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Monday, 13 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 27


 

कुछ दिन अस्पताल में रहकर अयांश घर वापिस आ गया। उसी दिन रात के वक्त जब अयांश खाने के लिए नीचे नही आया तो राकेश उसे नीचे लाने के लिए डाइनिंग टेबल से खड़े हुए। उन्हें उठते हुए देखकर रिद्धिमा ने पूछा, “तुम कहाँ जा रहे हो उठकर?” 


“अयांश को लेने जा रहा हूँ।” राकेश ने कहा। 


“तुम्हें उसकी फिक्र होती है। मुझे तो लगता था तुम्हें उस आहना के अलावा कुछ और याद ही नही रहता है।” रिद्धिमा ने  कहा। 


“आपको कोई जरूरत नही है उसे नीचे लाने की। आप शायद भूल रहे है उसका एक्सीडेंट हुआ है। उसे रेस्ट करने देना चाहिए जिससे वो जल्दी ठीक हो सके।” किचन से आती हुई नुपुर ने कहा और कुर्सी पर बैठ गई। 


राकेश ने गुस्से से नुपुर को देखा और पूछा, “अब तुम मुझे बताओगी की मुझे मेरे बेटे का ख्याल कैसे रखना है।” 


ये सुनकर नुपुर हँसने लगी और उसने कहा, “आपको अचानक से उसकी इतनी फिक्र कैसे होने लगी। जहाँ तक मुझे याद है आप तो उससे इस हद तक गुस्सा थे की आप बात तक नही करते थे उससे।” 


“तुम मेरे और अयांश के मामले में ना ही बोला करो तो बेहतर होगा क्योंकि तुम भूल रही हो की वो सब तुम्हारी वजह से ही हुआ था।” राकेश ने कहा और अपनी कुर्सी से खड़े होकर ऊपर चले गए। उन्होंने अयांश के कमरे के बाहर आकर दरवाज़े पर नॉक किया। 


अयांश अपने फोन में कुछ देख रहा था जब उसने दरवाज़े पर नॉक की आवाज सुनी। उसने दरवाज़े की तरफ देखा तो राकेश को वहाँ देखकर थोड़ा हैरान रह गया। उसने उन्हें अंदर आने के लिए कहा। राकेश अंदर आकर उसके पास आए और कुछ कहने ही वाले थे कि उनकी नजर अयांश के फोन की स्क्रीन पर गई जिसमें आहना की तस्वीर थी। वो अयांश के पास बैठे और उन्होंने कहा, “जब तुम्हें आहना से इतना प्यार है तो तुमने उसे माफ क्यों नहीं किया जब वो तुमसे माफी मांग रही थी।”


“पापा, अगर मैं आहना को उस वक्त माफ कर देता तो हम साथ तो रहने लग जाते पर उस साथ में वो पहले वाली बात नही होती। वो पहले जैसा प्यार नही होता क्योंकि आहना के मन में नुपुर की वजह से कहीं न कहीं ये बात रहती की मैं उसके साथ जरूर हूँ पर उसका नही हूँ। मुझे उसे ये यकीन दिलाना है की मैं उसके अलावा किसी और का हो ही नही सकता। मुझे उसके दिल में फिर से वही प्यार जगाना है जैसा प्यार हमारा था और इसके लिए मेरा उससे अभी दूर रहना जरूरी है जिससे उसके मन में मेरे लिए प्यार बहुत ज्यादा बढ़ जाए क्योंकि दूरियां प्यार को मजबूत बनाती है। मुझे यकीन है की जब आहना के मन में मुझे खोने का डर आएगा तो उसका प्यार मेरे लिए बढ़ जाएगा।” अयांश ने कहा और राकेश को देखा। 


“उम्मीद है ऐसा है ही हो। अब चलो, मैं तुम्हें खाने के लिए नीचे ले जाने आया  हूँ।” राकेश ने कहा। अयांश को यकीन नही हुआ की राकेश उसे लेने आए है। उसे तो अभी भी यही लग रहा था की राकेश उससे नाराज है। 


राकेश ने उसका हाथ पकड़ कर उसे अच्छे से सहारा देकर खड़ा किया और ध्यान से उसे नीचे ले आए। उस दिन अयांश बहुत खुश था। 


राकेश अब उससे धीरे धीरे बात करने लग गए। वो रोज शाम को ऑफिस से घर आकर उसके साथ थोड़ा वक्त बिताते थे। अयांश ये जानकर खुश था की राकेश की नाराज़गी थोड़ी सी कम हो गई है। 


आहना भी रोज राकेश से ऑफिस में अयांश के बारे में पूछा करती थी। उसने अयांश को कॉल करके बहुत बार उससे बात करने की भी कोशिश की पर अयांश उसका फोन नही उठाता था। वो अयांश से मिलने उसके घर भी आती थी पर गार्ड उसे रिद्धिमा और नुपुर के कहने पर अंदर ही नही आने देते थे या फिर अयांश ही उससे मिलने से मना कर देता था। आहना को तकलीफ तो बहुत होती थी पर उसे उम्मीद थी की अयांश और उसके बीच की ये दूरियां ज्यादा देर तक नही चलेंगी। 


अयांश ने भी ठीक होने के बाद ऑफिस आना शुरू कर दिया था। आहना ने वहाँ भी बहुत बार उससे बात करने की कोशिश की पर अयांश हमेशा उसे नजर अंदाज कर देता। 


एक दिन ऑफिस में लंच टाइम हो रखा था इसलिए सारे एम्प्लॉय कैंटीन में लंच करने गए हुए थे। कबीर और राकेश भी एक मीटिंग के लिए हॉटल गए हुए थे। सिर्फ़ आहना ही थी जो लंच छोड़कर काम में लगी हुई थी। 


अयांश अपने केबिन से बाहर आया तो आहना को वहाँ बैठा देखकर हैरान रह गया। वो उससे पूछना चाहता था की वो लंच करने क्यों नही गई पर उसने खुद को रोक लिया और वहाँ से जाने लगा। 


आहना ने जब उसे देखा तो जल्दी से उठी और उसे रोकते हुए कहा, “अयांश, मुझे तुमसे एक बार बात करनी है बस।” 


अयांश चेहरे पर गुस्से वाले भाव के साथ पलटा और कहा, “मुझे तुमसे कोई बात नही करनी। तुम क्यों मेरे पीछे पड़ी हुई हो।” 


“तुम एक बार मेरी बात सुन लो, प्लीज़।” आहना ने कहा।


ये सुनकर अयांश हँसने लगा और उसने कहा, “देखा आहना, एक वक्त था जब ऐसे ही मैं तुम्हारे पीछे था की तुम एक बार मेरी बात सुन लो क्योंकि उस वक्त मुझे तुम्हारी सबसे ज्यादा जरूरत थी और मैं चाहता था कि उस वक्त तुम मेरे साथ रहो और आज देखो, तुम मेरी जगह पर हो बल्कि तुम्हें तो मेरी जरूरत भी नही है।” 


उसकी बात सुनकर आहना की आँखों से आँसू बहने लगे और उसने कहा, “ऐसा नही है अयांश।” 


अयांश उसके करीब आया और उसने कहा, “पता है आहना, मुझे चोट मेरी गाड़ी को टक्कर लगने से नही लगी और न ही जहाँ दिख रही है वहाँ लगी है।” उसने आहना का हाथ पकड़ कर अपने दिल पर रखा और फिर कहा, “असली चोट तो यहाँ लगी है जो तुम्हारे मुझे अपने आप से दूर करने पर लगी है जिसे कोई भी नही देख सकता। शुरू से ही तुम मुझे खुद से दूर करती आई हो। किसी ने हल्का सा कुछ कह दिया तो तुम मुझे अपने आप से दूर कर देती थी तो अब दूर ही रहो मुझसे।” 


अयांश वहाँ से जाने लगा तो आहना ने कहा, “तुम तो कहते थे की कभी मुझे खुदको तुमसे दूर करने ही नही दोगे तो फिर आज खुद क्यों दूर हो रहे हो।” 


अयांश ने मुड़कर उसे देखा और कहा, “हाँ, चाहता था तुम्हारे करीब रहना और मैंने कोशिश भी की पर तुम मुझसे दूरियां ही बनाती रही तो अब मैं खुद ये दूरियां बनाना चाहता हूँ।” 


अयांश ऑफिस से घर वापिस आ गया। नुपुर और रिद्धिमा लिविंग रूम में बैठी थी। अयांश भी वहाँ सोफे पर आकर बैठा ही था की नुपुर ने कहा, “मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।” 


अयांश ने उसपर ध्यान न देते हुए अपना फोन निकाला और उसपर कुछ देखने लगा। नुपुर अयांश का इस तरह उसे नजर अंदाज करना बर्दाश्त नही कर पाई और उसने कहा, “तुमसे बात कर रही हूँ मैं।” 


अयांश ने उसे देखा और कहा, “बोलो।” 


“हमारी शादी को इतना वक्त हो गया है और हम अभी तक मेरे घर नही गए है इसलिए इस संडे हम मेरे घर जा रहे है। मेरे पेरेंट्स ने इनवाइट किया है हमें लंच पर।” नुपुर ने कहा। अयांश मना करने वाला था पर फिर कुछ सोचकर उसने हाँ कह दिया।


Continued In जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 28

Sunday, 12 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 26


 

आहना की उँगली से अँगूठी गिरकर टेबल के पास जा गिरी जिसे देखकर उसका मन घबराने लगा। उसने अँगूठी उठाकर वापिस अपनी हाथ में कसकर पकड़ ली। उसने राकेश को देखा और कहा, “अंकल, मैं भी आपके साथ हॉस्पिटल जाऊंगी।” 


राकेश ने हाँ में सिर हिलाया। वो आहना और कबीर को साथ लेकर अस्पताल के लिए निकल गए। रास्ते में उन्होंने रिद्धिमा और नुपुर को भी इस बारे में बताया। 


अस्पताल ऑफिस से बहुत दूर था और रास्ते में उन सबको ट्रैफिक भी मिला इसलिए उन्हें वहाँ पहुँचने में बहुत वक्त लग गया। राकेश ने गाड़ी जैसे ही अस्पताल के बाहर रोकी, आहना ने जल्दी से गाड़ी का दरवाज़ा खोला और उतरकर अस्पताल के अंदर भाग गई। रिसेप्शन पर अयांश के बारे में पूछकर वो उसके वार्ड के सामने आई। वो दरवाजा खोलने ही वाली थी की तभी उसने दरवाजे के बीच लगे गोल आकार के शीशे से नुपुर को देखा, जो अयांश के करीब खड़ी होकर उसे पानी पिला रही थी। उसके हाथ वही रूक गए और वो बस उसी शीशे से अयांश को देखती रही, जिसके सिर और बाएं हाथ पर पट्टी बंधी हुई थी। 


