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Wednesday, 1 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 16


 

घर पहुँचकर आहना जैसे ही अपने बेड पर लेटी, उसका फोन बजने लगा। उसने देखा अयांश का फोन है। उसने फोन उठाया और अयांश की आवाज उसके कानों में पड़ी। “हेलो, टेडी बियर।”


“अयांश।” आहना ने कहा। अयांश की आवाज सुनते ही उसका मन शांत हो गया। 


“क्या तुम मुझे मिस कर रही हो, टेडी बियर। मैं तो तुम्हे बहुत मिस कर रहा हूँ।” अयांश ने कहा।


“मैं भी तुम्हे बहुत मिस कर रही हूँ।” उसने कहा और एक आँसू उसकी आँख से निकलकर बह गया। 


“आहना, कुछ हुआ है क्या? आज तुम मुझे चॉकलेट कहकर भी नही बुला रही?” अयांश ने परेशान होते हुए पूछा। 


आहना अयांश को सब कुछ बता देना चाहती पर नही बताया क्योंकी उसकी बातों से अयांश परेशान हो जाता। उसने एक गहरी सांस ली और कहा, “नही, कुछ नही हुआ। बस ऐसे ही मम्मी की याद आ रही हैं।" 


“आहना, वो हमेशा हमारे साथ है। तुम उनसे बहुत प्यार करती हो ना तो उस प्यार को जिंदा रखो और उन्हें खुशी से याद करो। अगर हम किसी से प्यार करते है ना तो उसे खुशी से याद करना चाहिए। ऐसे उदास होकर नही।” अयांश ने आहना को समझाने के लिए कहा।


“तुम जल्दी से अपनी स्टडीज कंप्लीट करके वापिस आ जाओ। मुझे कुछ अच्छा नही लग रहा।” आहना ने उदास होकर कहा। 


“मैं बहुत जल्दी वापिस आऊंगा तुमसे कभी न दूर जाने के लिए।” अयांश ने प्यार से कहा। उसे आहना का उदास होना परेशान कर रहा था इसलिए आहना का मन लगाने के लिए वो आहना को अमेरिका और अपनी वहाँ की जिंदगी के बारे में बताने लगा। आहना से बात करते हुए ही अयांश किचन में आया और पानी पीते हुए वहीं खड़ा उसके साथ बातें करने लगा। पूरे आधे घंटे तक बातें करने के बाद अयांश ने कहा, “अच्छा आहना, अभी यहाँ बहुत रात हो गई है तो मैं सोने जा रहा हूँ। वो क्या है न यहाँ सुबह जल्दी उठकर टाइम से कॉलेज जाना पड़ता हैं। मैं तुम्हें कल फिर फोन करूंगा।” 


“ठीक है, तुम सो जाओ।” आहना ने कहा। अयांश से बात करके उसे अच्छा लग रहा था।


“आई लव यू, टेडी बियर।” अयांश ने कहा।


“आई लव यू, चॉकलेट।” आहना ने कहा और फोन काट दिया। 


आहना से बात करने के बाद अयांश जैसे ही पलटा, देखा नूपुर उसके पीछे खड़ी थी। 


“सॉरी, मुझे पता नही चला की तुम मेरे पीछे खड़ी हो।” उसने मुस्कान के साथ कहा। 


“कोई बात नही और सॉरी तो मुझे कहना चाहिए मैंने तुम्हारी बातें सुन ली।” नूपुर ने कहा। थोड़ी देर बाद उसने पूछा, “क्या तुम अपनी गर्लफ्रेंड से बात कर रहे थे?” 


“नही, मेरी कोई गर्लफ्रेंड नही है।” अयांश ने कहा क्योंकि वो नूपुर को इस बारे में नही बताना चाहता था। 


“झूठ मत बोलो। क्या तुम दोस्तों को आई लव यू कहते हो और उन्हें टेडी बियर कहके बुलाते हो।” नूपुर ने शरारत से कहा। 


अयांश समझ गया की वो नुपुर से इस बारे में नही छुपा पाएगा। वो मुस्कुराने लगा और कहा, “हां, मेरी गर्लफ्रेंड ही थी फोन पर और शायद तुमने उसे देख रखा है।” 


“मैंने उसे देख रखा है।” नुपुर ने हैरान होने का नाटक करते हुए कहा और फ़िर थोड़ी देर सोचने का नाटक करने के बाद कहा, “ओह हाँ, याद आ गया। वही लड़की न जिसे तुमने अपनी बर्थडे पार्टी पर प्रपोज किया था।” 


अयांश ने हाँ में सिर हिला दिया और मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ, वही है।” 


“देखा है मैंने उसे। बहुत ब्यूटीफुल है वो और बहुत लकी भी जिसे तुम जैसा बॉयफ्रेंड मिला है।” नूपुर ने झूठी मुस्कान के साथ कहा। 


“लकी मैं हूँ की मेरी लाइफ में वो है। अच्छा अब मुझे नींद आ रही है। गुड नाईट।” कहकर अयांश अपने कमरे मे चला गया। 


“बेशक वो बहुत खूबसूरत है और बहुत लकी है जो तुम्हारी लाइफ का पार्ट है पर बस थोड़े दिन की बात और है बेबी, तुम्हें बहुत जल्द ये गुड न्यूज मिल जाएगी की वो तुम्हारी लाइफ का पार्ट नही रही और तुम हमेशा के लिए मेरे हो गए हो।” नूपुर ने उसे जाते हुए देखकर सोचा और मुस्कुराने लगी। 


***


अगले दिन आहना कबीर के साथ ऑर्फनेज और ओल्ड एज होम पहुँची। वो सामने बने घर को और बाहर लगे झूलों को देख रही थी। उसने झूले देखकर अंदाजा लगा लिया की ये ऑर्फेनेज है। धूप होने की वजह से वहाँ बाहर कोई दिखाई नही दे रहा था। वो आसपास सब कुछ देख ही रही थी कि तभी एक लड़का वहाँ आया। उसने कबीर के पास आकर कहा, “सर, आप यहाँ।”


“हाँ, वो मेरी बेटी यहाँ आना चाहती थी।” कहकर कबीर ने आहना को अपने पास बुलाया और उससे कहा, “आहना इनसे मिलो। ये यहाँ के मैनेजर है, वीर सिंह।” 


वीर ने आहना को देखा तो देखता ही रह गया। पीले रंग की ड्रेस में आहना बहुत ही खूबसूरत लग रही थी। धूप में उसका गोरा रंग चमक रहा था। वीर मुस्कुराया और कहा, “हेलो मैम।” 


आहना भी मुस्कुराई और कहा, “हेलो! आप प्लीज मुझे आहना ही कहे।” 


“वेलकम आहना।” वीर ने कहा। 


“थैंक्यू।” कहकर आहना ने कबीर से पूछा, “पापा, क्या मैं अंदर जाकर बच्चों से मिल सकती हूँ?”


“जरूर बेटा, तुम जाओ। मैं भी थोड़ी देर में अंदर आता हूँ।” कबीर ने कहा क्योंकि उन्हें वीर से कुछ बात करनी थी। आहना बच्चों से मिलने अंदर चली गई। अंदर आकर उसने देखा की कुछ बच्चें आपस में खेल रहे है और कुछ बच्चें बुजुर्गों के साथ बैठकर किताब में से कहानियाँ पढ़ रहे है। उसे ये देख थोड़ी हैरानी हुई की बुजुर्ग लोग यहाँ क्या कर रहे है। वो सबके पास ना जाकर चुपचाप वहीं खड़ी सबको देखती रही। थोड़ी देर के बाद कबीर ने पीछे से आकर उसके कंधे पर अपना हाथ रखा और कहा, “तुम यहाँ क्यों खड़ी हो, बेटा। जाओ बच्चों और सबसे मिलो।” 


आहना कबीर की तरफ मुड़ी और उनसे पूछा, “पापा, मुझे तो बाहर से देखकर लगा था कि ये सिर्फ ऑर्फेनेज होगा और ओल्ड एज होम इसके आसपास ही कहीं और होगा पर यहाँ तो बुजुर्ग लोग भी है।” 


कबीर मुस्कुराए और कहा, “ये अंजलि का आइडिया था। उसका कहना था की इससे जिन बच्चों के मां बाप नही है उन्हें मां बाप का प्यार मिल जायेगा और जिन मां बाप को उनके बच्चों ने छोड़ दिया है उन्हें बच्चो का प्यार मिल जाएगा।” 


“मैं सबसे मिलती हूँ।” आहना ने सबको देखते हुए कहा। 


“तुम चलकर सबसे मिलो। मैं थोड़ा सा काम देख लूं यहाँ का। कुछ चाहिए हो तो किसी को भी कह देना या फिर वीर को।” कहकर कबीर दूसरी ओर चले गए। 


आहना सबसे मिलने उनकी और चली आई। वीर भी वहाँ आया और सबको आहना से मिलवाने लगा। आहना बच्चों के साथ खेलते हुए खिलखिलाकर हँस रही थी और वृद्ध लोगों से बातें करते हुए खुश हो रही थी। बातें करते हुए जब एक बुजुर्ग महिला ने आहना के सिर पर उसे आशीर्वाद देने के लिए हाथ रखा तो आहना खुशी से मुस्कुरा उठी। वो सबके साथ प्यार से बातें किए जा रही थी और वीर वहीं खड़ा प्यार से उसे देखे जा रहा था। 


आहना को सबके साथ वक्त बिताकर बहुत ही अच्छा लग रहा था। आज इतने दिनों बाद वो अच्छा महसूस कर रही थी। घर पहुँचते ही उसके फोन पर अयांश का वीडियो कॉल आया। कॉल उठाते ही अयांश को देखकर आहना के चेहरे पर एक प्यारी-सी मुस्कान आ गई। 


अयांश भी उसे देखकर मुस्कुराने लगा। आहना ने अयांश को आज ऑर्फनेज और ओल्ड एज होम के बारे में और वहाँ जाकर उसे कितना अच्छा लगा, इस बार में बताया। 


“तुम जब वापिस आ जाओगे ना। तब मैं तुम्हें भी वहाँ लेकर जाऊंगी।” आहना ने कहा। अयांश उसकी आवाज़ में बहुत सारी खुशी को महसूस कर पा रहा था। उसे आहना की आवाज सुनकर तसल्ली हुई की आहना अब खुश है क्योंकी कल से वो आहना की उदासी की वजह से परेशान था। अयांश आहना से काफी देर तक बातें करता रहा। दोनों ही महसूस कर पा रहे थे वो दूर होते हुए भी एक दूसरे के बहुत करीब है।


