुनकर वो रोने लगा। उससे कुछ बोला ही नही गया। आहना उसकी रोने की आवाज सुनकर परेशान हो गई और पूछा, “क्या हुआ है, अयांश?”

अयांश ने बिना कुछ भी कहे फोन काट दिया और रोने लगा। कुछ देर बाद किसी ने उसके कमरे का दरवाजा खटखटाया। उसने उठकर दरवाजा खोला तो सामने नुपुर खड़ी थी। उसे वहाँ देखकर अयांश को गुस्सा आ गया और उसने कहा, “तुम यहाँ क्या कर रही हो?” 

“मैं बताने आई हूँ की मैं हमारी शादी के लिए सारी फॉर्मेलिटी पूरी करने के लिए कोर्ट जा रही हूँ। तुम फ्राइडे को तैयार रहना।” नुपुर ने कहा। अयांश ने कोई जवाब नही दिया बस जोर से दरवाजा बंद कर दिया। 

***

आहना ऑफिस में काम कर रही थी पर उसका मन काम में नही लगकर अयांश के बारे में सोचे जा रहा था। कल रात से ही आहना परेशान थी इस बारे में सोचकर की अयांश ने उसे फोन करके उससे बात क्यों नही की और वो रो क्यों रहा था। उसने सोचा कि उसे राकेश से इस बारे में बात करनी चाहिए। वो उठकर उनके केबिन की तरफ चली गई। 

आहना ने राकेश के केबिन का दरवाजा खोला तो देखा राकेश और कबीर वहाँ लगे सोफों पर तीन आदमियों के साथ बैठे है जिन्हें आहना नही जानती थी। उसे वहाँ देखकर राकेश ने कहा, “आहना, अंदर आ जाओ बेटा।” 

आहना अंदर चली आई तो वो तीनों आदमी उसे देखकर मुस्कुराते हुए खड़े हो गए। कबीर आहना के पास आए और कहा, “आहना, ये तीनों तुम्हारे मामा है।” 

कबीर की बात सुनकर आहना डर गई और उसने उन तीनों को देखकर कहा, “आप लोग यहाँ क्यों आए है? आप अगर यहाँ मेरे से वो प्रॉपर्टी लेने आए है जो नानाजी ने मम्मी को दी थी तो चले जाइए यहाँ से। मैं आपको प्रॉपर्टी के पेपर्स पर कभी साइन नही दूंगी अपने और अगर आपने ऑर्फेनेज या ओल्ड एज होम को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की तो मैं पुलिस में आपकी कंप्लेंट करदूंगी।” 

उसके बड़े मामा मुस्कुराते हुए उसके पास आए और कहा, “हम तुमसे कुछ भी वापिस लेने नही आए है बेटा। वो सब तुम्हारा है। हम तो बस यहाँ अपनी बहन की आखिरी निशानी को देखने आए है।  जब तक तुम्हारे नानाजी थे, तब तक हम अंजलि को वापिस नही ला सकते थे क्योंकि वो अंजलि से नफरत करने लग गए थे। उनकी मौत के बाद हमने अंजलि को ढूंढना शुरू किया और एक साल बाद हमें पता चला की अंजलि ने दूसरी शादी कर ली है और तुम भी इस दुनिया में आ गई हो। उस वक्त हम ये जानकर खुश थे की अंजलि ठीक है और अपनी जिंदगी में खुश है।” 

उनकी आँखों में आँसू आ गए और उन्होंने कहा, “अंजलि मुझसे मिली थी एक दिन।” कबीर ने जैसे ही ये सुना उन्होंने हैरानी से उनकी तरफ देखा तो उन्होंने कबीर को देखकर कहा, “उसने मुझसे कहा था की मैं किसी को न बताऊं की हम मिले थे। उसके चार साल बाद पता चला की अंजलि हमारे बीच नही रही।” 

उन्होंने अपने आँसू पोंछे और कहा, “मुझे तुम्हारी फिक्र होने लगी की तुम ठीक होगी या नही। मैंने तुमसे कभी मिलने की कोशिश तो नही की पर तुम्हारी खबर जरूर रखता था मैं।” उन्होंने आहना के सिर पर हाथ रखा और फिर कहा, “तुम बिल्कुल अंजलि जैसी हो। हमेशा खुश रहना और अपना ख्याल रखना। हमें अब चलना चाहिए।” 

उसके बाकी दोनों मामा ने भी उसके सिर पर हाथ रखा और वो सब वहाँ से चले गए। 
कबीर को कुछ जरूरी काम था इसलिए वो भी बाहर चले गए। उनके जाते ही आहना ने राकेश से कहा, “अंकल, मुझे आपसे अयांश के बारे में कुछ बात करनी है।” 

“बताओ क्या बात है?” राकेश ने अपनी कुर्सी पर बैठते हुए पूछा। 

“अंकल, कल रात मुझे अयांश का फोन आया था पर उसने मुझसे कोई बात नही की और वो रो रहा था। मुझे बहुत टेंशन हो रही है उसकी” आहना की बात सुनकर राकेश को हैरानी हुई और उन्होंने कहा, “तुम परेशान मत हो बेटा। मैं बात करता हूँ अयांश से।” 