राकेश ने गाड़ी पार्क की और कबीर के साथ अंदर आए। रिसेप्शन पर अयांश के बारे में पूछकर वो कबीर के साथ वार्ड की तरफ जा ही रहे थे की तभी उन्हें रिद्धिमा दिखाई दी। वो डॉक्टर से बात कर रही थी। राकेश भी कबीर के साथ उनके पास पहुँचे और डॉक्टर से अयांश के बारे में पूछने लगे। 


अयांश आहना के उसके आसपास होने के एहसास को न पहचाने ऐसा हो ही नही सकता था। उसे ऐसा लगा कि आहना उसके आसपास ही है इसलिए उसने दरवाजे की तरफ देखा। अयांश को दरवाज़े की ओर देखता पाकर आहना जल्दी से दीवार वाली साइड हो गई। 


अयांश को दरवाज़े की तरफ देखता पाकर नुपुर ने भी दरवाज़े की तरफ देखा। वो समझ गई कि अयांश किसके इंतजार में है इसलिए उसने कहा, “तुम जिसके इंतजार में हो न वो नही आने वाली। यही प्यार है उसका तुम्हारे लिए। तुम इतनी तकलीफ में हो और उसे तुम्हारा ख्याल तक नही है तो बेहतर यही होगा कि छोड़ दो उसका इंतजार करना तुम अब और अपने मन को समझालो की वो लौटकर नही आने वाली तुम्हारी जिंदगी में क्योंकि उसे आना होता तो अबतक वो यहाँ होती पर वो यहाँ नही है और मुझे देखो, तुम मुझे चाहते भी नही हो फिर भी तुम्हारे पास हूँ और तुम्हारा ख्याल रख रही हूँ। एनीवेज, क्या फायदा तुमसे कुछ भी कहने का। प्यार तो तुम फिर भी उस आहना को ही करोगे। मैं अभी आती हूँ।” 


अयांश आहना के बारे में इतना सबकुछ सुनना तो नही चाहता था पर उस वक्त वो चुप रहा क्योंकि उसके दिमाग में और भी बहुत कुछ चल रहा था। बाहर खड़ी आहना ने नुपुर की सारी बातें सुन ली थी। जैसे ही उसे एहसास हुआ की नुपुर दरवाजे की तरफ आ रही है वो दूसरी तरफ घूमकर खड़ी हो गई। नुपुर दरवाजे से निकलकर दूसरी ओर चली गई। उसके जाते ही आहना जल्दी से अयांश के वॉर्ड में चली गई। 


अयांश किसी गहरी सोच में खोया हुआ था। दरवाज़ा खुलने की आवाज़ से उसकी तंद्रा टूटी। उसने दरवाज़े की ओर देखा तो आहना को वहाँ देखकर वो हैरान रह गया। आहना उसके पास आई और उसे देखने लगी। 


आहना को देखकर अयांश की आँख से आँसू बहकर गाल पर आ गया। ये देखकर आहना अयांश के आँसू को पोंछने के लिए जैसे ही अपने हाथ को उसके चेहरे के करीब लाई, उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया। 


आहना उसके पास बैठ गई और उसने कहा, “अयांश, एक बार मेरी तरफ देखो।” 


अयांश ने उसे देखा और पूछा, “क्यों आई हो तुम यहाँ, आहना?” 


“मैं…मैं डर गई थी जब मुझे…मुझे पता चला की तुम्हारा एक्सीडेंट हो गया है। तुम्हें कुछ हो… हो जाता तो मैं…मैं तो जी ही नही पाती।” आहना ने रोते हुए कहा। 


“तुम्हें इससे क्या फ़र्क पड़ता है। तुम तो नफरत करने लग गई हो न मुझसे।” अयांश ने गुस्से में कहा। 


“ऐसा नही है, अयांश वो तो…” आहना ने कहना चाहा पर अयांश ने उसकी बात बीच में ही काटते हुए कहा, “तो फिर कैसा है हाँ। मेरे एक्सीडेंट की खबर सुनते ही तुम्हें ऐसा क्यों लगा की मुझे कुछ हो जाता तो तुम जी नही पाओगी।” 


“क्योंकि मैं तुम्हें तकलीफ में नही देख सकती।” आहना ने कहा। 


“और जो इतने वक्त से तुम मुझसे दूर रहकर हम दोनों को तकलीफ दे रही हो उसका क्या।” अयांश की बात सुनकर आहना रोने लगी। उसे ऐसे देखकर अयांश ने फिर कहा, “पता है आहना, मुझे लगता था की पूरी दुनिया मुझे गलत समझ सकती है और मुझे इन सब से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि मेरी आहना मुझे हमेशा समझेगी पर मैं गलत था। तुम मुझे नही समझ नही पाई बल्कि तुमने तो ये समझ लिया की मैंने तुम्हें धोखा दिया है।” 


आहना ने अपने आँसू पोंछे और कहा, “अयांश, मैं तुमसे दूर नही रहना चाहती थी पर जब मैंने तुम्हें नुपुर का हाथ थामे देखा तो मुझे बहुत बुरा लगा। उस वक्त मुझे ऐसा लगा की तुम मुझसे दूर हो गए हो।” 


“मैं जानता हूँ की मुझसे बहुत बड़ी गलती हुई थी पर उस गलती की इतनी बड़ी सजा मिलेगी मुझे तुमसे, ये नही सोचा था मैंने। मुझे लगा था मैं तुम्हें समझाऊंगा तो तुम मुझे माफ करदोगी और हम दोनों साथ मिलकर सब कुछ ठीक करदेंगे पर मैं गलत था और शायद अब कुछ ठीक नहीं हो सकता।” अयांश ने कहा। 


अपनी बातों में उन दोनों ने ध्यान ही नही दिया की राकेश, नुपुर, रिद्धिमा और कबीर वहीं दरवाजे पर खड़े है। अयांश की बात सुनकर आहना ने  उसका हाथ पकड़ लिया जिसे देखकर नुपुर ने अंदर जाना चाहा पर राकेश ने अपना हाथ दरवाजे पर लगाकर न में सिर हिलाते हुए उसे रोक दिया। नुपुर वही खड़ी गुस्से से आहना को देखने लगी। 


आहना ने अयांश के हाथ को देखते हुए कहा, “अयांश, मैं बस गुस्से में थी जिसकी वजह से मैंने तुम्हें कहा की मैं तुमसे नफरत करती हूँ पर सच ये है की हर पल मैंने तुमसे सिर्फ प्यार किया है। तुम मुझे माफ करदो, अयांश। अभी भी सब कुछ ठीक हो सकता है। आई प्रॉमिस हम इन सब से मिलकर बाहर आएंगे।” 


अयांश ने उसके हाथ से अपने हाथ को छुड़वाया और कहा, “दूर रहो मुझसे। तुम शायद भूल रही हो की मैं मैरिड हूँ।” 


ये सुनकर नुपुर मुस्कुराने लगी। आहना ने अयांश को हैरानी से देखा और कहा, “अयांश…” 


अयांश ने उसकी बात बीच में ही काट दी और गुस्से से कहा, “क्या अयांश हाँ, क्या अयांश…? तुमने ही मुझे याद दिलाया था ना की मैं मैरिड हूँ तो अब ये बात मैं खुद मान रहा हूँ की मैं मैरिड हूँ।” 


आहना रोने लगी और उसने कहा, “अयांश, प्लीज़।” 


अयांश ने उसे देखते हुए अपना सिर हिलाया और कहा, “प्यार के बाद अगर किसी वजह से नफरत हो जाए न, आहना तो उस नफरत के बाद प्यार दोबारा होना मुश्किल होता है।” 


आहना ने इस बार कुछ नही कहा तो अयांश ने कहा, “जाओ यहाँ से। मुझे रेस्ट करना है।” 


आहना ने अयांश को आखिरी बार देखा और वहाँ से बाहर जाने के लिए जैसे ही मुड़ी, उसने देखा कि सब दरवाजे पर खड़े हुए उसे ही देख रहे थे। उसकी नज़र रिद्धिमा और नुपुर पर गई जो कि मुस्कुरा रही थी। अयांश ने भी उन सबको देखा पर वो खामोश रहा। 


आहना जैसे ही वहाँ से जाने लगी, राकेश ने उसका हाथ पकड़ कर उसे रोकने चाहा पर आहना वहाँ नही रुकना चाहती थी इसलिए अपना हाथ छुड़वाकर वहाँ से चली गई। कबीर भी उसके साथ चले गए। राकेश भी आहना के पास जाना चाहते थे पर अयांश को देखते हुए उन्होंने खुद को रोक लिया और वार्ड के अंदर आ गए। उनके साथ रिद्धिमा और नुपुर भी चली आई। राकेश ने प्यार से अयांश के गाल को छूते हुए पूछा, “कैसे हो तुम?” 


अयांश को उस वक्त यकीन नही हुआ की राकेश उससे बात कर रहे है फिर भी उसने कहा, “मैं ठीक हूँ, पापा।” 


राकेश ने अयांश से आहना के बारे में कोई बात नही की क्योंकि वो नुपुर के सामने आहना के बारे में कोई बात नही करना चाहते थे। 


***


कबीर आहना को अस्पताल से घर ले आए। घर पहुँचकर आहना सीधे अपने कमरे में गई। वो दरवाजा बंद करके वहीं दरवाजे के सहारे बैठ गई और अपने घुटनों को पकड़कर रोने लगी। रोते हुए उसकी नज़र अयांश की उस पेंटिंग पर गई जिसे उसने बनाया था। 


वो उठकर उस पेंटिंग के पास आई और उसे अपने हाथ में पकड़कर रोते हुए कहने लगी, “मैं जानती हूँ तुम मुझसे नफरत नही कर सकते। तुम बस नाराज हो मुझसे पर कोई नही, मैं मना लूंगी तुम्हें। जानती हूँ गलती हम दोनों से हुई है और अब हम इसे मिलकर ठीक करेंगे। हम मिलकर सब कुछ ठीक करदेंगे।” 


उसने उस पेंटिंग को अपने गले से लगा लिया और बेड पर बैठकर अयांश के बारे में सोचने लगी। 


***


अयांश को अपना ध्यान रखने का कहकर राकेश रिद्धिमा के साथ अस्पताल से घर जाने के लिए निकल गए। उनके जाते ही नुपुर अयांश के सामने बैठी और उसने कहा, “याद है मैंने तुमसे रिसेप्शन वाले दिन कहा था की तुम अभी आहना से जितना प्यार करते हो एक दिन उतनी ही नफरत करोगे और देखो, आज तुम्हें आहना से नफरत हो ही गई।” 


अयांश ने नुपुर से कुछ नही कहा और उसे देखते हुए मन ही मन में सोचा, “गलतफहमी है ये तुम्हारी नुपुर। अयांश अपनी आहना से नाराज़ जरूर रह सकता है पर उससे नफरत कभी नही कर सकता।”


Continued In जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 27

Saturday, 11 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 25


 

