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Friday, 2 October 2026

आर्ज-ए-इश्क - 26

 



शुभम ने रावी को पानी लाने के लिए कहकर गुरनूर को सोफे पर बैठाते हुए कहा, “तुम्हें घबराना बिल्कुल नहीं है, बेटा। सब ठीक हो जाएगा। विक्रम से मैं बात करूँगा। डरना नहीं है तुम्हें। तुमने बिल्कुल सही फैसला किया है। जबरदस्ती शादी करके खुश रहने का नाटक करने से अच्छा है उस शादी से बचना।” 


रावी ने पानी का गिलास लाकर शुभम को दे दिया। शुभम ने गुरनूर को पानी पिलाया। 


“रावी, तुम गुरनूर को कमरे में लेकर जाओ। ये फ्रेश हो जाएगी तो ठीक महसूस करेगी।” शुभम को गुरनूर की हालत ठीक नही लग रही थी इसलिए उसने रावी से कहा और फिर मधु को देखकर कहा, “गुरनूर जब फ्रेश हो जाए तो इसे अच्छे से और प्यार से नाश्ता करवा देना।” 


रावी गुरनूर को ऊपर अपने कमरे में ले आई। विक्रम और नील भी अपना नाश्ता खत्म कर अपने अपने ऑफिस जाने के लिए निकल गए। 


रावी गुरनूर से सब कुछ जानना चाहती थी कि वो भागी कैसे और श्रेयांश से उसकी मुलाकात हुई या नही लेकिन गुरनूर की हालत देखते हुए उसने उससे कुछ भी पूछना ठीक नही समझा। गुरनूर नहाकर आई तो अभी भी उसके चेहरे पर काफी उदासी थी। रावी को लगा कि शायद वो विक्रम की वजह से परेशान है इसलिए उदास है। उसने गुरनूर को गले लगाते हुए कहा, “तुम टेंशन मत लो। सब ठीक हो जाएगा।” 


“अब कुछ ठीक नहीं होगा, रावी।” गुरनूर ने उसके गले लगे हुए ही मन ही मन में कहा। 


रावी ने उसे बेड पर बैठा दिया। गुरनूर इतने लंबे सफर में बैठे हुए आई थी इसलिए काफी ज्यादा थक चुकी थी। मधु उसके लिए कमरे में ही नाश्ता ले आई। गुरनूर का मन नही था फिर भी रावी और मधु ने मिलकर उसे नाश्ता करवाया और फिर गुरनूर को सुला दिया। थकावट की वजह से गुरनूर को जल्दी नींद आ गई। 


***


दिल्ली में नीत ने गुस्से से विक्रम से कहा, “तुम्हारी बेटी की वजह से हमें कितनी शर्मिंदगी उठानी पड़ी है लड़के वालों के सामने और वो भागकर टेंशन फ्री होकर घूम रही होगी कहीं।” 


“मुझे पता है वो कहाँ गई है।“ विक्रम ने नीत के सवाल को नज़रअंदाज़ करते हुए कहा और फिर शीतल को देखकर कहा, “तैयारी करो जाने की।” 


***


गुरनूर जब से उठी थी, वो एक बार भी कमरे से बाहर ही नहीं आई थी। वो बस रोए जा रही थी। शुभम ने ऑफिस से आकर रावी से उसके बारे में पूछा तो रावी ने कहा, “वो तो बस रोए जा रही है, पापा। डरी हुई भी है।” 


शुभम फ्रेश होकर रावी के साथ उसके कमरे में आए तो देखा की गुरनूर बेड पर लेटकर रो रही थी। शुभम ने पीछे से उसके पास जाकर उसके सिर पर हाथ रखा तो गुरनूर ने मुड़कर अपनी आँसूओं से भरी हुई आँखों से उन्हें देखा। शुभम ने उसे बेड पर बैठने के लिए कहा और फिर प्यार से उसे समझाते हुए कहा, “क्यों रो रही हो, बेटा? मैंने कहा न तुमने कुछ गलत नहीं किया है। तुम किसी से भी मत डरो। विक्रम आएगा तो उससे मैं बात करलूॅंगा।” 


गुरनूर को समझाने के बाद शुभम वहाँ से चले गए। उनके जाने के बाद गुरनूर ने मन ही मन में सोचा, “गलत तो मैंने किया है, अंकल। मैंने एक ऐसे इंसान से प्यार किया जो  बस अपनी इगो की वजह से मेरे दिल के साथ खेल रहा था।” 


विक्रम शीतल और नीत के साथ इंदौर पहुँच गया। गुरनूर रावी, शुभम और नील के साथ लिविंग रूम में बैठी हुई थी जब दरवाजे की घंटी बजी। मधु ने जाकर दरवाज़ा खोला तो देखा कि सामने विक्रम शीतल और नीत के साथ खड़ा था। उसने उन्हें अंदर बुलाया। गुरनूर को देखते ही विक्रम को गुस्सा आ गया और वो उसे थप्पड़ मारने ही वाला था कि तभी शुभम ने उसका हाथ पकड़कर उसे रोक दिया। विक्रम ने शुभम को देखते हुए कहा, “शुभम भाई, मेरा हाथ छोड़ दीजिए। इस लड़की ने इतना भी सोचना या समझना ठीक नहीं समझा की इसके भागने से मुझ पर क्या बीतेगी।” 


“तुमने गुरनूर को समझने की कोशिश की। नहीं ना। बस किसी की बातों में आकर उसकी जबरदस्ती शादी कराने लग गए तुम। इतने खुले विचारों वाले हो तुम। तुमसे ये उम्मीद नहीं थी मुझे।” शुभम ने विक्रम का हाथ छोड़ते हुए कहा। 


“मैं अच्छा सोच रहा था, इसका।” विक्रम ने कहा जिसे सुनकर शुभम ने उन्हें देखते हुए कहा, “अगर तुम्हें गुरनूर का अच्छा सोचना है तो इसे इसके पैरों पर खड़े होने दो पहले और अगर अपने पैरों पर खड़ी नहीं भी होती तो एकलौती बेटी है, जबरदस्ती नहीं करो इसके साथ। शादी एक ज़िम्मेदारी है। जब इसे लगेगा की ये तैयार है इस जिम्मेदारी को निभाने के लिए तो कर लेगी ये शादी अपने आप। हर जगह तुमने इसे समझा है तो जब इसकी जिंदगी का इतना बड़ा फैसला लेने की बारी आई तो तुम टिपिकल इंडियन फादर बन गए। इसकी बातें छोड़कर दूसरो की सुनने लग गए तुम। कहता नहीं था पर शुरू से ही तुम ओपन माइंडेड के साथ-साथ टिपिकल फादर भी रहे हो। तुम हल्का सा चिल्ला भी देते थे तो वो बच्ची अंदर तक सहम जाती थी। कभी सोचा जहाँ इसे भेजने की तैयारी कर रहे थे वहाँ इसके साथ ऐसा होता तो कैसे रहती ये।” 


विक्रम ने पास शुभम की बातों का कोई जवाब नही था। उसे खामोश देखकर शुभम ने आगे कहा, “गुरनूर को उसका लाइफ पार्टनर खुद चुनने दो। अरेंज मैरिज में भी। ऐसे जबरदस्ती मत करो। भागकर आई वो क्योंकि तुमने उसकी बात ना सुनकर उसे मजबूर कर दिया था।” 