“जी अंकल।” कहकर आहना उठकर उनके केबिन से बाहर आ गई। राकेश ने अयांश को फोन लगाया पर अयांश ने उनका फोन नही उठाया। 

अयांश अब सबसे बहुत कम बात करने लगा। वो ना आहना का फोन ज्यादा उठाता न ही समीर से ज्यादा बात करता। आहना को समझ नही आ रहा था की अयांश ऐसा क्यों कर रहा है। वहीं राकेश भी उसे लेकर परेशान थे पर वो कुछ नही कर सकते थे क्योंकि अयांश उनके फोन भी नही उठा रहा था। आहना और राकेश को बस अब अयांश के लौटने का इंतजार था। इन सब में अगर कोई खुश था तो वो थी रिद्धिमा और नुपुर क्योंकि वो जो चाहती थी वो होने जा रहा था। 

फ्राइडे को अयांश नुपुर के साथ कोर्ट में खड़ा था। समीर और अमीषा भी आए हुए थे। समीर को हैरानी हो रही थी की अयांश अचानक से नुपुर के साथ शादी क्यों कर रहा है अगर वो आहना से प्यार करता है। उसे बहुत गुस्सा भी आ रहा था अयांश के ऊपर पर वो चुप रहा। 

नुपुर ने मुस्कुराते हुए रजिस्टर पर साइन कर दिए और पैन अयांश को थमा दिया। अयांश चुपचाप अपने हाथ में पकड़े पैन को देखे जा रहा था। आहना का चेहरा उसकी नजरों के सामने आने लगा। उसने अपनी आँखें बंद करली और सोचा, “आई एम सॉरी, आहना। तुम्हारे लिए मुझे ये करना होगा।” 

उसने अपनी आँखें खोली और रजिस्टर पर साइन कर दिए। उसके बाद अमीषा ने नुपुर की तरफ से और समीर ने अयांश की तरफ से गवाह बनकर साइन कर दिए। साइन करके समीर वहाँ से जल्दी से बाहर आ गया। अयांश भी उसके पीछे आया और उसे रोकते हुए कहा, “समीर, मैं जानता हूँ तू गुस्सा है मुझसे बस एक बार मेरी बात सुन ले।” 

समीर ने उसे देखा और कहा, “मैं नही जानता तूने ये क्यों किया पर तूने आहना के साथ अच्छा नही किया। एक बार भी नही सोचा तूने उसके बारे में। ये सिला दिया है तूने उसे उसके प्यार और इंतजार का। वो वहाँ खुशी के साथ तेरे आने का इंतजार कर होगी की क्योंकि वो तुझे अपना प्यार समझती है और तेरे साथ रहना चाहती है पर उसे क्या पता की उसका प्यार उसके साथ रहने नही बल्कि उससे दूर होकर उसके पास आ रहा है।” 

“समीर ये…” अयांश ने जैसे ही कहना चाहा समीर ने उसे बीच में ही रोकते हुए कहा, “क्या समीर हा, क्या समीर? देख इतना तो मैं भी जानता हूँ की तेरे इस डिसीजन से तुझे भी उतनी ही तकलीफ हो रही है जितनी आहना को होगी क्योंकि ये डिसीजन लेना तेरे लिए आसान नही रहा होगा। अब बस इतना जानना चाहता हूँ की क्यों किया तूने ये सब अपने और आहना के साथ?” 

“मैं ये तुझे नही बता सकता।” अयांश ने कहा। 

“तुझे बताना होगा, अयांश। बता मुझे क्यों किया तूने ये सब?” समीर ने गुस्से में अयांश की बाहों को पकड़ते हुए उसे देखकर पूछा। समीर के बार बार पूछने पर अयांश ने चिल्लाकर कहा, “आहना के लिए ही किया है यार मैंने ये सब। आहना के लिए ही किया है।” 

अयांश की आँखों में आँसू आ गए। समीर ये सुनकर हैरान था। वो अयांश से कुछ कहता इससे पहले ही उसके कान में एक आवाज पड़ी, “उफ्फ, सच अ ड्रामा।” 

समीर और अयांश ने देखा तो वहाँ नुपुर खड़ी थी अमीषा के साथ। उसे देखते ही अयांश को गुस्सा आ गया तो उसने समीर से कहा, “घर चलते है। वहाँ मैं तुझे सब कुछ बताऊंगा।” 

घर पहुँचकर अयांश समीर को अपने कमरे में लेकर गया और उसे सब कुछ बता दिया कि नुपुर ने उसके साथ क्या किया और कैसे उसे धमकाया की अगर उसने उससे शादी नही की वो आहना की जिंदगी बरबाद करदेगी। समीर को ये सब जानकर बहुत दुख हुआ की अयांश ने उसे एक बार भी ये सब नही बताया और अकेले ही सब कुछ सहता रहा।