Continued In जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 17


Tuesday, 30 June 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 15



अपनी माँ का नाम सुनकर आहना का दिल तेजी से धड़कने लगा और वो थोड़ी हैरान थी क्योंकि कबीर आहना से अंजलि के बारे में बहुत कम बात किया करते थे। कबीर ने आहना को अपने पास बैठाया और उसके दोनों हाथों को अपने हाथों में लेकर कहा, “आहना, मेरी बात को ध्यान से सुनना। ये सब जानना तुम्हारे लिए बहुत जरूरी है।” 


आहना ने हाँ में सिर हिला दिया तो कबीर ने कहा, “मैं तुम्हारा अपना पिता नही  हूँ।”


जैसे ही आहना ने ये सुना, उसे अपने कानों पर यकीन नही हुआ। उसे लगा कबीर उसके साथ मज़ाक कर रहे है पर उसने कोई सवाल नही पूछा। कबीर ने आगे कहा, “अंजलि से मैं कॉलेज में पहली बार मिला था। वो इतनी खूबसूरत थी की उसे देखते ही मुझे वो पसंद आ गई। मैंने उससे दोस्ती के लिए कहा तो वो मान गई और फिर हम बहुत सारा वक्त एक साथ बिताने लगे। मेरी पसंद प्यार में कब बदल गई मुझे पता ही नही चला और मैंने फैसला किया की मैं अंजलि को बता दूंगा कि मुझे उससे प्यार हो गया है पर इससे पहले की मैं उसे ये बता पाता उसने…।  


कबीर ने बात पूरी नही की और रूक गए। आहना को लगा कबीर जो बात कहने जा रहे थे वो उदास कर देने वाली थी इसलिए वो उस बात को कहते कहते रूक गए पर कबीर मुस्कुरा रहे थे। आहना को ये देखकर थोड़ी हैरानी हुई इसलिए उसने पूछा, “क्या हुआ था पापा इसके बाद?” 


“इससे पहले मैं उससे अपने प्यार का इजहार कर पाता, अंजलि ने आकर मुझसे मेरे लिए अपने प्यार का इजहार कर दिया। मैं बहुत ही खुश हुआ ये जानकर की वो भी मुझसे प्यार करती है। उस दिन से हम सारा वक्त एक साथ बिताने लगे। सिर्फ राकेश हमारे रिश्ते के बारे जानता था। हम दोनों एक दूसरे का साथ पाकर बहुत खुश थे पर ये खुशियां ज्यादा वक्त तक नही टिकी।” कहते हुए कबीर उदास हो गए। 


उनकी आँख से एक आँसू निकलकर गाल पर आ गया। उन्होंने उसे पोंछा और फिर कहना शुरू किया, “कॉलेज खतम होने के बाद मुझे पता चला की तुम्हारे नाना जी अंजलि की शादी जबरदस्ती किसी और के साथ करवा रहे है। उसकी शादी वाले दिन मैं उसे रोकने गया था पर उसने मेरी एक नही सुनी और शादी कर ली। उस दिन के बाद से मैं अंजलि से कभी नही मिला। जिससे उसकी शादी हुई थी वही इंसान तुम्हारे असली पिता थे और वो बहुत ही बुरे इंसान थे। वो ड्रिंक करके अंजलि को रोज मारते पीटते थे।” 


आहना यकीन नही कर पा रही थी कि कबीर और अंजलि ने ये सब बर्दाश्त किया। उसने धीरे से पूछा, “अगर उन्होंने किसी और से शादी कर ली थी तो वो आपके पास कैसे आई?” 


कबीर ने एक गहरी सांस ली और आगे कहा, “जब अंजलि को पता चला कि तुम आने वाली हो तो वो अपने ससुराल से भाग आई तुम्हारी जान बचाने के लिए। उसके पास रहने के लिए कोई भी जगह नही थी क्योंकी तुम्हारे नाना जी के पास नही जा सकती थी वो इसलिए उसने मुझे ढूंढने की कोशिश की। मुझे तो वो नही ढूंढ पाई पर शायद उसकी किस्मत उसके साथ थी की एक दिन राकेश उसे मिल गया। राकेश उसे मेरे घर ले आया।” 


कबीर मुस्कुराने लगे और कहा, “जब मुझे पता चला की उसके साथ इतना कुछ हो गया है तो मैंने फैसला किया की मैं उससे शादी कर लूंगा पर मेरे माँ बाप हमारी शादी के लिए नही माने जिसकी वजह थी अंजलि की पहली शादी। मैं अंजलि से बहुत प्यार करता था और उससे शादी करना चाहता था इसलिए मैंने अपने माँ बाप के खिलाफ जाकर उससे शादी करली और खुशी खुशी उसके साथ रहने लगा।”


“क्या आप…आप लोग मेरे असली पापा से कभी मिले है?” आहना ने पूछा क्योंकि इस वक्त बहुत से सवाल उसके दिमाग में चल रहे थे। उसकी आँखें आँसूओं से भरी हुई थी।


“नही, हम नही जानते की तुम्हारे असली पिता कौन है और हम जानना भी नही चाहते। अंजलि ने हमे कभी बताया भी नही उसके बारे में और बेहतर होगा की तुम जानने की कोशिश भी न करो की वो कौन है।” राकेश ने कहा, जो अभी तक सब कुछ बिना कुछ कहे सुन रहे थे।


“पर क्यों अंकल?” आहना ने पूछा।


राकेश ने उठकर उसके आँसू पोंछे और कहा, “आहना, जब अंजलि की शादी हुई थी, तब तुम्हारे नाना जी ने उसे अपनी प्रॉपर्टी और पैसे का आधा हिस्सा अंजलि के नाम कर दिया था। जब अंजलि अपने ससुराल से भागी थी, तो इन सबके पेपर्स भी ले आई थी अपने साथ। कबीर से शादी के बाद उसने हमें उन पेपर्स के बारे में बताया था।” 


“वो पेपर्स अभी कहाँ है?” आहना ने पूछा। 


“अंजलि ने कुछ पैसे और जो प्रॉपर्टी उसे मिली थी, उसका इस्तेमाल उसने एक अनाथालय और ओल्ड एज होम बनवाने के लिए किया था। उसके बाद जितना पैसा बचा था, वो सारा उसने तुम्हारे नाम कर दिया था ये कहकर की उस पैसे को हम तुम्हारी पढ़ाई के लिए इस्तेमाल करेंगे और जिस प्रॉपर्टी पर अनाथालय और ओल्ड एज होम बने है, वो भी उसने तुम्हारे नाम करदी थी। वो सारा पैसा जो अंजलि ने तुम्हारे नाम किया था, मैंने उसे इस्तेमाल नही किया क्योंकि उसे इस्तेमाल करने का हक सिर्फ तुम्हे है।” कबीर ने आहना को देखकर कहा। 


“वो पैसा और प्रॉपर्टी ही इसका कारण है की हम तुम्हें इतनी प्रोटेक्शन देना चाहते है क्योंकी हमें पता है तुम्हारे मामा एक दिन तुम्हें ढूंढते हुए जरूर आएंगे तुमसे अपनी प्रॉपर्टी वापिस लेने के लिए।" राकेश ने गंभीर होकर कहा। 


“क्या वो…वो लोग मु…मुझे कोई नुकसान पहुँचा सकते है?” आहना ने कांपती हुई आवाज़ में पूछा। 


“हाँ, वो तुम्हे नुकसान पहुँचा सकते है लेकिन बेटा तुम्हें इस बारे में परेशान नही होना जबतक हम तुम्हारे साथ है। वो कोशिश करेंगे तुमसे प्रॉपर्टी और पैसे वापिस लेने की, और अगर उन्हें उन पेपर्स पर तुम्हारे सिग्नेचर मिल जाए, तो वो अनाथालय और ओल्ड एज होम को तुड़वा देंगे जिसमें बहुत सारे लोग रहते है।” राकेश ने कहा। 


कबीर ने आहना को सामने रखा पानी का ग्लास दिया और कहा, “तुम्हारे अंकल सही कह रहे है आहना। अंजलि ने मुझे बताया था की तुम्हारे नाना जी और तुम्हारे तीनों मामा को मेरे बारे में पता था और वो ये भी जानते थे कि अंजलि माँ बनने वाली है जब वो मेरे पास आई थी। तुम्हारे नाना जी की तो अंजलि और मेरी शादी के तीन महीने बाद ही मौत हो गई थी पर मुझे यकीन है की एक दिन तुम्हारे मामा तुम्हे ढूंढते हुए फिर से जरूर आएंगे।” 


“वो यहाँ क्यों आएंगे? क्या वो मम्मी से मिलने आए थे जब आप दोनों की शादी हुई थी? आहना ने पानी पीकर कबीर से पूछा।


“वो आए थे पर उस वक्त अंजलि हॉस्पिटल में थी क्योंकि तुम होने वाली थी। मैं उस वक्त घर आया था कुछ लेने और उसी वक्त वो लोग आए थे। उन्होंने मुझसे अंजलि के बारे में पूछा तो मैंने झूठ कह दिया की अंजलि मेरे साथ नही रहती। तब से लेकर वो आजतक यहाँ दोबारा नही आए पर फिर से आ सकते है क्योंकी हमें पता है की वो आजतक अंजलि और तुम्हें ढूंढ रहे है इसलिए हम आजतक तुम्हें बचाते आए है।” कबीर ने कहा और राकेश को देखा। वो दोनों जानते थे कि आहना के लिए ये सब जानना और ये बात स्वीकार करना की कबीर उसके असली पिता नही है बहुत मुश्किल है। 


आहना चुप बैठी थी। उसे ऐसे देखकर कबीर ने उसके गाल पर अपना हाथ रखा। आहना ने उन्हें देखा तो उन्होंने कहा, “आहना, मेरे बच्चे मैं खुदको बहुत खुशकिस्मत समझता हूँ की मुझे तुम जैसी बेटी मिली। मैं तो किसी और से शादी करने वाला था लेकिन इससे पहले ही तुम्हारी माँ मेरे पास वापिस आ गई और तुम्हें पता है, मेरी लाइफ का सबसे अच्छा दिन था जब मैंने पहली बार तुम्हें अपनी गोद में उठाया था।” कबीर ने कहा और उस दिन को याद करते हुए मुस्कुरा उठे। 


“मुझे एक बात समझ नही आई। वो अनाथालय और ओल्ड एज होम  को क्यों तोड़ेंगे? उन्हें उन बच्चों की और वहाँ रह रहे लोगों की परवाह नही होगी।” आहना ने पूछा। 


“आहना, कबीर और मैं सालो से बिजनेस वर्ल्ड में काम कर रहे है। हम आए दिन लोगों को बिजनेस में सक्सेस और पैसे के लिए हर हद पार करते देखते है। लोग इंसानियत की हदें भी पार कर जाते है। हम आपके मामा को नही जानते लेकिन अंजलि ने हमें बताया था कि उनका कुछ फैक्ट्री से रिलेटेड बिजनेस है। अगर वो तुमसे प्रॉपर्टी के पेपर्स पर साइन ले लेते है तो हो सकता है वो उस प्रॉपर्टी पर वो फैक्ट्री बनवाए क्योंकी इससे उनका बिजनेस बड़ेगा जिसके लिए उन्हें अनाथालय और ओल्ड एज होम  को तोड़ना होगा। अगर उन्होंने ऐसा किया, तो वे बच्चें और बूढ़े बेघर हो जाएंगे।” राकेश ने उसे समझाया। 


आहना ने अपने माथे पर हाथ रखा और कबीर को देखकर पूछा, “अगर मेरे असली पापा वापिस आ गए तो क्या होगा?”