गुरनूर की आँखें ये सब सुनकर आँसुओं से भरी हुई थी। विक्रम को अपनी गलती का एहसास हो गया। नीत और शीतल, दोनों ही अब तक खामोश खड़ी थी। विक्रम ने गुरनूर के पास आकर उसके सिर पर हाथ रखकर कहा, “आई एम सॉरी, बेटा। अपने पापा को माफ करदो।” 


गुरनूर ने उनसे कुछ नही कहा और ना ही उनकी तरफ देखा। मधु सबको बैठने का कहकर सबके लिए चाय बनाने चली गई। गुरनूर बस खामोशी से विक्रम के पास बैठी हुई थी। शीतल इसी बात से परेशान हो रही थी की गुरनूर ने अभी तक कुछ नही कहा था। उसके चेहरे पर अभी भी उदासी ही थी।


Continued In आर्ज-ए-इश्क - 27

Thursday, 1 October 2026

आर्ज-ए-इश्क - 25



गुरनूर की शादी किसी और से होने वाली थी, ये बात सुनकर श्रेयांश बहुत ज्यादा हैरान हो गया था क्योंकि पिछले दिनों में उसने जब भी गुरनूर से बात की थी, गुरनूर ने उसे ऐसा कुछ भी नही बताया था। गुरनूर की किसी और से शादी के बारे में सोचते ही श्रेयांश के दिल में बेहद तकलीफ हुई लेकिन उसने भी खुद को समझा रखा था की उसे गुरनूर के लिए सीरियस नही होना है। उसने गुस्से में गुरनूर से कहा, “तुम दिल की जगह दिमाग से क्यों नही सोचती हो कभी। पागल हो क्या। बिना सोचे समझे घर से भाग आई।” 


गुरनूर ने अपने आँसू पोंछकर श्रेयांश को हैरानी से देखते हुए कहा, “वो जबरदस्ती मेरी शादी कहीं और करवा रहे थे।” 


“तो कर लेती शादी। यहाँ क्यों आ गई?” श्रेयांश ने कहा जिसे सुनकर गुरनूर को एक झटका सा लगा। वो ये देखकर हैरान हो गई थी की श्रेयांश ने कितनी आसानी से उसे किसी और के साथ शादी करने के लिए कह दिया। उसने गुस्से और बेबसी से श्रेयांश को देखते हुए कहा, “कैसे कर लेती जब मैं तुमसे प्यार करती हूँ और तुम मुझसे।” 


वहाँ आसपास आते जाते हुए लोग उन्हें देख रहे थे। श्रेयांश ने उसे देखा और कहा, “तो तुम इस उम्मीद में यहाँ आ गई हो कि मैं तुमसे शादी कर लूँगा। अगर ये सोचकर यहाँ आई हो तो अभी के अभी वापिस लौट जाओ क्योंकि ऐसा कभी नहीं होगा, गुरनूर। मुझे नहीं है प्यार तुमसे और वैसे भी, मैं दो महीने बाद तेरह तारीख को जा रहा हूँ यहाँ से।” 


“तुम ये क्या कह रहे हो, श्रेयांश। तुम्हारी आँखों में दिखता है प्यार मेरे लिए।” गुरनूर ने श्रेयांश का हाथ पकड़कर कहा तो श्रेयांश ने अपना हाथ उसके हाथ से छुड़वाते हुए कहा, “नहीं, यकीन मुझे किसी प्यार में और न ही मुझे कभी प्यार हो सकता है। तुम्हारे साथ जो कुछ भी था, वो बस टाइमपास था।” 


“तुम अपने करियर की वजह से ये सब कह रहे हो ना क्योंकि तुम तीन साल के लिए जा रहे हो। देखो अगर ऐसा है तो मैं तुम्हारा इंतजार करूॅंगी श्रेयांश। तुम्हारे करियर में प्रॉबलम कभी नहीं बनूंगी मैं। मेरे साथ रहकर भी तुम अपना करियर बना सकते हो।” गुरनूर ने श्रेयांश की बातों पर यकीन न करते हुए कहा। उसे अभी भी उम्मीद थी की श्रेयांश कह देगा की ये सब कुछ झूठ है लेकिन श्रेयांश ने अगले ही पल उसकी सारी उम्मीदों पर पानी फेरते हुए कहा, “मैंने तुम्हें सच बता दिया है, गुरनूर। वो सब सिर्फ टाइमपास था।” 


गुरनूर ने अपने दोनों हाथों से श्रेयांश की कॉलर पकड़कर उसकी आँखों में देखते हुए कहा, “तुम मेरे साथ इतना बड़ा फरेब नहीं कर सकते। मैंने तुम्हें अपनी जिंदगी में वहाँ जगह दी है जहाँ मेरे लिए सब कुछ मेरे सपने थे। क्यों…क्यों इतना बड़ा झूठ बोला तुमने मुझसे कि तुम मुझसे प्यार करते हो।” 


“तुमने भी तो मुझसे झूठ कहा था कि तुम्हारा बॉयफ्रेंड है। मैंने भी हिसाब बराबर करने के लिए ये कह दिया कि मुझे तुमसे प्यार है क्योंकि मुझे नही पसंद की कोई मुझसे झूठ बोले।” श्रेयांश ने गुरनूर के हाथों से अपनी कॉलर छुड़वाते हुए कहा। 


गुरनूर ने खीचकर एक थप्पड़ श्रेयांश के गाल पर मारा और कहा, “पहले जब मुझे तुमसे मतलब नहीं था तो तुम मेरे इतने करीब आए कि मुझे तुम्हारी आदत लग गई, और अब जब मुझे तुम्हारी इतनी आदत लग गई है तो तुम दूर जाना चाहते हो मुझसे। किसी की फीलिंग्स के साथ भी खेलना सीखा है क्या तुमने। प्यार जैसी इतनी प्योर फीलिंग का मज़ाक बना दिया तुमने।” 


“वापिस चली जाओ जहाँ से आई हो। भुला दूॅंगा आसानी से मैं तुम्हें।” कहकर श्रेयांश वहाँ से जाने लगा। 


“नहीं जाऊॅंगी। जब तक तुम यहाँ हो, मैं भी यहीं रह कर तुम्हें अपने प्यार का एहसास दिलाने की कोशिश करूँगी और जहाँ तक बात है मुझे भुलाने की तो तुम मुझे कभी भूला नहीं पाओगे। हर जगह तुम मुझे देखोगे और हर किसी में मेरी तलाश करोगे तुम।” गुरनूर ने उसे जाते हुए देखकर कहा तो श्रेयांश मुड़ा और उसके करीब आकर कहा, “कोई कोशिश मत करना मुझे एहसास दिलाने की क्योंकि इसका कोई फ़ायदा नहीं होगा।” 


श्रेयांश गुरनूर को वहाँ छोड़कर चला गया। गुरनूर बेबसी से बस उसे जाते हुए देखती रही। उसके दिल में इस वक्त बहुत तकलीफ हो रही थी। गुरनूर के पास पैसे थे इसलिए थोड़ी देर वहाँ ऐसे ही खड़े रहने के बाद वो ऑटो में बैठकर रावी के घर जाने के लिए निकल गई। 


रावी सबके साथ बैठकर नाश्ता कर रही थी की तभी उनके घर की डोरबेल बजी। रावी ने उठते हुए कहा, “आप सब नाश्ता कीजिए। मैं देखती हूँ।” 


रावी ने दरवाज़े की तरफ आकर जैसे ही दरवाज़ा खोला, वो अपने सामने गुरनूर को देखकर हैरान रह गई। गुरनूर को देखकर लग रहा था की वो इस वक्त बहुत डरी हुई है और पूरे रास्ते रोते हुए आई है। रावी ने गुरनूर को देखते हुए कहा, “गुरनूर, तुम यहाँ क्या कर रही हो और ये क्या हाल बना रखा है तुमने अपना?”


