Ibtidaa-E-Ishq
Thursday, 10 September 2026
आर्ज-ए-इश्क - 20
आर्ज-ए-इश्क - 19
लव आजकल - 1
आर्ज-ए-इश्क - 18
Sunday, 23 August 2026
आर्ज-ए-इश्क - 17
गुरनूर को जब महसूस हुआ की उसे कोई छू रहा है तो उसने अपने साइड में देखा। वो उस लड़के पर चिल्ला पाती, इससे पहले श्रेयांश ने पीछे से जाकर उस लड़के की शर्ट की कॉलर को पकड़कर उसे अपनी तरफ किया और जोर से एक मुक्का उसके चेहरे पर मारा।
श्रेयांश ने उस लड़के को इतनी जोर से मारा था की वो लड़का जमीन पर गिर गया। क्लब में जो गाने बज रहे थे वो बंद हो चुके थे। क्लब में मौजूद सभी लोगों की नज़रें श्रेयांश और उस लड़के पर थी। विवेक और श्रेयांश के सारे दोस्त उस तरफ आ गए थे। गुरनूर भी श्रेयांश को ऐसे देखकर घबरा गई थी। उसने कसकर रावी का हाथ पकड़ लिया। श्रेयांश ने एक नजर गुरनूर को देखा और फिर नीचे झुककर उस लड़के को थोड़ा और पीटने लगा। उस लड़के को पिटता हुआ देखकर उसके दोस्त ने उसे बचाने के लिए आगे आना चाहा पर उसे विवेक और श्रेयांश के बाकी दोस्तों ने रोक लिया। श्रेयांश ने उस लड़के की कॉलर पकड़कर उसकी आँखों में देखते हुए कहा, “इस बार सिर्फ थोड़ा सा पीटा है। अगर इसे अगली बार छूने की हिम्मत की तो मैं तेरा वो हश्र करूँगा की तेरी रूह कापेगी किसी को भी हाथ लगाने से पहले। गुरनूर कौर ता कयामत तक सिर्फ श्रेयांश शर्मा की है।”
गुरनूर इस वक्त श्रेयांश को देखकर डरी और घबराई हुई थी फिर भी उसने इस बात पर ध्यान दिया की श्रेयांश ने ये बात उर्दू में कही है।
श्रेयांश ने खड़े होकर गुरनूर का हाथ पकड़ा और उसे क्लब से बाहर ले जाने लगा। उसे बाहर जाता देखकर विवेक ने रावी को इशारा किया और वो दोनों भी उनके पीछे पीछे बाहर आ गए।
श्रेयांश का मूड खराब हो चुका था। उसने अपनी बाइक स्टार्ट की तो गुरनूर बिना कुछ कहे उसके पीछे बैठ गई। श्रेयांश बाइक चलाने लगा। विवेक ने भी बाइक स्टार्ट कर रावी को बैठने के लिए कहा और श्रेयांश के पीछे जाने लगा।
थोड़ी देर बाद वो सभी एक पार्क में आकर बैठे हुए थे। गुरनूर श्रेयांश के साथ बैठी हुई थी। विवेक और रावी बेंच पर बैठे हुए उन दोनों को देख रहे थे। गुरनूर श्रेयांश को देखकर मुस्कुरा रही थी। श्रेयांश ने उसे देखते हुए पूछा, “मुस्कुराते हुए यही सोच रही हो ना की किस गुंडे से प्यार कर लिया है तुमने?”
श्रेयांश की ये बात सुनकर गुरनूर हँसने लगी। उसने अपनी हँसी कंट्रोल की और कहा, “अपना हाथ दिखाओ। ज्यादा तो नही लगी।”
“कुछ नही हुआ है।” श्रेयांश ने अपने हाथ को देखते हुए कहा।
“तुमने मेरे लिए उर्दू कब सीखी?” गुरनूर ने पूछा। उसका सवाल सुनकर श्रेयांश ने उसे हैरानी से पूछा, “तुमने नोटिस किया?”