“आसान नही था यार पर मेरी आहना की जिंदगी के लिए मुझे ये करना पड़ा। वो मेरी लाइफ है यार। अपनी लाइफ को बचाने के लिए ही मुझे अपनी लाइफ को अपनी लाइफ से बाहर करना पड़ रहा है।” अयांश की आँखों से आँसू निकलकर गाल पर बह गया। ये देखकर समीर ने उसे गले लगा लिया और कहा, “तूने एक बार तो मुझे ये सब बताया होता। इतने दिनों से सब कुछ अकेले ही सहा तूने।”

“मुझे खुद कुछ समझ नही आ रहा था। मैं बस ये जानता था की मैं अपनी आहना को तकलीफ में नही देख सकता।” अयांश ने उससे अलग होते हुए कहा। 

समीर ने अयांश की आंखों में देखा और कहा, “आहना को तो अभी भी तकलीफ होगी यार। नुपुर जो भी उसके साथ करती, आहना उन सबको सह लेती क्योंकि तू उसके पास होता पर वो यह तकलीफ कैसे बर्दाश्त करेगी की तू उसका नही रहा अब।”

 
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Monday, 6 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 20


सुबह सूरज की रोशनी चेहरे पर पड़ने से अयांश की आँख खुली। वो धीरे से उठा। उसका सिर अभी भी दर्द कर रहा था। उसने इधर उधर देखा तो पाया कि वो अपने कमरे में नही था और उसकी टीशर्ट नीचे जमीन पर गिरी हुई थी। “मैं ऐसे यहाँ क्या कर रहा हूँ?” सोचते हुए वो इस बारे में याद करने की कोशिश करने लगा की कल रात को क्या हुआ था पर उसे कुछ भी याद नही आया। 


उसने बेड से खड़े होकर जल्दी से अपनी टीशर्ट उठाकर पहनी। वो वहाँ से निकलना चाहता था इसलिए वो दरवाज़े की तरफ जाने ही लगा था की तभी दरवाजा खुला और हाथ में नींबू पानी से भरा ग्लास लिए नुपुर अंदर आई। 


नुपुर को देखकर अयांश को याद आया की वो यहाँ कल नुपुर के साथ पार्टी में आया था। नुपुर ने मुस्कुराते हुए अयांश को देखा। ग्लास को टेबल पर रखकर वो अयांश के करीब आई और उसे किस करते हुए कहा, “तुम्हारा सिर दर्द कर रहा होगा ना। मैं तुम्हारे लिए नींबू पानी लाई हूँ।” 


अयांश को शुरू से ही नुपुर का अपने इस तरह करीब आना अच्छा नही लगता था और इस बार तो नूपुर उसे किस कर रही थी जिससे अयांश को गुस्सा आ गया। अयांश ने नूपुर को दूर धकेला और चिल्लाते हुए कहा, “ये क्या कर रही हो तुम?” 


नुपुर हल्का सा हँसी और कहा, “मैं वही कर रही हूँ जो हमने कल रात में किया था।” 


अयांश ये सुन हैरान हो गया और कहा, “ये तुम क्या कह रही हो?” 


“मैं सच कह रही हूँ। नही यकीन हो रहा तो ये देखो।” कहते हुए नुपुर ने अपना फोन जेब से निकाला और अयांश को दे दिया। अयांश ने देखा उसमें उसकी और नुपुर की इंटीमेट तस्वीरें थी। नुपुर ने उससे फोन छीन लिया और पूछा, “अब हुआ यकीन?” 

अयांश ने कल रात के बारे सोचा तो उसे याद आया की नूपुर ने उसे कल रात जूस पीने के लिए दिया था। उसने नुपुर को देखा और कहा, “मैं ये नही कर सकता। कल रात तुमने मुझे जूस दिया था ना। तुमने ही उस जूस में कुछ मिलाया होगा क्योंकि अपनी होश में रहते हुए मैं ऐसा कुछ नही कर सकता।” 


“बैठके बात करते है अयांश। बैठो और ये नींबू पानी पिलो। तुम्हें अच्छा लगेगा।” कहकर नुपुर ने टेबल से ग्लास उठाकर जैसे ही अयांश को देना चाहा, अयांश ने गुस्से से उसे देखते हुए उसके हाथ से ग्लास छीनकर जोर से जमीन पर फैंक दिया और कहा, “इसमें भी तुमने कुछ मिलाया ही होगा जैसे कल रात जूस में मिलाया था।” 


नुपुर को भी अब गुस्सा आ गया। वो अयांश ने करीब आई और उसकी आँखों में देखते हुए कहा, “सच कहा तुमने। तुम अपनी होश में ऐसा कुछ नही कर सकते इसलिए मिलाया था मैंने कुछ तुम्हारी ड्रिंक में जिससे तुम बेहोश हो जाओ।” 


“क्यों किया तुमने ऐसा? आखिर क्या चाहती हो तुम मुझसे।” अयांश ने गुस्से में पूछा। 


“तुम्हें। तुम्हें चाहती हूँ मैं। तुमसे शादी करना चाहती हूँ मैं।” नुपुर की बात सुनकर अयांश चौंक गया। वो कुछ कहता इससे पहले नूपुर ने फिर कहा, “अगर तुमने ना कहा तो मैं तुम्हारे पापा और आहना को हमारी फोटोज अभी भेज दूंगी।” 