कबीर ने उसका हाथ पकड़ा और कहा, “अगर वो वापिस आते है और तुम उनके साथ जाना चाहोगी तो मैं तुम्हे नही रोकूंगा बेटा। तुम अब बड़ी हो गई हो और ये अच्छे से समझ सकती हो की तुम्हारे लिए क्या सही है और क्या गलत पर एक बात तुम्हें बताना चाहूंगा कि अंजलि चाहती थी की तुम अपने पिता से दूर रहो और उससे कभी न मिलो।” 


आहना ने अपना सिर कबीर के कंधे पर रखा और कहा, “वो आ भी जाएं तो मैं उनके साथ कभी नही जाऊंगी। मेरे लिए मेरे पापा आप ही रहेंगे। आपकी जगह कोई नही ले सकता मेरी लाइफ में।” 


उसने राकेश को देखा और कहा, “अंकल, मैं घर जाकर रेस्ट करना चाहती हूँ।” 


आहना घर जाकर इन सबके बारे में सोचना चाहती थी इसलिए राकेश ने कबीर को उसे घर ले जाने के लिए कहा। 


“ठीक है मैं इसे घर ले जाता हूँ।” कबीर ने खड़े होकर कहा। 


आहना भी उठ खड़ी हुई और कहा, “एक और बात कहनी है। अगर आप दोनों को ठीक लगे तो मैं कल ऑर्फेनेज और ओल्ड एज होम जाना चाहूंगी।” 


“जरूर बेटा। तुम्हें जाना चाहिए वहाँ।” राकेश ने कहा। उन्हें बाय बोलकर आहना कबीर के साथ जाने लगी तो उन्होंने उसे वापिस बुलाकर कहा, “आहना बेटा, मुझे कोई फर्क नही पड़ता कि तुम्हारी पिछली लाइफ कैसी रही है और तुम्हारे पिता कौन है? बस एक बात याद रखना की तुम मेरे बेटे की जिंदगी का खास हिस्सा हो और उसका प्रेजेंट और फ्यूचर हो।” 


“जी अंकल, मैं ख्याल रखूंगी।” आहना ने कहा और केबिन से बाहर आ गई। कबीर उसे लेकर घर के लिए निकल गए।


Continued In जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 16


Sunday, 28 June 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 14


 

अयांश नूपुर के इस तरह गले लगाने से अनकंफर्टेबल हो गया। उसने नुपुर को हाथ लगाए बिना खुदको उससे दूर किया और कहा, “तुम फ्रेश हो जाओ।” 

नुपुर कमरे में चली गई और दरवाजा बंद कर लिया। समीर कुर्सी पर बैठा कबसे उन दोनों को ही देख रहा था। जब अयांश वापिस लिविंग रूम में आकर सोफे पर बैठ गया तो समीर ने उससे पूछा, “क्या तू इसे पसंद नही करता?”

“तू ये क्यों पूछ रहा है?” अयांश ने पूछा। 

समीर हँसने लगा और फिर कहा, “भाई, अभी जब उसने तुझे गले लगाया था, तो तू कैसे अनकंफर्टेबल हो गया था ये नोटिस किया मैंने। इतनी सुंदर लड़की मुझे गले लगाए तो मज़ा ही आ जाए।” 

“तू तो है ही ठरकी। ये सिर्फ दोस्त है मेरी। मैं किसी और से प्यार करता हूँ।” अयांश ने कहा और आहना का ख्याल आते ही मुस्कुराने लगा। 

“क्या सच में? कौन है वो जो मेरे यार का प्यार बन गई?” समीर ने एक्साइटेड होते हुए पूछा। 

“बताऊंगा सब तुझे। पहले मैं भी फ्रेश हो जाऊं।” कहते हुए अयांश उठा। 

“हाँ, तब तक मैं कॉफी बनाता हूँ।” कहते हुए समीर भी कुर्सी से उठ गया। अयांश अपना सामान लेकर कमरे में चला गया और समीर रसोई में जाकर कॉफी बनाने लगा। कॉफी बनाकर उसने तीन कप में कॉफी डाली और नुपुर को बुलाने के लिए उसके कमरे का दरवाजा खटखटाया। 

नुपुर इस वक्त रिद्धिमा से बात करके उन्हें बता रही थी कि वो अयांश के साथ ही है। समीर ने उसे बाहर बुलाया तो उसने समीर से कॉफी रूम में ही देने की रिक्वेस्ट की क्योंकि अयांश के आगे वो रिद्धिमा से बात नही कर सकती थी। समीर ने उसे कॉफी रूम में ही दे दी। 

अयांश फ्रेश होकर आया। समीर कॉफी के कप सामने टेबल पर रखकर अकेला बैठा अपने फोन में कुछ देख रहा था। 

“नुपुर बाहर नही आई अभी तक।” अयांश ने पूछा। अयांश की आवाज सुनकर समीर ने फोन से नजरे हटाकर उसे देखा और कहा, “मैंने उसे कॉफी रूम में ही दे दी है। वो बाहर नही आना चाहती थी। शायद अपने पैरेंट्स से बात कर रही थी वो।” 

“कोई बात नही।” अयांश ने कहा और सोफे पर बैठ गया। 

“चल अब मुझे बता कौन है वो जिसने तेरा दिल चुरा लिया।” समीर ने उसे कॉफी का कप देते हुए कहा।

“आहना, दुनिया की सबसे प्यारी लड़की।” अयांश ने खोए हुए कहा। आहना का चेहरा इस वक्त उसकी नजरों के सामने था। 

“तू सच में प्यार में है यार। उसके बारे में बात करते हुए ही तेरे चेहरे पर कितनी खुशी है।” समीर ने कहा। 

“क्या करूं? मेरी आहना है ही इतनी खूबसूरत।” अयांश ने उसे देखते हुए कहा। 

“और बता ना मुझे आहना के बारे में।” समीर ने कहा तो अयांश ने बताया शुरू किया, “वो मेरे बचपन की दोस्त है। हम स्कूल में एक साथ पढ़ते थे। स्कूल में मैं सोचता था कि वो सिर्फ मेरी दोस्त है और मुझे उसके साथ इतना ज्यादा रहना पसंद नही था। मैं उसका ख्याल रखता था स्कूल में बस पर कॉलेज के फर्स्ट ईयर की शुरुआत में जब मैं आहना की और भी ज्यादा परवाह करने लगा तो मुझे एहसास हुआ की हमारा रिश्ता दोस्ती से कई ज्यादा है हालांकि मैं अपनी फीलिंग्स को समझ नही पा रहा था उस वक्त पर आहना की आँखों में आँसूओं ने मुझे ये एहसास दिलाया की मैं उससे प्यार करने लगा क्योंकि मैं उसकी आँखों में आँसू नही देख पा रहा था।” 

समीर जो अबतक चुपचाप अयांश की बात सुन रहा था उसे कुछ याद आया और उसने अयांश से पूछा, “वेट, ये वही आहना है जो तेरे डैड के दोस्त की बेटी है। जिसे तू मिस पढ़ाकू कहकर बुलाता था और उसकी मजाक भरी तारीफें मेरे आगे करता था।” 

अयांश ने ये जैसे ही सुना, अपने पास पड़ा कुशन सोफे से उठाकर समीर की तरफ फैंका। इससे पहले की कुशन समीर को लगता, उसने उसे पकड़ लिया और कहा, “अब तो मैं आहना भाभी से जब भी मिलूंगा न, उनकी तारीफें उन्हें जरूर सुनाऊंगा जो तू किया करता था मेरे आगे।” 

“खबरदार अगर आहना को उस बारे में पता लगा। शादी से पहले ही डाइवोर्स ले लेगी वो मुझसे।” अयांश की बात सुनकर समीर हँसने लगा और कहा, “आगे की लव स्टोरी बता ना अपनी और आहना की।” 

“पापा भी चाहते थे कि मैं आहना से ही शादी करूं इसलिए मैंने उसे कॉलेज के फर्स्ट ईयर में ही प्रपोज कर दिया था और उसके बाद हमारे बीच प्यार बढ़ता गया। तू अंदाजा भी नही लगा सकता पर मुझे सिर्फ आहना ही नही, मुझे उसकी हर बात पसंद है। उसकी क्यूटनेस, उसकी मासूमियत और जब वो मेरे लिए कुछ खास करती है।” अयांश ने कहा। आहना के बारे में बातें करते हुए अयांश के चेहरे पर एक अलग ही खुशी थी।  समीर ने देखा तो उसे छेड़ते हुए कहा, “कितना ज्यादा खुश लग रहा है अभी तू? सही है अभी खुश हो जितना होना है शादी के बाद तो रोना ही है।” 

“मैं क्यों रोयूंगा शादी के बाद?” अयांश ने हैरानी से पूछा। 

“बेटा, लव मैरिज है तेरी। जब भाभी तुझे अपनी प्यारी प्यारी बातों में फंसाकर तूझसे प्याज कटवाया करेंगी ना, तो रोएगा ही तू शादी के बाद।” समीर ने हँसते हुए कहा तो अयांश ने सोफे पर पड़ा दूसरा कुशन भी उसकी तरफ फैंका और फिर खुद भी हँसने लगा।

अगले दिन से ही अयांश ने भी समीर के साथ कॉलेज जाना शुरू कर दिया। नुपुर ने अयांश से झूठ बोला था की वो भी पढ़ने आई है इसलिए उसे घर से बाहर निकलना ही पड़ता था। वो घर से बाहर आकर अपनी दोस्तों के साथ घूमती रहती। उसे किसी चीज की परवाह नही थी। वहीं आहना ने भी अयांश के जाने के एक हफ्ते बाद से ही ऑफिस ज्वॉइन कर लिया। 

राकेश के ऑफिस में आहना उनके सामने कुर्सी पर बैठी थी। राकेश उसे सारा काम समझा रहे थे। सारा काम समझने के बाद आहना ने उठते हुए कहा, “अंकल, मैं अब जाऊं।” 