इसपर गुरनूर ने शरारत से कहा, “मैंने तो ये भी नोटिस किया की तुमने कैसे उस लड़के को करांटे के मूव्स यूज करके मारा।”
“इंटरनेशनल लेवल चैंपियन हूँ मैं करांटे का। मैंने पाँच साल तक करांटे किया है।” श्रेयांश ने कहा तो पहले गुरनूर ने हैरानी से उसे देखा और फिर खुशी और हैरानी के मिले जुले भावों के साथ पूछा, “क्या सच में?”
श्रेयांश ने मुस्कुराते हुए हाँ में सिर हिला दिया। वहीं दूसरी तरफ रावी ने श्रेयांश और गुरनूर को देखते हुए विवेक से पूछा, “क्या यही सब तुम दोनों की लाइफ है जिसे देखने के लिए गुरनूर इतनी एक्साइटेड थी?”
“येस, यही हम दोनों की लाइफ है। बाइक एण्ड पार्टीज।” विवेक ने रावी को देखते हुए कहा तो रावी ने कहा, “बेकार है काफी।”
“लेकिन हम इसे एन्जॉय करते है और तुम्हारी दोस्त ने तो शायद इसे एक्सेपट भी कर लिया है।” कहकर विवेक फिर से श्रेयांश और गुरनूर को देखने लगा।
रावी ने मुस्कुराते हुए कहा, “ऐसा इसलिए है क्योंकि वो इस वक़्त श्रेयांश की मोहब्बत में है और उसकी मोहब्बत की डेफनिशन यही है। किसी की मोहब्बत में उसका सब कुछ अपना बना लो। बुरी आदतें भी। अगर वो भी तुमसे मोहब्बत करता होगा तो अपनी बुरी आदतें सुधार लेगा।”
विवेक ने उसकी बातों में दिलचस्पी दिखाते हुए पूछा, “और तुम्हारे लिए मोहब्बत क्या है?”
“ये तो अभी मुझे भी नहीं पता पर मैं मोहब्बत के नाम किसी की बुरी आदतों को एक्सेपट नहीं करूॅंगी। मैं ये ऐसे अपने बॉयफ्रेंड का क्लब में जाना, ड्रिंक्स करना और ऐसे किसी को भी पीटना बर्दाश्त नहीं करूँगी। मेरे बॉयफ्रेंड में अगर ऐसी कोई भी बुरी आदत हुई तो उसे वो सुधारनी पड़ेगी।” रावी ने कहा। उसकी बातें सुनकर विवेक ने दबी आवाज़ में कहा, “तुम मोहब्बत करके तो देखो। मैं खुद को पूरी तरह से सुधार लूँगा।”
विवेक को अपनी इस बात पर हैरानी हुई। कहाँ वो श्रेयांश को गुरनूर के लिए सीरियस न होने के लिए कहता था और कहाँ इस वक्त वो रावी ने साथ मोहब्बत के बारे में सोच रहा था। रावी ने भी उसे हैरानी से देखकर पूछा, “क्या कहा तुमने?”
विवेक को एक पल के लिए लगा की रावी ने उसकी बात सुन ली है इसलिए उसने अपनी बात संभालते हुए कहा, “मैंने कहा की श्रेयांश ने तुम्हारी दोस्त के लिए ही उस लड़के को इतना मारा पीटा। बाकी अब उसे गुरनूर से मोहब्बत है तो जैसा तुमने कहा, सुधार लेगा वो खुद को।”
रावी ने हाँ में सिर हिलाया और अपनी घड़ी में टाइम देखा। अभी थोड़ा वक्त था उसके और गुरनूर के पास इसलिए उसने सोचा की गुरनूर को श्रेयांश के साथ थोड़ा और वक्त बिताने देना चाहिए।
श्रेयांश ने प्यार से गुरनूर को देखते हुए पूछा, “कैसी लगी मेरी दुनिया, तुम्हें?”