आहना अयांश और नुपुर के वेडिंग रिसेप्शन में जाना चाहती थी पर कबीर नही चाहते थे की आहना वहाँ जाए। आहना के लिए उन्हें मानना पड़ा और वो तैयार होकर आहना के साथ रिसेप्शन के लिए निकल गए। 


वहाँ पहुँचकर वो दोनों जब हॉल के अंदर आए तो सबसे पहले दोनों की ही नजर सामने स्टेज पर एक साथ बैठे अयांश और नुपुर पर गई। अयांश कहीं और ही खोया हुआ था इसलिए आहना पर उसका ध्यान नही गया पर नुपुर ने उसे देख लिया था। कबीर अयांश से मिलना नही चाहते थे इसलिए आहना के साथ राकेश के पास चले गए। 


राकेश आहना को वहाँ देखकर हैरान थे क्योंकि उन्हें लगता था की आहना यहाँ नही आएगी। कबीर और राकेश मिलकर अपने ऑफिस के लोगों के साथ बातें कर रहे थे। उनके पास खड़ी आहना अयांश को ही देखे जा रही थी और कुछ वक्त बाद स्टेज की ओर बढ़ गई। 


अयांश को नुपुर के साथ देखकर उसे तकलीफ तो बहुत ज्यादा हो रही थी पर खुद के लिए उसे ये करना ही था। अयांश ने जब उसे देखा तो वो खड़ा हो गया। वो दोनों एक दूसरे की आँखों में देखे जा रहे थे। 


आहना ने अयांश से नज़रे हटाकर नुपुर को देखा और उसकी तरफ हाथ बढ़ाकर कहा, “कंग्रेटुलेशनस।” 


“थैंक्यू।”, नुपुर ने आहना से हाथ मिलाते हुए कहा। आहना स्टेज से नीचे जाने लगी तो अयांश ने उसका हाथ पकड़ लिया क्योंकि वो आहना से बात करना चाहता था पर इससे पहले की वो आहना से कुछ कह पाता, नुपुर ने खड़े होकर उसका हाथ पकड़ लिया और अयांश को देखने लगी, जिसकी नज़रे सामने खड़ी आहना पर टिकी हुई थी। 


आहना ने पहले नूपुर को देखा और फिर वापिस अयांश को देखकर स्टेज से नीचे उतरने के लिए मुड़ गई और उसका हाथ अयांश के हाथ से छूट गया। अयांश को ऐसा लगा जैसे आहना उससे सच में बहुत दूर जा चुकी है। वहीं आहना ने अयांश और नुपुर के आगे तो खुद को संभाल लिया था पर उसे अयांश को नुपुर के साथ देखकर बहुत ही ज्यादा तकलीफ हो रही थी। 


आहना वहाँ अब एक पल और नही रुकना चाहती थी इसलिए वो कबीर के पास आई और कहा, “पापा, मुझे घर जाना है।” 


“तुम ठीक तो हो न, बेटा।” कबीर ने परेशान होते हुए पूछा। 


“मैं ठीक हूँ, पापा बस मुझे घर जाना है। मैं यहाँ और नही रहना चाहती।” आहना ने कहा तो कबीर उसे लेकर वहाँ से घर के लिए निकल गए। 


घर पहुँचकर आहना दौड़कर अपने कमरे में चली गई और दरवाज़ा बंद करके रोने लगी। अयांश के साथ बिताए एक एक पल उसकी आँखों के सामने आने लगे। उसकी नज़र अपने बाएं हाथ पर पड़ी, जिसकी उँगली में वो अँगूठी थी जो अयांश ने उसे पहनाई थी। 


उसने अँगूठी को उतारने की कोशिश की पर वो अँगूठी उसकी उँगली से नही उतरी जैसे अयांश और उसकी यादों की तरह वो अँगूठी भी आहना से दूर न होना चाह रही हो। आहना बेड के पास जमीन पर बैठ गई और कहने लगी, “क्यों, क्यों, क्यों….। जब तुम मुझसे दूर हो चुके हो तो क्यों तुम्हारी यादें मुझसे दूर नही हो रही, अयांश।” 


आहना रोते रोते वहीं सो गई। कबीर ने जब उसके कमरे में आकर देखा तो उसे जमीन पर बैठे सोता हुआ देखकर उन्हें अच्छा नही लगा। उन्होंने प्यार से आहना को उठाया और उसे बेड पर सोने के लिए कहा। 


आहना बेड पर लेट गई। कबीर ने उसे कंबल ओढ़ाकर उसके माथे को चूमा। वो आहना के कमरे से बाहर आए और अपने कमरे में सोने चले गए। 

अगले दिन से ही आहना ने वापिस ऑफिस जाना शुरू कर दिया। कबीर और राकेश को भी लगा कि आहना का ऑफिस आना ठीक है क्योंकि इससे वो व्यस्त रहेगी और अयांश के बारे में कम सोचेगी। आहना को भी यही लगता था पर ऑफिस में काम करते हुए भी उसे अयांश की यादें आती रहती। 


अयांश को जब पता चला की आहना ने ऑफिस जाना शुरू कर दिया है तो वो भी रोज ऑफिस आने लगा। उसने बहुत बार आहना से बात करने की कोशिश की पर आहना हर बार उसे इग्नोर कर दिया करती। 


एक दिन आहना अयांश को ऑफिस की कैंटीन में अकेले मिल गई। अयांश उसके पास गया और उसने उसका हाथ पकड़ कर कहा, “आहना, मुझे तुमसे बात करनी है।” 


“लेकिन मुझे तुमसे कोई बात नही करनी।” कहते हुए आहना ने अपना हाथ छुड़वाया और वहाँ से जाने के लिए जैसे ही मुड़ी, अयांश ने फिर से उसका हाथ पकड़ लिया और कहा, “आहना प्लीज, एक बार मेरी बात सुन तो लो।” 


“तुम अब भूल जाओ मुझे अयांश। यही बेहतर होगा हम दोनों के लिए।” आहना ने कहा। वो दोनों ही इस बात से अनजान थे की राकेश उन्हें छुपके से देख रहे थे और उनकी बातें भी सुन रहे थे। 


“आहना, मेरे लिए इतना आसान नही है तुम्हें भूल जाना और मैं जानता हूँ की तुम भी मुझे आसानी से नहीं भुला सकती।” अयांश ने कहा। 


“मैं भुला चुकी हूँ तुम्हें।” आहना ने अयांश की आँखों में देखकर कहा। 


“तुम बेशक भूल चुकी हो मुझे और मेरे प्यार को पर मैं नही भूलूंगा और तुम्हें भी हमारा प्यार दोबारा याद दिलाऊंगा मैं।” अयांश ने भी उसकी आंखो में देखते हुए कहा। 


“किस प्यार की बात कर रहे हो, तुम? वो प्यार जिसका तुम्हारे मन में ख्याल तक नही आया था जब तुमने नुपुर से शादी करने का फैसला लिया था। ये प्यार था तुम्हारा। मेरे लिए किसी और से शादी कर लेना।” आहना ने हँसते हुए कहा पर उसकी हँसी में तकलीफ थी जिसे अयांश महसूस कर पा रहा था। 


अयांश आहना के करीब आया और उसने कहा, “मैं उस प्यार की बात कर रहा हूँ जिसमें हमने एक दूसरे के साथ हर हालात में हमेशा साथ रहने के वादे किए थे। वो प्यार जिसमें हमने अपनी आने वाली जिंदगी में बहुत सारी खूबसूरत यादें बनाने के बारे में सोचा था। वो प्यार जिसमें हमें खुद से पहले एक दूसरे का ख्याल रहता था और वो प्यार जिसमें हम एक दूसरे के लिए कुछ भी कर सकते है। ये हमारा प्यार है और इसे न मैं तुम्हें कभी भूलने दूंगा न मैं खुद भूलूंगा।” 


“लोग जब किसी के उनकी जिंदगी में आने पर उसे चाहने की हिम्मत रख सकते है तो फ़िर उसके उनकी जिंदगी से चले जाने के बाद उन्हें भुलाने की भी हिम्मत रखनी चाहिए।” आहना ने कहा तो अयांश ने आहना के चेहरे को अपने हाथों में लिया और कहा, “भूलना चाहती हो न तुम मुझे। भूल जाओ पर मेरी एक बात याद रखना की तुम मुझे कभी भी भूल नही पाओगी और एक दिन अपनी मर्जी से खुद मेरे पास वापिस आना चाहोगी।” 


आहना ने अयांश के दोनों हाथों को अपने चेहरे से हटाया और गुस्से से अपने दोनों हाथों को उसके सीने पर रख उसे खुद से दूर धक्का देते हुए कहा, “आगे से मेरे करीब आने की और मुझे छूने की कोशिश भी मत करना। नफरत हो गई है अब मुझे तुमसे।” 


“क्यों ना आया करूं? पहले तो तुम्हें बहुत अच्छा लगता था मेरा करीब आना और तुम्हें प्यार था मुझसे तो ये नफरत कैसे हो गई अब।” अयांश ने कहा। 


“क्योंकि अब तुम मैरिड हो।” आहना ने कहा। 


“थैंक यू मुझे याद दिलाने के लिए पर तुम भी मेरी कही बात याद रखना। आज तुम मुझसे दूर रहना चाहती हो न पर एक दिन तुम मेरे पास वापिस आओगी।” कहकर अयांश वहाँ से चला गया। वो ऑफिस से बाहर आया और अपनी गाड़ी में बैठकर चला गया। 


आहना भी अपने केबिन में आकर काम करने की कोशिश करने लगी पर उसे काम करते हुए अयांश की कही बातें याद आने लगी। कुछ वक्त बाद उसके पास ऑफिस में काम करने वाले एक लड़के ने आकर कहा की राकेश उसे बुला रहे है। वो खड़ी हुई और राकेश के केबिन की तरफ बढ़ गई। 


***


अयांश बहुत ही तेज़ रफ़्तार से गाड़ी चलाए जा रहा था। उसके मन में आहना की कही सारी बातें चल रही थी और उसे वो पल याद आया जब आहना ने उसे खुद से दूर करने के लिए धक्का दिया था। उसका दिल इस वक्त काफी तकलीफ में था। वो रास्ते पर बेतहाशा गाड़ी चलाए जा रहा था की उसने सिग्नल पर भी नही ध्यान दिया जिसकी वजह से साइड से आती हुई एक गाड़ी की टक्कर उसकी गाड़ी से हो गई। 


जिस गाड़ी से उसकी टक्कर हुई थी, उसमें बैठा आदमी बिलकुल सही सलामत था पर अयांश की गाड़ी को साइड से टक्कर लगी थी और उसने सीट बेल्ट नही पहन रखा था इसलिए उसे ज्यादा चोट आई थी। 