“हाँ बेटा तुम जा सकती हो बस कुछ बातों का ख्याल रखना।” राकेश ने कहा तो आहना ने वापिस बैठते हुए पूछा, “किन बातों का ख्याल रखना है अंकल मुझे।”   

“पहली बात की तुम यहाँ काम करते हुए हमेशा मेरे आसपास रहोगी। काम के बाद तुम कबीर के साथ घर जाओगी और अगर कबीर यहाँ नही होगा तो मैं तुम्हें घर छोड़ा करूंगा। दूसरी बात की अगर तुम्हें कहीं भी घूमने जाना है तो मुझे या कबीर को बताकर जाओगी और अगर तुम्हें कोई ऐसा फोन कॉल आता है जो तुम्हें अजीब लगे तो उस बारे में भी मुझे बताओगी तुम।” राकेश ने कहा जिसे सुनकर आहना को थोड़ा डर लगने लगा और बहुत सारे सवाल उसके मन में आने लगे। 

“अंकल, ये सब जरूरी क्यों है? अयांश ने मुझसे कहा था की ये जॉब सिर्फ इसलिए है की मैं आपकी नजरों के सामने रहूं जिससे निखिल और रिद्धिमा आंटी को मेरे साथ कुछ गलत करने का मौका न मिले पर आपकी बातों से तो ऐसा लग रहा है की आप मुझे किसी और से बचाना चाहते है।” आहना ने कहा।

“आहना, मैं भी तुम्हारे पापा जैसा हूँ। क्या तुम्हें अपने पापा पर भरोसा नही है? तुम्हारी प्रोटेक्शन जरूरी है हम सब के लिए और अगर जरूरत पड़ी तो मैं तुम्हारे लिए बॉडी गार्ड्स को भी रखूंगा।” राकेश ने कहा और लैपटॉप में अपना ध्यान लगा लिया। 

“इन्हें तो सिर्फ मुझे निखिल से बचाना है। उसके लिए बॉडी गार्ड्स का क्या काम?” आहना ने सोचा और कहा, “अंकल, मुझे खुदको निखिल से ही तो बचाना है। इसके लिए बॉडी गार्ड्स की क्या जरूरत है? निखिल मेरे साथ ज्यादा कुछ नही कर सकता।”

“बेटा समझने की कोशिश करो। ये सब बहुत जरूरी है।” राकेश ने कहा जिससे आहना को समझ आ गया की कोई तो बहुत बड़ी बात है जो राकेश उससे छुपा रहे है। वो इस बारे में सोचने लगी।

“आहना।” राकेश की आवाज सुनकर वो अपने ख्यालों से बाहर आई और कहा, “जी अंकल।” 

“तुम जाकर काम पर ध्यान दो बेटा और कबीर को अंदर भेजना। मुझे उससे कुछ बात करनी है।” राकेश ने सामने रखी फाइल उठाते हुए कहा। 

“जी अंकल।” कहकर आहना बाहर आ गई। वो कबीर के पास गई और कहा, “पापा, आपको अंकल बुला रहे है। उन्हें आपसे कुछ बात करनी है।”  

“ठीक है बेटा, तुम यहाँ बैठकर मेरा ये काम करदो। मैं राकेश के पास जाता हूँ।” कबीर ने कहा और राकेश के केबिन की तरफ बढ़ गए। उन्होंने दरवाजे खटखटाया और अंदर चले गए। 

“बैठो कबीर।” राकेश ने हाथ में पकड़ी फाइल को वापिस टेबल पर रखते हुए कहा और कबीर को देखा। 

कबीर सामने रखी कुर्सी पर बैठ गए और पूछा, “क्या बात है, राकेश।” 
“कबीर मुझे लगता है की हमें आहना को अब सबकुछ बता देना चाहिए। कब तक उससे ये सब छुपा कर रखेंगे।" राकेश ने सीरियस होकर कहा। 

“नही, अभी मुझमें उसे सच बताने की हिम्मत नही है की मैं उसका अपना पिता…” कहते कहते कबीर रूक गए। 

राकेश ने एक गहरी सांस ली और कहा, “मैं समझ सकता हूँ कबीर पर ये जरूरी है। आहना को लगता है कि हम सिर्फ उसे निखिल और रिद्धिमा से बचा रहे है। मैं नही जानता की हम उसे सच बताएंगे तो क्या होगा पर मैं ये नही चाहता की उसे इस सच के बारे में किसी और से पता लगे। ऐसा कुछ भी हो इससे पहले हमे उसे बता देना चाहिए।” 

“मैं इस बारे में सोचना चाहता हूँ पहले।” कबीर ने परेशान होकर कहा।

“ठीक है पर जल्दी ही फैसला लो कोई। मैं समझ सकता हूँ ये बहुत मुश्किल है पर हमें ये करना होगा।” राकेश ने कबीर के हाथ पर अपना हाथ रखकर कहा। उन दोनों ने देखा ही नही की आहना दरवाजे पर ही खड़ी उनकी बाते सुन रही है। वो बिना सोचे समझे केबिन के अंदर गई और उन दोनों की तरफ देखने लगी। 

थोड़ी देर बाद उसने कबीर से पूछा, “पापा, आप दोनों किस सच की बात कर रहे थे? ऐसा क्या है जो मुझे पता होना चाहिए?” 

“ऐसा कुछ भी नही है, बेटा।” राकेश ने कहा। 

“प्लीज अंकल, इतना मैं भी समझती हूँ की खुदको निखिल या रिद्धिमा आंटी से बचाने के लिए मुझे बॉडी गार्ड्स की जरूरत नही है। ऐसा कौन है जिससे आप सब मुझे बचाना चाहते है?” आहना ने थोड़ा सा तेज आवाज में पूछा। 

राकेश आहना को समझाने के लिए कुछ कहने ही लगे थे की तभी कबीर ने अचानक से कहा, “ये बात तुम्हारी माँ, अंजलि के बारे में है आहना।” 

“मम्मी…मम्मी के बारे में।” आहना ने कहा। उसका दिल तेज़ी से धड़कने लगा।


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Saturday, 27 June 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 13


 

अयांश आहना को लेकर कहीं जाना चाहता था इसलिए उसने आहना से तैयार होकर आने को कहा। पंद्रह मिनट के बाद वह तैयार होकर आई। उसने अपने फेवरेट नीले रंग का एक खूबसूरत गाउन पहन रखा था। 


अयांश उसे लेकर लेवेंडर्स  होटल पहुँचा। अयांश उसे गार्डन में ले गया। पूरे गार्डन को लाइटों और फूलों से सजाया गया था। गार्डन के बीच में एक सफेद पर्दो से बना टेंट लगा हुआ था जो लाइटों की रोशनी से चमक रहा था। उन दोनों ने पहले खाना खाया और फिर अयांश आहना के साथ उस टेंट के अंदर आया। अयांश लेट गया। ये देखकर आहना भी लेट गई और अपना सिर अयांश के सीने पर रख दिया जिससे अयांश के दिल की धड़कनों उसे सुनाई दे रही थी। अयांश ने आहना को अपनी बाहों में कैद कर लिया और उसके बालों को सहलाते हुए पूछा, “आहना, तुम क्या करोगी जब तुम्हें मेरी याद आएगी?” 


“याद उसे किया जाता है जो बहुत दूर हो और तुम तो मेरे बहुत करीब हो। तुम मुझसे दूर जाकर भी दूर नही होगे।” आहना ने कहा और मुस्कुरा दी। 


“क्या मतलब?” अयांश ने कन्फ्यूजन में पूछा। 


“अयांश, तुम मेरे दिल में रहते हो। अब जो मेरे दिल में रहता है वो मुझसे दूर कैसे हो सकता है।” आहना ने कहा और उसके गाल पर किस कर लिया। 


“आहना, मैं बहुत लकी हूँ जो तुम मेरी जिंदगी में हो। पता नही मैं तुम्हारे बिना दो साल कैसे रहूंगा।" अयांश ने थोड़ा उदास होकर कहा और उसके हाथ के पीछे किस किया। 


“सिर्फ दो साल की ही तो बात है और हमें ये भी पता चल जाएगा कि क्या हम सच में एक-दूसरे को लेकर सीरियस है या नही। पास रहकर तो सब साथ रह लेते है क्योंकि रोज मिलना होता है। प्यार का असली पता तो लॉन्ग डिस्टेंस में लगता है जब रोज मिलना तो छोड़ो, बात करना भी मुश्किल होता है और जब एक दूसरे से दूर रहते हुए भी साथ रहना होता है।" आहना ने कहा और मुस्कुराने लगी। 


अयांश ने उसकी आँखों में देखा और कहा, “मैं रहूंगा तुम्हारे साथ, हमेशा।” 


आहना ने अपने साथ लाए पर्स में से एक लाल रंग का बॉक्स  निकालकर अयांश को देते हुए कहा, “मैं तुम्हारे लिए गिफ्ट लाई हूँ। खोलकर देखो कैसा है।” 


अयांश ने बॉक्स खोला तो देखा अंदर एक खूबसूरत सा ब्रेसलेट था। अयांश ने उसे बॉक्स से बाहर निकाला और उसे देखते हुए आहना से पूछा, “ये तुमने कब लिया?” 