श्रेयांश की वजह से गुरनूर पूरे रास्ते रोते हुए आई थी जिसकी वजह से उसकी आँखें और नाक लाल हो चुकी थी। गुरनूर ने बिना कुछ कहे रावी को गले लगा लिया और रोने लगी। 


गुरनूर का नाम सुनकर शुभम और मधु ने एक दूसरे को देखा और फिर उठकर गुरनूर के पास आ गए। नील भी उनके पीछे आ गया। मधु मन ही मन में गुरनूर को अपने पास देखकर खुश हो रही थी लेकिन उसे हैरानी भी थी की गुरनूर ऐसे अकेले यहाँ कैसे आ गई। नील और रावी भी काफी हैरान थे। मधु खुश तो बहुत थी लेकिन जब उसने गुरनूर को रोते हुए देखा तो उसे तकलीफ होने लगी। 


शुभम ने गुरनूर के सिर पर हाथ रखा तो उसने रावी से अलग होकर उसे देखा। शुभम ने गुरनूर के हाथ से उसका बैग लेकर नील को दिया और उसके आँसू पोंछे। शुभम ने प्यार से उसके कंधे पर हाथ रखा और उसे अंदर ले आया। उसे गुरनूर के यहाँ आने से ज्यादा हैरानी बिल्कुल भी नही हुई थी क्योंकि शायद उन्हें मालूम था की गुरनूर घर से भागकर यहाँ आएगी।


Continued In आर्ज-ए-इश्क - 25

Monday, 28 September 2026

आर्ज-ए-इश्क - 24

 



गुरनूर ने फैसला तो कर लिया था कि वो घर भाग जाएगी पर ये उसके लिए इतना आसान नही था क्योंकि नीत उसके ऊपर कड़ी नज़र रखती थी। शादी का दिन आने में ज़्यादा वक़्त नहीं बचा था इसलिए नीत के कहने पर शीतल ने जल्दी जल्दी उसे उसकी शादी की शॉपिंग करवायी और शादी की सारी तैय्यारियाँ भी कर ली। जब विक्रम ने शुभम को जल्दी ही गुरनूर की शादी करने के बारे में बताया और उन्हें शादी में आने के लिए कहा तो शुभम को काफी हैरानी हुई क्योंकि वो अच्छे से जानते थे की गुरनूर इस शादी के लिए तैयार नहीं होगी इसके बावजूद विक्रम उसकी जबरदस्ती शादी कर रहे हैं। वो विक्रम से इस बारे में कुछ नही कहना चाहते थे इसलिए उन्होंने विक्रम से कहा कि नील और अपने काम की वजह से वो चार दिन पहले पहुँच जाएंगे। रावी भी गुरनूर के लिए काफ़ी परेशान थी लेकिन वो भी कुछ नही कर सकती थी। रावी की नज़रों में अगर गुरनूर को इस शादी से कोई बचा सकता था तो वो श्रेयांश था लेकिन गुरनूर ने उसे श्रेयांश को इस बारे में कुछ भी बताने के लिए मना किया था। 


वहीं श्रेयांश इन सबसे बेख़बर विवेक के साथ लंदन जाने के लिए शॉपिंग खत्म करने में बिजी था। गुरनूर से उसकी बात तो होती थी मैसेज पर लेकिन गुरनूर ने खुद ही उसे इस बात का एहसास नहीं होने दिया कि वो किस प्रॉब्लम में है।


गुरनूर के घर में शादी के लिए कुछ करीबी मेहमान आ चुके थे। नीत भी गुरनूर को लेकर उनके साथ बैठी हुई थी और शीतल उनके लिए खाने की तैयारी में लगी हुई थी। गुरनूर के पास यही सही मौका था की वो अपने कमरे में जाकर घर से भागने के लिए पैकिंग कर सके इसलिए वो बहाना बनाकर ऊपर अपने कमरे में आ गई और अपने कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद कर भागने के लिए पैकिंग करने में लग गई। जैसे ही उसने पैकिंग खत्म की, किसी ने उसके कमरे का दरवाज़ा खटखटाया। गुरनूर ने जल्दी से बैग को साइड में छुपाकर दरवाजा खोला तो देखा सामने नीत की छोटी बेटी, रूही खड़ी हुई थी। रूही ने उसे देखकर कहा, “दीदी, आप यहाँ क्या कर रही है? नीचे सब आपके बारे में पूछ रहे है।” 


“वो मैं अपने कपड़े सही करने आई थी। चलो नीचे चले।” कहते हुए गुरनूर ने अपने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और रूही के साथ नीचे आकर सबके बीच चुपचाप बैठ गई। 


शादी के फंक्शनस की शुरुआत होने के दिन गुरनूर पाँच बजे उठ गई। उसने अपने पास में रूही को सोते हुए देखा तो थोड़ा परेशान हो गई लेकिन फिर बहुत ही ध्यान से बेड से उतरकर वो अपना बैग लेकर कमरे से बाहर आ गई। देर रात सोने की वजह से पूरे घर में अभी कोई भी नहीं जगा था जिसका फ़ायदा उठाकर गुरनूर बहुत ही ध्यान से घर से भाग गई। 


शीतल सुबह उठकर गुरनूर को फंक्शन के लिए उठाने के लिए आई तो   गुरनूर उसे पूरे कमरे में कहीं भी दीखाई नहीं दी। उसने रूही को उठाते हुए पूछा, “रूही, गुरनूर कहाँ है?” 


“यहीं कहीं होगी, मामी।” रूही ने अलसाई सी आवाज में उठते हुए कहा। शीतल गुरनूर को ना पाकर परेशानी हो गई। 


वहीं गुरनूर इस वक्त इंदौर जाने वाली ट्रेन में अकेली बैठी हुई थी। वो डरी हुई तो काफी थी लेकिन श्रेयांश का प्यार उसे कहीं ना कहीं हिम्मत भी दे रहा था। 


शीतल ने विक्रम और नीत को गुरनूर के भाग जाने के बारे में बताया। उन्होंने गुरनूर को कई बार फोन किया लेकिन गुरनूर ने अपना फोन स्विच ऑफ कर लिया था। विक्रम को भी अब गुस्सा आ रहा था जिसे देख शीतल ने कहा कि उन्हें गुरनूर का इंतजार करना चाहिए। नीत ने शीतल को देखकर हल्के गुस्से में कहा, “आप अपनी बेटी पर ठीक से नज़र नही रख सकती थी, भाभी।” 


“ये बात आप मुझसे न ही कहे तो बेहतर होगा। एक तो मेरी बेटी की मर्ज़ी के खिलाफ आपने उसकी शादी तय की और जब वो आपके इस जबरदस्ती के फैसले से बचने के लिए भाग गई तो इल्जाम मेरे ऊपर की मैंने उसपर ठीक से नज़र नही रखी। जरा पूछिए अपने भाई से। मैंने इन्हें पहले ही कह दिया था की अगर गुरनूर ने इस शादी से बचने के लिए कल को कोई भी ऐसा वैसा कदम उठाया तो मुझे मत कहे इसलिए बेहतर होगा मेरे ऊपर ये इल्जाम न लगाए आप। ये जो कुछ भी गुरनूर ने किया है ना इसके जिम्मेदार आप दोनों भाई बहन खुद है। अगर आप दोनों उसकी मर्ज़ी के बिना उसकी शादी न करवा रहे होते तो वो कभी नहीं भागती। ये जो इल्जाम है ना अपने और अपने भाई पर लगाइए आप, दीदी।” कहकर शीतल गुस्से में वहाँ से चली गई। 