अयांश के आसपास भीड़ जमा हो गई। कुछ लोगों ने मिलके उसे गाड़ी से बाहर निकाला और एंबुलेंस को बुलाकर उसे अस्पताल पहुँचाया। ये वही अस्पताल था जहाँ कबीर का ऑपरेशन हुआ था और जिस डॉक्टर ने कबीर का ऑपरेशन किया था, वो रिसेप्शन पर ही खड़े थे जब अयांश को स्ट्रेचर पर लेटाकर अंदर लाया गया। वो डॉक्टर अयांश को पहचान गए और जल्दी से उसे देखने लगे। 


उन्होंने नर्स को उसे अंदर वार्ड में ले जाने के लिए कहा। उनके पास कबीर का नंबर था इसलिए उन्होंने जल्दी से कबीर को फोन करके अयांश के एक्सीडेंट के बारे में बताया। 


***


आहना ने राकेश के केबिन के दरवाजे को खोला। राकेश ने उसे देखकर अंदर बुलाया और बैठने के लिए कहा। आहना उनके सामने कुर्सी पर बैठ गई और पूछा, “आपको कोई काम है मुझसे, अंकल।” 


राकेश ने हाँ में सिर हिलाते हुए कहा, “तुमसे कुछ बात करनी है, बेटा।” 


“जी, कहिए न अंकल।” आहना ने कहा। 


राकेश ने उसे देखा और कहा, “बेटा, अभी थोड़ी देर पहले मैंने कैंटीन में तुम्हारी और अयांश की सारी बातें सुन ली थी। बेटा, तुमने उससे कहा की तुम उसे भूल चुकी हो और वो भूल जाए तुम्हें पर ये सब बातें तुम्हारे दिल की नही थी। तुम्हारा दिल तो आज भी अयांश के ख्यालों में ही रहता है और जो ख्यालों में रहता हो, इंसान उसे भूल कैसे सकता है।” 


“मेरा दिल कहता है की उसे माफ करदूं क्योंकि मेरा दिल आज भी उससे प्यार करता है और दिमाग कहता है की उससे नफरत करूं क्योंकि उसने मुझे धोखा दिया है। इस दिल और दिमाग, दोनों में से जिसकी मर्ज़ी सुन लूं, दर्द और तकलीफ दोनों में ही बहुत ज्यादा होते है।” आहना ने इतना ही कहा था की किसी ने अचानक से केबिन का दरवाजा खोला। 


राकेश और आहना ने पीछे देखा तो वहाँ कबीर खड़े थे, जो बहुत ही परेशान लग रहे थे। वो जल्दी से अंदर से आए। उन्हें ऐसे देखकर राकेश ने पूछा, “क्या हुआ, कबीर? तुम इतने परेशान क्यों लग रहे हों?” 


“अयांश, अयांश का एक्सीडेंट हो गया है।” कबीर ने कहा। अयांश के एक्सीडेंट की खबर सुनते ही राकेश परेशान हो गए। बेशक वो इस वक्त अयांश से नाराज़ थे पर उससे बहुत प्यार करते थे। आहना भी कुर्सी से खड़ी हो गई। उसे भी अयांश की चिंता होने लगी। वो राकेश से कुछ कहने ही वाली थी कि उसके हाथ में पहनी हुई अँगूठी, जो अयांश ने उसे पहनाई थी और जिसे कुछ दिनों पहले ही उसने उतारने की कोशिश की थी, आज उसके हाथ से अपने आप उतरकर दूर टेबल के पास जा गिरी।


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Friday, 10 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 24


 

अयांश के घर से निकलकर आहना रोने लगी। जो आँसू उसने अयांश के सामने रोककर रखे थे वो अब उसकी आँखों से बहने लगे थे। आहना को कुछ समझ नही आ रहा था बस उसके मन में एक ही सवाल था की उसके साथ ही ये सब क्यों हुआ। कहाँ उसने अयांश के साथ जिंदगी भर साथ रहने के सपने सजाए थे और कहाँ एक पल में सब कुछ बदल गया। वो वहीं खड़े खड़े आसमान की ओर देखने लगी। उसकी आँखों से आँसू लगातार बहे जा रहे थे। 


कुछ वक्त बाद, उसे अपने कंधे पर किसी का हाथ महसूस हुआ। उसने साइड में देखा। राकेश उसकी तरफ ही देख रहे थे। उन्होंने आहना के आँसूओं को अपनी उँगलीयों से पोंछते हुए कहा, “जिसके लिए तुम ये आँसू बहा रही हो न बेटा वो ये डिजर्व नही करता।” 


“मैं भी धोखा डिजर्व नही करती थी। मेरी क्या गलती थी, अंकल?” आहना ने रोते हुए पूछा। 


“रो मत आहना बेटा। चलो तुम्हें घर छोड़ आता हूँ। मैं आता हूँ गाड़ी लेकर।” राकेश ने आहना के गाल को छूते हुए कहा और गाड़ी लेने चले गए। 


राकेश गाड़ी घर से बाहर लेकर आए। आहना बिना कुछ कहे गाड़ी में बैठ गई। हमेशा खुश रहने वाली और ज्यादा बातें करने वाली आहना के चेहरे पर आज कोई मुस्कान नही थी क्योंकि उस मुस्कान और खुशी की जगह आज दर्द, तकलीफ और खामोशी ने ले ली थी। 


राकेश ने गाड़ी आहना के घर के सामने रोकी और आहना को देखकर कहा, “अयांश के बारे में मत सोचना, बेटा।” 


आहना ने कुछ नही कहा और गाड़ी से उतरकर अंदर चली गई। कबीर भी अब तक घर आ चुके थे। जैसे ही उन्होंने आहना को अंदर आते हुए देखा, उन्होंने मुस्कुराते हुए पूछा, “तुम बड़ी जल्दी वापिस आ गई, आहना बेटा? मुझे तो लगा था तुम अयांश के साथ थोड़ा वक्त बिताओगी। अच्छा, अयांश कैसा है?” 


आहना ने कबीर के किसी भी सवाल का जवाब नही दिया। उसने अपने कमरे के अंदर जाकर दरवाजा जोर से बंद कर लिया और बेड पर लेटकर रोने लगी। कबीर को आहना के इस बर्ताव की उम्मीद नही थी। वो समझ गए की आहना के साथ कुछ तो हुआ है। उन्होंने आहना के कमरे का दरवाजा खटखटाकर उसे बाहर आने के लिए कहा पर आहना ने दरवाजा नही खोला इसलिए कबीर ने थोड़ी देर के लिए आहना को अकेले छोड़ना सही समझा। 


***


आहना को घर छोड़कर राकेश जब वापिस आए तो उन्हें लिविंग रूम में से नुपुर और रिद्धिमा के हँसने की आवाजें आई। वो लिविंग रूम में गए तो देखा अयांश खामोशी से सोफे पर बैठा है और रिद्धिमा और नुपुर बातें कर रही है। 


राकेश अयांश से नाराज़ थे इसलिए वहाँ से ऊपर अपने कमरे में जाने के लिए मुड़ गए पर रिद्धिमा ने उन्हें बुलाते हुए कहा, “राकेश, अंदर आओ ना। तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है।” 


“पर मुझे किसी से भी कोई बात नही करनी।” राकेश ने गुस्से में कहा। 


“तुम्हें करनी बात पड़ेगी राकेश। इंपोर्टेंट है।” रिद्धिमा ने कहा। राकेश अंदर आकर सोफे पर बैठ गए। 


रिद्धिमा मुस्कुराई और कहा, “राकेश, मैं सोच रही थी की अयांश और नुपुर की शादी ऐसे ही जल्दी जल्दी हो गई है। हमें कोई भी सेलिब्रेशन करने का मौका ही नही मिला तो क्यों न नेक्स्ट संडे इनके लिए वेडिंग रिसेप्शन पार्टी रखे और उसमें हम अपने सभी रिलेटिव्स, फ्रेंड्स और बिज़नेस पार्टनर्स को भी इनवाइट करेंगे जिससे उन्हें भी पता चल सके की अयांश ने शादी कर ली है।” 


“ऐसा कुछ भी नही होगा। जब इसने शादी बिना किसी को बताए कर ही ली है तो अब क्या फायदा है इन सब का।” राकेश ने अयांश को देखते हुए कहा। 


“वेडिंग रिसेप्शन तो होकर रहेगा, राकेश और तुम आओगे वहाँ। आफ्टर ऑल, मैं हमारे होटल में ही इनका रिसेप्शन ऑर्गेनाइज करूंगी।” रिद्धिमा ने कहा। नुपुर भी मुस्कुरा रही थी। राकेश बिना कुछ कहे वहाँ से ऊपर अपने कमरे में चले गए। 


***


शाम हो चुकी थी पर आहना अभी तक अपने कमरे से बाहर नही आई थी। अब कबीर को आहना की चिंता होने लगी थी और वो सोचने लगे की ऐसा क्या हुआ है आहना के साथ। सोचते हुए उन्होंने राकेश को फोन लगाया। 


राकेश ने फोन उठाया तो उन्होंने जल्दी से पूछा, “राकेश, आहना को क्या हुआ है? वो जब से घर आई है तब से ही खुदको अपने कमरे के अंदर बंद करकर बैठी है।” 


राकेश ने एक गहरी सांस ली और कबीर को सब कुछ बता दिया। कबीर को ये सब जानकर एक झटका सा लगा। उन्हें यकीन ही नही हुआ की अयांश आहना के साथ ऐसा कर सकता है। उन्होंने फोन काटा और फिर से आहना के कमरे के बाहर आकर दरवाजा खटखटाया। 


इस बार आहना ने दरवाजा खोला और कबीर के गले लगकर रोने लगी। कबीर आहना को हॉल में लेकर आए। उन्होंने आहना को सोफे पर बैठाकर उसे पानी पिलाया। 


“अयांश ने मेरे साथ ऐसा क्यों किया, पापा?” आहना ने पूछा और फिर रोने लगी। 


“क्योंकि तुम उससे भी अच्छा लाइफ पार्टनर डिजर्व करती हो।” कहते हुए कबीर ने उसके आँसू पोंछे। 


कबीर ये समझ रहे थे की आहना सिर्फ इसलिए रो रही है क्योंकि अयांश ने उसे धोखा दिया पर इस वक्त आहना पर क्या बीत रही थी और उसका मन कितनी उलझनों में फंसा हुआ था ये सिर्फ वो ही समझ सकती थी। 


आहना ने ऑफिस जाना छोड़ दिया और अब रोज सारा दिन खुदको कमरे में बंद रखने लगी। कबीर को डर था की आहना बीमार न हो जाए इसलिए वो भी ऑफिस न जाकर घर ही रुकते। राकेश भी रोज ऑफिस खतम होने के बाद आहना से मिलने आते। 


जहाँ सब आहना का ख्याल रख रहे थे वहीं अयांश अकेले ही अंदर ही अंदर खुदसे लड़ रहा था।  वो भी सारा दिन खुदको कमरे में बंद रखता, घर में किसी से भी बिल्कुल भी बात नही करता और सिर्फ खाने के वक्त बाहर आता। राकेश से तो उसकी पूरी तरह से दूरियां बन चुकी थी। नुपुर ने बहुत बार उसके करीब आने की कोशिश की पर हर बार वो नुपुर को खुद से दूर कर देता। नुपुर को इन सब से गुस्सा तो आता था पर वो चुप रहती क्योंकि वो अयांश को पसंद करती थी और उसे यकीन था की अयांश एक दिन उसे अपनी मर्जी से अपना बना ही लेगा। वो बेफिक्र होकर रिद्धिमा के साथ मिलकर अपने रिसेप्शन की तैयारियां कर रही थी। 


रिद्धिमा ने नुपुर के घरवालों को भी उनके घर जाकर इनवाइट किया। नुपुर के पिता, अंबर थोड़ा नाराज़ थे क्योंकि अयांश नही आया था पर उन्हें इस बात की बहुत खुशी थी की उनकी बेटी को इतना अच्छा परिवार मिल गया है। 


रिसेप्शन की सभी तैयारियां अच्छे से हो चुकी थी। रिसेप्शन से ठीक एक दिन पहले रिद्धिमा आहना के घर आई। उसने डोरबेल बजाई तो दरवाजा कबीर ने खोला। रिद्धिमा को सामने खड़ा देखकर कबीर ने पूछा, “आप यहां क्यों आई है?” 


