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Sunday, 19 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 32

 


नुपुर अयांश का इंतजार करते करते जब थक गई तो अपने कमरे में जाकर सो गई। 


सुबह अयांश की नींद खुली तो वो मुस्कुरा उठा। आहना उसके सीने पर अपना सिर रखकर आराम से सो रही थी और उसके होठों पर मुस्कान थी। उसने आहना के बालों पर एक किस किया। उसने धीरे से आहना को खुद से अलग किया जिससे वो जाग न जाए और उठकर बाथरूम में चला गया। 


बाथरूम से बाहर आने के बाद उसने देखा कि आहना अभी भी सो रही है और उसके सारे बाल उसके चेहरे पर आ गए है। अयांश उसके पास आकर बैठ गया। उसने प्यार से अपनी उंगलियों से आहना के चेहरे से सारे बाल हटाए और उसके माथे पर किस करते हुए कहा, “उठ जाओ, टेडी बियर।” 


“उम्म, उठती हूँ थोड़ी देर में।” आहना ने नींद में कहा और अयांश का हाथ अपने हाथ में लेकर उसकी गोद में सिर रखकर फिर से सो गई। अयांश मुस्कुरा दिया और उसके बालों को सहलाने लगा। 


थोड़ी देर बाद आहना उठी और तैयार होने चली गई। उसके तैयार होने के बाद, उसने और अयांश ने वहीं नाश्ता किया और फिर वहाँ से निकल गए। अयांश जैसे ही अपने घर पहुँचा, उसका सामना सबसे पहले नुपुर से हुआ, जो गुस्से से उसे घूरे जा रही थी। 


“कहाँ थे तुम कल सारी रात?” नुपुर ने उसके पास आकर गुस्से में पूछा। 


अयांश ने उसे देखा और कहा, “तुम ये सवाल पूछने का कोई हक नही रखती मुझसे?” 


“ओह रियली, मैं तुम्हारी वाइफ हूँ और मुझे ये जानने का राइट है की तुम कहाँ थे।” नुपुर ने चिल्लाते हुए कहा।


“जबरदस्ती के रिश्ते को नाम देना बंद करो तुम और जानना चाहती हो ना मैं कहाँ था तो सुनो। तुम मेरी वाइफ हो पर आजतक मैंने तुम्हें इसका असली हक नही दिया है। वही हक मैं किसी और को देकर आया हूँ कल रात। अब इतनी समझदार तो तुम हो की ये जान सको की मैं कहाँ था।” कहकर अयांश ऊपर अपने कमरे में चला गया। 


नुपुर हैरानी और गुस्से से उसे देखती रही और उसने कहा, “मैं तुम्हें छोडूंगी नही आहना।” 


रात को डिनर के बाद राकेश ने अयांश को अपने स्टडी रूम में आने के लिए कहा। नुपुर जानना चाहती थी की राकेश अयांश से क्या बात करना चाहते है इसलिए वो भी थोड़ी देर बाद अयांश के पीछे पीछे आ गई और स्टडी रूम में बाहर आकर रुक गई। 


अयांश राकेश के सामने कुर्सी पर बैठा था। राकेश अयांश के सामने आकर बैठा और पूछा, “आहना के साथ अब तुम्हारा रिश्ता ठीक है ना।” 


“जी पापा। सब ठीक है। फिर से सब कुछ पहले जैसा हो गया है।” अयांश ने कहा। आहना का नाम सुनते ही बाहर रूम के बाहर खड़ी नुपुर को गुस्सा आ गया पर राकेश की अगली बात ने उसे और गुस्सा दिला दिया जब उन्होंने अयांश से पूछा, “नुपुर को डायवोर्स कब दे रहे हो तुम?” 


“पापा, मैं नही दूंगा नूपुर को डायवोर्स।” अयांश ने जैसे ही ये कहा, नूपुर खुश हो गई पर राकेश ये सुनकर हैरान है इसलिए उन्होंने पूछा, “तुम्हारे कहने का मतलब क्या है, अयांश?” 


“पापा, मैं नुपुर को इतना ज्यादा परेशान करूंगा की वो खुद मुझे डायवोर्स देकर छोड़ देगी।” अयांश ने कहा जिसे सुनते ही नुपुर गुस्से में वहाँ से अपने कमरे में आ गई और उसने दीवार पर लगी अयांश की तस्वीर को देखते हुए कहा, “जितनी मर्जी कोशिश करलो अयांश। जितना मर्जी परेशान करो तुम मुझे। मैं तुम्हें कभी डायवोर्स नही दूंगी और न ही कभी छोडूंगी। अगर तुम्हें कोई छोड़कर जाएगा तो वो है आहना।” 


एक दिन आहना ऑफिस में बैठे कंप्यूटर स्क्रीन के आगे काम कर रही थी की तभी उसे महसूस हुआ की उसकी नज़र कमज़ोर हो रही है। उसने अपनी आँखें बंद करते हुए कहा, “ज्यादा कम्प्यूटर स्क्रीन पर काम करने की वजह से नजर कमज़ोर हो रही है।” 


वो आँखें खोलकर फिर से अपने काम में लग गई। वो इतनी व्यस्त हो गई की उसने ध्यान ही नही दिया की अयांश पिछले पाँच मिनिट से उसके पीछे खड़ा उसे ही देख रहा था। उसने हल्के से आहना के कंधे पर मारा जिससे आहना का ध्यान उसके ऊपर गया और उसने खड़े होते हुए कहा, “अयांश, तुम यहाँ?” 


“तुमसे मिलने आया था पर तुम तो बिजी हो बहुत। इतना कहाँ ध्यान लगा रखा है की मेरा ही ध्यान नही रहा तुम्हें।” अयांश ने कहा। 


आहना ने अपने सामने रखी कुछ फाइलों और कंप्यूटर की तरफ इशारा करते हुए कहा, “इन फाइलों और कंप्यूटर के साथ बिजी हूँ।” 


अयांश ने सारी फाइल्स को बंद किया और कहा, “मैं तुम्हें अपने साथ ले जाने आया था। तुम इसी वक्त मेरे साथ चल रही हो।” 


“पर कहाँ?” आहना ने फाइलों को बंद करता देखते हुए पूछा।


“हमारे बचपन वाले पार्क में।” अयांश ने आहना का हाथ पकड़कर उसे उठाते हुए कहा। 


वो दोनों ऑफिस से बाहर आ गए और गाड़ी में बैठ गए। जल्दी ही वो दोनों पार्क के अंदर आकर उसी बेंच पर बैठ गए जिसपर वो हमेशा बैठा करते थे और हमेशा की तरह आहना ने अपना सिर अयांश के कंधे पर रख रखा था। 


वो दोनों एक दूसरे का हाथ थामे हुए पार्क में खेल रहे बच्चों को देख रहे थे। अयांश ने आहना को देखा और पूछा, “क्या तुम्हें भी मेरी तरह हमारा बचपन याद आ गया। जब हम भी ऐसे ही यहाँ आकर खेला करते थे?” 


“हम्म, कितनी जल्दी बड़े हो गए न हम लोग। मुझे तो आज भी वो दिन फिर से जीने का मौका मिले न, तो मैं आसानी से तैयार हो जाऊंगी इसके लिए।” आहना ने कहा। 


“वैसे ये मौका तो हमें मिलेगा एक बार बहुत जल्दी।” अयांश ने कहा तो आहना ने उसे हैरानी से देखा और पूछा, “वो कैसे?” 