गुरनूर ने मुस्कुराते हुए कहा, “अच्छी है। एटलीस्ट तुम इसी से अपनी लाइफ एन्जॉय तो कर लेते हो।”
“तुम्हें सच में अच्छी लगी?” श्रेयांश ने हैरानी से पूछा।
“जब हम किसी से इश्क करते हैं ना तो उसका सब कुछ अच्छा लगता है।” गुरनूर ने प्यार से उसकी आँखों में देखते हुए कहा।
श्रेयांश हल्का सा मुस्कुराया और उसने कहा, “मेरे लिए तो ये एक्सटेसी है। एक्सटेसी इन फन।”
“एक्सटेसी इन फन तो तुम अच्छे से जानते हो। ये बताओ की एक्स्टेसी इन लव क्या है तुम्हारे लिए?” गुरनूर ने पूछा तो श्रेयांश खामोशी से उसे देखने लगा क्योंकि उसने तो दिल से आजतक गुरनूर के लिए मोहब्बत को महसूस ही नहीं किया था। बल्कि गुरनूर की वजह से उसका दिल उसके दिमाग से लड़ता रहता था।
Continued In आर्ज-ए-इश्क - 18
Friday, 21 August 2026
आर्ज-ए-इश्क - 16
नाश्ता करने के बाद गुरनूर रावी के साथ कमरे में आई और शाम को पहनने के लिए कपड़े देखने लगी। उसने दो टॉप उठाकर रावी को दिखाते हुए कहा, “रावी, बता ना मैं इन दोनों में से कौन सा टॉप पहनू आज रात।”
रावी ने उन दोनों टॉप्स को देखा। एक टॉप गुलाबी रंग का था जिसके ऊपर बस फूलों वाला प्रिंट था और दूसरा नीले रंग का टॉप था जिसके गले पर हल्के नीले और सफेद रंग के फूलों से डिज़ाइन बना हुआ था। रावी ने नीले टॉप को पसंद कर दिया। उसके बाद गुरनूर ने रावी से पूछा, “इसके साथ जींस कौन सी पहनू। ब्लू या ब्लैक?”
“ब्लैक कलर की।” रावी ने कहा और अपने पहनने के लिए भी कपड़े देखने लगी।
श्रेयांश गुरनूर को छह बजे लेने आने वाला था इसलिए उसने रावी के साथ चार बजे से तैयार होना शुरू कर दिया। तैयार होने के बाद वो दोनों श्रेयांश के फोन का इंतज़ार करने लगी क्योंकि वो विवेक के साथ उन दोनों को लेने आने वाला था।
थोड़ी देर बाद ही गुरनूर को श्रेयांश का फोन आ गया और वो सबसे मिलकर रावी के साथ घर से बाहर आ गई। वो दोनों चलकर कॉलोनी से बाहर आ गई जहाँ श्रेयांश और विवेक उन दोनों का इंतज़ार कर रहे थे।
श्रेयांश की नज़र जब गुरनूर पर गई तो वो उसे देखता ही रह गया। गुरनूर बहुत ही ज्यादा खूबसूरत लग रही थी। गुरनूर श्रेयांश के करीब आकर उसके गले लग गई। विवेक ने ये देखा तो उसने श्रेयांश को मुस्कुराकर देखते हुए आँख मार दी जैसे कहना चाहता हो की ये होते है गर्लफ्रेंड होने के मज़े पर श्रेयांश ने उसके ऊपर ध्यान नहीं दिया क्योंकि उसे पता था की गुरनूर ने उसे मोहब्बत में गले लगाया है और यही वजह थी जो गुरनूर के गले लगते ही उसे सुकून और घबराहट एक साथ महसूस होती थी। गुरनूर की मोहब्बत उसके लिए सुकून तो थी पर इसी मोहब्बत के एहसासों से उसे घबराहट भी होती थी ये सोचकर की वो गुरनूर के जज़्बातों के साथ खेल रहा है।