“कल जब मैं तुम्हारे साथ मॉल गई थी और तुम्हें मॉल से बाहर भेज दिया था।” आहना ने कहा।


“ये बहुत अच्छा है। मुझे बहुत पसंद आया।” कहते हुए उसने ब्रेसलेट आहना को दिया और कहा, “अब जितने प्यार से ये मेरे लिए लिया है, उतने ही प्यार से पहना भी दो।” 


आहना उठी और अयांश को ब्रेसलेट पहनाते हुए कहा, "इसे कभी मत उतारना।” 


“मैं वादा करता हूँ। इसे कभी भी नही उतारूंगा।” अयांश ने आहना को प्यार से देखते हुए कहा। आहना भी अपनी प्यार भरी नजरों से उसे ही देखे जा रही थी। 


अमेरिका, वर्तमान समय 


अयांश ने दीवार पर लगी आहना की तस्वीर से नजरें हटाकर अपने हाथ में पहने हुए ब्रेसलेट को देखा। ये वही ब्रेसलेट था जो आहना ने उसे पहनाया था और अयांश ने आहना से अपना वादा निभाते हुए आज तक इसे कभी नही उतारा था। उसने वापिस तस्वीर को देखा। तस्वीर में आहना तो मुस्कुरा रही थी पर उसे देखते हुए अयांश की आँखों से आँसू बहने लगे।    


“काश मैं सात साल पहले अमेरिका ना जाता तो आज जिंदगी जीने के लिए मेरे साथ तुम होती आहना, तुम्हारी यादें नही।” अयांश ने तस्वीर को देखते हुए कहा जैसे वो आहना से बात कर रहा हो। 


सात साल पहले,


अयांश आहना का हाथ पकड़े हुए एयरपोर्ट पर खड़ा था। दोनों उदास आँखों से एक दूसरे को देख रहे थे। राकेश और कबीर भी वहीं थे। वो दोनों अयांश और आहना से दूर खड़े हुए थे जिससे अयांश और आहना आपस में आराम से बात कर सके पर उन दोनों के बीच तो खामोशियां थी। बस दोनों बिना कुछ कहे एक दूसरे को देखे जा रहे थे। रिद्धिमा की तबियत ठीक नही थी इसलिए वो नही आई थी। 


कुछ वक्त बाद राकेश ने उनके पास आकर अयांश से कहा, “तुम्हें अब जाना चाहिए बेटा।” 


“जी पापा।” कहकर अयांश राकेश और कबीर से मिलकर आहना ने सामने आया जिसकी आँखों में आँसू थे। अयांश की आँखें भी नम हो गई पर उसने अपने आँसूओं को बहने से रोक लिया क्योंकी उसे आहना के लिए मजबूत रहना था। उसने आहना के हाथ को थामा और उसके करीब आकर उसके माथे को अपने होठों से छू लिया और कहा, “मैं जल्दी ही आ जाऊंगा तुम्हारे पास वापिस। तब तक अपना ख्याल रखना, टेडी बियर।” 


अयांश ने आहना का हाथ छोड़ा और जाने के लिए मुड़ा तो आहना ने उसका हाथ पकड़ लिया जैसे वो उसे जाने ना देना चाहती हो। कबीर ने आहना को संभाला और कहा, “वो लेट हो रहा है, बेटा। उसे जाने दो।” 


आहना ने धीरे से अयांश का हाथ छोड़ दिया। अयांश भी बहुत उदास था पर उसने आहना के सामने खुदको ठीक रखा और सबको बाय बोलकर अपने बैग लेकर अंदर चला गया। उसने पीछे मुड़कर आहना को नही देखा। जो आँसू उसने अब तक रोक रखे थे वो उसकी आँखों से बह गए। उसने अपने हाथ को देखा जो कुछ वक्त पहले आहना के हाथ में था और सोचने लगा, “पता नही क्यों ये हाथ छोड़ने मुश्किल हो जाते है किसी अपने से दूर जाने के लिए।” 


बाहर खड़ी आहना जो अभी भी अयांश को देख रही थी, वो भी यही सोचने लगी, “पता नही क्यों ये हाथ छोड़ने मुश्किल हो जाते है किसी अपने को खुदसे दूर भेजने के लिए।” 


आहना वहीं खड़ी अयांश को तब तक देखती रही जब तक वो उसकी आँखों से ओझल नही हो गया। राकेश और कबीर आहना को लेकर घर के लिए निकल गए। 


एयरपोर्ट पर अयांश अपना सामान जमा करवाकर और बोर्डिंग पास लेकर वेटिंग एरिया में आकर बैठ गया और अपनी फ्लाइट की अनाउंसमेंट होने का इंतजार करने लगा। थोड़ी देर बाद एक लड़की उसके पास आकर बैठ गई। उसने अपने साथ बैठे अयांश को देखा और कहा, “अयांश, तुम यहाँ।” 


अपना नाम सुनकर अयांश ने साइड में देखा तो थोड़ा हैरान रह गया। उसके साथ जो लड़की बैठी थी वो कोई और नही बल्कि नुपुर थी। 


“हेलो।” अयांश ने नुपुर से कहा।


“तुम कहाँ जा रहे हो?” नुपुर ने पूछा। 


“अमेरिका और तुम?” अयांश ने पूछा। 


नुपुर मुस्कुराने लगी और उसने कहा, “मैं भी अमेरिका ही जा रही हूँ। फाइनली मुझे किसी की कंपनी मिल गई।” 


“क्या तुम भी स्टडीज के लिए जा रही हो?” अयांश ने पूछा। 


“हाँ, मैं भी स्टडीज के लिए जा रही हूँ।” नुपुर ने अयांश से झूठ बोल दिया जबकी सच ये था कि वो वहाँ पढ़ाई के लिए नही जा रही थी। वो वहाँ अयांश के लिए जा रही थी। रिद्धिमा ने ही उससे कहा था कि वो भी अयांश के साथ ही अमेरिका जाए और वहाँ उसके साथ रहते हुए उसे कुछ भी ऐसा करके फंसा सके जिससे अयांश को आहना को भूलकर उससे शादी करनी पड़ जाए। टीना भी इसके लिए मान गई क्योंकी वो जानती थी नुपुर अयांश को पसंद करती है। 


कुछ देर इंतजार करने के बाद उनकी फ्लाइट की अनाउंसमेंट हो गई और वो दोनों प्लेन के अंदर आ बैठे। उन दोनों की सीट एक साथ ही थी जिसे देखकर नुपुर मन ही मन में बहुत खुश हुई।


“तुम वहाँ कहाँ रहने वाली हो?” अयांश ने उससे पूछा। 


“मैं अपनी दोस्त के हॉस्टल जाऊंगी अभी के लिए लेकिन मुझे जल्द ही एक अपार्टमेंट ढूंढना होगा।” नुपुर ने कहा।


“तुम मेरे साथ मेरे अपार्टमेंट में रह सकती हो अगर चाहो तो।” अयांश ने कहा पर उसे ये मालूम नही था कि अंजाने में वो अपनी जिंदगी की कितनी बड़ी गलती कर रहा है। 


“यही तो मैं चाहती हूँ की मैं तुम्हारे साथ आकर रहूं।” नूपुर ने खुश होते हुए मन ही मन में कहा और फिर अयांश से पूछा, "क्या मैं सच में तुम्हारे साथ रह सकती हूँ?" 


“हाँ, तुम मेरी मम्मी की सबसे अच्छी दोस्त की बेटी हो, जिसका मतलब है कि तुम मेरी भी दोस्त हुई और मैं हमेशा अपने दोस्तों की मदद करता हूँ।” अयांश ने उसकी ओर देखे बिना कहा। 


“थैंक्यू, अयांश।” नुपुर ने उससे कहा और फिर मन ही मन में कहा, “तुमने तो मेरा काम बहुत ही ज्यादा आसान कर दिया। अब मुझे तुम्हारे करीब आने और तुमसे शादी करने से कोई नही रोक सकता।” वो मुस्कुराने लगी। आखिरकार, यह उसके प्लैन का ही एक हिस्सा था कि वो अमेरिका में वही रहेगी जहाँ अयांश रहेगा। वो इसके लिए कुछ दिन इंतजार करने वाली थी लेकिन जब अयांश ने कहा कि वो उसके साथ आकर रह सकती है तो वो ना कैसे कह सकती थी। 


पूरे बारह घंटे सफर करने के बाद, वो दोनों अमेरिका पहुँचे। उन्होंने अपना अपना सामान लिया और एयरपोर्ट से बाहर आ गए। अयांश का दोस्त, समीर वहाँ बाहर खड़ा उसका इंतजार कर रहा था। जैसे ही समीर ने अयांश को देखा, वो खुश हो गया और अयांश के पास आकर उसे गले लगाते हुए कहा, “वेलकम भाई, आखिरकार तु यहाँ आ ही गया।” 


“कैसा है तू?” अयांश ने उससे दूर होकर पूछा। 


“एकदम बढ़िया।” समीर ने कहा और उसकी नजर अयांश के पीछे खड़ी नूपुर पर गई तो उसने अयांश से पूछा, “ये कौन है, अयांश। तेरी गर्लफ्रेंड।”   


“समीर, तु गलत समझ रहा है। ये मेरी गर्लफ्रेंड नही है। मेरी दोस्त है, नूपुर। हमारे साथ ही रहने वाली है।” अयांश ने कहा और नुपुर को समीर से मिलवाया। समीर ने मुस्कुराते हुए नूपुर की तरफ अपना हाथ बढ़ाया। नुपुर ने उससे हाथ मिलाया। 


समीर उन दोनों को अपने अपार्टमेंट ले आया। ये एक छोटा-सा दो बेडरूम का अपार्टमेंट था जिसमें एक छोटी-सी रसोई और एक लीविंग रूम था जिसमें एक सोफा और दो कुर्सियाँ थी। सोफे और कुर्सियों के बीच एक टेबल था और सामने दीवार पर टीवी भी लगा हुआ था।


समीर ने उन्हें पानी पिलाया। पानी पीकर नुपुर ने अयांश से कहा, “अयांश, मुझे मेरा कमरा बतादो कहाँ है। मुझे फ्रेश होना है।” 

अयांश सोफे से उठ गया। नुपुर ने अपना बैग लिया और उसके पीछे चल दी। अयांश ने एक कमरे का दरवाजा खोला।  


“ये तुम्हारा कमरा है। प्लीज बी कम्फ़र्टेबल।” अयांश ने मुस्कुराते हुए नुपुर से कहा और वहाँ से जाने ही वाला था कि नूपुर ने उसका हाथ पकड़कर उसे रोक लिया और पूछा, “अयांश, अगर मैं तुम्हारे साथ नही आती तो क्या तुम इस कमरे में रहने वाले थे?” 


अयांश को नुपुर का इस तरह उसका हाथ पकड़ना अच्छा नही लगा तो उसने जल्दी से अपना हाथ छुड़वाया और कहा, “हाँ, मैं इस कमरे में रहने वाला था लेकिन तुम परेशान मत हो। मैं समीर के साथ रूम शेयर कर सकता हूँ।” 


“थैंक्यू, अयांश। तुम मेरे लिए इतना सब कुछ कर रहे हो। तुम्हें अपना कमरा किसी और के साथ शेयर करने की आदत नही होगी फिर भी तुम मेरे लिए ये कर रहे हो।” नुपुर ने कहा और खुशी से अयांश के गले लग गई।


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Friday, 26 June 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 12


 

अयांश अपनी आगे के पढ़ाई के लिए अमेरिका जाना चाहता था। उसने जब आहना को इस बारे में बताया तो आहना उदास हो गई हालांकि वो पहले से ही जानती थी ये अयांश का सपना है और अयांश एक दिन इस सपने के लिए अमेरिका जाएगा पर उसे डर था कि अगर अयांश उससे दूर चला गया तो वो उसे खो देगी। उसे इस तरह देखकर अयांश ने कहा, “मैं वहाँ सिर्फ दो साल के लिए जा रहा हूँ, हमेशा के लिए नही।”


आहना ने उसकी ओर देखा और कहा, "मैं तुम्हें रोकूंगी नही क्योंकि मुझे पता है की तुम्हारा सपना है एक सक्सेसफुल बिजनेस मैन बनना पर पता नही क्यों तुम्हारा दो साल कहना भी ऐसा लग रहा है जैसे हमेशा के लिए दूर जा रहे हो तुम मुझसे।”


आहना की आँखों में आँसू आ गए। अयांश ने उसे गले लगाया और उसके माथे पर किस किया। अयांश को इस बात की परवाह नही थी कि लोग उन्हें देख रहे हैं लेकिन कैफे में सभी की निगाहें उन पर थी। 


“अयांश, मुझे छोड़ दो। सब हमें देख रहे है।” आहना ने कहा। 


अयांश ने उसे छोड़ दिया और पूछा, “मैं अपने लिए कुछ कपड़े खरीदना चाहता हूँ। क्या तुम मेरे साथ मॉल चलोगी?” 