“हमारी शादी होगी। फिर हमारे बच्चे होंगे। छोटी आहना और छोटा अयांश। जिनमें हम अपना बचपन जीयेंगे और उनके साथ रोज यहाँ आया करेंगे।” अयांश ने मुस्कुराते हुए कहा और आहना को देखा। 


“तुमने बच्चों के बारे में भी अभी से ही सोच लिया।” आहना ने हैरानी से पूछा।


“येस, मुझे एक बेबी गर्ल एंड एक बेबी बॉय चाहिए जो बिल्कुल मेरे ऊपर जाएंगे।” अयांश ने खुश होकर कहा।


“वो तो होगा ही। हर वक्त तुम मेरी नज़रों के सामने जो रहा करोगे।” आहना ने प्यार से कहा तो अयांश भी प्यार से उसकी आँखों में देखने लगा।


जैसे ही अयांश आहना के साथ ऑफिस से निकला था, उसके कुछ वक्त बाद ही नुपुर ऑफिस में आई। जब उसे पता चला की अयांश ऑफिस में नही है तो उसे गुस्सा आने लगा जो और ज्यादा बढ़ गया जब उसे पता चला की आहना भी ऑफिस में नही है। उसे समझते देर नही लगी की पक्का अयांश आहना के साथ कहीं गया है। 


वो गुस्से से घर आ गई और अयांश के आने का इंतजार करने लगी। रिद्धिमा भी वहीं बैठी उसे देख रही थी। शाम में सात बजे के करीब अयांश घर पहुँचा। 


“कहाँ थे तुम इतने वक्त से?” नुपुर ने उसे गुस्से में पूछा। 


अयांश ने उसे देखा और कहा, “ऑफिस में था मैं।” 


नुपुर ने उसे देखा और कहा, “झूठ। तुम ऑफिस में नही थे। गई थी मैं ऑफिस आज। न तुम वहाँ थे और न वो आहना। उसी के साथ थे न तुम?” 


“सही कहा तुमने। आहना के साथ ही था मैं।” अयांश ने कहा और बिना नुपुर कि बात सुने वहाँ से ऊपर अपने कमरे में चला गया।


नुपुर ने रिद्धिमा को देखा और कहा, “देखा आपने। वो आहना अयांश को मुझसे छीनकर ही रहेगी।” 


“शांत रहो, नुपुर।” रिद्धिमा ने कहा।


“कैसे शांत, रहूं? आपको पता है राकेश अंकल चाहते है की अयांश जल्द से जल्द मुझे डायवोर्स दे और आहना से शादी करले।” नुपुर ने गुस्से में चिल्लाते हुए कहा।


“क्या? वो तुम्हें डायवोर्स नही दे सकता।” रिद्धिमा ने कहा।


“अब मैं उस आहना को नही छोडूंगी, मॉम। मैं उस आहना को अयांश के साथ और बर्दाश्त नही कर सकती।” नुपुर ने गुस्से में अपने दांत भींचते हुए कहा।


रिद्धिमा ने नुपुर को देखा और एक शैतानी मुस्कान के साथ कहा, “डोंट वरी, बेटा। आहना को नुकसान पहुँचाने में अब वही इंसान हमारी मदद करेगा, जो उसे सबसे ज्यादा पसंद करता है।” 


Continued In जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 33

Saturday, 18 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 31


 
अयांश आहना के साथ रहना चाहता था इसलिए उसने आहना से पूछा की क्या वो दोनों पूरी रात एक साथ रह सकते है जिससे आहना जो अभी कुछ वक्त पहले मुस्कुरा रही थी, उसे गुस्सा आने लगा जो उसके चेहरे पर साफ नजर आ रहा था। 

अयांश आहना को ऐसे देखकर घबरा गया था और उसके मन में बहुत से ख्याल आने लगे क्योंकि उसे भी समझ नही आ रहा था की आहना को एकदम से उसकी बात पर इतना गुस्सा क्यों आ गया क्योंकी वो अच्छे से जानता था की आहना कभी सपने में भी उसपर कभी गुस्सा नही कर सकती थी। 

अयांश आहना को देखकर परेशान था पर आहना को उसे ऐसे देखकर बहुत ही ज्यादा हँसी आ रही थी जिसे वो उससे छुपाने की पूरी कोशिश कर रही थी अपना गुस्सा अच्छे से दिखाने के लिए क्योंकि उसे अयांश को थोड़ा और परेशान करना था। 

“आहना तुम…तुम ऐसे गुस्सा क्यों कर…” अयांश ने घबराते हुए इतना ही कहा था की आहना ने उसे देखते हुए हँसना शुरू कर दिया जिससे अयांश समझ गया की आहना उसे परेशान कर रही थी।

“ये क्या था आहना। पता है कितना घबरा गया था मैं तुम्हें ऐसे देखकर। मुझे लगा तुम फिर से मुझसे नाराज़ हो गई हो।” अयांश ने कहा तो आहना उसके करीब आई और उसने हँसते हुए कहा, “सॉरी, मुझे नही पता था की तुम इतना परेशान हो जाओगे पर तुम बहुत क्यूट लग रहे थे।” 

अयांश ने मुस्कुराते हुए उसके माथे को अपने होठों से छू लिया। आहना ने उसके गाल को छुआ और कहा, “मैं पापा को बता देती हूँ फिर नीचे चलते है।” 

आहना ने फोन करके कबीर को इस बारे में बताया तो कबीर ने उसे अयांश के साथ रहने की परमिशन दे दी क्योंकि उन्हें अयांश पर पूरा भरोसा था। अयांश आहना को नीचे लेकर आया और रिसेप्शन की तरफ आकर वहाँ बैठी रिसेप्शनिस्ट से कहा, “प्रिपेयर अ सुइट रूम फोर मी।” 

रिसेप्शनिस्ट जिसका नाम सावी था, उसने अयांश को हैरानी से देखा क्योंकि उसे अयांश का लहजा ऑर्डर देने वाला लगा। उसने अयांश से पूछा, “सर, यू नीड टू हैव अ बुकिंग फोर रूम।” 

अयांश कुछ कहने ही वाला था की तभी वहाँ होटल का मैनेजर आया और अयांश को देखकर उसने मुस्कुराते हुए कहा, “सर, आप यहाँ।” 

अयांश ने हाँ में सिर हिलाया और कहा, “मुझे पाँच मिनिट में अपने लिए एक सुइट रूम तैयार चाहिए।” 

“जी सर। आप बैठिए। मैं अभी करवाता हूँ।” मैनेजर ने कहा तो अयांश आहना हाथ थामकर उसके साथ वहाँ लगे सोफे पर आकर बैठ गया। सावी ने मैनेजर को देखा और पूछा, “सर, ये रिक्वेस्ट भी तो कर सकते थे न। ये तो सीधा हमें ऑर्डर्स दे रहे है।” 

“क्या तुम्हें पता है ये है कौन?” मैनेजर ने पूछा तो सावी ने ना में सिर हिला दिया।  

“ये इस होटल के ओनर है। तुमने अगर उन्हें कुछ कहा है तो जाकर अपने बिहेवियर के लिए अपोलोजाईस करो। मैं जाकर जल्दी से रूम तैयार करवाता  हूँ।” कहकर मैनेजर वहाँ से चला गया। सावी ये जानकर हैरान थी की अयांश वहाँ का ओनर है क्योंकी वो अयांश को गेस्ट समझ रही थी। वो अयांश के पास जाने लगी। 

अयांश आहना के साथ कुछ बात कर रहा था की तभी सावी ने उसके पास आकर कहा, “एक्सक्यूज मी, सर।” 

अयांश और आहना ने उसकी तरफ देखा और अयांश ने कहा, “येस।” 

“सर, आई एम रियली सॉरी फोर माय बिहेवियर।  एक्चुअली, मैंने अभी अभी यहाँ काम करना शुरू किया है इसलिए मुझे पता नही था की आप कौन है।” सावी ने कहा।

अयांश ने उसे देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “इट्स ओके। आप सिर्फ अपना काम कर रही थी। ये अच्छी बात है की आप अपना काम अच्छे से कर रही है।” 

“थैंक यू, सर।” सावी ने कहा और अयांश को देखकर मुस्कुरा दी। मैनेजर वहाँ आया और अयांश से कहा, “सर, रूम रेडी है।” 

अयांश आहना का हाथ पकड़कर उसके साथ जाने के लिए सोफे से उठा तो सावी ने अयांश को देखकर मुस्कुराते हुए कहा, “सर, आपको किसी भी चीज की जरूरत हो तो प्लीज मुझे इनफॉर्म कर दीजिएगा।” 

आहना को सावी का ऐसे अयांश को देखना अच्छा नही लग रहा था। उसका मन कर रहा था की वो अभी सावी की आँखों पर पट्टी बांध दे। 