गुरनूर ने श्रेयांश से दूर होकर विवेक को हेलो कहा। श्रेयांश ने भी रावी को हेलो कहा। गुरनूर श्रेयांश के पीछे उसकी बाइक पर बैठ गई। उसने रावी को देखा और कहा, “तुम भी विवेक के पीछे बैठ जाओ।”
रावी भी विवेक के पीछे आकर बैठ गई और उसने विवेक को कमर से पकड़ लिया। रावी के ऐसा करने से विवेक को बहुत अलग सा एहसास हुआ। विवेक, जो लड़कियों के साथ प्यार के नाम पर सिर्फ टाइमपास करता था, आज उसे रावी के साथ कुछ अलग ही एहसास महसूस हो रहा था। ये एहसास इतना मजबूत था की उसके मन में इश्क़ के ख्याल आने लगे। श्रेयांश ने बाइक स्टार्ट कर आगे बढ़ा दी। उसे जाते हुए देख विवेक ने अपने मन में चल रहे सारे ख्यालों को झटका और बाइक स्टार्ट कर आगे बढ़ा दी।
वो सभी पार्टी में पहुँचे। ये पार्टी इंदौर के बहुत ही फेमस क्लब के अंदर थी। गुरनूर और रावी जैसे ही श्रेयांश और विवेक के साथ अंदर गई, दोनों ही हैरान रह गई। क्लब में कुछ लड़के लड़कियाँ नाच रहे थे तो कुछ साथ बैठे हुए ड्रिंक्स कर रहे थे। लड़कियाँ भी ड्रिंक कर रही थी जिसे देखकर गुरनूर और रावी को और ज्यादा हैरानी हुई। वो दोनों हैरानी से अपने चारों तरफ देख रही थी क्योंकि दोनों ही ऐसी किसी जगह पर पहली बार आई थी।
श्रेयांश गुरनूर का हाथ पकड़कर उसे ड्रिंक्स वाले एरिया की तरफ ले आया। विवेक ने भी ऐसा ही किया और रावी ने उसे रोका भी नहीं क्योंकि अपनी हैरानी के चलते उसने इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया था की विवेक ने इसका हाथ पकड़ा है।
श्रेयांश ने बार टेंडर से कुछ कहा और वहीं खड़े होकर इंतजार करने लगा। विवेक भी रावी को लेकर उसके पास आकर खड़ा हो गया। रावी सामने देख रही थी लेकिन गुरनूर ने पीछे मुड़कर क्लब में नाच रहे लड़के लड़कियों को देखा जो एक दूसरे से चिपक पर नाच रहे थे। गुरनूर ने उनसे नज़रें हटाकर सामने देखा तो श्रेयांश उसके लिए ड्रिंक लेकर खड़ा हुआ था। उस ड्रिंक को देखकर गुरनूर ने कहा, “मैं ड्रिंक नहीं करती।”
श्रेयांश ने गुरनूर और रावी, दोनों को देखकर कहा, “दोनों अनकंफर्टेबल मत हो। मैं और विवेक हैं यहाँ तुम्हारे साथ और मैं जानता हूँ तुम दोनों ड्रिंक नहीं करती इसलिए ये सॉफ्ट ड्रिंक्स है। इन्हें पी सकती हो तुम दोनों।”
रावी के हाथ में तो पहले से ही गिलास था। गुरनूर ने श्रेयांश के हाथ से गिलास ले लिया और धीरे धीरे पीने लगी। श्रेयांश ने भी अपनी ड्रिंक उठाते हुए गुरनूर को देखकर कहा, “मैं विवेक के साथ अपने दोस्तों से मिलने जा रहा हूँ। तुम रावी के साथ यहीं खड़ी रहना। इधर उधर मत जाना।”