सुबह के वक्त इंदौर में आकर गुरनूर ने सबसे पहले अपना फोन ऑन किया और श्रेयांश को फोन लगाया। जैसे ही श्रेयांश ने दूसरी तरफ से फोन उठाया, गुरनूर ने जल्दी से कहा, “इंदौर रेलवे स्टेशन पर मिलने आ जाओ अभी।” 


श्रेयांश ये सुनकर हैरान हो गया। उसे समझ नही आया की इतनी सुबह सुबह गुरनूर इंदौर रेलवे स्टेशन पर कर क्या रही है। वो गुरनूर के साथ इस रिश्ते में सीरियस नही होना चाहता था लेकिन उसके दिल में गुरनूर के लिए मोहब्बत थी जो उसे गुरनूर के पास जाने के लिए कह रही थी। श्रेयांश खुद को रोक नही पाया और अपने घर से बाहर आकर अपनी बाइक पर बैठ स्टेशन जाने के लिए निकल गया। 


जल्दी ही वो स्टेशन पहुँच गया। बाइक पार्किंग में लगाकर वो अंदर जाने लगा तो देखा की गुरनूर बाहर खड़ी हुई थी। वो उसके पास आया और उसने गुस्से में पूछा, “ये क्या पागलपन है अब तुम्हारा गुरनूर? अचानक से तुम यहाँ क्यों आ गई हो? वो भी बिल्कुल अकेले।” 


श्रेयांश गुरनूर के चेहरे को देखकर समझ रहा था की वो इस वक्त कितना डरी हुई है और वो बहुत ज्यादा रोई भी है क्योंकि उसकी आँखें रोने की वजह से सूजी हुई थी। गुरनूर की आँखों में फिर से आँसू आ गए और उसने कहा, “मैं भागकर आई हूॅं। पापा जबरदस्ती  मेरी शादी करवा रहे थे बुआ के कहने पर।” 


गुरनूर की शादी की बात सुनकर श्रेयांश बहुत ज्यादा हैरान हो गया।


Continued In आर्ज-ए-इश्क - 25

Tuesday, 22 September 2026

आर्ज-ए-इश्क - 23

 


मधु ने गुरनूर और नील की शादी को लेकर अब तक अपने दिल में बहुत सारे ख़्वाब सजाए थे जिन्हें अब वो टूटता हुआ देख रही थी। शुभम ने उनके कंधे पर हाथ रखकर उन्हें समझाते हुए कहा, “मधु समझने की कोशिश करो। मैं ऐसे ही विक्रम को फोन कर गुरनूर का रिश्ता तोड़ने की बात नही कह सकता। तुम भगवान से दुआ करो क्योंकि मेरा दिल कह रहा है ये शादी गुरनूर बिल्कुल नहीं करेगी।” 


शुभम बहुत देर तक मधु को समझाते रहे और मधु समझ भी गई। 


गुरनूर ने उस दिन बहुत मुश्किल से श्रेयांश से बात की। वो अपनी आवाज़ से श्रेयांश को इस बात का एहसास नही होने देना चाहती थी की वो उदास या परेशान है पर श्रेयांश इस बात को अपने दिल से महसूस कर पा रहा था की गुरनूर काफी तकलीफ़ में है लेकिन उसने गुरनूर से इस बारे में कुछ नहीं पूछा। 


गुरनूर के रोके को अभी तीन दिन ही हुए थे की विक्रम को नीत का फोन आया और नीत ने विक्रम से जो कुछ कहा, उसे सुनकर वो थोड़ा परेशान हो गए। शीतल भी वहीं खड़ी होकर उन्हें देख रही थी। जैसे ही विक्रम ने फोन रखा, शीतल ने पूछा, “क्या कहा है दीदी ने?” 


“लड़के वाले शादी जल्दी करना चाहते है इसलिए कल वो हमसे मिलने आएंगे।“ विक्रम ने कहा तो शीतल ने गुस्से से कहा, “मुझे एक बात बताइए। क्या दीदी को हमसे ये नही पूछना चाहिए था की हम कल उनसे मिल सकते है या नहीं। आपकी बहन की न कुछ ज्यादा ही आदत है हमारे घर में दखल देने की। पूछती नही है कुछ भी। सीधा बताती है की ये कर लेना। अरे, उनका हक़ है अपने मायके पर लेकिन इसका मतलब ये तो नही की वो अपने फैसले भी हमसे मनवाएंगी।” 


शीतल गुस्से में वहाँ से चली गई। विक्रम को भी अब समझ नही आ रहा था की वो क्या करे। वो अपनी बहन से कुछ कह नहीं सकते थे क्योंकि वो बड़ी थी और शीतल से भी नही क्योंकि उन्हें मालूम था की शीतल भी गलत नही है। 


अगले दिन लड़केवाले नीत के साथ आ गए और सबने मिलकर शादी की तारीख अगले महीने की तय कर दी। विक्रम और शीतल को छोड़कर सभी खुश थे और गुरनूर, उसकी उदासी को तो किसी ने देखा तक नही। गुरनूर ने नजर उठाकर उस लड़के को देखा जिससे उसकी शादी होने वाली थी तो पाया कि वो लड़का उसे हवस भरी नज़र से देख रहा था। गुरनूर को उस लड़के की नज़र को अपने ऊपर महसूस करना अच्छा नहीं लग रहा था क्योंकि श्रेयांश ने उसे आजतक ऐसे कभी नहीं देखा था। ये याद करते ही उसे रोना आ गया। वो वहाँ से एकदम से उठकर ऊपर अपने कमरे में चली गई और बेड पर लेटकर रोने लगी।


शीतल और विक्रम ने गुरनूर को ऐसे जाते हुए देखा तो वो दोनों परेशान हो गए। वहीं लड़केवाले भी हैरानी से उस तरफ देख रहे थे जहाँ गुरनूर गई थी। उन्हें ऐसे देखकर नीत ने बात संभालते हुए कहा, “लगता है हमारी गुरनूर शर्मा गई है। लड़की है ना। अपनी शादी की बात सुनकर शर्मा ही जाती है लड़कीयाँ।” 


लड़केवाले मुस्कुराने लगे। लड़के की माँ ने मुस्कुराकर विक्रम को देखते हुए कहा, “भाई साहब, ये मेरा एक लौता बेटा है इसलिए मैं चाहती हूँ की ये शादी बहुत धूमधाम से हो। किसी को भी कोई कमी न आए और लेन देन भी आपकी तरफ से एकदम बढ़िया हो जिससे मेरे सारे रिश्तेदार खुश हो जाएं।” 


विक्रम को तो जल्दबाजी में कुछ समझ नहीं आ रहा था इसलिए उसने बिना कुछ कहे हाँ में सिर हिला दिया। उनके जाने के बाद शीतल ने गुस्से में विक्रम और नीत को देखते हुए कहा, “अब ये जो इनकी डिमांड है शादी धूमधाम से करने की और सारे लेन देन की। इन सबका इतने कम वक्त में कौन इंतजाम करेगा। पूछ लीजिए अपनी बहन से। जब ये हमारे घर के सभी फैसले खुद लेना चाहती है तो अब पूछिए इनसे। क्या ये करेंगी हमारी गुरनूर की शादी पर इतना सा भी खर्चा।” 