“हम्म्म।” कहते हुए अयांश आहना के साथ जाने लगा। 

“हैव अ प्लीसेंट स्टे, सर।” सावी ने कहा तो अयांश मुस्कुराते हुए थैंक यू कहकर जाने के लिए मुड़ गया।

“गुड नाईट, सर।” सावी ने फिर कहा और उसने ये बात बहुत ही अलग अंदाज में कही जिससे अब आहना को गुस्सा आ गया और उसने सावी को घूरते हुए कहा, “मुझे कुछ चाहिए।” 

“यस मैम।” सावी ने धीरे से कहा क्योंकि वो आहना के इस तरह उसे घूरने से थोड़ा घबरा गई थी पर अयांश समझ गया की आहना को सावी का उसे इस तरह देखना पसंद नही आया और उसे जलन हो रही है। 

“प्राइवेसी, मुझे प्राइवेसी चाहिए इनके साथ जो तुम लेने नही दे रही हो क्योंकि जैसे ही हम जाने लगते है तुम कुछ न कुछ बोलने लग जाती हो।” आहना ने उसे घूरते हुए कहा। 

अयांश मन ही मन में हँसने लगा। आहना सावी से कुछ और कहती, इससे पहले ही अयांश ने उसे वहाँ से ले जाना सही समझा। सावी हैरान खड़ी उन्हें जाता हुआ देखती रही और फिर मैनेजर से पूछा, “ये कौन थी सर के साथ?” 

“ये उनकी गर्लफ्रेंड और उनकी होने वाली वाइफ है। यहाँ ये बात सबको पता है क्योंकि सर इन्हें बहुत बार अपने साथ यहाँ लाते रहते है और राकेश सर भी इन्हें अपने साथ बहुत बार मीटिंग्स के लिए यहाँ लेकर आते थे जब इन्होंने उनके ऑफिस में काम करना शुरू किया था। राकेश सर की बेटी की तरह है ये। तुमने नया नया ज्वाइन किया है न इसलिए नही पता तुम्हें इस बारे में। अयांश सर की शादी वैसे तो किसी और से हो रखी है और उनका वेडिंग रिसेप्शन भी हुआ था पर मैंने सुना है कि अयांश सर उस शादी में खुश नही है क्योंकि वो शादी इनकी जबरदस्ती करवाई गई थी। ये आज भी आहना मैम से ही प्यार करते है।” मैनेजर ने सावी को बताया। 

“तो क्या इन्होंने अपनी वाइफ को डायवोर्स दे दिया है?” सावी ने पूछा। 

“ये सब मैं नही जानता बट सर लकी है की उनकी लाइफ में आहना मैम है जो उनके ऊपर इतना ट्रस्ट करती है और उन्हें समझती है। उनकी जगह कोई और लड़की होती तो कभी भी सर को माफ नही करती।” मैनेजर ने कहा और फिर सावी को वापिस काम करने का कहकर वहाँ से चला गया। सावी वापिस रिसेप्शन पर आकर काम में लग गई। 

अयांश आहना को कमरे में लेकर आया और दरवाज़ा बंद करने के बाद उसे अपनी बाहों में भरकर पूछा, “तुम्हें जलन हो रही है?” 

"हाँ, हो रही है जलन। वो मेरे सामने तुम्हारे साथ फ्लर्ट कर रही थी और तुम भी उसे देखकर मुस्कुरा रहे थे।” आहना ने कहा।

अयांश ने उसके माथे को अपने होठों से छुआ और कहा, “मेरी नजरों के सामने हजारों खूबसूरत लड़कियां भी आ जाए, फिर भी मेरी आँखों में सिर्फ तुम्हारा ही चेहरा रहेगा और मेरे दिल पर तुम्हारा पहरा।” 

आहना उसकी बात सुनकर हँसने लगी और उसने कहा, “तुम क्या अमेरिका में दो साल रहकर फ्लर्टिंग में मास्टर्स करकर आए हो।” 

“येस, आई मास्टरड द आर्ट ऑफ फ्लर्टिंग।” अयांश ने शरारत से कहा। 

आहना अयांश के साथ बेड पर बैठ गई। अयांश ने उसे अपनी बाहों में भर लिया। आहना उसके सीने पर सिर रखकर उसके दिल की धड़कने सुनने लगी। अयांश ने आहना के माथे पर किस किया और पूछा, “आहना, क्या मैं तुम्हें होठों पर किस कर सकता हूं?” 

आहना ने उसकी आँखों में देखा और पूछा, “तुम इतने शरीफ कैसे हो गए?” 

“मतलब?” अयांश ने पूछा।

“आज से पहले तो तुमने कभी पूछा नही किस करने के लिए तो अब कैसे?” आहना ने कहा तो अयांश ने अपने हाथ की उंगलियों को उसके हाथ की उंगलियों में फंसाते हुए कहा, “अमेरिका में थोड़ा सा कोर्स सुधरने का भी किया था।” 

उसकी बात सुनकर आहना हँसने लगी और उसने कहा, “ये बात है तो तुम मुझे कहीं भी किस कर सकते हो।” 

“क्या सच में?” अयांश ने खुश होते हुए कहा। 

“हाँ।” आहना ने मुस्कुराते हुए कहा जिससे अयांश की आँखों में एक चमक आ गई पर अगले ही पल आहना ने अयांश के अरमानों पर पानी फेर दिया जब उसने कहा, “पर शादी के बाद।” 

“आहना, ये तो चीटिंग हुई न।” अयांश ने झूठी नाराज़गी दिखाते हुए कहा। 

“फिर मेरा सारा प्यार भी तो तुम्हारे लिए ही है ना।” आहना ने कहा और फिर वो दोनों लेट गए। अयांश ने अपने दोनों हाथ आहना की कमर के आसपास लपेटे और उसे अपनी बाहों में भरकर सुकून से सो गया। आहना के चेहरे पर भी एक प्यारी सी मुस्कान थी। 

अयांश और आहना जहाँ सुकून से एक दूसरे के साथ वक्त बिता रहे थे वहीं नुपुर गुस्से से लिविंग में इधर उधर टहल रही थी। उसे घर आकर सिक्योरिटी गार्ड से पता चला था की अयांश आहना के साथ गया है जिसकी वजह से उसे इतना ज्यादा गुस्सा आया था की वो रिद्धिमा पर भी चिल्लाई थी की उसने अयांश को रोका क्यों नही, ऊपर से अयांश अभी तक घर नही पहुँचा था जिसकी वजह से नुपुर का गुस्सा हर बीतते हुए मिनट के साथ साथ बढ़ रहा था।

Continued In जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 32

Friday, 17 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 30



आहना अयांश को लेकर ऑर्फेनेज और ओल्ड एज होम पहुँंची। जब अयांश ने उससे पुछा की वो उसे वहाँ क्यों लेकर आई है तो आहना ने कहा, “अंदर चलो मेरे साथ तुम्हें सब पता चल जाएगा।” 


अयांश आहना के साथ अंदर जाने लगा पर उसने अपने मन में ये सोचना शुरू कर दिया था की आहना उसे लेकर यहाँ क्यों आई है और अब तक वो बहुत कुछ सोच चुका था। आहना को वहाँ देखकर वीर जल्दी से उनके पास आया और कहा, “आहना, आप यहाँ।” 


“जी, मैं इन्हें यहाँ लाना चाहती थी।” कहकर आहना ने वीर और अयांश को एक दूसरे से मिलवाया। अयांश ने वीर से हाथ मिलाया और फिर आहना से पूछा, “आहना मुझे बताओ ना तुम मुझे यहाँ क्यों लाई हो। कहीं तुमने किसी बच्चे को एडॉप्ट करने का फैसला तो नही ले लिया। अगर ऐसी कोई बात है तो मुझे नही लगता हमें इसकी जरूरत है। हम शादी के बाद अपना बच्चा पैदा कर सकते है।” 


अयांश को एहसास ही नही हुआ की अभी अभी उसने क्या बोला था पर आहना उसकी बात सुनकर चौंक गई थी। वहीं वीर अपनी हँसी को रोकने की कोशिश कर रहा था। आहना ने अयांश का हाथ पकड़ा और कहा, “मेरी चॉकलेट, तुम न बहुत ज्यादा सोचते हो।” 