गुरनूर ने हाँ में सिर हिला दिया। श्रेयांश विवेक के साथ अपने दोस्तों के पास चला गया। गुरनूर रावी से थोड़ी बहुत बातें करने लगी। विवेक ने जब अपने दोस्तों को दूर से ही गुरनूर को दिखाया तो सभी श्रेयांश को छेड़ने लगे और उसके दोस्त रवि ने उससे कहा, “भाई, तू हम सबको मिलवाएगा नही उससे। बस दूर से दिखा दी कौन है।”
“नही, वो पहली बार यहाँ आई है इसलिए थोड़ी अनकंफर्टेबल है। तुम लोगों को ऐसे उसके पास लेकर जाऊॅंगा तो वो और ज्यादा अनकंफर्टेबल हो जाएगी।” श्रेयांश ने कहा तो विवेक ने उसे शक भरी नज़रों से देखते हुए कहा, “तुझे बड़ी फिक्र है उसकी और तू इतना तक समझ गया की वो अनकंफर्टेबल है।”
“फीलिंग जो भी हो। इस वक्त वो मेरी रिस्पांसिबिलिटी है।” श्रेयांश ने कहा तो विवेक खामोश हो गया।
श्रेयांश अपने दोस्तों से बातें कर रहा था पर उसकी नज़रें गुरनूर के ऊपर ही थी। बातें करते हुए उसकी नज़र क्लब के कोने में खड़े दो लड़कों पर गई। उनमें से एक लड़का गुरनूर को ही देख रहा था। श्रेयांश ने एक नज़र गुरनूर को देखा और फिर उसने वापिस से उस लड़के को देखा तो इस बार वो लड़का गुरनूर को देखते हुए अपनी गर्दन पर हाथ फेर रहा था।
ये देख श्रेयांश को गुस्सा आ गया पर उसने अपने गुस्से को काबू में रखने की कोशिश की क्योंकि वो वहाँ कोई तमाशा नहीं करना चाहता था।
गुरनूर को बिल्कुल अकेला समझकर वो लड़का उसके करीब गया और उसने साइड से अपने हाथ को गुरनूर के हाथ से छुआ। ये देखकर श्रेयांश को अब और ज्यादा गुस्सा आ गया और वो गुस्से से उस लड़के की तरफ बढ़ गया।
Continued In आर्ज-ए-इश्क - 17
Wednesday, 19 August 2026
आर्ज-ए-इश्क - 15
श्रेयांश के दिल और दिमाग के बीच में जंग चल रही थी क्योंकि उसे लग रहा था वो गुरनूर के साथ गलत कर रहा है और ये होना ही था क्योंकि बेशक उसका साथ विवेक जैसे दोस्तों का हो पर उसके अंदर संस्कार तो उसकी माँ के दिए हुए थे जो उसे ये इजाजत नही देते थे की वो किसी लड़की के दिल के साथ खेले पर इस वक्त वो विवेक के प्रभाव में भी था जो उसे गुरनूर के साथ सीरियस होने की इजाज़त नही देता था।
ये सब सोचकर उसका मूड खराब हो चुका था पर उसने इस बारे में गुरनूर से कुछ भी कहना ठीक नही समझा क्योंकि वो गुरनूर के साथ पहली बार ऐसे डेट पर आया था इसलिए वो उसका भी मूड खराब नही करना चाहता था।
रास्ते भर बस गुरनूर बिना कुछ कहे श्रेयांश की करीबियों के एहसास को महसूस करती रही। थोड़ी देर बाद श्रेयांश ने बाइक एक बहुत ही खूबसूरत जगह पर लाकर रोकी।
इस जगह पर काफी हरियाली थी जिसे देखकर गुरनूर को अच्छा लग रहा था। बाइक से उतरकर गुरनूर उस जगह को देखने लगी। वो सच में बहुत खुश थी। श्रेयांश भी बाइक पार्क कर उसके पास आया और उसने थोड़ा जबरदस्ती गुरनूर के आगे मुस्कुराने का नाटक करते हुए कहा, “चले अंदर।”