“और तुम्हें लगता है आहना मुझसे ज्यादा भरोसा इन तस्वीरों पर कर लेगी।” अयांश ने कहा तो नूपुर हँसी और कहा, “नही, वो तुम्हारे ऊपर ही भरोसा करेगी पर अगर उसने इन तस्वीरों पर भरोसा कर लिया तो क्योंकि इन तस्वीरों को देखकर कोई भी यही सोचेगा की तुम मेरे साथ सोए हो।” 


“मेरी आहना ऐसी नही है की सिर्फ कुछ तस्वीरें देखकर वो मेरे ऊपर भरोसा न करे और मेरा साथ छोड़ दे। वो भी इतना प्यार करती है मुझसे और इसी प्यार के चलते वो मुझे समझने की कोशिश करेगी की ये सब मैंने जान बूझकर नही किया। आहना प्यार है मेरा और ये रिश्ता खूबसूरत होने के साथ साथ मजबूत भी बहुत होता है की दुनिया की बड़ी से बड़ी ताकत इसे तोड़ नही सकती पर तुम्हें ये कैसे समझ आएगा क्योंकि तुम प्यार को समझ ही नही सकती।” अयांश को इस बात से नुपुर को गुस्सा आने लगा। 


“क्या है प्यार जो आहना तुमसे कर सकती है पर मैं नही? आहना में ऐसा क्या है जो मुझमें नही है?” नुपुर ने चिल्लाते हुए पूछा।” 


“तुम सिर्फ मुझे पाना चाहती हो और मुझे अपने करीब रखना चाहती हो और अगर मैं तुमसे दूर जाऊं तो तुम्हें बर्दाश्त नही होगा। ये है तुम्हारा प्यार और आहना वो मुझसे दूर है पूरे दो साल से फिर भी वो मुझसे ही प्यार में है। उसमें और तुम में ये फर्क है की आहना मेरे साथ कभी कुछ गलत नही करेगी जैसा कल रात तुमने किया। वो तुम्हारी तरह मुझे जबरदस्ती अपने साथ रहने के लिए मजबूर नही करेगी बल्कि मेरी खुशी के लिए वो मुझे खुदसे दूर करने की हिम्मत रखती है। ये फर्क है आहना में और तुम में। आहना जैसा प्यार तुम नही कर सकती।” अयांश की बातों ने नुपुर के गुस्से को और ज्यादा बढ़ा दिया और उसने कहा, “ठीक है, अब मैं देखती हूँ की क्या तुम भी आहना से उसके जैसा प्यार कर सकते हो। आहना तुम्हें तुम्हारी खुशी के लिए खुदसे दूर कर सकती है पर क्या तुम ये कर सकते हो?” 


“मतलब क्या है तुम्हारा।” अयांश ने पूछा। 


“मतलब ये की अगर तुमने मुझसे शादी नही की तो मैं आहना की जिंदगी बरबाद करदूंगी।” नुपुर ने कहा। 


“तुम ऐसा कुछ नही करोगी।” अयांश ने गुस्से से कहा तो नूपुर हँसने लगी और उसने कहा, “अगर तुम नही माने तो मैं ऐसा करूंगी इसलिए सोच समझकर फैसला लेना। मिलते है हमारी शादी में।” कहकर नुपुर कमरे से बाहर निकल गई। 


उसके जाते ही अयांश अपना सिर पकड़कर बैड पर बैठ गया और सोचने लगा, “मैं नुपुर से शादी कैसे कर सकता हूँ पर अगर मैंने नूपुर से शादी नही की तो वो आहना की जिंदगी बरबाद करदेगी। नही, मैं ऐसा नही होने दे सकता। मैं आहना के लिए हर तकलीफ सह सकता हूँ पर उसे तकलीफ में नही देख सकता। मुझे आहना की जिंदगी के लिए आहना को खुद से दूर करना होगा और नुपुर से शादी करनी होगी।” उसकी आँखों से एक आँसू निकलकर गाल पर बह गया। 


उसे अपने इस फैसले पर गुस्सा तो आ रहा था पर आहना के लिए उसे ऐसा करना था क्योंकि वो समझ चुका था की अगर नुपुर सिर्फ उसे पाने के लिए इतना सब कुछ कर सकती है तो वो आहना को उससे दूर करने के लिए भी बहुत कुछ कर सकती है। 


वो कमरे से बाहर निकला तो नुपुर कि दोस्त उसे मिल गई। वो अयांश को देखकर खड़ी हुई और कहने लगी, “कल रात तुम्हारे साथ जो कुछ भी हुआ उसके लिए आई एम सॉरी, अयांश।” 


“तुम सब जानती थी न की नुपुर मेरे साथ क्या करने वाली है और तुमने उसे रोकने के बजाय उसका साथ भी दिया।” अयांश गुस्से में चिल्ला उठा। 


"आई एम सॉरी, अयांश। मैंने नुपुर को रोकने की कोशिश की थी पर उसने मेरी एक नही मानी।” नुपुर की दोस्त ने कहा। 