“भाभी, आपको मेरे लिए ऐसा कहने की ज़रूरत नहीं है। मैंने अपना मानकर ही गुरनूर का रिश्ता करवाया है इतने अच्छे घर में। इसमें आपके घर के फैसले लेने वाली कौन सी बात आ गई?” नीत ने कहा। 


ये सुनकर शीतल का गुस्सा सातवें आसमान पर पहूँच गया और उसने कहा, “ना, आप तो पूछती है हमसे। गुरनूर के लिए रिश्ता लाने से पहले भी आपने हमसे पूछा, फिर पक्का होने लगा तो भी आपने गुरनूर के मना करने के बावजूद भी पक्का करवा दिया रिश्ता बिना हमारी मर्ज़ी के, और कल भी आपने हमसे पूछा कहाँ, की भाई भाभी, वो लोग तारीख तय करना चाहते है। क्या आप लोगों के पास इतना पैसा है अभी की शादी में खर्च कर पाओ। नही, आपने तो सीधा फैसला सुनाया की वो आ रहे है शादी पक्की करने।” 


विक्रम जानते थे शीतल गलत नहीं है फिर भी उन्होंने कहा, “शीतल, बस शांत हो जाओ। अब जो होना था वो हो गया। अब हमें मिलकर आगे का सोचना होगा की क्या करना है।” 


“मुझे ही शांत करवाना आप। अपनी बहन को मत समझाना कुछ भी। आजतक जितनी हमने सेविंग्स की है, वो तो लगेंगी ही इस शादी में। जैसी उनकी डिमांड्स है ना, लोन भी लेना पड़ जाएगा हमें।” कहकर शीतल गुस्से में वहाँ से चली गई। 


नीत को अपनी भाभी की बातों का बुरा लगा था इसलिए वो भी अपने घर जाने के लिए निकल गए। विक्रम वहीं बैठकर इन सब के बारे में सोचने लगे। उन्होंने सोचा नही था की एक गुरनूर की शादी को लेकर घर में इतना कलेश होगा। अब उन्हें पछतावा हो रहा था और उन्हें सच में लग रहा था की उन्हें गुरनूर के इनकार के खिलाफ जाकर ये रिश्ता पक्का नही करना चाहिए था। 


थोड़ी देर रोने के बाद गुरनूर ने उठकर अपने आँसू पोंछे। उसने पहले गुस्से से अपने कानों में पहने हुए झुमके उतारकर जमीन पर फैंके और फिर अपने हाथों में पहनी हुई चूड़ियाँ भी उतारकर जमीन पर फैंकने लगी जिससे वो सारी चूड़ियाँ टूट गई। उन टूटी हुई चूड़ियों को देखते हुए गुरनूर ने फैसला किया की वो खुदको और अपनी जिंदगी को ऐसे इन चूड़ियों की तरह टूटकर बिखरने नही देगी। वो घर से भाग जाएगी।


Continued In आर्ज-ए-इश्क - 24

Monday, 21 September 2026

आर्ज-ए-इश्क - 22



लड़के वाले आ गए तो विक्रम और नीत ने अच्छे से उनका स्वागत किया। थोड़ी देर बातें करने के बाद विक्रम ने शीतल से कहा, “जाओ गुरनूर को ले आओ।” 


शीतल ऊपर गुरनूर के कमरे में आई तो देखा गुरनूर अपनी डायरी में कुछ लिख रही थी। उसने बस सूट पहनकर अपने बालों को सही किया हुआ था। उसके चेहरे पर कोई मेकअप नही था और न ही उसने अपने कानों या हाथों में कुछ पहना हुआ था। उसे ऐसे देखकर शीतल ने कहा, “गुरनूर, लड़के वालों के सामने जाने के लिए कोई ऐसे तैयार होता है। कानों में तो कम से कम कुछ पहन लो।” 


“मम्मी, मैं कोई खरीदा या बेचे जाने वाला सामान नही हूँ जिसे आप किसी के सामने बिना मेंटेन किए प्रेसेंट करदेंगी तो वो खरीदने से मना करदेंगे। इंसान हूँ मैं और मुझे ऐसे ही रहना पसंद है। मैं नीचे जा रही हूँ ना आपके साथ। यही बहुत है। पहले ही कह रही हूँ मुझसे और कोई उम्मीद मत रखना।” गुरनूर ने अपनी डायरी बंद कर उसे बेड पर रखते हुए गुस्से में कहा। 


“ठीक है। चलो।” कहते हुए शीतल गुरनूर को नीचे ले आई। गुरनूर ने बेमन से सबको नमस्ते कहा और एक कुर्सी पर बैठ गई। उसने किसी को भी आँख उठाकर देखा तक नही। उसे देखकर लड़के की माँ ने नीत से कहा, “लगता है इसे ज्यादा सजने संवरने का शौंक नही है।” 


नीत ने शीतल को गुस्से से देखा और फिर लड़के की माँ से कहा, “जी, इसे सादगी ज्यादा पसंद है।”


“मेरे बेटे को तो गुरनूर तस्वीर देखते ही पसंद आ गई थी। आप गुरनूर से उसकी मर्जी पूछ लीजिए। अगर उसे भी मेरा बेटा पसंद है तो आज ही रिश्ता पक्का कर देते है।” लड़के की माँ ने मुस्कुराते हुए कहा।


“जी, ज़रूर।” कहते हुए विक्रम खड़े हुए और शीतल के साथ गुरनूर को वहाँ से अपने कमरे में ले आए। उन्होंने गुरनूर से उसकी मर्ज़ी पूछी तो गुरनूर ने गुस्से में कहा, “पापा, मैंने नही करनी शादी। आप मना कर दीजिए सबको। बुआ को भी।” 


गुरनूर कमरे से बाहर निकलकर ऊपर अपने कमरे में चली गई। नीत ने उसे ऊपर जाते हुए देखा तो उसने विक्रम के कमरे में आकर पूछा, “क्या कहा गुरनूर ने?” 


“वो अभी शादी के लिए तैयार नही है, दीदी।” विक्रम ने कहा तो नीत ने उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे समझाते हुए कहा, “विक्रम, वो तो बच्ची है। मना करेगी ही। तुम तो समझदार हो ना। उसे समझाओ। इतना अच्छा लड़का और परिवार है। उसकी जिंदगी बन जाएगी। वो लोग रोके की तैयारी करके आए है। मैं तो कहती हूँ अभी रोका करदो। एक बार रोका हो जाएगा तो अपने आप मान जाएगी तुम्हारी गुरनूर।” 


विक्रम ने कुछ सोचा और कहा, “शायद आप ठीक कह रही है, दीदी। रोका कर देते है। गुरनूर मान जाएगी।” 


विक्रम की बात सुनकर शीतल हैरान रह गई। नीत ने मुस्कुराते हुए शीतल को देखा और कमरे से बाहर चली गई। उसके जाते ही शीतल ने गुस्से में विक्रम से कहा, “आपका दिमाग तो नही खराब हो गया, विक्रम। आप देख पा रहे है की मेरी बेटी ये शादी नही करना चाहती, फ़िर भी आप अपनी बहन की बातों में आकर मेरी बेटी का रोका करने की बात कर रहे है। अरे आपकी ये बहन तो चाहती ही यही है कि इस घर में जितने फैसले हो, वो वही ले। उन्हें बस अपने भाई के घर में भी अपनी हुकुमत चाहिए और आप उनकी बातों में आ भी जाते है।” 