“आहना, मुझे कुछ काम है। आप अंदर जाकर सबसे मिल सकती है।” उन्हें ऐसे देखकर वीर ने कहा और वहाँ से चला गया। 


“मैंने कुछ गलत बोला क्या आहना?” अयांश ने मासूमियत से पूछा। 


आहना ने उसे देखा और कहा, “माना की हमें लेकर तुम बहुत एक्साइटेड रहते हो पर इस एक्साइटमेंट को कंट्रोल करना सीखो दूसरो के आगे।” 


“अच्छा ठीक है, अब बताओ हम यहाँ क्यों आए है?” अयांश ने पूछा। 


“अयांश ये वहीं ऑर्फेनेज है जो मम्मा ने खोली थी। बताया था ना तुम्हें मैंने। मैं यहाँ तुम्हें सबसे मिलवाने लाई हूं। देखना तुम्हें बहुत अच्छा लगेगा।” आहना ने कहा। 


“हाँ, याद आ गया पर आंटी के पास ऑर्फेनेज बनवाने के लिए जमीन खरीदने के पैसे कहाँ से आए।” अयांश ने पूछा तो आहना ने कहा, “पापा ने मुझे बताया था की मेरे नाना जी ने उनकी मदद की थी।” 


वो अयांश को ये पता नही लगने देना चाहती थी की कबीर उसके असली पिता नही है इसलिए उसने झूठ बोल दिया। वो दोनों अंदर चले गए। उन्हें वहाँ देखकर सभी बच्चे उनके पास आ गए। अयांश सब कुछ देख रहा था। उसने वहाँ वृद्ध लोगों को देखा तो आहना से पूछा, “आहना, मुझे तो बाहर से देखकर लगा था की ये सिर्फ ऑर्फेनेज है पर यहाँ तो वृद्ध लोग भी है। ऐसा क्यों।” 


आहना मुस्कुराई और उसने कहा, “ये मम्मी का आइडिया था। उनका कहना था की इससे जिन बच्चो के माँ बाप नही है उन्हें माँ बाप का प्यार मिल जायेगा और जिन माँ बाप को उनके बच्चो ने छोड़ दिया है उन्हें बच्चो का प्यार मिल जाएगा।” 


“वाव, हम यहाँ हर संडे आया करेंगे, आहना इन बच्चों के साथ खेलने के लिए और वृद्ध लोगों के साथ वक्त बिताने के लिए।” अयांश ने कहा तो आहना ने मुस्कुराते हुए हाँ में सिर हिला दिया। वो दोनों सबके साथ वक्त बिताने लगे और बच्चों के साथ खेलने लगे। 


शाम होते ही सबको बाय बोलकर अयांश और आहना बाहर आए तो आहना ने कहा, “चलो तुम्हें घर छोड़ देती हूँ अब।” 


“आहना, थोड़ा और टाइम साथ में स्पेंड करते है ना।” अयांश ने कहा तो आहना ने उसे देखा और मुस्कुराते हुए पूछा, “अयांश, क्या बात है?”


“वो मैंने तुम्हारे लिए एक सरप्राईज प्लैन किया हुआ है। मैं तुम्हें रात को उसके लिए लेने आने वाला था पर तुम मुझे लेने आ गई।” अयांश ने कहा। 


“सच में सरप्राईज है मेरे लिए।” आहना ने एक्साइटेड होकर पूछा। 


“येस माय टेडी बियर।” अयांश ने आहना के गाल खींचते हुए कहा।


“तो फिर जल्दी से चलो। वैसे भी पूरे दो साल और चार महीने बाद तुमसे कोई सरप्राईज मिल रहा है मुझे।” आहना ने अयांश का हाथ पकड़कर उसे गाड़ी की तरफ ले जाते हुए कहा।


इस बार गाड़ी अयांश चलाने लगा। आहना साथ वाली सीट पर बैठे हुए प्यार से उसे देखे जा रही थी। अयांश का ध्यान उस पर गया तो उसने पूछा, “तुम मुझे ऐसे क्यों देख रही हो, टेडी बियर?” 


“ऐसे ही। इतने दिनों बाद तुम्हें जी भरकर देखने का मौका मिला है। अच्छा लग रहा है।” आहना ने कहा तो अयांश मुस्कुराने लगा। उसने गाड़ी अपने होटल के अंदर लाकर रोकी और वो दोनों गाड़ी से नीचे उतर गए। 


इस बार अयांश आहना को गार्डन में न ले जाकर होटल की छत पर लेकर गया जहाँ से पूरा शहर दिखाई दे रहा था। पूरी छत दिल के आकार के लाल और सफेद रंग ने गुब्बारों से भरी हुई थी। छत के एक कोने में एक टेबल लगी हुई थी जिसपर एक केक रखा हुआ था। 


अयांश आहना को उस टेबल के पास लेकर आया। आहना केक को देखकर खुश हो गई क्योंकि वो आहना का फेवरेट चॉकलेट केक था। अयांश ने उसके माथे को चूमा और फिर उसके पीछे खड़े होकर उसे अपनी बाहों में भरा और उसके साथ केक काटते हुए कहा, "ये पिछली सारी बातें भुलाकर हमारी एक नई शुरुआत के लिए।” 


आहना उसकी तरफ पलटी तो वो दोनों एक दूसरे की आँखों में खो गए और फिर आहना उसके गले लग गई। अयांश ने कसकर आहना को अपनी बाहों में समेट लिया और उसके बालों को सहलाने लगा। उससे अलग होकर अयांश ने उसके होठों को अपने होठों से छुआ और कहा, “चलो, अब खाना खाते है। फिर एक और सरप्राईज है मेरे पास तुम्हारे लिए।” 


आहना मुस्कुराते हुए कुर्सी पर बैठ गई और वो दोनों खाना खाने लगे। खाना खाने के बाद अयांश आहना को छत के दूसरी साइड लेकर गया जहाँ बहुत सारी मोमबत्तियां जल रही थी और उन्हीं के बीच फूलों से लिखा हुआ था, “आई लव यू, आहना।”


आहना आगे बढ़कर ये सब देखने लगी। वो इस वक्त बहुत खुश थी। अयांश मुस्कुराते हुए अपनी जेब से एक छोटा सा डिब्बा निकालकर उसके पीछे एक घुटने पर बैठ गया। 


“अयांश, ये सब…” आहना कहते हुए जैसे ही पलटी, अपने साथ अयांश को ऐसे देखकर हैरान रह गई। 


“ज्यादा कुछ नही कहूँगा, आहना बस इतना ही की पिछली सारी बातों को भुलाकर फिर से एक नई शुरुआत करते है हमेशा साथ रहने के वादे के साथ। चाहे गलतियां ही क्यों न करे, फिर भी एक दूसरे पर भरोसा रखते हुए और एक दूसरे को समझते हुए साथ रहना।” कहकर अयांश ने अपने हाथ में पकड़ा हुआ डिब्बा खोला जिसके अंदर एक पेंडेंट था जिसमें इनफिनिटी के साथ दो ए बने हुए थे। उसने वो पेंडेंट डिब्बे में से निकाला और खड़े होकर आहना को पहना दिया। 


आहना ने उस पेंडेंट को देखा और मुस्कुरा उठी। अयांश ने उसके साथ बहुत सारी तस्वीरें ली और दोनों छत पर खड़े होकर आसमान में चमक रहे चांद और तारों को देखने लगे। आहना अयांश की बाहों में सिमटी उसकी धड़कनों का शोर सुनते हुए चांद को देख रही थी कि तभी अयांश ने उसे बुलाया तो आहना ने उसकी आँखों में देखते हुए पूछा, “तुम कुछ कहना चाहते हो ना मुझसे?” 


“तुम्हें कैसे पता?” अयांश ने हैरानी से पूछा। 


“तुम्हारे दिल की धड़कनों से। बहुत जोर से धड़क रहा है।” आहना ने मुस्कुराते हुए कहा और फिर पूछा, “क्या कहना चाहते हो तुम मुझसे?” 