“तुम्हारी सॉरी से मेरी लाइफ में जो भी होने जा रहा है वो रुक नही जाएगा बस ये याद रखना की मेरे साथ साथ नुपुर की लाइफ भी बरबाद होगी।” कहकर अयांश वहाँ से निकल गया।

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Sunday, 5 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 19


 

आहना को किडनैप करने की कोशिश के लिए अर्जुन ने निखिल को जल्दी ही अरेस्ट कर लिया और निखिल को कानूनी सजा दिलवाई। अयांश जो इन सब से से अंजान था, आराम से अमेरिका में अपनी पढ़ाई कर रहा था। उसके कॉलेज का दूसरा साल भी जल्दी से बीत गया।  उसकी पढ़ाई पूरी हो चुकी थी इसलिए वो बहुत ही खुश था की अब वो जल्दी से आहना के पास जा पाएगा। आहना की याद आते ही उसने जल्दी से आहना को फोन लगाया।  


आहना ने फोन उठाया और कहा, “हेलो अयांश।”


“हेलो टेडी बियर। कैसी हो?” अयांश ने पूछा। 


“ठीक हूँ। बस तुम्हे मिस कर रही हूँ।” आहना ने पूछा। 


“मैं भी तुम्हे बहुत मिस कर रहा हूँ।” अयांश ने उदास होकर कहा। 


“पर कोई बात नही। सिर्फ कुछ दिनों की बात और है। फिर हम हमेशा साथ रहेंगे।” आहना ने कहा। 


“यह दो साल भी मुझे दो हजार साल जैसे लगे है। अब तो वापिस आते ही मैं तुमसे शादी कर लूंगा बस मुझसे एक वादा करो।” अयांश ने कहा। 


“कैसा वादा, अयांश।” आहना ने पूछा।


“आहना, जब मैं यहाँ आ रहा था तो पापा ने मुझसे एक बात कही थी की उन्होंने तुम्हे मेरे लिए इसलिए चुना है की तुम मेरी सबसे बड़ी ताकत बन सको, मेरी कमजोरी नही। मैं तुम्हें अपनी ताकत बनाना चाहता हूँ की मैं जब भी गिरू, तुम मेरा हाथ पकड़ कर मुझे उठाओ और हिम्मत दो हर प्रोब्लम से निकलने की।” अयांश ने कहा और उसके जवाब का इंतजार करने लगा।


आहना मुस्कुराई और कहा, “मैं वादा करती हूँ, अयांश की मैं तुम्हारी ताकत बनके रहूंगी। जिंदगी के हर एक कदम पर हमेशा तुम्हारा हाथ थामे तुम्हारे साथ चलूंगी।”


वो दोनों एक दूसरे से पूरे दो घंटे तक बातें करते रहे। जैसे ही अयांश ने आहना से बात करके फोन काटा, नुपुर उसके पास आकर बैठ गई। वो थोड़ी परेशान लग रही थी इसलिए अयांश ने उससे पूछा, “इस एवरीथिंग फाइन, नुपुर? तुम कुछ परेशान लग रही हो।” 


“एक्चुअली, मुझे अपनी फ्रेंड की पार्टी में जाना है। वहाँ उसके और भी दोस्त होंगे जो पता नही कैसे होंगे इसलिए मैं नहीं जाना चाहती पर मैं उसे मना भी नही कर सकती। कोई है भी नही जो मेरे साथ जा सके।” कहकर नुपुर अयांश को देखने लगी और फिर उससे पूछा, “क्या तुम मेरे साथ चल सकते हो?” 


अयांश जाना नही चाहता था। वो नुपुर को मना कर पाता इससे पहले ही नुपुर ने रिक्वेस्ट करते हुए कहा, “प्लीज़ ना मत कहना। मैं वहाँ अकेले नही जा सकती।” 


अयांश को कुछ अजीब लग रहा था इसलिए उसने कहा, “मैं समीर से कह देता हूँ। वो चला जाएगा तुम्हारे साथ।” 


“नही, मैं समीर के साथ नही जा सकती। मुझे अयांश को मनाना होगा वरना मेरा सारा प्लान बिगड़ जाएगा।” नुपुर ने सोचा और फिर कहा, “मुझे समीर पर भरोसा नही है पर मैं तुम्हारे ऊपर आसानी से यकीन कर सकती हूँ क्योंकि तुम मेरी मॉम की दोस्त के बेटे हो। प्लीज अयांश, मेरे साथ चलो।”


इस बार उसकी रिक्वेस्ट करने पर अयांश मान गया और कहा, “ठीक है पर हम वहाँ से जल्दी वापिस आ जाएंगे।” 


“पक्का।” कहकर नुपुर तैयार होने चली गई। अयांश भी अपने कमरे में तैयार होने चला गया। 

आधे घंटे बाद वो दोनों तैयार हो गए। अयांश समीर को बताकर नुपुर के साथ घर से निकल गया। नुपुर की दोस्त ने उसके लिए गाड़ी भेजी थी। पाँच मिनिट इंतजार करने के बाद गाड़ी आ गई। 