विक्रम खामोश रहा क्योंकि वो जानता था शीतल का गुस्सा जायज़ है क्योंकि वो झूठ नहीं बोल रही थी। उसे खामोश देख शीतल ने कहा, “आपको मेरी बेटी का जबरदस्ती रिश्ता तय करना है। कर दीजिए लेकिन अगर गुरनूर ने इस शादी से बचने के लिए कल को कोई भी ऐसा वैसा कदम उठाया तो मुझे मत कहना। इसके जिम्मेदार आप खुद होंगे और आपकी बहन।” 


शीतल भी गुस्से से कमरे से निकल गई। नीत ने शीतल से गुरनूर को नीचे लाने के लिए कहा तो शीतल गुरनूर को समझाकर नीचे ले आई और देखते ही देखते गुरनूर का रोका हो गया। जिस लड़के से उसका रोका हुआ था, वो तो गुरनूर को ही देखे जा रहा था पर इस सबके बीच गुरनूर बस खामोशी से बैठी रही। 


लड़के वालों के जाने के बाद गुरनूर ने अपने कमरे में जाकर गुस्से में वो सारा सामान ज़मीन पर फैंक दिया जो लड़के की माँ ने उसे दिया था। गुरनूर ने अपना कमरा बंद करके रावी को फोन लगाया और उसे इस बारे में सब कुछ बता दिया। 


रावी को ये सब जानकर एक झटका सा लगा और उसने कहा, “विक्रम अंकल तुम्हारे साथ ऐसा नही कर सकते। 


“पर ऐसा कर दिया है उन्होंने रावी।” गुरनूर ने गुस्से में कहा। उसकी आवाज़ में गुस्सा महसूस कर रावी ने कहा, “तुम शांत हो जाओ, गुरनूर।” 


उसकी बात सुनकर गुरनूर ने कहा, “कैसे शांत हो जाऊॅं, रावी। तुम जानती हो ना मैं श्रेयांश…” 


कहते कहते गुरनूर रुक गई तो रावी ने कहा, “मैं श्रेयांश को बताऊँ इस बारे में। वो जरूर कुछ करेगा तुम्हारे लिए।” 


“नहीं, मैं श्रेयांश को नहीं बता सकती। वो शो का कॉन्ट्रैक्ट मिलने की वजह से इतना खुश है और अपने वीज़ा प्रोसेस वैगरह में बिजी है।  मैं उसकी खुशी खराब नहीं करना चाहती।” गुरनूर ने कहा तो रावी ने कहा, “तो तुम्हारी खुशी भी तो श्रेयांश ही है गुरनूर।” 


गुरनूर ने कुछ नही कहा और फोन काट दिया। रावी गुरनूर के लिए परेशान हो गई पर वो कुछ भी नहीं कर सकती थी। श्रेयांश को बताने के लिए भी उसे गुरनूर ने मना कर दिया था। 


वहीं जब विक्रम ने शुभम और मधु को गुरनूर का रिश्ता पक्का हो जाने के बारे में बताया तो वो दोनों भी हैरान रह गए और मधु का दिल टूट गया। वो दोनों इस वक्त अपने कमरे में बैठे हुए थे। मधु ने रोते हुए शुभम से कहा, “आपने मुझसे कहा था की गुरनूर मेरी बहु बनकर मेरे पास आ जाएगी तो उसका रिश्ता कहीं और कैसे हो सकता है। आपने जब मुझसे कहा की हम गुरनूर को अपनी बहु बनाकर इस घर में हमेशा हमेशा के लिए ले आयेंगे तो कितना खुश थी मैं लेकिन अब देखिए, गुरनूर किसी और की बहु बनेगी।” 


शुभम ने जैसे ही मधु को समझाने के लिए कुछ कहना चाहा, मधु ने कहा, “मुझे कुछ नहीं पता। आप अभी विक्रम भैया से बात करकर गुरनूर का रिश्ता माॅंगिए नील के लिए।” 


शुभम जानते थे की मधु अब जिद्द कर रही है पर उन्हें ये भी समझ थी की मधु की जिद्द पूरी करने के लिए वो ऐसे ही विक्रम को फोन कर उन्हें गुरनूर का रिश्ता तोड़ने के लिए तो नही कह सकते थे। उन्हें बस इतना मालूम था की उन्हें इस वक्त मधु को कुछ भी करके समझाना पड़ेगा। 


Continued In आर्ज-ए-इश्क - 23

Monday, 14 September 2026

आर्ज-ए-इश्क - 21


 

लंबे सफर के बाद वो सभी दिल्ली पहुँच गए। गुरनूर ने अपना बैग खुद उठा लिया क्योंकि नील अर्पिता के बैग्स उठाना चाहता था। वो सभी स्टेशन से बाहर आ गए। गुरनूर रावी के साथ एक जगह जाकर खड़ी हो गई और नील ने अर्पिता के बैग्स थोड़ी दूरी पर नीचे रखे। अर्पिता को आखिरी बार देखकर नील गुरनूर और रावी के पास आ गया। जैसे ही वो उन दोनों के पास आया, रावी ने उसे देखकर कहा, “अब उनसे इतनी बातें कर ली है तो स्पेशल वाला बाय बोलना तो उन्हें बनता है। जाइए, स्पेशल वाला बाय बोल दीजिए भैया।” 


रावी की बात सुनकर नील के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई। वो मुस्कुराते हुए अर्पिता के पास जाने के लिए जैसे ही मुड़ा, हैरान रह गया क्योंकि अर्पिता उसके पास आ रही थी। उसे आता हुआ देखकर गुरनूर ने नील से कहा, “लीजिए नील, आप क्या जायेंगे। वही आपके पास आ रही है।” 


अर्पिता ने उनके पास आकर नील से कहा, “वो मैं बाय बोलने आई थी और थैंक यू भी। आपने बहुत हेल्प की है आज मेरी।” 


“बाय क्यों कह रही है, आप। अब बातें और मुलाकातें तो होती ही रहेंगी।” नील ने अर्पिता को देखते हुए कहा, जिसे सुनकर रावी और गुरनूर ने एक दूसरे को देखा। अर्पिता भी इंदौर से ही थी बस कुछ वक्त के लिए दिल्ली में होस्टल में रहकर पढ़ने आई थी।


अर्पिता से मिलकर वो सभी घर आ गए। विक्रम और शीतल ने जैसे ही उन तीनों को देखा, वो खुश हो गए। विक्रम ने प्यार से गुरनूर को गले लगाकर उसके माथे पर किस करते हुए पूछा, “ठीक है मेरी प्रिंसेस?” 