रिद्धिमा हल्का सा मुस्कुराई और कहा, “अंदर तो आने दो या यहीं सारी बातें करनी है।” 


“मुझे नही लगता अयांश ने आहना के साथ जो कुछ भी किया उसके बाद बात करने के लिए कुछ बचा है।” कबीर ने कहा। 


कबीर की बात सुनकर रिद्धिमा को गुस्सा आ गया और उन्होंने कहा, “मुझे कोई शौंक नही है यहाँ आने का। वो तो मैं तुम्हें…” 


रिद्धिमा ने इतना ही कहा था की उनकी नजर कबीर के पीछे खड़ी आहना पर गई। कबीर ने भी पीछे मुड़कर देखा। वो नही चाहते थे की रिद्धिमा आहना को कुछ भी कहे इसलिए उन्होंने आहना के पास आकर उसे अंदर जाने के लिए कहा पर आहना वहीं खड़ी रिद्धिमा को देखती रही। 


रिद्धिमा आहना के पास आई और कहा, “आहना बेटा, अच्छा हुआ तुम मिल गई। मैं तुम्हें इनवाइट करने आई थी। वो कल नुपुर और अयांश का वेडिंग रिसेप्शन है। तुम जरूर आना।” 


रिद्धिमा ने आहना के गाल को थपथपाया और वहाँ से चली गई। आहना अपने कमरे में चली गई। कबीर को आहना के लिए बुरा लग रहा था और साथ ही रिद्धिमा पर गुस्सा आ रहा था पर वो चाहकर भी कुछ नही कर सकते थे। 


अगले दिन, 


अयांश बे मन से रिसेप्शन के लिए तैयार हो रहा था। उसने बहुत ही प्यारा थ्री पीस सूट पहना हुआ था और वो लग भी बहुत प्यारा रहा था पर उसके चेहरे पर कोई खुशी नही थी। नुपुर दूसरे कमरे में तैयार हो रही थी। रिद्धिमा ने उसे तैयार होकर अयांश के साथ जल्दी से रिसेप्शन हॉल पहुँचने के लिए कहा और फिर रिसेप्शन में जाने के लिए घर से निकल गई।


तैयार होकर नुपुर उस कमरे में गई जहाँ अयांश तैयार हो रहा था। उसने देखा अयांश तैयार है और बेड पर बैठे हुए अपने फोन में कुछ देख रहा है। वो अयांश के करीब गई तो उसे गुस्सा आने लगा क्योंकि अयांश फोन में आहना की तस्वीरों को देख रहा था। वो इतना खोया हुआ था की उसे ये अहसास तक नही हुआ की नुपुर उसके पास ही खड़ी है। 


नुपुर के उसके हाथ से फोन छीन लिया तो अयांश ने उसकी तरफ देखा। वो खड़ा हुआ और अपना फोन वापिस छीनते हुए कहने लगा, “तुम इसे मेरी जिंदगी से निकाल सकती हो बस। मेरे दिल और दिमाग से नही।” 


“आज जितना प्यार करते हो न तुम उस आहना से अयांश, एक दिन उतनी ही नफरत करोगे तुम उससे।” नुपुर ने कहा। 


“जैसे शादी जबरदस्ती की थी मुझसे वैसे ही जबरदस्ती नफरत भी करवाओगी तुम अब मुझसे। करवा लेना, क्योंकि मेरी नफरत आहना के लिए कभी हो ही नही सकती, तुम्हारे लिए होगी।” कहकर अयांश हँसने लगा। 


“तुम्हारी प्रॉब्लम क्या है हाँ? क्या तुम्हें मेरा प्यार नही दिखता?” नुपुर ने अयांश की आँखों में देखकर पूछा। 


“जो कुछ भी तुमने मेरे साथ किया उसे तुम प्यार कहती हो तो आई एम सॉरी क्योंकि यह प्यार नही सजा है मेरे लिए जो मेरे साथ साथ मेरी आहना को भी मिल रही है।” अयांश ने कहा। 


“आहना, आहना, आहना। क्यों इतनी इंपोर्टेंट है वो तुम्हारे लिए। वो तुम्हारे सामने भी नही रहती फिर भी तुम उसके बारे में ही सोचते रहते हो और मैं तुम्हारे साथ रहती हूँ फिर भी तुम मुझे इग्नोर करते हो।” नूपुर गुस्से में चिल्लाई। 


“वो इंपोर्टेंट है क्योंकि वो प्यार है मेरा। तुम मुझे खुद से जबरदस्ती प्यार करवा नही सकती और आहना के लिए मेरा प्यार खतम नही कर सकती।” कहकर अयांश कमरे से बाहर निकल गया। 

नुपुर अयांश के साथ रिसेप्शन पार्टी में पहुँची। सभी मेहमानों की नजरें उन दोनों पर ही थी इसलिए नुपुर ने अयांश का हाथ पकड़ लिया। वो दोनों स्टेज पर लगे सोफे पर बैठ गए। सबसे पहले रिद्धिमा और राकेश ने उनके साथ एक तस्वीर खिंचवाई। राकेश अयांश से कोई बात नही करना चाहते थे इसलिए तुरंत ही स्टेज से नीचे उतर गए और अपने ऑफिस की तरफ से आए लोगों से बातें करने लगे। 


टीना और अंबर भी अयांश और नुपुर से मिले। अयांश ने उनके पैर छुने चाहे तो अंबर ने उसे रोककर गले से लगा लिया। धीरे धीरे करके सभी मेहमान उन दोनों को मुबारक बाद देने लगे पर अयांश का मन इन सब में कहाँ था। वो जबरदस्ती सबके सामने मुस्कुराने को कोशिश कर रहा था जबकि अंदर ही अंदर उसे बेहद तकलीफ हो रही थी। 


आहना का घर


कबीर हॉल में बैठे हुए कुछ सोच ही रहे थे की तभी आहना वहाँ आई। कबीर आहना को देखकर हैरान हो गए क्योंकि आहना ने डिजाइनर अनारकली सूट पहना हुआ था। ऐसा लग रहा था कि वो कहीं जा रही है। कबीर सोफे से खड़े हुए और उन्होंने पूछा, “आहना बेटा, तुम ऐसे तैयार होकर कहाँ जा रही हो?” 


“मैं अयांश के वेडिंग रिसेप्शन में जा रही हूँ, पापा।” आहना ने कहा। 


“ये तुम क्या कह रही हो, बेटा। तुम वहाँ नही जा सकती।” कबीर ने कहा। 


आहना ने एक गहरी सांस ली और कहा, “मुझे जाने दीजिए, पापा। मैं अपनी आँखों से देखकर अपने दिल और दिमाग को ये यकीन दिला देना चाहती हूँ की अयांश मेरा नही रहा अब और मुझे उसे अपने दिल और दिमाग से निकालना पड़ेगा अब।”



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Thursday, 9 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 23


नुपुर को अयांश के साथ देखकर सभी हैरान थे सिवाय रिद्धिमा के। अयांश नुपुर के साथ उन सबके पास आया और नुपुर का हाथ छोड़कर राकेश के गले लग गया। रिद्धिमा की तरफ उसने देखा तक नही।


“कैसे हो बेटा।” राकेश ने उसे पूछा।


“मैं ठीक हूँ, पापा।” कहते हुए उसने राकेश के पीछे खड़ी आहना को उदासी से देखा। आहना भी उसे देखे जा रही थी। इस वक्त उसके मन में बहुत से सवाल चल रहे थे जिसके जवाब सिर्फ उसे अयांश से ही मिल सकते थे। 


राकेश जैसे ही अयांश से दूर हुए, उन्होंने उसके पीछे खड़ी नुपुर को देखा और अयांश से पूछा, “अयांश, तुम तो अकेले गए थे न। नुपुर तुम्हारे साथ क्या कर रही है, बेटा?” 


“पापा, वो ये…!!”, अयांश ने जैसे ही कहना चाहा, नुपुर आगे आई और उसने आहना को देखते हुए कहा, “मैं बताती हूँ। मैं अयांश के साथ इसलिए हूँ क्योंकि हमने शादी कर ली है।” 


आहना ने जैसे ही ये सुना, उसके हाथों में पकड़े गुलाब के फूलों का गुलदस्ता उसके हाथों से छूटकर नीचे जा गिरा और बिखर गया। उसकी आँखों में आँसू आ गए जिन्हें उसने बहने से रोक लिया। उसकी आँखों में आँसू देख अयांश के दिल में दर्द हुआ क्योंकि उन आँसूओं की वजह वो खुद था। वो दूसरी ओर देखने लगा और उसने खुद से ही कहा, “कहाँ मैं इसे हमेशा हँसने की वजह देना चाहता था और कहाँ आज मेरी ही वजह से इसके चेहरे पर उदासी और आँखों में आँसू है। समीर ने सही कहा था, ये फैसला लेकर मैंने आहना को सबसे बड़ी तकलीफ दी है।” 


राकेश को नुपुर की बात पर यकीन नही हुआ तो उन्होंने अयांश को  देखा जो खामोश खड़ा था। अयांश को कुछ न कहता देख राकेश समझ गए की नूपुर सच कह रही है। उन्होंने रिद्धिमा पर भी एक नजर डाली जो की मुस्कुरा रही थी। राकेश जानते थे की रिद्धिमा अयांश की शादी नूपुर से करवाना चाहती थी इसलिए उन्हें यकीन था की इन सब में रिद्धिमा भी शामिल होगी। उन्हें गुस्सा आने लगा तो उन्होंने अयांश और रिद्धिमा को देखते हुए कहा, “घर चलो, सब। तुम सबसे घर पहुँचकर ही बात करूंगा मैं।” 