अयांश और नुपुर गाड़ी में बैठ गए। अयांश नुपुर से थोड़ा दूर होकर बैठ गया और बाहर देखने लगा। नुपुर ने उसे देखा और हल्का सा मुस्कुराते हुए सोचा, “अभी रहलो जितना दूर रहना है तुम्हें मुझसे क्योंकि आज रात के बाद तुम मुझसे दूर नही रह पाओगे।” 


जल्दी ही वो दोनों पार्टी में पहुँच गए। नुपुर अपनी दोस्त, अमीषा को देखते ही उससे गले मिली और फिर उसे अयांश से मिलवाया। नुपुर अमीषा के साथ पार्टी एंजॉय करने लगी और अयांश वहाँ चुपचाप सोफे पर आकर बैठ गया। वो वहाँ बैठे हुए सबको देख रहा था। कुछ लड़के लड़कियां नाचने में लगे थे तो कुछ बातों में। अचानक से उसे वहाँ बैठे हुए आहना का ख्याल आया तो वो मुस्कुराने लगा। 


नुपुर जो अब तक अमीषा के साथ बातों में लगी हुई थी, जब उसने अयांश को ऐसे मुस्कुराते हुए देखा तो समझ गई कि वो आहना के बारे में ही सोच रहा है। 


“मैंने तुम्हें कुछ लाने के लिए कहा था। क्या वो लेकर आई हो तुम?” नुपुर ने अमीषा से पूछा। 


अमीषा ने अयांश को देखा और कहा, “मैं लाई तो हूँ पर तुम्हें उसके साथ ऐसा कुछ भी नही करना चाहिए।” 


“ये सब तुम मुझे मत सिखाओ की मुझे क्या करना है। प्यार करती हूँ मैं इससे और पाना चाहती हूँ इसे।” नुपुर ने एक ग्लास में जूस डालते हुए कहा। 


“नुपुर पागल मत बनो। तुम जबरदस्ती उसे पा सकती हो पर उसका प्यार नही। उसके साथ अपनी भी लाइफ बर्बाद करोगी तुम ये सब करके।” अमीषा ने उसे समझाने की कोशिश करते हुए कहा पर नुपुर के ऊपर तो अब जुनून सवार था अयांश को पाने का, इसलिए  उसने अमीषा की बातों पर ज्यादा ध्यान न देते हुए कहा, “मुझे तुम्हारी ये बातें नही सुननी है। वो दो जो मैंने मंगवाया था तुमसे।” 


अमीषा ने चुपचाप एक पैकेट अपने पर्स से निकालकर उसे दे दिया और वहाँ से चली गई। नुपुर ने पैकेट में से एक गोली निकालकर जूस में मिलाई और ग्लास लेकर अयांश के पास आई। उसने मुस्कुराते हुए अयांश से कहा, “क्या हुआ अयांश? तुम यहाँ ऐसे अकेले क्यों बैठे हो? पार्टी एंजॉय करो।” 


“नही, मैं यहीं ठीक हूँ।” कहकर अयांश मुस्कुरा दिया। 


“अच्छा ठीक है। मैं तुम्हारे लिए ये जूस लाई थी।” कहते हुए नुपुर ने अयांश को ग्लास दे दिया। अयांश ने जूस का एक घूंट भरा और नुपुर को थैंक्यू कहा। नुपुर अमीषा के पास चली गई। अयांश ने धीरे धीरे जूस खतम किया और ग्लास टेबल पर रखा। थोड़ी देर बाद उसे महसूस हुआ की उसके सिर में बहुत दर्द हो रहा है और उसे चक्कर आने लगे। उसे सब धुंधला धुंधला सा नजर आने लगा। वो वहाँ से घर जाना चाहता था इसलिए वो नुपुर के पास जाने के लिए खड़ा हुआ। जैसे ही वो एक दो कदम चला, उसे लगा की उसकी टांगें कमज़ोर हो गई है। वो वापिस सोफे पर आकर बैठ गया। उसने अपना सिर पकड़ लिया और फिर वो बेहोश हो गया। 


नुपुर उसे बेहोश होता देखकर शैतानी मुस्कान के साथ मुस्कुरा उठी। वो अयांश के पास आई। ये पक्का करने के लिए की अयांश बेहोश हो चुका है, उसने अयांश को कंधे से पकड़कर उठाने की कोशिश की। जब उसे यकीन हो गया की अयांश बेहोश हो चुका है, उसने अमीषा को बुलाया और कहा, “इसे कमरे तक लेकर जाने में मेरी मदद करो।” 


“नुपुर तुम्हें क्या हो गया है? तुम क्यों ये नही देख पा रही की तुम गलत कर रही हो? कुछ नही मिलेगा तुम्हें इन सबसे सिवाय कुछ वक्त की खुशी के। आखिर में तुम्हारे पास सिर्फ तन्हाई और अयांश की नफरत होगी।” अमीषा ने कहा जिससे नुपुर को गुस्सा आने लगा तो उसने कहा, “तुम मेरी इतनी परवाह मत करो बस इसे कमरे में लेकर चलो मेरे साथ।” 