श्रेयांश अपने खराब मूड के चलते गुरनूर के आगे जबरदस्ती मुस्कुराने की कोशिश कर रहा था पर गुरनूर ने अपनी खुशी के चलते इस बात पर ध्यान ही नही दिया।
श्रेयांश गुरनूर को नीचे ले आया जहाँ सामने एक बहुत ही खूबसूरत झरना था। इस झरने का नाम पातालपानी झरना था। उस झरने को देखकर गुरनूर और ज्यादा खुश हो गई क्योंकि उसने पहली बार अपनी जिंदगी में झरना देखा था। ऊपर से वो श्रेयांश के साथ थी। गुरनूर ने मुस्कुराते हुए श्रेयांश का हाथ थाम लिया पर श्रेयांश को गुरनूर की मुस्कुराहट और गुरनूर का इस तरह से उसका हाथ पकड़ना बेचैन कर रहा था। उसने गुरनूर से कुछ नही कहा, बस चुपचाप उसके साथ चलता रहा। वहीं गुरनूर को भी खामोशियाँ ज्यादा भा रही थी।
वो श्रेयांश के साथ पातालपानी झरना घूम रही थी की तभी उसने एक प्रेमी जोड़े को देखा। उन्हें देखकर ऐसा लग रहा था जैसे उनकी नई नई शादी हुई है। उसने उन्हें श्रेयांश को दिखाते हुए कहा, “श्रेयांश, शादी के बाद हम भी इतने ही अच्छे लगेंगे न साथ में।”
श्रेयांश का मूड तो आगे ही खराब था। उसे गुरनूर की ये बात सुनकर गुस्सा भी आने लगा जिसे उसने कंट्रोल करते हुए प्यार से गुरनूर को समझाने के लिए कहा, “गुरनूर, तुम ये शादी के बेफिजूल ख़्वाब देखना बंद करो अभी के लिए। मैं इन सब के लिए न अभी तैयार हूँ और न ही इन सब के बारे में सोचना चाहता हूँ। वैसे भी, तुम शायद हमारे रिलीजियस और कल्चरल डिफरेंस को नही देख पा रही हो।”
श्रेयांश ने ये बात इस अंदाज में कही की गुरनूर उसके खराब मूड को समझ ही नही पाई। उसने इस बात पर भी ध्यान नही दिया की श्रेयांश ने अपनी बात में उर्दू के शब्दों का इस्तेमाल किया है। गुरनूर ने मुस्कुराते हुए श्रेयांश को देखा और कहा, “क्या तुमने ये सब मुझसे अपनी मोहब्बत का इजहार करते वक्त देखा था?”
श्रेयांश के पास गुरनूर के इस सवाल का कोई जवाब नही था इसलिए वो खामोश रहा। उसे खामोश देखकर गुरनूर ने धीरे से उसके करीब आकर उसकी आँखों में देखते हुए कहा, “मेरा दीन और धर्म अब सिर्फ इश्क़ है। वो इश्क़ जिसमें मैंने तुम्हारा सब कुछ अपना बना लिया है। मैं तुम्हारे साथ सबसे पहले रूह के फेरे ले चुकी हूँ। कौन अलग कर सकता है हमें।”
“फिर भी मेरी दुनिया तुम्हारी दुनिया से अलग है।” श्रेयांश ने भी उसकी आँखों में देखते हुए कहा तो गुरनूर ने मुस्कुराकर कहा, “तो फिर दिखाओ कैसी है तुम्हारी दुनिया। तुम्हारी दुनिया का ही तो हिस्सा बनना है मुझे।”
“ये पागलपन है, गुरनूर।” श्रेयांश ने उससे दूर होते हुए गुस्से के साथ थोड़ा तेज आवाज़ में कहा।
गुरनूर ने उसे प्यार से देखते हुए कहा, “ये मेरा विश्वास है जिसकी वजह से मैं तुम्हें रोज़ भगवान से जाकर माँगती हूँ।”