“हम क्या आज की पूरी रात एक साथ रह सकते है? मैं घर नही जाना चाहता। तुम्हारे साथ रहना चाहता हूँ।” अयांश के पूछा तो आहना जो अभी कुछ वक्त पहले मुस्कुरा रही थी अब उसके चेहरे पर गुस्सा साफ नजर आ रहा था। 


अयांश आहना को ऐसे देखकर बिलकुल घबरा गया और मन ही मन में सोचने लगा, “कहीं मैंने इससे ये पूछकर इसे हर्ट तो नही कर दिया जो ये ऐसे गुस्से से मेरी तरफ देख रही है। कहीं इसके मन में ये बात तो नही आ गई की नुपुर के साथ अभी भी मेरी शादी चल रही है, फिर भी मैं इसके साथ रात…” उसने अपनी सोच को अपने दिमाग से निकाला और खुद से कहा, "नही नही, आहना मुझ पर गुस्सा नही कर सकती। पर फिर इसे अचानक से क्या हो गया?” 


अयांश ये सोचकर अब परेशान हो गया और आहना को चुपचाप देखने लगा जो इस वक्त गुस्सा करते हुए बहुत प्यारी लग रही थी।


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Thursday, 16 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 29


 

अयांश आहना के पास बैठकर उसकी चोट पर दवाई लगाने लगा। आहना के मुंह से एक आह निकली तो अयांश ने उसकी ओर देखा और पूछा, “ज्यादा तकलीफ हो रही है?” 


आहना मुस्कुराई और उसने कहा, “सारी तकलीफें दूर हो गई।” 


अयांश ने उसके गाल को प्यार से छुआ और उसकी चोट पर पट्टी बांधने लगा। पट्टी बांधकर उसने कहा, “चलो तुम्हें घर छोड़ आता हूँ।” 


“इतनी जल्दी। इतने दिनों तक नाराज और दूर रहे हो और अब जब आखिरकार नाराजगी खत्म हुई है तो इतनी जल्दी फिर से दूर जाने की बातें कर रहे हो।” आहना ने शिकायत करते हुए कहा। 


अयांश हँसने लगा और उसने पूछा, “कहाँ जाना है आपको मोहतरमा?” 


“पक्का मैं जहाँ लेके जाना चाहूँ वहाँ चलोगे मेरे साथ।” आहना ने पूछा। 


“हाँ, तुम्हारे पीछे पीछे तो कहीं भी चल सकता हूँ।” अयांश ने मुस्कुराते हुए कहा। 


“फिर से फ्लर्टिंग कर रहे हो तुम।” आहना ने हंसते हुए पूछा। 


“तो इतने दिन हो गए थे तुम्हारे साथ फ्लर्टिंग किए हुए। अब तो तुम्हारे रोकने से भी नही रुकूंगा।” अयांश ने आहना की आँखों में देखते हुए कहा। नुपुर छुपके से उन्हें देख रही थी। उन दोनों को हँसता देख उसका मन कर रहा था की अभी जाकर आहना की जान ले ले। 


अगले दिन ऑफिस में आहना आराम से बैठकर अपना काम कर रही थी की तभी किसी ने उसका कंधा थपथपाया। आहना ने फाइल से नज़रे हटाकर देखा तो पाया कि अयांश उसे मुस्कुराते हुए देख रहा था। आहना भी उसे देखकर मुस्कुराने लगी और खड़े होकर उससे पूछा, “तुम यहाँ?” 


“तुम्हारे लिए आया हूँ, जान। कहा था ना कल की तुम्हारे पीछे पीछे कहीं भी चल सकता  हूँ।” अयांश ने धीमी आवाज में उसकी आँखों में देखते हुए कहा।


“अयांश, ऑफिस है ये। यहाँ तो फ्लर्ट मत करो।” आहना ने कहा। शिप्रा उन दोनों को साथ देखकर जल रही थी। 


“तुम्हारी चोट कैसी है अब?” अयांश ने पूछा। 


“ठीक है। पापा ने दोबारा दवाई लगा दी थी।” आहना ने कहा। 


अयांश ने इधर उधर देखा और पूछा, "अंकल कहाँ है?” 


“वो राकेश अंकल के केबिन में है। किसी इंपोर्टेंट फाइल को लेकर कुछ डिस्कस करना था उन्हें अंकल के साथ।” आहना ने कहा। 


अयांश ने उसका हाथ पकड़ा और कहा, “आहना, मुझे अंकल और पापा से बात करनी थी हमारे बारे में। पिछले दिनों में मैंने जो कुछ भी किया है उससे तुम्हारे साथ साथ अंकल को भी तकलीफ हुई होगी। उसके लिए मैं उनसे माफी मांगना चाहता हूँ और फिर पापा और अंकल को बताना भी तो है की हमारे बीच अब सबकुछ ठीक हो गया है।” 


“उसमें अकेले तुम्हारी गलती नही थी, अयांश। मेरी भी थी। मुझे तुम्हें समझना चाहिए था।” आहना ने कहा। 


“छोड़ो अब इन बातों को और चलो, अंकल और पापा से बात करते है।” कहते हुए अयांश ने अपना हाथ उसकी और बढ़ाया। आहना ने मुस्कुराते हुए अपने हाथ को उसके हाथ पर रखा और वो दोनों राकेश के केबिन की तरफ बढ़ गए। 

राकेश कबीर से कुछ कह रहे थे की तभी उनके केबिन का दरवाजा खुला और वो बात करते करते रूक गए। राकेश को दरवाज़े की तरफ देखता पाकर कबीर ने भी पीछे मुड़कर देखा। वो दोनों आहना और अयांश को साथ देखकर हैरान थे। उनकी हैरानी और भी ज्यादा बढ़ गई जब उनकी नजर आहना और अयांश के हाथों पर गई क्योंकी दोनों ने ही एक दूसरे का हाथ कसकर पकड़ रखा था। 


आहना और अयांश समझ गए की राकेश और कबीर उन्हें साथ देखकर हैरान हो गए है इसलिए आहना ने कहा, “मैं जानती हूँ आप दोनों के मन में इस वक्त बहुत सारे सवाल है हमें ऐसे देखकर। पापा, अंकल, पिछले कुछ महीनों में जो कुछ भी हुआ वो सब एक मिसअंडरस्टैंडिंग थी और कुछ गलतियां भी। मुझे अयांश को समझना चाहिए था। अगर मैं अयांश की जगह होती तो मैं भी इसे बचाने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाती। अंकल, जो हुआ वो सब हम भुला देना चाहते है और सब कुछ पहले जैसा करना चाहते है। मैं और अयांश, हम दोनों फिर से पहले जैसे रहना चाहते है एक साथ।” 


“वो सब तो ठीक है, बेटा। अगर तुम दोनों में सब कुछ ठीक हो जाता है तो सबसे ज्यादा खुशी मुझे ही होगी पर अयांश अभी भी नुपुर के साथ शादी के बंधन में है।” राकेश ने कहा।


“मैं उसे डायवोर्स दे दूंगा, पापा मौका मिलते ही बस हमें आहना का ख्याल रखना होगा।” अयांश ने आहना के लिए परेशान होते हुए कहा। 


राकेश मुस्कुराए और उन्होंने कहा, “जब तुम अमेरिका में थे, आहना को हमने ही सबसे बचाया था और अभी भी हम ही इसका ख्याल रखेंगे।” 


“जी पापा।” अयांश ने कहा। 


“अच्छा अब तुम दोनों जाओ और एक दूसरे के साथ वक्त बिताओ। इतने दिनों बाद तुम दोनों के बीच सब कुछ ठीक हुआ है।” राकेश ने कहा तो अयांश आहना को लेकर ऑफिस से बाहर आ गया। 


अयांश आहना के साथ अपनी गाड़ी के पास आया और उससे पीठ लगाकर खड़ा होते हुए आहना को पूछा, “तो कहिए मोहतरमा, कहाँ जाना चाहेंगी आप।” 


"जहाँ आप ले चले।” आहना ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा। 


“हम तो जहाँ आप जायेंगी, वहाँ आपके पीछे पीछे चलेंगे।” अयांश ने फिर से फ्लर्ट करते हुए कहा।


"अब बस भी करो। कल से ही तुम यहीं बोल बोलकर मेरे साथ फ्लर्ट किए जा रहे हो।” आहना ने हंसते हुए कहा। 