"चलो चलते है।" आहना ने खड़े होकर कहा और वो दोनों कैफे से बाहर आ गए। दोनों पास ही एक मॉल में गए। अयांश एक दुकान में गया पर उससे कुछ समझ नही आ रहा था कि क्या खरीदें? उसे कन्फ्यूस देखकर आहना आगे बढ़ी और उसने जल्दी से अयांश के लिए दस जीन्स और टी-शर्ट सेलेक्ट की। आहना ने उन्हें दुकानदार को दिया और कहा "इन्हें पैक कर दीजिए।” 


अयांश ने बिल चुकाया, कपड़ो के बैग लिये और आहना के साथ दुकान से बाहर आ गया। 

“मेरी शॉपिंग हो गई। चलो चलते है अब घर।” अयांश ने कहा। आहना उसके साथ चलने लगी तभी उसकी नज़र सामने एक दुकान पर गई तो उसने अयांश से कहा, “अयांश, तुम जाकर ये सारे बैग गाड़ी में रखो। मैं थोड़ी देर में आती हूँ। मुझे अभी याद आया की मुझे कुछ जरूरी सामान लेना है।” 


“मैं तुम्हारे साथ आता हूँ ना।” अयांश ने कहा पर आहना ने मना कर दिया तो अयांश सारे बैग लेकर वहाँ से चला गया। उसके जाने के बाद आहना दुकान में गई। उसने वहाँ से एक ब्रेसलेट खरीदा और उसे लेकर मॉल से बाहर आ गई। उसने पार्किंग में आकर देखा की अयांश गाड़ी के बाहर खड़ा उसका इंतजार कर रहा था। 


“चलो, अयांश।” आहना ने अयांश के पास आकर कहा। वो दोनों गाड़ी में बैठ गए। अयांश ने आहना को घर छोड़ा और फिर अपने घर चला गया।


अयांश की फ्लाइट तीन दिन बाद की थी। रात में वो घर के स्टडी रूम में चला गया जहाँ राकेश अपना कुछ काम कर रहे थे। उसने दरवाजा खटखटाया और अंदर चला गया। 


"पापा मैं आपसे आहना के बारे में बात करना चाहता हूँ।” उसने सामने पड़ी कुर्सी पर बैठते हुए कहा।


राकेश ने कंप्यूटर स्क्रीन से नजरें हटाकर उसकी ओर देखा। एक मिनट के बाद, उन्होंने कहा, "मुझे पता है कि तुम किस बारे में बात करने आए हो? तुम परेशान हो कि जब तुम दूर होंगे तो आहना यहाँ अकेली होगी और अगर रिद्धिमा या किसी और ने उसके साथ कुछ गलत करने की कोशिश की तो क्या होगा? यही बात है ना?” 


“जी पापा। यही बात है।” अयांश ने कहा और फ़िर पूछा, “पापा क्या आपको मेरा सबसे अच्छा दोस्त निखिल याद है?”  


“हाँ, बिल्कुल याद है। वो तुम्हारे साथ स्कूल में पढ़ता था।” राकेश ने कहा।

“वो भी आहना को पसंद करता है और मुझे डर है कि वो आहना के साथ कुछ गलत करने की कोशिश करेगा।” अयांश ने सीरियस होकर कहा।


राकेश ने स्टडी टेबल की दराज खोली। उन्होंने उसमें से एक लेटर निकालकर अयांश को देते हुए कहा, "ये लेटर आहना को दे देना।”


अयांश ने लेटर अपने हाथ में लिया और पूछा, “ये किसलिए है पापा? ” 


“आहना की ग्रेजुएशन हो चुकी है इसलिए मैं उसे अपनी कंपनी में जोब दे रहा हूँ। अगर वो हमारी कंपनी ज्वॉइन करती है तो वो हमेशा मेरी नज़रों के सामने रहेगी। आहना जोब के साथ-साथ पढ़ाई भी जारी रख सकती है। अगर वो और पढ़ना चाहती है तो मैं उसकी आगे की पढ़ाई का खर्चा उठाऊंगा।” राकेश ने कहा। 


“ठीक है पापा। मैं आहना से बात करके उसे ये लेटर दे दूंगा।” अयांश ये कहकर वहाँ से जाने ही वाला था कि राकेश ने उसे वापस बुलाया और कहा, “अयांश, मैंने आहना को तुम्हारे लिए इसलिए चुना है की वो जिंदगी के हर कदम में तुम्हारी ताकत बने। अगर तुम उससे प्यार करते हो तो उसे अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाओ, कमजोरी नही।” 


अगले दिन शाम को अयांश आहना के घर जाता है। आहना लिविंग रूम में ही बैठी थी। अयांश को वहाँ देखकर वह मुस्कुराई और उसे गले से लगा लिया। अयांश ने उसके माथे पर किस किया और आहना के साथ बैठ गया। आहना ने उसका हाथ पकड़ लिया। 


“क्या तुम मुझे मिस कर रहे थे, चॉकलेट? आहना ने अयांश की आँखों में देखते हुए पूछा। 


“हाँ, तुम्हें बहुत याद कर रहा था।” अयांश ने कहा।


“तुम अभी दूर भी नही गए और अभी से ही तुम्हें मेरी याद आने लगी। क्या होगा जब तुम मुझसे दूर हो जाओगे?” आहना ने पूछा और मुस्कुरा दी। 


“फिर, मैं तुम्हें रोज हजारों फोन कॉल से परेशान करूंगा।” आहना उसकी बातों पर हँसी, उसके गाल पर किस करके कहा, "मैं तुम्हें बहुत याद करूँगी।”


अयांश ने अपनी जेब से राकेश का दिया हुआ लेटर निकाला और आहना को देते हुए कहा, “पापा ने ये लेटर मुझे तुम्हें देने के लिए कहा था। ये तुम्हारी जोब के लिए है।” 


“मेरी जोब?” आहना ने लेटर को देखते हुए पूछा। 


“आहना, अब तुम्हारी ग्रेजुएशन हो चुकी है तो पापा चाहते है कि तुम हमारी कंपनी में काम करो। उन्होंने कहा कि तुम जोब के साथ-साथ आगे की पढ़ाई भी कर सकती हो अगर करना चाहती हो।” 


“पर मैं अभी जॉब नही करना…..” आहना ने कहना चाहा पर अयांश ने उसकी बात बीच में ही काटते हुए कहा, “मुझे पता है आहना की तुम पेंटर बनना चाहती हो पर मेरी बात ध्यान से सुनो। तुम्हें पता है कि मैं तुमसे कभी झूठ नही बोलूंगा। पापा ने तुम्हें ये जॉब इसलिए दी है जिससे निखिल या मेरी मम्मी  को तुम्हारे साथ कुछ गलत करने का मौका न मिल सके। तुम जानती हो कि मेरी मम्मी हमारे रिश्ते के खिलाफ है और निखिल, मुझे डर है कि वो तुम्हारे साथ कुछ गलत करने की कोशिश करेगा। अगर तुम पापा के साथ काम करोगी तो तुम हमेशा उनकी नजरों के सामने रहोगी और वो तुम्हारे साथ कुछ गलत नही होने देंगे जब मैं यहाँ नही रहुंगा।”  


अयांश ने उसे समझाया और उसके जवाब का इंतजार करने लगा। इस बारे में बहुत सोचने के बाद आखिरकार आहना मान गई और उसने कहा, "ठीक है, लेकिन मैं हर वक्त राकेश अंकल के साथ रहूंगी। मैं नही चाहती कि वो मुझे ऑफिस या कहीं पर भी अकेला छोड़े। मुझे भी निखिल से बहुत डर लगता है। याद है जब वो मेरे घर आया था और उसने मेरे करीब आने की कोशिश की थी। तुम नही आते तो क्या करती उस वक्त मैं।”


“वो सब पुरानी बातें थी। उन्हें भूल जाओ अब और जाकर तैयार हो जाओ। मैं तुम्हें कहीं लेके जाना चाहता हूँ।” अयांश ने कहा।


आहना खुश हो गई और उसने पूछा, “कहाँ लेकर जा रहे हो?” 


“सरप्राईज है। अब जाकर तैयार हो जाओ।” अयांश ने कहा तो आहना मुस्कुराते हुए अपने कमरे में चली गई।


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Tuesday, 23 June 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 11

 


अयांश के आहना को सबके सामने प्रपोज किया और आहना को  अँगूठी वापिस पहना दी जिसे देख नुपुर का दिल टूट गया और निखिल को बहुत गुस्सा आया। उसे गुस्से में देख रिद्धिमा समझ गई कि निखिल आहना को पसंद करता है। ये बात जानकर रिद्धिमा को बहुत खुशी हुई। निखिल आहना को अयांश के साथ नही देख पा रहा था इसलिए वहाँ से जाने लगा तो रिद्धिमा भी उसके पीछे पीछे बाहर आ गई।


बाहर आकर रिद्धिमा ने देखा की निखिल अपनी गाड़ी में बैठने ही वाला था। रिद्धिमा ने निखिल को आवाज लगाकर रोका और उसके पास जाकर कहा,  "निखिल, क्या मैं तुमसे कुछ बात कर सकती हूँ?" 