“ये पागलपन है सिर्फ। ऐसा कुछ नहीं होता।” श्रेयांश ने फिर गुस्से से कहा तो गुरनूर ने कहा, “प्यार में पागलपन भी जरूरी होता है। तुम्हें मेरे जैसी मिलेगी क्या कहीं। अब बताओ कब दिखा रहे हो अपनी दुनिया मुझे।”
श्रेयांश को समझ आ गया की अपने इश्क़ के आगे गुरनूर कुछ और नहीं समझने वाली इसलिए उसने अपने गुस्से को शांत करते हुए कहा, “मेरी दुनिया देखने के लिए तुम्हें शाम में आना होगा।”
“मैं संडे की शाम को आ जाऊँगी घर पर कोई बहाना बनाकर।” गुरनूर ने खुश होते हुए कहा।
शाम होने से पहले पहले श्रेयांश ने गुरनूर को घर छोड़ने के लिए बाइक रावी के घर से थोड़ी ही दूरी पर रोकी। गुरनूर ने बाइक से उतरकर मुस्कुराते हुए श्रेयांश को देखा और उसके गले लग गई। श्रेयांश को गुरनूर के ऐसे गले लगाने से बेचैनी तो हो रही थी पर फिर भी उसने गुरनूर को गले से लगा लिया। थोड़ी देर बाद गुरनूर वहाँ से घर के अंदर चली गई।
रात में गुरनूर ने रावी को अपने और श्रेयांश के बीच हुई बातों के बारे में बताया जिसपर रावी ने कहा, “वो सब तो ठीक है लेकिन घर में मम्मी पापा से क्या कहकर जाएँगे।”
“अब कोई बहाना तो बनाना ही पड़ेगा उनके आगे।” गुरनूर ने धीरे से रावी को देखते हुए कहा। दोनों ने बेड पर लेटकर थोड़ी देर तक इस बारे में बात की और फिर सो गई।
संडे वाले दिन सुबह सुबह सभी नाश्ता कर रहे थे। गुरनूर ने रावी को देखा तो रावी ने अपनी पलकें झपकाई और फिर शुभम को देखकर कहा, “पापा, आपसे परमिशन चाहिए थी।”
“किस लिए?” शुभम ने चाय पीते हुए उससे पूछा तो रावी ने कहा, “वो पापा मेरे कॉलेज की फ्रेंड थी ना, राशि। वो यहीं आकर सैटल हो गई थी अपनी फैमिली के साथ। उसने और मैंने मिलकर मूवी देखने का प्लैन बनाया है। मैं गुरनूर को भी अपने साथ ले जाना चाहती हूँ। ये घर पर अकेले मेरे बिना क्या करेगी न। तो अगर आप परमिशन दे देते तो हम दोनों चले जाते। आई प्रॉमिस हम दोनों दस बजे तक घर आ जाएँगे।”
शुभम ने पहले एक नजर गुरनूर को देखा, जो चुपचाप अपना नाश्ता कर रही थी और फिर रावी को देखकर कहा, “ठीक है। तुम दोनों चली जाना और टाइम से घर वापिस आ जाना। कोई प्रॉब्लम हो तो मुझे या नील को फोन कर देना।”
शुभम ने जैसी ही हाँ कहा, गुरनूर मन ही मन में खुश हो गई पर उसने अपनी खुशी अपने चेहरे पर नही आने दी। शुभम से परमिशन मिलने के बाद उसकी एक्साइटमेंट बढ़ गई थी। वो सच में श्रेयांश की दुनिया को देखने और उसका हिस्सा बनने के लिए काफी एक्साइटेड थी। उसे ये भी नही पता था की श्रेयांश की दुनिया उसे पसंद आएगी या नहीं। वो तो बस इतना जानती थी की अपनी मोहब्बत में वो श्रेयांश की दुनिया को भी अपना बना लेगी।
Continued In आर्ज-ए-इश्क - 16