"ये सिर्फ फ्लर्ट नही, सच्चाई भी है। मैं तुम्हें जिंदगी भर फॉलो कर सकता हूँ बिना कुछ कहे। अब बताओ मिलेगा कहीं तुम्हें मेरे जैसा हसबैंड।” अयांश ने इतराते हुए कहा तो आहना ने कहा, "तो मिस्टर हसबैंड, कीजिए फिर मेरे ऑर्डर को फॉलो और लेकर चलिए हमें आइस क्रीम खिलाने के लिए।” 


“जो आपका हुकुम मल्लिका।” कहते हुए अयांश ने आहना के लिए गाड़ी का दरवाजा खोला। आहना हँसते हुए गाड़ी में बैठ गई और फिर वो दोनों आइस क्रीम खाने चले गए। अयांश ने खुशी खुशी पूरा दिन आहना के साथ बिताया जिससे आहना बहुत खुश थी। 


सन्डे वाले दिन आहना तैयार होकर अयांश के घर के सामने आई और उसे फोन लगाया। अयांश ने जैसे ही फोन उठाया, आहना ने जल्दी से कहा, “जल्दी से बिना कुछ पूछे अपने घर के बाहर आओ।” 


आहना ने अयांश की बात सुने बिना ही जल्दी से फोन काट दिया। नूपुर इस वक्त अपने घर गई हुई थी। अयांश जल्दी से घर से बाहर आया तो आहना अपनी गाड़ी के पास खड़ी थी। उसने नीले रंग का ड्रेस पहन रखा था जिसमें वो बहुत खूबसूरत लग रही थी। अयांश उसके पास आया और पूछा, "क्या हुआ, आहना? तुमने मुझे ऐसे बाहर क्यों बुलाया?” 

"तुम्हें कहीं लेकर जाना है।” आहना ने उसके लिए गाड़ी का दरवाजा खोलते हुए कहा। अयांश गाड़ी में बैठ गया। आहना ने भी गाड़ी के अंदर बैठकर गाड़ी चलानी शुरू की। 


अयांश ने उसकी तरफ देखा और कहा, "आहना, मुझे बताओ ना तुम मुझे कहाँ लेकर जा रही हो।” 


आहना ने उसे देखा और फिर रोड पर ध्यान लगाते हुए कहा, "तुम्हें पता चल जाएगा जब हम वहाँ पहुँचेंगे।” 


"मुझे अभी जानना है। तुम मुझे पहली बार कहीं लेकर जा रही हो इसलिए बहुत एक्साइटमेंट हो रही है मुझे।” अयांश ने कहा। 


"जानती हूँ पर मैं अभी तुम्हें नही बता सकती।” आहना ने कहा और मुस्कुराने लगी। अयांश चुपचाप खिड़की से बाहर देखने लगा। 


आधे घंटे बाद, आहना ने गाड़ी रोकी और अयांश को गाड़ी से उतरने का बोलकर खुद भी गाड़ी से नीचे उतर गई। अयांश गाड़ी से उतरकर आहना के पास आया और उसने सामने दीवार पर लगे बोर्ड को देखते हुए कहा, “आहना, हम इस ऑर्फनेज और ओल्ड एज होम में क्यों आए है?”


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Wednesday, 15 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 28


 

संडे को अयांश नुपुर के साथ उसके घर गया। टीना और अंबर उन्हें एक साथ देखकर बहुत खुश थे। अयांश पहली बार घर आया था इसलिए टीना और अंबर ने उसकी खातिरदारी में कोई कमी नही छोड़ी।


लंच के बाद वो सभी लिविंग रूम में आ बैठे। टीना नुपुर से अकेले में बात करना चाहती थी इसलिए उन्होंने अंबर से कहा, “अंबर, अयांश पहली बार हमारे घर आया है। आप उसे घर क्यों नही दिखाते।” 


“जरूर, मुझे भी मौका मिल जाएगा हमारे बेटे को अच्छे से जानने का।” कहते हुए अंबर ने अयांश की तरफ देखा और उससे कहा, “आओ बेटा।” 


अयांश उठकर अंबर के साथ चला गया। उनके जाते ही टीना ने नुपुर से पूछा, “तो अयांश और तुम्हारे बीच सब कैसा चल रहा है। तुमने मुझे बताया था की वो अब आहना को देखना तक पसंद नही करता तो क्या वो अब तुम्हारे करीब आता है?” 


“नही मम्मी, मुझे समझ नही आता इसकी परेशानी क्या है। मुझे लगा था ये अब आहना से नफरत करने लगा है तो मेरे करीब आया करेगा। पर ये तो मुझे भी देखना पसंद तक नही करता।” नुपुर ने गुस्से में कहा। 


“मुझे लगता है अयांश ने तुमसे झूठ कहा है की वो आहना से नफरत करने लगा है। देखना नुपुर, तुम तो उसके साथ रहकर उसे दूर रख रही हो आहना से पर वो कहीं तुम्हें भुलाकर आहना के पास वापिस न चला जाए।” टीना ने कहा तो नूपुर इस बारे में सोचने लगी।


वही अंबर अयांश को घर दिखाते हुए एक जगह आकर रुके जहाँ दीवार पर नुपुर की बचपन की प्यारी सी तस्वीर लगी हुई थी। अंबर उस तस्वीर को देखकर मुस्कुराए और कहने लगे, “जब नुपुर को मैंने पहली बार अपनी गोद में उठाया था ना उस वक्त मेरे मन में सबसे पहला ख्याल ये आया था की एक दिन कोई आकर इसे मुझसे दूर ले जाएगा और जब मुझे पता चला की नुपुर ने तुमसे शादी करली है तो मैं उस दिन उदास और खुश दोनों था। खुश इसलिए की मेरी बेटी को उसका हमसफर मिल गया है और उदास इसलिए की अब वो मुझसे दूर रहेगी।” 


“आप टेंशन मत लीजिए। आपको नुपुर से ज्यादा दिन दूर नही रहना पड़ेगा अब।” अयांश जो अबतक खामोशी से अंबर की बातें सुन रहा था, उसने कहा।


उसकी बात सुनकर अंबर ने उसे देखा और पूछा, “तुम्हारे कहने का मतलब क्या है, बेटा।” 


“यही की मैं उसे बहुत जल्दी डायवोर्स देने वाला हूँ।” अयांश की बात सुनकर अंबर चौंक गए और उन्होंने पूछा, “तुम नुपुर को डायवोर्स देने की बात क्यों कर रहे हो। तुम तो प्यार करते हो उससे। लव मैरिज की है तुम दोनों ने।” 


“मैं कोई प्यार नही करता आपकी बेटी से। धोखे से शादी की है उसने मेरे साथ जबरदस्ती।” अयांश ने गुस्से में कहा।


“देखो बेटा, मैं जानता हूँ मेरी बेटी थोड़ी सी जिद्दी है पर वो प्यार करती है तुमसे।” अंबर ने कहा।


“और मेरा क्या। उसने ये सोचा की मैं भी किसी से प्यार कर सकता हूँ और अगर वो मुझसे प्यार करती होती तो मेरी खुशी के बारे में सोचती, मेरी जिंदगी बर्बाद करने के बारे में नही।” कहकर अयांश नीचे चला आया। 


नीचे आकर उसने नुपुर से कहा, “नुपुर, मुझे लगता है अब हमें चलना चाहिए।” 


नुपुर हाँ में सिर हिलाते हुए सोफे से उठी और कहा, “मैं डैड से मिलके आती हूँ फिर चलते है।” 


नुपुर अंबर से मिलने ऊपर चली गई क्योंकि अयांश की बातें सुनकर अंबर नीचे न जाकर अपने कमरे में आ गए थे। नुपुर ने उनके कमरे के दरवाज़े पर नॉक किया और अंदर चली गई। अंबर सोफे पर बैठे हुए थे। नुपुर उनके पास आकर बैठी और पूछा, “आप वापिस नीचे क्यों नही आए अयांश के साथ।” 


“तुमने मुझसे झूठ कहा नुपुर कि अयांश तुमसे प्यार करता है। जबकि वो तो तुम्हें डायवोर्स देने की सोच रहा है।” अंबर ने नुपुर को देखते हुए कहा।