“जी, पापा।” गुरनूर ने कहा और फिर शीतल के गले लग गई। विक्रम ने नील को भी गले लगाया और प्यार से रावी के सिर पर हाथ फेरा। 


विक्रम और शीतल चाहते थे की रावी और नील थोड़े दिन रूके लेकिन नील के काम की वजह से उन्हें अगले दिन ही इंदौर वापिस जाना पड़ा। 


गुरनूर श्रेयांश के साथ फिर से लॉन्ग डिस्टेंस निभाने लग गई और इस बीच श्रेयांश को भी अपने करियर का सबसे बड़ा मौका मिला जिसमें उसे पूरे तीन साल तक एक कंपनी के लिए भारत से बाहर परफॉर्म करना था। वो किसी भी हालत में ये मौका छोड़ना नहीं चाहता था।


जब उसने गुरनूर को बताया की उसे आगे बढ़ने का इतना अच्छा मौका मिल रहा है तो गुरनूर बहुत ही ज्यादा खुश हो गई। 


एक शाम गुरनूर ओपन माइक इवेंट से वापिस आई तो उसने देखा कि घर पर उसकी बुआ, नीत आई हुई है और घर पर ऐसे तैयारिययाँ हो रही हैं जैसे कोई खास मेहमान आने वाला है। नीत से मिलकर उसने किचन में काम कर रही शीतल के पास आकर पूछा, “ये सब क्या हो रहा है, मम्मा?” 


“तुम तैयार हो जाओ जाकर अच्छे से।” शीतल ने नीत के लिए चाय बनाते हुए कहा। 


“पर क्यों मम्मा? बुआ के आने पर मुझे तैयार होने की क्या जरूरत है?” गुरनूर ने हैरानी से पूछा तो शीतल ने उसे देखकर कहा, “तुम्हें लड़के वाले देखने आ रहे है। तुम्हारी बुआ रिश्ता लाई है तुम्हारे लिए।” 


ये सुनकर गुरनूर की आँखों के सामने श्रेयांश का चेहरा आ गया। उसे हैरानी के साथ साथ गुस्सा भी आने लगा और उसने कहा, “पर मम्मी मेरा करियर बनाना रहता है अभी।” 


शीतल कुछ कहती उससे पहले ही नीत ने अंदर आते हुए कहा, “ये करियर का रोना सही है तुम लड़कियों का जबकि इसका फायदा कुछ नही है। घर तो तुम्हें फिर भी संभालना पड़ेगा तो अच्छा है तुम इसी पर ध्यान दो और अपनी मम्मी से घर संभालना सीखो।” 


नीत की बातों ने गुरनूर ने गुस्से को बढ़ा दिया और उसने नीत को देखते हुए कहा, “ये करियर का फायदा और नुकसान तो आप मुझे मत ही बताए क्योंकि आपको अगर इसका फायदा पता होता तो आप अपनी बेटी के करियर पर ध्यान ज़रूर देती जिससे वो अपनी दर्दनाक शादीशुदा जिंदगी से आज़ाद हो पाती लेकिन अफ़सोस आपने उसके घर संभालने पर ज्यादा तवज्जो दी जिससे अब वो उसी लायक रह गई है बस। खुद की बेटी की तो वो हालत कर दी है, दूसरो की बेटी की भी अब वैसी ही हालत चाहती है आप।” 


गुरनूर की बातों से नीत को कहीं न कहीं ये एहसास हो गया था की उसने अपनी बेटी के साथ क्या किया है। गुरनूर की कही बातें कड़वी ज़रूर थी पर सच थी। शीतल ने जब देखा की गुरनूर नीत के आगे ज्यादा बोल रही है तो उसने गुरनूर को शांत करते हुए कहा, “गुरनूर, बुआ से ऐसे बात नही करते। अब हमने उन्हें बुला लिया है ना तो तुम बस एक बार उस लड़के से मिल लो। मिलने में क्या जाता है। पसंद आया अगर हमें तो ही शादी की बात होगी ना। जाओ जाकर तैयार हो जाओ।” 


“सही कहा मम्मी आपने ऐसे बात नही करते बड़ो से पर कई बार न अपने लिए बड़ो को जवाब देना ज़रूरी हो जाता है वरना वो हमारी जिंदगी को अपना बनाकर हमारे लिए खुद से फैसले करने लग जाते है ये सोचते हुए की हम तो बच्चे है, जो वो कहेंगे, हम उसे चुपचाप मान लेंगे।” गुरनूर ने नीत को देखते हुए कहा और फिर तैयार होने ऊपर अपने कमरे में चली गई। 


उसके जाते ही नीत ने शीतल से कहा, “ये सिखाया है भाभी आपने इसे। जुबान चलाना। ससुराल में जाकर यही करेगी क्या।” 


शीतल ने कुछ नही कहा क्योंकि उसे पता था गुरनूर भी गलत नहीं है। शीतल भी नीत की बातों में कम आती थी क्योंकि उसे मालूम था की नीत बस अपने भाई के घर में भी अपनी हुकुमत चाहती है और पूरे घर में एक विक्रम ही है जो नीत की बातों में आ जाता है। 


गुरनूर ने गुस्से से अपने कमरे में आकर अपना बैग बेड पर फैंका और उसपर बैठ गई। उसने अपना गुस्सा थोड़ा सा शांत करने की कोशिश की। थोड़ी देर ऐसे ही बैठे रहने के बाद गुरनूर ने उठकर अलमारी से अपने लिए अनारकली सूट निकाला और उसे पहनकर ये दुआ करते हुए तैयार होने लगी की वो उस लड़के और उसके परिवार को बिल्कुल भी पसंद न आए।


Continued In आर्ज-ए-इश्क - 22

लव आजकल - 2


 

राज ने विहान को अपने पास बैठा लिया और पुरानी तस्वीरें दिखाते हुए अपनी लव स्टोरी सुनाने लगे।


विहान चुपचाप तस्वीरें देखता रहा। लेकिन आज उसका ध्यान राज की बातों से ज़्यादा किसी और के ख्यालों में था।


अचानक उसकी आँखों के सामने इशिका का चेहरा आ गया।


हल्की नीली ड्रेस...


खुले हुए लंबे बाल...


वो मुस्कान...


विहान कुछ पल के लिए उन्हीं ख्यालों में खो गया।


फिर उसे एहसास हुआ कि वो क्या कर रहा है। उसने खुद से ही कहा,


“ये क्या कर रहा है तू, विहान? तू इशिका को जानता भी नहीं है। उसके ख्यालों में खोना बंद कर।”


लेकिन जितनी जल्दी उसने खुद को ये समझाया था, उतनी ही जल्दी इशिका का चेहरा फिर उसकी आँखों के सामने आ गया।


विहान ने अपने ख्यालों को झटका और खुद को राज की बातों में व्यस्त कर लिया।


अगले दिन कॉलेज में भी इशिका ही चर्चा का सबसे बड़ा विषय थी।


जब से वो कॉलेज आई थी, लगभग हर लड़का उसे इंप्रेस करने की कोशिश में लगा हुआ था। कोई उसे गिफ्ट दे रहा था, कोई कॉफी डेट के लिए पूछ रहा था तो कोई उसे लव नोट्स भेज रहा था।


लड़कियाँ भी उससे बात करने के बहाने ढूँढती रहती थीं। कुछ तो सिर्फ ये जानना चाहती थीं कि आखिर उसकी खूबसूरती का राज़ क्या है।


इशिका इन सब चीज़ों से परेशान हो चुकी थी। उसे अच्छा नहीं लगता था कि हर वक्त कोई न कोई उसके पीछे पड़ा रहे, लेकिन वो किसी की शिकायत भी नहीं करना चाहती थी।


वहीं दूसरी तरफ, अभय पूरे कॉलेज में विहान को ढूँढ रहा था।


वो विहान को इशिका के बारे में सब कुछ बताना चाहता था कि कैसे सब उसे इंप्रेस करने में लगे है। उसे उम्मीद थी कि ये सब सुनकर विहान को थोड़ी जलन होगी और शायद वो भी इशिका को इंप्रेस करने की कोशिश करेगा।


क्लासरूम में विहान के न मिलने पर अभय आखिरकार कैंटीन पहुँच गया।


विहान वहाँ अकेला बैठा था।


अभय उसके पास जाकर बैठ गया और बोला, “तू यहाँ बैठा है और मैं तुझे क्लासरूम से लेकर पूरे कॉलेज में ढूँढ रहा हूँ। तू क्लास में क्यों नहीं है?”