आहना अब तक खामोशी से खड़ी अपनी आँसूओं से भरी आँखों के साथ बस अयांश को देखे जा रही थी। उसे बहुत ही तकलीफ हो रही थी क्योंकी उसे ये यकीन ही नही हो रहा था की वो अयांश जो उससे कहता था कि वापिस आकर वो उससे शादी कर लेगा, उस अयांश ने किसी और से शादी कर ली है। राकेश ने उसके पास आकर उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा, “चलो आहना।” 


आहना राकेश के साथ चलने लगी। अयांश, नूपुर और रिद्धिमा भी उनके पीछे चलने लगे। 


घर पहुँचकर राकेश ने आहना को सोफे पर बैठाया और फिर अयांश से कहा, “कोई इधर उधर की बातें नही। बस इतना बताओ तुमने नूपुर से शादी क्यों की जब तुमने आहना को प्रोपोज किया हुआ था।” 


“पापा, मैं नही बता सकता आपको इस बारे में।” अयांश ने कहा। 


“तुम नही भी बताओ फिर भी इतना तो मुझे पता ही है की इन सबमें तुम्हारी माँ भी शामिल है क्योंकि वो तो चाहती ही थी की आहना तुम्हारी लाइफ में न रहे पर अगर मुझे ये पता चला की तुमने ये शादी अपनी खुशी से की है तो तुम्हारे लिए मुझसे बुरा कोई नही होगा।” राकेश ने कहकर रिद्धिमा की तरफ देखा जो की आराम से बैठी थी जैसे उसे इन सब से कुछ फर्क ही नही पड़ रहा हो।


“डैड, ये हमारी फैमिली का पर्सनल मैटर है। बाहर वालों के सामने इसे डिस्कस करना ठीक है इसलिए मुझे लगता है कि आहना को यहाँ से जाना चाहिए।” नूपुर ने आहना को देखते हुए कहा। 


“जाना तुम्हें चाहिए यहाँ से। आहना को नही। वो मेरी बेटी है।” राकेश की बात सुनकर नुपुर को गुस्सा आ गया और उसने कहा, “पर मैं अब आपकी बहू हूँ।” 


“मैं नही मानता तुम्हें अपनी बहु।“ राकेश ने जैसे ही कहा, रिद्धिमा खड़ी हुई और उसने कहा, “तुम्हारे मानने या ना मानने से क्या होगा, राकेश। नुपुर अब हमारी बहु है।” 


“ये सब सच में तुमने ही किया है ना। बताओ क्या प्लैनिंग की इस बार तुमने।” राकेश ने रिद्धिमा से गुस्से में पूछा। 


“मुझे जितनी प्लानिंग्स करनी थी ना वो मैंने बहुत पहले ही कर ली थी और उसमें से एक प्लैनिंग को फेल किया था तुमने पर अफ़सोस, तुम मेरे दूसरे प्लैन को फेल नही कर पाए और देखो, जो मैं चाहती थी वो हो गया।” रिद्धिमा ने हँसते हुए कहा। 


“तुम ऐसी भी सकती हो ये मैंने कभी नही सोचा था।” राकेश ने गुस्से से रिद्धिमा को कहा और फिर अयांश की ओर देखा। 


“अयांश, रिद्धिमा की बातों से मैं जान चुका हूँ की ये फैसला तुम्हारा नही है पर सच मैं तुमसे सुनना चाहता हूँ। ये फैसला तुम्हारा नही है ना।” राकेश ने उससे आराम से पूछा। नुपुर और रिद्धिमा थोड़ा सा घबरा गई की अयांश कही ये न बता दे की नुपुर ने उसके साथ क्या किया था और उसे कैसे ब्लैकमेल किया था। 


अयांश ने आहना को देखा जो उम्मीद भरी नजरों से उसे देख रही थी की वो ये कह दे की ये फैसला उसका नही था पर अगले ही पल उसकी सारी उम्मीदें टूट गई जब अयांश ने कहा, “ये मेरा…मेरा खुद का फैसला था, पापा।” 


उसकी आवाज में तकलीफ थी जिसे सिर्फ आहना ही महसूस कर पा रही थी। आहना ने उसे देखा तो उसकी आँखों में भी उसे तकलीफ दिखाई दी। वो जानती थी कि अयांश झूठ बोल रहा था और उसने ये फैसला किसी मजबूरी में लिया है। उसने अयांश की तरफ देखा और फिर राकेश से कहा, “अंकल, मैं अयांश से अकेले में बात करना चाहती हूँ।” 


ये सुनते ही नुपुर ने कहा, “क्या अकेले में बात हाँ? तुम शायद भूल चुकी हो की ये अब तुम्हारा बॉयफ्रेंड नही है, मेरा हसबैंड है। तो तुम्हें अयांश से जो भी बात करनी है मेरे सामने ही करोगी तुम।” 


“नुपुर, वेट। आई थिंक मुझे इससे अकेले में बात करनी चाहिए एक बार इसे समझाने के लिए।” अयांश ने कहा तो नूपुर गुस्से से सोफे पर बैठ गई। अयांश आहना के साथ घर से बाहर आया और उसके साथ गार्डन में लगी कुर्सियों पर बैठ गया। 


कुछ वक्त तक दोनो एक दूसरे को खामोशी से देखते रहे और फिर आहना ने कहा, “तुमने अंदर सबके सामने झूठ बोला ना, अयांश।” 


“नही, आहना। मैंने सच कहा था सबके सामने।” अयांश ने कहा।


“तुम झूठ बोलते हो, अयांश पर तुम्हारी आवाज़ और आँखों में जो तकलीफ है, वो सच बोलती है।” आहना की बात सुनकर अयांश बिना कुछ कहे दूसरी तरफ देखने लगा तो आहना ने पूछा, “अयांश, मुझे तो बता सकते हो न क्यों किया ये सब तुमने।” 


“तुम्हारे लिए।” अयांश ने उसकी आँखों में देखकर कहा। 


“मेरे लिए।” कहते हुए आहना ने हैरानी से अयांश को देखा तो अयांश ने आहना को वो सब कुछ बता दिया जो उसके साथ अमेरिका में हुआ। “मुझे डर था आहना की कहीं तुम उन तस्वीरों पर भरोसा करके उनको सच न मान लो और ये डर भी की कहीं नुपुर तुम्हें मेरी वजह से कोई नुकसान न पहुँचा दे। बस इसलिए मुझे उस वक्त जो सही लगा मैंने वो किया।” 


आहना को ये सब जानकर एक झटका सा लगा और उसने कहा, “अगर इतना सब कुछ हो गया था तुम्हारे साथ तो तुम्हें एक बार तो मुझे ये सब बताना चाहिए था ना इतना बड़ा फैसला लेने से पहले। मुझे न सही तो अंकल को बता देते और तुमने ये कैसे सोच लिया की तुम्हारी आहना तुम्हारे ऊपर भरोसा न करके कुछ तस्वीरों पर भरोसा कर लेगी।” 


“आहना, मैं…”, अयांश ने जैसे ही कहना चाहा आहना ने उसकी बात को बीच में ही काटते हुए कहा, “तुम पहुँचाने देते नुपुर को मुझे नुकसान। तुम साथ होते तो नूपुर जो कुछ भी करती मेरे साथ, मैं हँसते हँसते सह लेती वो सब पर अब जो तकलीफ तुमने मुझे दी है मुझे धोखा देकर नूपुर से शादी करके वो नही सह पाऊंगी मैं।” 


“आहना प्लीज, तुम ये समझने की कोशिश करो की मुझे उस वक्त कुछ समझ नही आ रहा था।” अयांश ने कहा। 


“बताते तो सही एक बार, अयांश। तुम्हारा साथ देती मैं पर तुमने तो ठीक से बात तक करना भी छोड़ दिया था। कभी न दूर जाने के लिए वापिस आने वाले थे न तुम मुझसे पर तुम तो मुझसे बहुत दूर होकर वापिस आए हो।” आहना ने कहा। उसकी आँखों में आँसू आ गए जिन्हें उसने बहने से रोक लिया। 


अयांश ने आहना का हाथ पकड़ा और कहा, “मैंने ये सब तुम्हारी खुशी के लिए ही किया है, आहना।” 


आहना ने अपना हाथ छुड़वाया और कहा, “मेरी खुशी तुम्हारे साथ है तुमसे दूर रहकर नही।” 


“आहना, आई प्रॉमिस मैं सब ठीक कर दूंगा।” अयांश ने कहा।


“टूटी हुई चीजों को जोड़ना और ठीक करना आसान होता है, अयांश पर टूटे हुए रिश्तों को जोड़ना और ठीक करना बहुत मुश्किल होता है। सच्चा प्यार किया था तुमसे मैंने और निभाया भी पर सच्चे प्यार का बदला अगर धोखा होता है तो नही था कभी भी मुझे सच्चा प्यार तुमसे।” कहकर आहना कुर्सी से खड़ी हो गई। उसने अयांश को देखा और फिर वहाँ से चली गई। अयांश भी आहना को बाहर जाते हुए देखता रहा और फिर कुछ देर बाद घर के अंदर चला गया।


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Wednesday, 8 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 22


 समीर की बातों से अयांश को अहसास हुआ की उससे बहुत बड़ी गलती हो चुकी है। वो आहना को कोई तकलीफ में नही देख सकता था इसलिए उसने आहना से दूर होने का फैसला किया और नुपुर से शादी की पर उसने ये तो सोचा ही नही की उसके इस फैसले से तो आहना को सबसे ज्यादा तकलीफ होगी। उसने अपना सिर पकड़ लिया और कहा, “मुझसे जल्दी में बहुत बड़ी गलती हो गई यार। मैंने ये कैसे नही सोचा की आहना को आने वाली तकलीफों से बचाने के लिए मैं नुपुर से शादी करने का फैसला लेकर आहना को सबसे ज्यादा तकलीफ देने जा रहा हूँ। इतनी तकलीफ जितनी उसे नुपुर भी नही दे पाती मेरे होते हुए।” 


“तुझे इतना बड़ा फैसला इतनी जल्दी नही लेना चाहिए था। ये फैसला लेने से पहले एक बार किसी से बात करनी चाहिए थी तुझे। मुझसे ही बात कर लेता एक बार।” समीर ने कहा तो अयांश ने उसे देखा और कहा, “मैं बहुत डर गया था यार। कुछ समझ नही आ रहा था। बस कुछ समझ आ रहा था तो वो ये था की मैं अपनी आहना को दर्द में नही देख सकता।” 


“इस नुपुर को तो मैं छोडूंगा नही। तूने इसकी इतनी मदद की और इसने ये सब किया तेरे साथ।” समीर ने गुस्से में कहा और कमरे से बाहर लिविंग रूम में आया जहाँ नुपुर आराम से अमीषा के साथ बैठी हुई थी। अयांश भी उसके पीछे पीछे आ गया। 


समीर नुपुर के पास आया और कहा, “तुम्हें शर्म नही आई उस इंसान के साथ इतना सब कुछ करते हुए जिसने तुम्हारी इतनी हेल्प की।” 