“डैड, वो…” नुपुर कुछ कहने लगी तो अंबर उसकी बात बीच में ही काटते हुए बोले, “मुझे कुछ नही सुनना है, नुपुर। अगर अयांश ने तुम्हें डायवोर्स दिया तो तुम अपने बारे में खुद सोच लेना की कहाँ जाओगी तुम। पहले भी तुम्हारी वजह से मेरी इज्ज़त मिट्टी में मिलते हुए बची है, मैं नही चाहता की फिर से ऐसा कुछ हो जो पाँच साल पहले हुआ था।” 


पाँच साल पहले जब नुपुर ने अयांश को नही देखा था, उससे पहले उसका एक बॉयफ्रेंड था जिसने नुपुर को झूठ बोलकर अपने प्यार के जाल में फंसाया था और उसका इस्तेमाल करके उसे छोड़ दिया था। अपनी इज्जत के डर से अंबर ने उस लड़के से बात करके उसे बहुत सारे पैसे देकर सब कुछ ठीक किया था और इस बात का किसी को भी पता नही लगने दिया था। 


“आप टेंशन न ले, डैड। अयांश की सबसे बड़ी कमजोरी मेरे पास है जिसके लिए वो कुछ भी कर सकता है।” नुपुर ने कहा। 


अंबर ने उसे देखा और कहा, “कमजोरी को ताकत बनते देर नही लगती। ध्यान रखना इस बात का। चलो अब। अयांश इंतजार कर रहा होगा।” 


नुपुर और अंबर नीचे आ गए। टीना और अंबर से मिलकर नुपुर और अयांश गाड़ी में बैठकर वहाँ से निकल गए। नुपुर अयांश को घूरे जा रही थी पर अयांश ने उसपर कोई ध्यान नही दिया। अयांश ने गाड़ी एक सिग्नल पर रोकी तो नुपुर ने उसे देखा और पूछा, “तुम्हें मेरे अपने साथ होने या न होने से कोई फर्क नही पड़ता न?” 

“एटलीसट तुम्हें इस बात का अंदाजा तो है।” अयांश ने कहा।


नुपुर ने उसे गुस्से से देखा और कहा, “तुमने डैड को कहा की तुम मुझे डायवोर्स देने वाले हो।” 


“मैंने गलत तो कुछ भी नही कहा उनसे जो तुम ऐसे रिएक्ट कर रही हो। जबरदस्ती शादी की है तुमने मुझसे। अंजाम तो पता होना चाहिए था इसका तुम्हें उसी वक्त ही। जबरदस्ती बनाए गए रिश्तों का यही अंजाम होता है। उनका टूटना।” अयांश ने नुपुर को देखते हुए कहा। सिग्नल ग्रीन हो गया तो अयांश फिर से गाड़ी चलाने लगा। 


“मुझे डायवोर्स देने के बारे में सोचना भी मत अयांश वरना।” नुपुर ने गुस्से से कहना चाहा तो अयांश ने उसकी बात बीच में ही काटते हुए कहा, “वरना तुम आहना को नुकसान पहुँचाओगी। यही न। मुझे उसकी टेंशन नही है क्योंकि पापा आहना को बचा लेंगे तुमसे। तुम अपना सोचो की डायवोर्स के बाद तुम कहाँ जाओगी। आफ्टर ऑल, इस जबरदस्ती की शादी को तब तक चला पाओगी तुम।” 


नुपुर को उसकी बातों से बहुत ज्यादा गुस्सा आ रहा था। अयांश ने गाड़ी घर के अंदर लाकर रोकी और नुपुर को देखे बिना ही गाड़ी से उतरकर घर के अंदर चला गया। नुपुर गुस्से में उसे जाते हुए देखती रही और फिर खुद भी अंदर चली आई।


दो दिन बाद, आहना ऑफिस में बैठे हुए काम कर रही थी की तभी वहाँ काम करने वाली एक लड़की, जिसका नाम शिप्रा था आहना के पास आई। शिप्रा आहना से काफी जलती थी क्योंकि आहना राकेश के साथ ज्यादा रहती थी और उसने ये भी सुना था की आहना राकेश की बहु बनने है। वो मैटरनिटी लीव पर थी इसलिए उसने बहुत महीनों बाद ऑफिस दोबारा ज्वॉइन किया था। वो खुश हुई थी जब उसे पता चला की अयांश ने आहना को छोड़ किसी और से शादी कर ली है। वो आहना को हर्ट करना चाहती थी इसलिए उसने कहा, “आहना, मुझे पता चला की तुम्हारे साथ कितना बुरा हुआ। मुझे न तुम्हारे ऊपर बहुत तरस आ रहा है। कहाँ तुम अयांश के साथ शादी के ख़्वाब देखती होगी और कहाँ उसने तुम्हें छोड़ कर किसी और के साथ शादी करली। तुम्हें कितनी तकलीफ हुई होगी ना उसे किसी और साथ देखकर।” 


आहना ने अपने लैपटॉप की स्क्रीन से नजरें हटाकर उसे देखा और कहा, “तुम्हें कोई जरूरत नही है मेरे ऊपर तरस करने की और जहाँ तक बात है अयांश की, तो वो बस मुझसे नाराज़ है। बहुत जल्द तुम उसे वापिस मेरे साथ देखोगी।” 


आहना अपना बैग लेकर वहाँ से निकल गई। शिप्रा के सामने तो आहना ने खुद को संभाल लिया था पर उसे सच में शिप्रा की बातों से तकलीफ हुई थी। आहना ने तय किया कि वो फिर से एक बार अयांश से बात करने की कोशिश करेगी। 


अयांश आज ऑफिस नही आया था इसलिए आहना उसके घर चली गई। उसने गार्ड से अयांश को मिलने की बात कही तो गार्ड बोला, “आपको क्यों समझ नही आता। अयांश साहब आपसे नही मिलना चाहते। आप जाइए यहाँ से।” 


अयांश अपने कमरे की बालकनी में खड़ा ये सब देख रहा था। आहना ने एक बार फिर गार्ड से कहा तो इस बार उसे गुस्सा आ गया और उसने आहना को धक्का दे दिया जिसकी वजह से आहना नीचे गिर गई और उसके हाथ और बाजू पर चोट लग गई। 


अयांश ने जैसे ही ये देखा, वो भागकर अपने कमरे से बाहर जाने के लिए मुड़ा पर फिर नूपुर के बारे में सोचकर रूक गया पर आहना की फिक्र हो रही थी इसलिए उसने कहा, “मुझे नुपुर के नही आहना के बारे में सोचना चाहिए। नुपुर ने तो जबरदस्ती मुझसे ये शादी की है जिसकी सजा मैं आहना को दे रहा हूँ जबकि उसकी तो कोई गलती भी नही है। माफ़ करना नुपुर, तुम मुझे खुद से जबरदस्ती प्यार करवा नही सकती और आहना के लिए मेरा प्यार खत्म नही कर सकती।” 

अयांश अपने कमरे से बाहर आया और नीचे आकर आहना के पास जाने के लिए घर से बाहर निकल गया। नुपुर बाथरूम से निकलकर आई तो अयांश को वहाँ न देखकर हैरान रह गई और खुद से कहा, “अभी थोड़ी देर पहले तो अयांश यहीं था।” 


अयांश आहना के पास पहुँचा और घुटने के बल उसके करीब बैठकर उसकी चोट को देखने लगा। आहना की बाजू और हाथ के पीछे खरोचें आ गई थी। अयांश को ये देखकर बहुत तकलीफ हो रही थी। आहना उसे अपनी आँसूओं से भरी आँखों के साथ देखे जा रही थी। 


अयांश ने बिना कुछ कहे आहना की खड़े होने में मदद की। 


नुपुर, जो की बालकनी में आई थी अयांश को देखने के लिए, उसने ये सब देख लिया था। आहना अयांश से कुछ कहने वाली होती है की तभी उसकी नज़र बालकनी में खड़ी नुपुर पर जाती है जो गुस्से से उन दोनों को घूर रही थी। 