अमीषा ने अयांश को कमरे तक पहुँचाने में उसकी मदद की। अयांश को बेड पर लेटाने के बाद, नुपुर ने अमीषा से कहा, “अब तुम जाओ यहाँ से और ध्यान रखना की हमें कोई भी डिस्टर्ब न करे।” 


नुपुर ने अमीषा के जाते ही दरवाज़े को अंदर से बंद किया और अयांश को देखकर मुस्कुराने लगी। रात का माहौल बेशक अयांश के लिए शांत था पर आने वाली सुबह उसकी और आहना की जिंदगी में अपने साथ बहुत से तूफान लाने वाली थी।



Continued In जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 20

Friday, 3 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 18

 


आहना उन दोनों आदमियों के साथ बाहर जाने लगी। ये देख राकेश ने अर्जुन और कबीर से कहा, “चलो।” 


राकेश अर्जुन और कबीर के साथ कमरे से बाहर चले गए। आहना का दिल बहुत जोर से धड़क रहा था और उसे डर भी लग रहा था पर वो चुप चाप चलती रही। मॉल के बाहर पहुँचते ही तीन पुलिस वालों ने उन्हें घेर लिया। राकेश, कबीर और अर्जुन भी बाहर आ गए और अर्जुन ने कहा, “उसे इसी वक्त छोड़ दो और बताओ ये सब तुमसे किसने करने के लिए कहा।”


निखिल अपनी गाड़ी में बैठा ये सब देख रहा था। उसे बहुत गुस्सा आ रहा था। ये देख की वो दोनों आदमी कुछ नही बोल रहे है, अर्जुन ने अपने साथ आए पुलिस वालों को इशारा किया। पुलिस वालों ने ध्यान से उनके पास जाकर उन्हें पकड़ लिया जिससे उन्हें आहना को छोड़ना पड़ा। 


आहना भागकर कबीर के पास आई और उनके गले लगकर रोने लगी। निखिल को पता चल गया की अब वो फंसने वाला है इसलिए जल्दी से वहाँ से निकल गया। 


“ये सब तुम लोगों ने किसके कहने पर किया।” अर्जुन ने उनसे दोबारा पूछा। दूसरा आदमी जल्दी से बोल पड़ा। “किसी निखिल नाम के लड़के ने हमें ऐसा करने को कहा था।”


निखिल का नाम सुनते ही आहना हैरान हो गई। उसे यकीन नही हुआ निखिल ऐसा कुछ भी कर सकता है। “उसे भी हम जल्दी अरेस्ट कर लेंगे। तुम आहना को लेके घर जाओ।” अर्जुन ने राकेश से कहा। 


अर्जुन ने उन दोनों आदमियों को अरेस्ट किया और राकेश और कबीर आहना को लेकर घर चले गए। कुछ देर बाद रिद्धिमा भी वहाँ से घर जाने लगी। वो खुश हो रही थी की आहना को निखिल अब तक किडनैप कर चुका होगा पर उसे नही पता था की आहना राकेश के साथ है। 


आहना गाड़ी में चुपचाप बैठी हुई थी। राकेश ने उसे देखा और कहा, “आहना, अयांश को इस बारे में कुछ मत बताना बेटा। वो परेशान हो जाएगा।”


“थैंक यू, अंकल।” आहना ने कहा।


“अपना ख्याल रखना।” राकेश ने कहा। उन्होंने पहले कबीर और आहना को घर छोड़ा और फिर अपने घर जाने लगे। जब वो अपने घर पहुँचे तो देखा रिद्धिमा आराम से सोफे पर बैठी हुई है। 


“तुम्हारी शॉपिंग कैसी रही?” राकेश ने उनके पास बैठते हुए कहा। 


“अच्छी रही पर वो आहना, वो बहुत ही लापरवाह है।” रिद्धिमा ने झूठा गुस्सा दिखाते हुए कहा।


राकेश हल्का-सा हँसे और पूछा, “क्या किया उसने?”


“मुझे अकेले मॉल में छोड़कर चली गई। मैं उसका कितने वक्त तक इंतजार करती रही पर वो पता नही कहाँ चली गई। मैं थक चुकी हूँ इसलिए मैं सोने जा रही हूँ।” रिद्धिमा ने अपना हैंडबैग लेकर सोफे से उठते हुए कहा। 


“तो आहना को किडनैप करवाने की प्लानिंग ने तुम्हें थका दिया।” रिद्धिमा लिविंग रूम से निकलने ही वाली थी जब उसने ये सुना। उसने पलटकर राकेश को देखा और कहा, “ये क्या कह रहे हो तुम? मैं आहना को किडनैप क्यों करवाऊंगी?”