विहान ने उसे देखते हुए कहा, “मैं क्लास में नहीं हूँ क्योंकि कोई भी क्लास में नहीं है। सारे लड़के और लड़कियाँ तो इशिका के पीछे पड़े हुए हैं। पढ़ाई छोड़कर सबको बस उसी की पड़ी है। मैं अकेला क्लास में बैठकर क्या करता?”


अभय के चेहरे पर तुरंत मुस्कान आ गई। “तो तू भी ट्राई कर न उसे इंप्रेस करने की।”


विहान ने उसे घूरकर देखा।


अभय जानता था कि विहान लड़कियों से हमेशा दूरी बनाकर रखता है। उसे रिश्तों और डेटिंग में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी।


विहान की चुप्पी देखकर अभय ने कहा, “भाई, मैं जानता हूँ तू लड़कियों से दूर रहता है क्योंकि तेरी उनसे बनती नहीं। लेकिन एक बार इशिका को इंप्रेस करने की कोशिश तो कर। क्या पता वो तेरे लिए बिल्कुल परफेक्ट हो।”


विहान ने फिर उसे घूरकर देखा।


अभय ने हार नहीं मानी। “सारे लड़के उसके पीछे लगे हैं। तू भी कोशिश कर न। तू इतना हैंडसम है। आई एम श्योर, वो तुझसे इंप्रेस हो जाएगी।”


विहान ने बिना किसी भाव के कहा, “सब कुएँ में कूदेंगे तो मैं भी कूदूँ?”


अभय समझ गया कि फिलहाल उसे विहान से हाँ नहीं मिलने वाली। लेकिन उसने भी हार नहीं मानी।


अगले कुछ दिनों तक वो जब भी मौका मिलता, विहान को इशिका का नाम लेकर चिढ़ाता रहता। और विहान हर बार उसे टाल देता। लेकिन रात को जब वो अपने कमरे में अकेला होता, तो उसकी आँखों के सामने इशिका का चेहरा आ ही जाता। वो खुद ये मानने के लिए तैयार नहीं था कि इशिका उसे अच्छी लगती है।


एक दिन अभय की लगातार बातों से परेशान होकर आखिरकार विहान ने उससे पूछ ही लिया, “तू क्यों मेरे पीछे पड़ा हुआ है कि मैं इशिका को इंप्रेस करके उसे अपनी गर्लफ्रेंड बनाऊँ?”


अभय के चेहरे पर तुरंत मुस्कान आ गई। “क्योंकि मेरी ऑलरेडी गर्लफ्रेंड है। तेरी भी बन जाएगी तो सोच, हम चारों एक साथ मिलकर कितने मज़े करेंगे।”


विहान उसकी बात सुनकर हँस पड़ा। “तू मज़े भी करता है?”


अभय ने हैरानी से पूछा, “तू ऐसे क्यों कह रहा है?”


विहान हँसते हुए बोला, “क्योंकि जब से तू रिलेशनशिप में आया है, मैंने तो हमेशा तेरी बैंड बजते हुए ही देखी है। एक महीने में पूरे पच्चीस दिन तो तेरी गर्लफ्रेंड तुझसे नाराज़ रहती है और तू उसे मनाने में लगा रहता है। मज़े कब करता है तू?”


“बचे हुए पाँच दिन में।” अभय ने बड़ी मासूमियत से जवाब दिया।


विहान फिर हँस पड़ा। “मुझे ये पाँच दिन वाले मज़े नहीं चाहिए। तुझे ही मुबारक हो। मैं सिंगल ही अच्छा हूँ। बिना किसी को मनाने के सिरदर्द के महीने के पूरे तीस दिन मज़े करता हूँ।”


अभय ने मासूम सा चेहरा बनाते हुए कहा, “तुझे इशिका को इंप्रेस करके उसके साथ रिलेशनशिप में नहीं आना तो मत आ, पर काशवी के साथ मेरे प्यार और रिलेशनशिप का मज़ाक तो मत उड़ा।”


विहान ने उसका हाथ पकड़कर उसे समझाते हुए कहा, “देख, काशवी न तेरे साथ सिर्फ रिलेशनशिप में है, प्यार में नहीं।”


अभय उसकी तरफ देखने लगा।


विहान आगे बोला, “क्योंकि जहाँ प्यार होता है, वहाँ अपने पार्टनर को समझा जाता है। उसकी प्रॉब्लम्स को समझा जाता है। ये समझा जाता है कि आपके पार्टनर का सारा वक्त सिर्फ आपका नहीं हो सकता। उसकी ज़िंदगी में और भी लोग हैं, और भी ज़िम्मेदारियाँ हैं।”


अभय अब चुपचाप उसकी बात सुन रहा था।


“अगर एनिवर्सरी या बर्थडे पर पार्टनर के पास पैसे नहीं हैं, इसलिए वो गिफ्ट नहीं दे पाया या कोई महँगा गिफ्ट नहीं दे पाया, तो इस बात पर उससे नाराज़ नहीं हुआ जाता। उसकी प्रॉब्लम को समझना और छोटी-छोटी चीज़ों में खुश रहना प्यार है। क्योंकि आपके लिए सबसे ज़रूरी आपका पार्टनर होना चाहिए और ये बात कि वो आपके साथ है।” विहान कुछ पल रुका और फिर बोला, “यही होता है प्यार।”


अभय उसे कुछ पल तक देखता रहा फिर मुस्कुराकर बोला, “तुझे कभी प्यार हुआ नहीं, फिर भी तू प्यार को इतना समझता है। और सबसे मज़ेदार बात ये है कि तू प्यार से ही बचता फिरता है।”


विहान के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई। “मुझे बेशक कभी प्यार नहीं हुआ और न ही मैं करना चाहता हूँ। लेकिन बेटा तो राज और सिमरन का हूँ न। उनकी महान लव स्टोरी सुन-सुनकर प्यार को समझा है मैंने।”


विहान अपनी जगह से उठा। “चल, अब यहाँ से चलते हैं।”


अभय भी उठ गया और दोनों कैंटीन से बाहर निकल आए।


दोनों क्लास की तरफ जा रहे थे कि तभी सामने से इशिका आती हुई दिखाई दी।


विहान की नज़र उस पर पड़ी और वो एक पल के लिए वहीं रुक-सा गया। वो उसे देखता ही रह गया पर फिर जैसे ही उसे एहसास हुआ कि वो क्या कर रहा है, उसने तुरंत अपनी नज़रें नीचे कर लीं और आगे बढ़ने लगा।


इशिका उसके पास से गुजर ही रही थी कि अचानक उसकी हील हल्की-सी मुड़ी। उसका बैलेंस बिगड़ा और वो गिरने लगी।


ये देखकर विहान ने बिना कुछ सोचे अपना हाथ आगे बढ़ाया और अगले ही पल इशिका उसकी बाँहों में थी।


कुछ सेकंड के लिए दोनों बिल्कुल खामोश रहे। इशिका ने धीरे से अपनी आँखें उठाईं और पहली बार उसकी नज़रें सीधे विहान की आँखों से मिलीं।



Continued In लव आजकल - 3