"जी आंटी।" निखिल ने गाड़ी का दरवाजा बंद करते हुए कहा। 


“क्या तुम आहना को पसंद करते हो?” रिद्धिमा ने मुस्कुराते हुए पूछा। 


“सॉरी आंटी, मैं आपको ये नही बता सकता।” निखिल ने कहा। 


“क्यों नही बता सकते बेटा? अगर तुम मुझे इस बारे में बताओ तो मैं तुम्हारी मदद करूंगी आहना से तुम्हारी शादी करवाने में।” रिद्धिमा ने कहा। 


“मैं करता हूँ आहना को पसंद पर आपने देखा न की वो अयांश को पसंद करती है और अयांश उसे पसंद करता है और आप मेरी हेल्प क्यों करेंगी आहना से मेरी शादी करवाने में जब आपका बेटा भी उससे शादी करना चाहता है। आप तो अपने बेटे का साथ देंगी ना?” निखिल ने कहा।


“मैं अयांश का साथ नही देने वाली। मैं आहना से बहुत नफरत करती हूँ।  मैं नही चाहती अयांश उससे शादी करे क्योंकी वो मेरी बहु बनने के लायक नही है। अगर तुम आहना को चाहते हो तो मैं खुद आहना से तुम्हारी शादी करवाऊंगी।” रिद्धिमा ने उसे देखते हुए कहा। 


रिद्धिमा की बाते सुन निखिल कुछ सोचने लगा और फिर कहा, “ठीक है पर आप जल्दी ही कुछ करेंगी। मैं आहना को अयांश के साथ नही देख सकता।” 


रिद्धिमा ने उसके कंधे पर हाथ रखा और कहा, “अभी नही, बेटा। एक बार, अयांश यहाँ अपनी पढ़ाई पूरी कर ले। फिर आगे की पढ़ाई के लिए वो अमेरिका चला जाएगा दो साल के लिए। उस वक्त तुम आहना से शादी कर लेना क्योंकी अयांश यहाँ नही होगा तो आहना को बचाने वाला भी कोई नही होगा। उस वक्त हम ये सब प्लान करेंगे की तुम आहना को यहाँ से दूर कैसे लेके जाओगे उससे शादी करने के लिए।” रिद्धिमा ने निखिल को समझाते हुए कहा। 


“आप क्या चाहती है की मैं आहना और अयांश को एक दूसरे के साथ देखता रहूं तब तक।” निखिल ने गुस्से में कहा। 


“कुछ ही महीनों में तुम सबके एग्जाम्स शुरू होने वाले है। उसके बाद सिर्फ दो साल की बात और है। थोड़ा तो बर्दाश्त करना होगा उन्हें साथ देखना तुम्हें अगर तुम आहना को पाना चाहते हो। मैं भी कर ही रही हूँ ना उस आहना को अपने बेटे के साथ बर्दाश्त। मदद तो मैं तुम्हारी अभी भी कर सकती हूँ पर इस वक्त अयांश यहाँ है और आहना के साथ अगर कुछ भी हुआ तो उसे पता लगाने में ज्यादा देर नही लगेगी की ये सब हमने किया है इसलिए दो साल का इंतजार तो करना ही होगा।” रिद्धिमा ने उसे समझाया। 


निखिल को भी रिद्धिमा की बात सही लगी। वो रिद्धिमा की बात मान गया क्योंकि आहना से शादी करने का मौका वो छोड़ नही सकता था। 


निखिल अपनी गाड़ी में बैठकर वहाँ से निकल गया और रिद्धिमा अंदर आ गई। अंदर आकर उसने देखा की आहना अयांश का हाथ थामे खुशी से खड़ी थी। राकेश और कबीर भी उनके साथ खड़े थे। उसने पहले आहना को नफरत भरी निगाहों से देखा फिर मुस्कुराते हुए आहना और अयांश की ओर चल दी। 


उन्होंने मुस्कुराते हुए पहले अयांश को गले लगाया फिर आहना के सामने आकर उसे गले लगाते हुए उसके कानों मे कहा, “जितना खुश होना है हो लो अभी क्योंकि मैं तुम्हें ज्यादा दिन अयांश के साथ नही रहने दूंगी।”   


आहना ने हैरानी से रिद्धिमा को देखा। आहना को रिद्धिमा की बात से बहुत बुरा लग रहा था और साथ ही डर भी की वो अयांश को खो देगी पर उसने वो डर अपने चेहरे पर नही आने दिया और अयांश को देखकर मुस्कुराने लगी। 


अयांश ने केक काटा और फिर सबने खूब डांस किया। देर रात सभी खाना खाकर अपने घर चले गए। अयांश चाहता था की आहना उसके साथ थोड़ी देर और रुके पर कबीर के साथ होने की वजह से वो आहना को नही रोक सकता था। आहना राकेश से मिली और अयांश को बाय बोलकर गाड़ी में बैठकर चली गई। 


अभी उन्हें अयांश के घर से निकले हुए दस मिनट ही हुए थे की आहना के फोन पर किसी का मैसेज आया। वो जानती थी की मैसेज अयांश का ही होगा इसलिए उसने पहले कबीर को देखा, जिनका सारा ध्यान रोड पर था। उसने अपना फोन अनलॉक किया और अयांश का मैसेज पढ़ने लगी जिसमें लिखा था “आहना, मैं तुम्हे बहुत मिस कर रहा हूँ। तुम्हें रोकना चाहता था पर अंकल साथ थे इसलिए खुदको रोकना पड़ा तुम्हें रोकने से पर अब तुम्हारी बहुत याद आ रही है।” 


आहना मैसेज पढ़कर मुस्कुराते हुए मैसेज टाइप करने लगी। कबीर ने उसे ऐसे फोन में देखते हुए मुस्कराते देखा तो कहा, “लगता है अयांश को भी हमें अपने साथ ले आना चाहिए था।” 


आहना ने फोन नीचे रखा और कबीर से पूछा, “आप ऐसा क्यों कह रहे है पापा?” 


“वो तुम्हें इतना याद कर रहा है की अभी दस मिनट ही हुए है वहाँ से निकले हुए और उसके मैसेज आने शुरू भी हो गए। हमारे होने वाले दामाद का मन नही लग रहा तुम्हारे बिना।” कबीर ने मजाक में उसे छेड़ते हुए कहा। 


“क्या पापा आप भी?” आहना ने कहा और शरमाते हुए बाहर देखने लगी। 


कबीर हँसने लगे। आहना ने उनकी तरफ देखा तो उन्होंने हँसना बंद कर दिया पर अगले ही पल फिर हँसने लगे। ये देखकर आहना भी हँसने लगी। कबीर ने प्यार से उसका सिर सहलाया और फिर गाड़ी चलाने लगे। 


एग्जाम्स शुरू होने से ठीक एक महीना पहले अयांश और आहना ने एक साथ पढ़ना शुरू किया। ज्यादातर दोनों आहना के घर बैठकर पढ़ा करते थे और पढ़ते हुए अयांश उसके घर पर ही सो जाया करता था। आहना जहाँ सभी किताबें अच्छे से पढ़ना चाहती थी की अच्छे नंबर लाए वहीं अयांश सिर्फ पास होने लायक जितना ही पढ़ना चाहता था। आहना ने बहुत बार उसे कहा की वो सब कुछ पढ़े पर उसने आहना की बात नही मानी। 


एग्जाम से एक दिन पहले वो दोनों ही देर रात तक आहना के घर में हॉल में बैठे हुए एक साथ पढ़ रहे थे और थक कर कब वहीं सो गए, उन्हें पता ही नही चला। 


सुबह कबीर जब अपने कमरे से निकलकर हॉल में आए तो उन दोनों को साथ देखकर मुस्कुरा उठे। 


"अयांश आहना, उठ जाओ। कॉलेज के लिए लेट हो जाओगे तुम दोनों।” कबीर ने उन्हें उठाते हुए कहा। 


“सोने दीजिए न पापा।” आहना ने नींद में ही कहा। 


“आहना, एग्जाम है बेटा आज तुम्हारा। उठ जाओ।” कबीर ने कहा। एग्जाम का नाम सुनते ही आहना एकदम से उठ गई और दीवार पर लगी घड़ी में टाइम देखा। उसने अयांश को उठाया और तैयार होने अपने कमरे में चली गई। 


अयांश भी गेस्ट रूम में जाकर तैयार होने लगा। नाश्ता आज कबीर ने बना लिया। उन दोनों ने जल्दी से नाश्ता किया और कॉलेज के लिए निकल गए। बीस मिनिट बाद दोनों कॉलेज पहुँच गए। 


“थैंक गॉड टाइम पर पहुँच गए।" आहना ने कहा और अयांश को  देखकर मुस्कुरा दी।


“ऑल द बेस्ट, टेडी बियर।” अयांश ने कहा और उसका हाथ पकड़ लिया। 


“ऑल द बेस्ट, चॉकलेट।” आहना ने भी कहा और दोनों अपना रोल नम्बर चेक करके अपनी अपनी सीट पर आकर बैठ गए। आहना ने ठीक पीछे निखिल आकर बैठ गया। 


आहना ने घबराकर पीछे मुड़कर अयांश को देखा तो उसने हल्का सा मुस्कुराकर उसे परेशान ना होने का इशारा किया। टीचर ने क्लास में आकर सबको पेपर दे दिए। आहना ने अपना पूरा ध्यान पेपर में लगा लिया। 


उनके सभी एग्जाम बहुत अच्छे गए। आखिरी एग्जाम के बाद अयांश आहना को लेकर उसी पार्क में आया जिसमे वो दोनों बचपन में आया करते थे। 


“थैंक गॉड, एग्जाम्स खत्म हो गए।” अयांश ने मुस्कुराते हुए कहा। 


आहना हँसने लगी और कहा, “तुम तो ऐसे कह रहे हो जैसे तुम्हारा कोई बहुत बड़ा काम खतम हुआ है।” 


“अब हर कोई आपके जैसा टॉपर नही होता न मैडम जो खुशी खुशी  सारे एग्जाम्स दे।” अयांश की बात सुनकर आहना ने उसके कंधे पर मारा और हँसने लगी। 


आहना और अयांश के कॉलेज के दो साल जल्दी से बीत गए और उनकी ग्रेजुएशन पूरी हो गई। इन दो सालों में उन दोनों का प्यार एक दूसरे के लिए और गहरा होता गया। पिछले दो सालों में उन दोनों ने एक साथ बहुत सारी खूबसूरत यादें बनाई। रिद्धिमा और निखिल ने उनके बीच समस्याएं पैदा करने की कोशिश की, लेकिन एक दूसरे पर उनके विश्वास और उनके प्यार ने उन समस्याओं को जीतने नही दिया। राकेश ने अयांश को आगे की पढ़ाई के लिए अमेरिका भेजने का फैसला किया। 


अयांश और आहना एक कैफे के अंदर बैठे थे। अयांश ने जब आहना को बताया कि वो अमेरिका जा रहा है तो आहना के चेहरे पर उदासी छा गई


Continued In जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 12

Monday, 22 June 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 10

 