नुपुर मुस्कुराई और कहा, “मेरी क्या गलती है इसमें? मैं अयांश को पसंद करती थी और इसे अपना बनाना चाहती थी। मैंने तो बस वही किया जो इसके लिए मुझे सही लगा। रही बात हेल्प की तो अयांश को इतना भी अच्छा नही होना चाहिए था। आफ्टर ऑल, लोग अच्छाई का फायदा तो उठाते ही है और तुम मुझे अकेले ब्लेम नही कर सकते इन सब के लिए। इन सब में रिद्धिमा आंटी भी मेरे साथ है।” 


ये सुनते ही अयांश ने हैरानी से नुपुर को देखा। उसे यकीन नही हो रहा था या जैसे उसका दिल ये मानने को तैयार नही था की रिद्धिमा उसके साथ ऐसा कर सकती है इसलिए उसने कहा, “तुम झूठ बोल रही हो। आई नो मॉम आहना को पसंद नही करती पर वो मेरे साथ ऐसा कभी नही करेंगी। वो आहना को मुझसे दूर करने की कोशिश नही करेंगी।” 


अयांश को ऐसे देखकर नुपुर ने फैसला किया की वो उसे ये यकीन दिलाने के लिए की रिद्धिमा उसके साथ ऐसा कर सकती है, वो सब कुछ बता देगी जो रिद्धिमा ने एक साल पहले आहना के साथ करना चाहा था। वो उठकर अयांश के करीब आई और कहने लगी, “अगर वो तुम्हारे साथ ऐसा नही कर सकती तो उन्होंने एक साल पहले आहना को किडनैप करवाने की कोशिश क्यों की थी और ये सब जो मैंने तुम्हारे साथ किया है, ये भी तुम्हारी मॉम की ही प्लानिंग थी। अब भी तुम्हें लगता है की वो ये सब तुम्हारे साथ नही कर सकती।” 


ये सुनकर अयांश चौंक गया और उसने कहा, “मेरी मॉम ऐसा…ऐसा नही कर सकती। तुम झूठ…झूठ बोल रही हो।” 


नुपुर हँसने लगी और बोली, “अच्छा ठीक है। मैं झूठ बोल रही हूँ पर तुम्हारी वो आहना, वो तो सच बताएगी न सब कुछ तुम्हें। तो उसी से क्यों नही पूछ लेते तुम की एक साल पहले उसके साथ क्या हुआ था।” उसने कुछ सोचा और फिर कहा, “जानना चाहोगे किसके साथ मिलके किया था तुम्हारी मॉम ने ये सब कुछ।” 


अयांश ने कुछ नही कहा तो नूपुर ने वापिस सोफे पर बैठकर कहा, “तुम्हारे बेस्टफ्रेंड निखिल के साथ मिलकर किया उन्होंने ये सब कुछ। उनका प्लान था की निखिल आहना को किडनैप करके उससे शादी करके वहाँ से और तुम्हारी जिंदगी से दूर ले जाए पर उस आहना की किस्मत अच्छी निकली और तुम्हारे डैड ने उसे बचा लिया।” आखिरी शब्द उसने नफरत भरे लहजे में कहे। 

अयांश को ये सब जानकर बहुत गुस्सा आ रहा था साथ ही उसे दुख भी था। उसे गुस्सा इसलिए आ रहा था क्योंकि उसकी गैर मौजूदगी में रिद्धिमा और निखिल ने आहना के साथ इतना सब कुछ करने की कोशिश की और दुख इस बात का था की आहना और राकेश ने उससे ये बात छुपाई। उसने किसी से कुछ भी नही कहा बस चुपचाप वहाँ से अपने कमरे के अंदर चला आया और दरवाजा अंदर से बंद करके रोने लगा क्योंकि उसके लिए ये यकीन कर पाना मुश्किल था की गैरों से ज्यादा दर्द उसके अपनों ने उसे दिया था।


***


आहना अयांश के घर में कबीर के साथ डिनर के लिए आई हुई थी। वो सब लिविंग रूम में बैठे बातें कर रहे थे। रिद्धिमा भी वहीं बैठी चुपचाप उनकी बातें सुन रही थी। राकेश ने आहना को देखा जो उनके पास ही बैठी थी और फिर कबीर से कहा, “कबीर, एक हफ्ते बाद अयांश वापिस आ रहा है। उसके आने की खुशी में मैं एक पार्टी रखने वाला हूँ तो मैं सोच रहा था की क्यों ना उसी पार्टी में हम आहना और अयांश की सगाई कर दें।” 


ये सुनकर कबीर मुस्कुराए और कहा, “ये तो बहुत ही अच्छा होगा। मुझे भी लगता है की हमें अब इनकी सगाई करवा देनी चाहिए।” 


आहना ये जानकर बहुत खुश थी की बहुत जल्दी अयांश आने वाला है और फिर उसकी सगाई भी हो जाएगी अयांश से। रिद्धिमा ने साथ बैठे आहना और राकेश को देखा और सोचा, “तुम्हें जितना खुश होना है हो सकती हो आहना क्योंकि अयांश के आने के बाद तुम्हारी ये सारी खुशियां दर्द में बदल जाएंगी। पता नही क्या होगा उस वक्त तुम्हारा जब तुम्हे पता चलेगा की अयांश तुम्हारा नही रहा और तुम राकेश, पार्टी तो तुम रखोगे पर आहना और अयांश की सगाई की नही बल्कि नुपुर और अयांश की रिसेप्शन पार्टी।” 


अयांश ने पिछले एक हफ्ते से खुदको कमरे में ही कैद रखा हुआ था। नुपुर को इस बात से ज्यादा फर्क नही पड़ा पर समीर को अयांश की फिक्र रहती क्योंकि अयांश खाने के लिए भी बाहर नही आता था पर फिर भी समीर उसे कमरे में ही जाकर जबरदस्ती थोड़ा बहुत खिला देता था जिससे अयांश की तबियत खराब न हो। 


इस वक्त वो सब एयरपोर्ट पर खड़े थे क्योंकि आज अयांश को वापिस जाना था। नुपुर जहाँ खुश थी वहीं अयांश का मन उलझनों से घिरा हुआ था की वो घर पहुँचकर आहना और राकेश से क्या कहेगा की उसने नुपुर से शादी क्यों की और क्या आहना उसे समझेगी। अयांश के पास बस ये सब सवाल जिनके जवाब उसे घर पहुँचकर ही मिल सकते थे। 


समीर अयांश से गले मिला और कहा, “तू टेंशन मत लियो। मुझे पूरा भरोसा है की आहना तुझे समझेगी।” 


अयांश बस हल्का सा मुस्कुरा दिया और फिर अपना सामान लेकर नुपुर के साथ एयरपोर्ट के अंदर चला गया। फ्लाइट में बैठकर नुपुर ने उसका हाथ पकड़ने की कोशिश की तो उसने अपने दोनों हाथों में किताब पकड़ ली। नुपुर ने उसे वहाँ कुछ नही कहा और अपने फोन में गाने सुनने लग गई। 


एक लंबे सफर के बाद उनकी फ्लाइट दिल्ली एयरपोर्ट पहुँची। अपना सामान लेने के बाद अयांश नुपुर के साथ एयरपोर्ट से निकलने के लिए जैसे ही आगे बढ़ता है, नूपुर उसका हाथ पकड़ लेती है। वो अपना हाथ छुड़वाने की कोशिश करता है तो नूपुर कहती है, “मत करो कोशिश अयांश। तुम शायद भूल चुके हो की अब तुम मेरे हो।” 


“और तुम शायद ये भूल रही हो की तुमसे शादी मैंने सिर्फ आहना को बचाने के लिए की है।” अयांश ने कहा तो नूपुर मुस्कुराने लगी और बोली, “आहना, उसे कैसे भूल सकती मैं। अब तो मैं तुम्हारा हाथ बिल्कुल भी नही छोड़ने वाली क्योंकि तुम्हारी आहना बाहर ही खड़ी होगी। जरा देखे तो सही की उसे कितनी तकलीफ होती है तुम्हारा हाथ मेरे हाथ में देखकर।” 


नुपुर की बात सुनकर अयांश परेशान हो गया। उसे तो इस बात का ध्यान ही नही था की आहना उसे लेने एयरपोर्ट आएगी। उसने एक बार फिर अपना हाथ नुपुर के हाथ से छुड़वाने की कोशिश की पर नुपुर ने अपनी पकड़ और मजबूत कर ली और उसे बाहर चलने के लिए कहा। अयांश अब खुदको आहना का सामना करने के लिए तैयार करने लगा। 


राकेश आहना को अपने साथ एयरपोर्ट ले जाने के लिए उसके घर पहुँचे। कबीर को कुछ जरूरी काम था इसलिए वो उनके साथ नही जा रहे थे। रिद्धिमा भी वहीं बैठी हुई थी पर आज उसे गुस्सा नही आ रहा था बल्कि वो तो आहना को आज खुद अपने साथ ले जाना चाहती थी जिससे वो देख सके की आहना की क्या हालत होगी जब वो अयांश को नुपुर के साथ देखेगी।


“आहना बेटा, कितना टाइम लगेगा। अंकल और आंटी वेट कर रहे है तुम्हारी।” कबीर ने जैसे ही कहा आहना अपने कमरे से बाहर आ गई। आज उसने बहुत ही खूबसूरत हल्के पर्पल रंग का अनारकली सूट पहना हुआ था जिसके दुप्पटे को उसने अपने कंधे पर पिन अप किया हुआ था। कानों में झुमके, माथे पर छोटी सी बिंदी और खुले बालों में वो बहुत ही प्यारी लग रही थी। 


राकेश उसे और रिद्धिमा को लेकर एयरपोर्ट के लिए निकल गए। आहना का दिल जोर से धड़क रहा था क्योंकि वो पूरे दो साल बाद अयांश को सामने से देखने वाली थी। आहना ने रास्ते में से अयांश के लिए लाल गुलाबों का एक खूबसूरत गुलदस्ता खरीदा और एयरपोर्ट पहुँचकर वो दरवाजे की तरफ देखते हुए बेसब्री से अयांश के आने का इंतजार करने लगी। 


कुछ वक्त बाद उसे अयांश बाहर आता हुआ दिखाई दिया। अयांश को देखकर वो मुस्कुराने लगी पर अगले ही पल उसकी मुस्कान गायब हो गई जब उसकी नजर अयांश के साथ उसका हाथ थामे चल रही नुपुर पर गई।


Continued In जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 23


Tuesday, 7 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 21




अयांश कैब लेकर अपने अपार्टमेंट में पहुँचा। समीर उस वक्त घर पर नही था। अयांश कमरे में आकर रोने लगा। वो आहना से बात करना चाहता इसलिए उसने आहना का नम्बर मिलाया। 

“हेलो, अयांश।” आहना की आवाज सुनकर वो रोने लगा। उससे कुछ बोला ही नही गया। आहना उसकी रोने की आवाज सुनकर परेशान हो गई और पूछा, “क्या हुआ है, अयांश?”