“क्योंकि तुम उससे नफरत करती हो और तुम नही चाहती की आहना अयांश की लाइफ में रहे।” राकेश ने खुदको शांत रखते हुए कहा।


“क्या प्रूफ है तुम्हारे पास इसका की ये सब मैंने किया है?” रिद्धिमा ने गुस्से में कहा। 


“अपना फोन दो।” राकेश ने हाथ आगे करके कहा। रिद्धिमा ने उन्हें अपना फोन दिया। राकेश ने वो मैसेज खोले जो रिद्धिमा ने निखिल को भेजे थे और रिद्धिमा को वो मैसेज दिखाते हुए पूछा, “अगर तुमने नही किया तो ये मैसेज क्यों भेजा तुमने उसे।”


राकेश सब कुछ जानते है ये जानकर रिद्धिमा के चेहरे का रंग उड़ गया। रिद्धिमा को ऐसे देखकर राकेश ने कहा, “मैंने तुम्हारे ऊपर नजर रखी हुई थी। आहना मेरे साथ ही थी जब तुमने उसे शॉपिंग का पूछने के लिए फोन किया और मैंने ही आहना को तुम्हें हाँ कहने के लिए कहा था क्योंकि मैं देखना चाहता था की तुम क्या करती हो उसके साथ।”


“तो तुमने उसे मुझसे झूठ बोलने के लिए कहा था और आज तुम उसे बचा चुके हो?” रिद्धिमा ने पूछा। 


“हाँ, आहना बिल्कुल सेफ है।” राकेश ने कहा। 


“तुम्हें वो इतनी ज्यादा क्यों पसंद है, राकेश? क्या लगती है वो तुम्हारी?” रिद्धिमा ने गुस्से से पूछा।


“वो हमारे बेटे का फ्यूचर है। हमारी होने वाली बहु है। अब बताओ क्यों किया तुमने ये सब?” राकेश ने गुस्से में रिद्धिमा की बाहों को पकड़कर पूछा। 


“मैं नही बताऊंगी।” रिद्धिमा ने चिल्लाते हुए कहा। 


“फिर मैं भी तुम्हें अरेस्ट करवाने से पीछे नही हटूंगा।" राकेश ने कहा और रिद्धिमा हैरानी से उसकी तरफ देखते हुए बोली, “उस लड़की के लिए तुम मुझे अरेस्ट करवाओगे।” 


“मैं सीरियस हूँ। अगर तुम अरेस्ट हुई तो अयांश को पता चल जाएगा की तुमने आहना के साथ क्या किया और फिर वो तुमसे नफरत करने लगेगा क्योंकि आहना उसके लिए बहुत स्पेशल है और वो सबसे ज्यादा प्यार आहना से करता है। वो तुमसे भी बहुत प्यार करता है पर जब उसे अपनी माँ की अच्छाई के बारे मे पता चलेगा तो वो तुमसे नफरत ही करेगा।” राकेश ने कहा। 


“तुम अयांश को कुछ भी नही बताओगे।” रिद्धिमा ने गुस्से में कहा। 


“अगर तुम चाहती हो अयांश को कुछ भी पता न चले तो बताओ तुमने निखिल के साथ मिलकर ये सब क्यों किया?” राकेश ने पूछा। 


“ठीक है बताती हूँ।” रिद्धिमा वापिस सोफे पर आ बैठी और बताना शुरू किया। “निखिल आहना से शादी करना चाहता है और मैं चाहती हूँ कि अयांश टीना की बेटी, नूपुर से शादी करे। निखिल आहना को उनके कॉलेज के पहले साल से पसंद करता है। मैं चाहती तो उसी वक्त आहना को अयांश से दूर कर सकती थी पर मैंने अयांश की पढ़ाई पूरी होने का इंतजार किया। मैंने निखिल को कहा था आहना को यहाँ से कहीं दूर ले जाए पर तुमने उसे बचा लिया आज।” रिद्धिमा ने कहा और राकेश को देखा। 


राकेश ने उसका हाथ कसकर पकड़ा और कहा, “मेरी बात ध्यान से सुन लो रिद्धिमा, सिर्फ आहना मेरी बहु बनेगी और आज के बाद अगर तुमने उसे नुकसान पहुँचाने की कोशिश की तो मैं भूल जाऊंगा की तुम मेरी वाइफ हो।” 


राकेश अपने कमरे मे चले गए। रिद्धिमा ने जल्दी से नूपुर का नंबर मिलाया। 


“हेलो, आंटी।”


“हेलो बेटा, मैंने तुमसे एक बहुत जरूरी बात करने के लिए फोन किया है। अभी तुम अयांश के साथ कुछ मत करना। कुछ महीने रूक जाओ।” रिद्धिमा ने घबराई सी आवाज में कहा। 


“क्या हुआ आंटी?” नूपुर ने परेशान होकर पूछा। 


“मैंने आहना को किडनैप करवाने की कोशिश की पर राकेश ने उसे बचा लिया और अब वो सब कुछ जानता है इसलिए कुछ महीने रूक जाओ।” रिद्धिमा ने समझाया। 


“ठीक है आंटी। मैं अभी कुछ नही करूंगी। बाय।” नूपुर ने कहकर फोन काट दिया और गुस्से में कहने लगी, “आहना, अब तुम देखना। तुम्हारी जिंदगी को मैं हेल बना दूंगी और बहुत जल्द अयांश सिर्फ मेरा होगा।”


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