रिद्धिमा टीना से मिलने आई थी जहाँ उसकी मुलाकात टीना की बेटी नुपुर से हुई। रिद्धिमा अयांश को नुपुर से मिलवाना चाहती थी क्योंकि उसे उम्मीद थी की नुपुर से मिलने के बाद अयांश आहना को भूल जाएगा इसलिए उन्होंने टीना और नुपुर को अयांश की बर्थडे पार्टी में इनवाइट किया। टीना ने पहले तो मना कर दिया पर नुपुर ने रिक्वेस्ट की तो उसे मानना पड़ा। 


शाम में अयांश की बर्थडे पार्टी रखी गई थी जिसमें उसने अपने  स्कूल और कॉलेज के सभी फ्रेंड्स को बुलाया था। निखिल भी पार्टी में आया था। अयांश अपने स्कूल के दोस्तों के साथ बात कर रहा था पर बार-बार उसकी नज़र कबीर के पास खड़ी आहना पर चली जाती। आहना ने उसकी ओर देखा और उनकी नज़रे मिली तो अयांश ने उसे अपने पास आने का इशारा किया लेकिन आहना ने ना में गर्दन हिला दी। अयांश ने अपने दोस्तों से कुछ कहा और आहना के पास आ गया। 


“क्या हुआ, अयांश?" आहना ने कबीर से थोड़ा-सा दूर होकर उससे पूछा।


“मैं तुम्हारे साथ रहना चाहता हूँ।” अयांश ने कहा और उसकी आँखों में प्यार से देखा। 


“अयांश, तुम्हारे दोस्त यहाँ तुम्हारी बर्थडे पार्टी एन्जॉय करने आए है। तुम्हें उनके साथ रहना चाहिए। मेरे साथ तो तुम कभी भी वक्त बिता सकते हो।” आहना ने उसे समझाते हुए कहा तो अयांश उसके गाल पर किस करके वापिस अपने दोस्तों के पास चला गया। अयांश के सबने सामने ऐसे किस करने से आहना शर्मा गई और चुपचाप कबीर के पास आकर खड़ी हो गई।


सभी अंदर पार्टी एंजॉय कर रहे थे लेकिन रिद्धिमा बाहर खड़ी नूपुर और टीना के आने का इंतजार कर रही थी। थोड़ी देर के बाद एक गाड़ी घर के सामने आकर रूकी। जैसे ही रिद्धिमा ने नूपुर को गाड़ी से बाहर निकलते हुए देखा, वो खुशी से उसके पास गई और कहा, “नूपुर, आओ बेटा। मैं तुम्हारा ही वेट कर रही थी।”  


“वेट कराने के लिए सॉरी आंटी। वो मुझे रेडी होने में टाइम लग गया।” नुपुर ने कहा। 


रिद्धिमा ने उसके गाल को छुआ और कहा, “कोई बात नही बेटा। तुम बहुत प्यारी लग रही हो।” 


रिद्धिमा ने टीना को गले लगाया और उन्हें लेकर अंदर आ गई।  रिद्धिमा ने अयांश को अपने पास बुलाया और कहा, “अयांश, टीना आंटी से मिलो।” 


अयांश ने टीना के पैर छुए। टीना ने उसे बर्थडे विश किया। रिद्धिमा ने नुपुर को देखा और अयांश को उससे मिलवाते हुए कहा, “ये इनकी बेटी है, नूपुर।” 


“जानता हूँ मॉम। बचपन में मिल चुका हूँ बहुत बार इनसे।” अयांश ने रिद्धिमा से कहा और फिर नुपुर की तरफ देखकर अयांश ने उसे हेलो कहा। 


अयांश इतना हैंडसम लग रहा था की नूपुर उसे देखे ही जा रही थी। वो ये भी भूल गई कि वो कहाँ है। उसे ऐसे देखकर टीना ने हल्के से उसके हाथ पर मारा तो उसकी तंद्रा टूटी और उसने मुस्कुराते हुए अयांश से कहा, “हेलो, हैप्पी बर्थडेI” 


“थैंक्यू।” अयांश ने कहा। उनसे थोड़ी देर बातें करने के बाद वो अपने दोस्तों के पास चला गया। नुपुर को अयांश पसंद आने लगा था और वो मन ही मन में इस पसंद को पहली नज़र में प्यार का नाम दे चुकी थी।


रिद्धिमा ने आहना को ढूंढने के लिए इधर-उधर देखा। आहना भी अपनी कॉलेज की फ्रेंड्स से बाते करते हुए अयांश को देख रही थी जिसपर उसकी फ्रेंड्स उसे खूब छेड़ रही थी। रिद्धिमा ने आहना को आवाज लगाकर अपने पास बुलाया और कहा, “आहना, तीन गिलास जूस लाओ।” 


“जी आंटी।” आहना रिद्धिमा को ना नही कह सकती थी इसलिए किचन की तरफ चल दी। आहना अभी उनसे कुछ ही कदम दूर चली थी कि नुपुर ने पूछा, "ये कौन है, आंटी?" 


“ये हमारे एम्प्लॉय की बेटी है। तुम इसे हमारी नौकर समझो।” रिद्धिमा ने कहा और आहना की तरफ देखा। रिद्धिमा ने ये बात धीरे से कही थी पर फिर भी आहना ने सुन ली थी। वो किचन में आकर रोने लगी। 


अयांश ने जब देखा कि आहना किचन में गई है तो वो भी अपने फ्रेंड्स के आगे बहाना बनाकर उसके पीछे किचन में आ गया और उसे पीछे से कसकर गले लगा लिया। आहना ने बिना कुछ कहे खुदको उससे दूर किया। अयांश को ये अच्छा नही लगा क्योंकी वो सब बर्दाश्त कर सकता था पर आहना से दूर जाना नही और यहाँ आहना खुद अपने आप को उससे दूर कर रही थी। 


अयांश ने आहना को कंधो से पकड़ा और उसके सामने आ गया। जब उसने आहना के चेहरे को देखा तो परेशान हो गया क्योंकी वो समझ गया कि आहना रो रही थी। उसने प्यार से आहना से पूछा, “तुम रो क्यों रही थी?” 


आहना ने उसकी बात का कोई जवाब नही दिया तो उसने फिर पूछा, “आहना, क्या बात है?” 


आहना ने वो अँगूठी जो अयांश ने उसे दी थी अपनी उँगली से उतार दी और उसे अयांश के हाथ में रखते हुए कहा, "मुझसे दूर रहो अयांश और ये अँगूठी भी वापिस ले लो। मैं इसके लायक नही हूँ।”


अयांश ने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके होठों पर किस करने लगा। आहना ने खुदको अयांश से दूर करने की कोशिश की तो अयांश ने उसे कमर से पकड़ कर अपने और भी करीब कर लिया।  


कुछ देर बाद अयांश ने उसे छोड़ा और अपने कमरे में ले गया। उसने आहना को बेड पर बैठाया और खुद भी दरवाजा बंद करके उसके सामने बैठते हुए कहा, "बताओ, क्या हुआ?”


आहना की आँखों से आँसू बहने लगे और उसने कहा, “मैं तुम्हारे लायक नही हूँ, अयांश।” 


अयांश उसे फिर से किस करने लगा। जब वे अलग हुए, तो अयांश ने कहा, “सिर्फ तुम ही मेरे लायक हो। मैं सिर्फ तुम्हें चाहता हूँ और कभी भी कोई और तो क्या, तुम खुद अपने आप को कभी मुझसे दूर नही कर पाओगी क्योंकि मैं तुम्हें कभी ऐसा करने ही नही दूंगा। अब बताओ ये किसने कहा तुमसे?” 


उसे यकीन था कि रिद्धिमा ने ही आहना से ऐसा कुछ कहा था। अयांश ने उसके जवाब का इंतजार कर रहा था लेकिन आहना अयांश के आगे रिद्धिमा का नाम नही लेना चाहती थी इसलिए उसने कोई जवाब नही दिया। उसे चुप देखकर अयांश ने पूछा, "क्या मम्मी ने तुमसे ये कहा?


आहना ने हाँ में सिर हिलाया और कहा, "हां, लेकिन उन्होनें मुझसे यह सीधे सीधे नही कहा। वो अपनी दोस्त के साथ बात कर रही थी और उन्होनें कहा कि वो मुझे…” आहना कहते कहते रुक गई और आँसू भरी आँखों से नीचे देखने लगी। 


“मुझे बताओ, आहना।” अयांश ने कहा। 


“नौक… नौकर समझे।” कहते हुए आहना रोने लगी। अयांश ने उसे गले से लगा लिया। उसने आहना के आँसू पोंछे और कहा, “चलो मेरे साथ।” 


इससे पहले कि वो कुछ कह पाती, अयांश ने उसका हाथ पकड़ा और उसे नीचे ले गया। जब वो दोनों हॉल में आए तो रिद्धिमा की नजर उन पर पड़ी। 


अयांश आहना के साथ हॉल के बीच में आकर खड़ा हुआ और कहने लगा, “हेलो एवरीवन।"


सब उन दोनों को देखने लगे। अयांश को अहाना का हाथ थामे देखकर राकेश को जहाँ बहुत खुशी हुई वहीं रिद्धिमा को बहुत गुस्सा आ रहा था। अयांश ने आगे कहा, “थैंक्यू ऑल फॉर कमिंग टुडे। आज का दिन मेरी लाइफ का सबसे स्पेशल दिन है और मैं अपने इस स्पेशल दिन को और भी स्पेशल बनाना चाहता हूँ इसलिए मैं आज उस लड़की को प्रपोज करने जा रहा हूँ जिससे मैं बहुत प्यार करता हूँ।” 


आहना का दिल बहुत जोर से धड़क रहा था। अयांश उसका हाथ थामे हुए ही उसके सामने एक घुटने पर बैठ गया और उसे देखते हुए कहा, “आहना, मेरी प्यारी सी टेडी बियर, क्या तुम मेरे साथ लाइफटाइम के लिए रहना चाहोगी?” 


अयांश के दोस्त उन दोनों के लिए हूटिंग करने लगे। निखिल कोने में खड़ा गुस्से से ये सब देख रहा था। रिद्धिमा की नजर निखिल पर पड़ी तो उसे समझने में देर नही लगी की निखिल आहना को पसंद करता है। ये जानकर वो बहुत खुश हुई पर वहीं नुपुर का दिल टूट चुका ये जानकर की अयांश आहना से प्यार करता है। 


“हाँ अयांश, मैं तुम्हारे साथ हमेशा रहूंगी।” आहना ने कहा। अयांश ने आहना की उँगली में अँगूठी वापिस पहना दी और उसे गले लगा लिया। 


उनके सभी दोस्त उन्हें बधाइयां देने लगे। निखिल उन दोनों को साथ नही देख पा रहा था इसलिए वो वहाँ से बाहर आ गया। ये देख रिद्धिमा भी उसके पीछे चली आई।


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