अयांश ने बिना कुछ भी कहे फोन काट दिया और रोने लगा। कुछ देर बाद किसी ने उसके कमरे का दरवाजा खटखटाया। उसने उठकर दरवाजा खोला तो सामने नुपुर खड़ी थी। उसे वहाँ देखकर अयांश को गुस्सा आ गया और उसने कहा, “तुम यहाँ क्या कर रही हो?” 

“मैं बताने आई हूँ की मैं हमारी शादी के लिए सारी फॉर्मेलिटी पूरी करने के लिए कोर्ट जा रही हूँ। तुम फ्राइडे को तैयार रहना।” नुपुर ने कहा। अयांश ने कोई जवाब नही दिया बस जोर से दरवाजा बंद कर दिया। 

***

आहना ऑफिस में काम कर रही थी पर उसका मन काम में नही लगकर अयांश के बारे में सोचे जा रहा था। कल रात से ही आहना परेशान थी इस बारे में सोचकर की अयांश ने उसे फोन करके उससे बात क्यों नही की और वो रो क्यों रहा था। उसने सोचा कि उसे राकेश से इस बारे में बात करनी चाहिए। वो उठकर उनके केबिन की तरफ चली गई। 

आहना ने राकेश के केबिन का दरवाजा खोला तो देखा राकेश और कबीर वहाँ लगे सोफों पर तीन आदमियों के साथ बैठे है जिन्हें आहना नही जानती थी। उसे वहाँ देखकर राकेश ने कहा, “आहना, अंदर आ जाओ बेटा।” 

आहना अंदर चली आई तो वो तीनों आदमी उसे देखकर मुस्कुराते हुए खड़े हो गए। कबीर आहना के पास आए और कहा, “आहना, ये तीनों तुम्हारे मामा है।” 

कबीर की बात सुनकर आहना डर गई और उसने उन तीनों को देखकर कहा, “आप लोग यहाँ क्यों आए है? आप अगर यहाँ मेरे से वो प्रॉपर्टी लेने आए है जो नानाजी ने मम्मी को दी थी तो चले जाइए यहाँ से। मैं आपको प्रॉपर्टी के पेपर्स पर कभी साइन नही दूंगी अपने और अगर आपने ऑर्फेनेज या ओल्ड एज होम को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की तो मैं पुलिस में आपकी कंप्लेंट करदूंगी।” 

उसके बड़े मामा मुस्कुराते हुए उसके पास आए और कहा, “हम तुमसे कुछ भी वापिस लेने नही आए है बेटा। वो सब तुम्हारा है। हम तो बस यहाँ अपनी बहन की आखिरी निशानी को देखने आए है।  जब तक तुम्हारे नानाजी थे, तब तक हम अंजलि को वापिस नही ला सकते थे क्योंकि वो अंजलि से नफरत करने लग गए थे। उनकी मौत के बाद हमने अंजलि को ढूंढना शुरू किया और एक साल बाद हमें पता चला की अंजलि ने दूसरी शादी कर ली है और तुम भी इस दुनिया में आ गई हो। उस वक्त हम ये जानकर खुश थे की अंजलि ठीक है और अपनी जिंदगी में खुश है।” 

उनकी आँखों में आँसू आ गए और उन्होंने कहा, “अंजलि मुझसे मिली थी एक दिन।” कबीर ने जैसे ही ये सुना उन्होंने हैरानी से उनकी तरफ देखा तो उन्होंने कबीर को देखकर कहा, “उसने मुझसे कहा था की मैं किसी को न बताऊं की हम मिले थे। उसके चार साल बाद पता चला की अंजलि हमारे बीच नही रही।” 

उन्होंने अपने आँसू पोंछे और कहा, “मुझे तुम्हारी फिक्र होने लगी की तुम ठीक होगी या नही। मैंने तुमसे कभी मिलने की कोशिश तो नही की पर तुम्हारी खबर जरूर रखता था मैं।” उन्होंने आहना के सिर पर हाथ रखा और फिर कहा, “तुम बिल्कुल अंजलि जैसी हो। हमेशा खुश रहना और अपना ख्याल रखना। हमें अब चलना चाहिए।” 

उसके बाकी दोनों मामा ने भी उसके सिर पर हाथ रखा और वो सब वहाँ से चले गए। 
कबीर को कुछ जरूरी काम था इसलिए वो भी बाहर चले गए। उनके जाते ही आहना ने राकेश से कहा, “अंकल, मुझे आपसे अयांश के बारे में कुछ बात करनी है।” 

“बताओ क्या बात है?” राकेश ने अपनी कुर्सी पर बैठते हुए पूछा। 

“अंकल, कल रात मुझे अयांश का फोन आया था पर उसने मुझसे कोई बात नही की और वो रो रहा था। मुझे बहुत टेंशन हो रही है उसकी” आहना की बात सुनकर राकेश को हैरानी हुई और उन्होंने कहा, “तुम परेशान मत हो बेटा। मैं बात करता हूँ अयांश से।” 

“जी अंकल।” कहकर आहना उठकर उनके केबिन से बाहर आ गई। राकेश ने अयांश को फोन लगाया पर अयांश ने उनका फोन नही उठाया। 

अयांश अब सबसे बहुत कम बात करने लगा। वो ना आहना का फोन ज्यादा उठाता न ही समीर से ज्यादा बात करता। आहना को समझ नही आ रहा था की अयांश ऐसा क्यों कर रहा है। वहीं राकेश भी उसे लेकर परेशान थे पर वो कुछ नही कर सकते थे क्योंकि अयांश उनके फोन भी नही उठा रहा था। आहना और राकेश को बस अब अयांश के लौटने का इंतजार था। इन सब में अगर कोई खुश था तो वो थी रिद्धिमा और नुपुर क्योंकि वो जो चाहती थी वो होने जा रहा था। 

फ्राइडे को अयांश नुपुर के साथ कोर्ट में खड़ा था। समीर और अमीषा भी आए हुए थे। समीर को हैरानी हो रही थी की अयांश अचानक से नुपुर के साथ शादी क्यों कर रहा है अगर वो आहना से प्यार करता है। उसे बहुत गुस्सा भी आ रहा था अयांश के ऊपर पर वो चुप रहा। 

नुपुर ने मुस्कुराते हुए रजिस्टर पर साइन कर दिए और पैन अयांश को थमा दिया। अयांश चुपचाप अपने हाथ में पकड़े पैन को देखे जा रहा था। आहना का चेहरा उसकी नजरों के सामने आने लगा। उसने अपनी आँखें बंद करली और सोचा, “आई एम सॉरी, आहना। तुम्हारे लिए मुझे ये करना होगा।” 

उसने अपनी आँखें खोली और रजिस्टर पर साइन कर दिए। उसके बाद अमीषा ने नुपुर की तरफ से और समीर ने अयांश की तरफ से गवाह बनकर साइन कर दिए। साइन करके समीर वहाँ से जल्दी से बाहर आ गया। अयांश भी उसके पीछे आया और उसे रोकते हुए कहा, “समीर, मैं जानता हूँ तू गुस्सा है मुझसे बस एक बार मेरी बात सुन ले।” 

समीर ने उसे देखा और कहा, “मैं नही जानता तूने ये क्यों किया पर तूने आहना के साथ अच्छा नही किया। एक बार भी नही सोचा तूने उसके बारे में। ये सिला दिया है तूने उसे उसके प्यार और इंतजार का। वो वहाँ खुशी के साथ तेरे आने का इंतजार कर होगी की क्योंकि वो तुझे अपना प्यार समझती है और तेरे साथ रहना चाहती है पर उसे क्या पता की उसका प्यार उसके साथ रहने नही बल्कि उससे दूर होकर उसके पास आ रहा है।” 

“समीर ये…” अयांश ने जैसे ही कहना चाहा समीर ने उसे बीच में ही रोकते हुए कहा, “क्या समीर हा, क्या समीर? देख इतना तो मैं भी जानता हूँ की तेरे इस डिसीजन से तुझे भी उतनी ही तकलीफ हो रही है जितनी आहना को होगी क्योंकि ये डिसीजन लेना तेरे लिए आसान नही रहा होगा। अब बस इतना जानना चाहता हूँ की क्यों किया तूने ये सब अपने और आहना के साथ?” 

“मैं ये तुझे नही बता सकता।” अयांश ने कहा। 

“तुझे बताना होगा, अयांश। बता मुझे क्यों किया तूने ये सब?” समीर ने गुस्से में अयांश की बाहों को पकड़ते हुए उसे देखकर पूछा। समीर के बार बार पूछने पर अयांश ने चिल्लाकर कहा, “आहना के लिए ही किया है यार मैंने ये सब। आहना के लिए ही किया है।” 

अयांश की आँखों में आँसू आ गए। समीर ये सुनकर हैरान था। वो अयांश से कुछ कहता इससे पहले ही उसके कान में एक आवाज पड़ी, “उफ्फ, सच अ ड्रामा।” 

समीर और अयांश ने देखा तो वहाँ नुपुर खड़ी थी अमीषा के साथ। उसे देखते ही अयांश को गुस्सा आ गया तो उसने समीर से कहा, “घर चलते है। वहाँ मैं तुझे सब कुछ बताऊंगा।” 

घर पहुँचकर अयांश समीर को अपने कमरे में लेकर गया और उसे सब कुछ बता दिया कि नुपुर ने उसके साथ क्या किया और कैसे उसे धमकाया की अगर उसने उससे शादी नही की वो आहना की जिंदगी बरबाद करदेगी। समीर को ये सब जानकर बहुत दुख हुआ की अयांश ने उसे एक बार भी ये सब नही बताया और अकेले ही सब कुछ सहता रहा।

“आसान नही था यार पर मेरी आहना की जिंदगी के लिए मुझे ये करना पड़ा। वो मेरी लाइफ है यार। अपनी लाइफ को बचाने के लिए ही मुझे अपनी लाइफ को अपनी लाइफ से बाहर करना पड़ रहा है।” अयांश की आँखों से आँसू निकलकर गाल पर बह गया। ये देखकर समीर ने उसे गले लगा लिया और कहा, “तूने एक बार तो मुझे ये सब बताया होता। इतने दिनों से सब कुछ अकेले ही सहा तूने।”

“मुझे खुद कुछ समझ नही आ रहा था। मैं बस ये जानता था की मैं अपनी आहना को तकलीफ में नही देख सकता।” अयांश ने उससे अलग होते हुए कहा। 

समीर ने अयांश की आंखों में देखा और कहा, “आहना को तो अभी भी तकलीफ होगी यार। नुपुर जो भी उसके साथ करती, आहना उन सबको सह लेती क्योंकि तू उसके पास होता पर वो यह तकलीफ कैसे बर्दाश्त करेगी की तू उसका नही रहा अब।”

 
Continued In जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 22