अयांश ने भी आहना की नजरों का पीछा करते हुए नुपुर को देखा। आहना अयांश से बात करना चाहती थी और इससे अच्छा मौका उसे नही मिलने वाला था इसलिए उसने अयांश का ध्यान अपनी तरफ खींचने के लिए उसका हाथ पकड़ लिया।


अयांश जो अबतक नुपुर को देख रहा था, उसने अपने सामने खड़ी आहना को देखा और उसे अपनी बांहों में भर कर गले से लगा लिया। आहना एक पल के लिए हैरान रह गई। उसने अपने हाथ अयांश की पीठ पर रख दिए। उसकी आँखों से आँसू बहने लगे जो अयांश की शर्ट को भीगा रहे थे। नुपुर उन दोनों को नफरत से देख रही थी और फिर कमरे के अंदर चली गई। 


अयांश ने आहना को छोड़ा और कहा, “अंदर चलो, तुम्हें बहुत चोट लगी है। मैं दवाई लगाकर पट्टी बांध देता हूँ इसपर।” 


अयांश उसका हाथ पकड़ कर उसे अंदर ले जाने लगा तभी उसने उस गार्ड को देखा, जिसने आहना को धक्का दिया था और उससे कहा, “आज के बाद इसे हाथ न लगा देना।” 


अयांश ने आहना को बाहर गार्डन में बैठाया और दवाई लेने अंदर चला गया। नुपुर सीढ़ियों पर ही खड़ी उसका इंतजार कर रही थी। उसे देखते ही उसने कहा, “तुमने बहुत बड़ी गलती की है आज अयांश। अब तुम देखना, न मैं तुम्हें और ना ही तुम्हारी आहना को खुश रहने दूंगी।” 


अयांश ने उसे देखा और कहा, “करो जो करना है। मैं भी देखता हूँ की मेरे होते हुए तुम आहना को हाथ भी कैसे लगाती हो। मैंने आहना को अपनी सबसे बड़ी कमजोरी बना लिया था पर मैं ये भूल गया था की पापा ने आहना को मेरे लिए इसलिए चुना था की मैं उसे अपनी सबसे बड़ी ताकत बना सकूं। अब आहना मेरी सबसे बड़ी ताकत है और मेरे होते हुए तुम उसे छू भी नही सकती।” 


अयांश घर से बाहर निकल गया। नुपुर गुस्से में वही खड़ी रही। उसकी आँखों में आहना के लिए नफरत साफ नजर आ रही थी।


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Monday, 13 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 27


 

कुछ दिन अस्पताल में रहकर अयांश घर वापिस आ गया। उसी दिन रात के वक्त जब अयांश खाने के लिए नीचे नही आया तो राकेश उसे नीचे लाने के लिए डाइनिंग टेबल से खड़े हुए। उन्हें उठते हुए देखकर रिद्धिमा ने पूछा, “तुम कहाँ जा रहे हो उठकर?” 


“अयांश को लेने जा रहा हूँ।” राकेश ने कहा। 


“तुम्हें उसकी फिक्र होती है। मुझे तो लगता था तुम्हें उस आहना के अलावा कुछ और याद ही नही रहता है।” रिद्धिमा ने  कहा। 


“आपको कोई जरूरत नही है उसे नीचे लाने की। आप शायद भूल रहे है उसका एक्सीडेंट हुआ है। उसे रेस्ट करने देना चाहिए जिससे वो जल्दी ठीक हो सके।” किचन से आती हुई नुपुर ने कहा और कुर्सी पर बैठ गई। 


राकेश ने गुस्से से नुपुर को देखा और पूछा, “अब तुम मुझे बताओगी की मुझे मेरे बेटे का ख्याल कैसे रखना है।” 


ये सुनकर नुपुर हँसने लगी और उसने कहा, “आपको अचानक से उसकी इतनी फिक्र कैसे होने लगी। जहाँ तक मुझे याद है आप तो उससे इस हद तक गुस्सा थे की आप बात तक नही करते थे उससे।” 


“तुम मेरे और अयांश के मामले में ना ही बोला करो तो बेहतर होगा क्योंकि तुम भूल रही हो की वो सब तुम्हारी वजह से ही हुआ था।” राकेश ने कहा और अपनी कुर्सी से खड़े होकर ऊपर चले गए। उन्होंने अयांश के कमरे के बाहर आकर दरवाज़े पर नॉक किया। 


अयांश अपने फोन में कुछ देख रहा था जब उसने दरवाज़े पर नॉक की आवाज सुनी। उसने दरवाज़े की तरफ देखा तो राकेश को वहाँ देखकर थोड़ा हैरान रह गया। उसने उन्हें अंदर आने के लिए कहा। राकेश अंदर आकर उसके पास आए और कुछ कहने ही वाले थे कि उनकी नजर अयांश के फोन की स्क्रीन पर गई जिसमें आहना की तस्वीर थी। वो अयांश के पास बैठे और उन्होंने कहा, “जब तुम्हें आहना से इतना प्यार है तो तुमने उसे माफ क्यों नहीं किया जब वो तुमसे माफी मांग रही थी।”


“पापा, अगर मैं आहना को उस वक्त माफ कर देता तो हम साथ तो रहने लग जाते पर उस साथ में वो पहले वाली बात नही होती। वो पहले जैसा प्यार नही होता क्योंकि आहना के मन में नुपुर की वजह से कहीं न कहीं ये बात रहती की मैं उसके साथ जरूर हूँ पर उसका नही हूँ। मुझे उसे ये यकीन दिलाना है की मैं उसके अलावा किसी और का हो ही नही सकता। मुझे उसके दिल में फिर से वही प्यार जगाना है जैसा प्यार हमारा था और इसके लिए मेरा उससे अभी दूर रहना जरूरी है जिससे उसके मन में मेरे लिए प्यार बहुत ज्यादा बढ़ जाए क्योंकि दूरियां प्यार को मजबूत बनाती है। मुझे यकीन है की जब आहना के मन में मुझे खोने का डर आएगा तो उसका प्यार मेरे लिए बढ़ जाएगा।” अयांश ने कहा और राकेश को देखा। 


“उम्मीद है ऐसा है ही हो। अब चलो, मैं तुम्हें खाने के लिए नीचे ले जाने आया  हूँ।” राकेश ने कहा। अयांश को यकीन नही हुआ की राकेश उसे लेने आए है। उसे तो अभी भी यही लग रहा था की राकेश उससे नाराज है। 


राकेश ने उसका हाथ पकड़ कर उसे अच्छे से सहारा देकर खड़ा किया और ध्यान से उसे नीचे ले आए। उस दिन अयांश बहुत खुश था। 


राकेश अब उससे धीरे धीरे बात करने लग गए। वो रोज शाम को ऑफिस से घर आकर उसके साथ थोड़ा वक्त बिताते थे। अयांश ये जानकर खुश था की राकेश की नाराज़गी थोड़ी सी कम हो गई है। 


आहना भी रोज राकेश से ऑफिस में अयांश के बारे में पूछा करती थी। उसने अयांश को कॉल करके बहुत बार उससे बात करने की भी कोशिश की पर अयांश उसका फोन नही उठाता था। वो अयांश से मिलने उसके घर भी आती थी पर गार्ड उसे रिद्धिमा और नुपुर के कहने पर अंदर ही नही आने देते थे या फिर अयांश ही उससे मिलने से मना कर देता था। आहना को तकलीफ तो बहुत होती थी पर उसे उम्मीद थी की अयांश और उसके बीच की ये दूरियां ज्यादा देर तक नही चलेंगी। 


अयांश ने भी ठीक होने के बाद ऑफिस आना शुरू कर दिया था। आहना ने वहाँ भी बहुत बार उससे बात करने की कोशिश की पर अयांश हमेशा उसे नजर अंदाज कर देता। 


एक दिन ऑफिस में लंच टाइम हो रखा था इसलिए सारे एम्प्लॉय कैंटीन में लंच करने गए हुए थे। कबीर और राकेश भी एक मीटिंग के लिए हॉटल गए हुए थे। सिर्फ़ आहना ही थी जो लंच छोड़कर काम में लगी हुई थी। 


अयांश अपने केबिन से बाहर आया तो आहना को वहाँ बैठा देखकर हैरान रह गया। वो उससे पूछना चाहता था की वो लंच करने क्यों नही गई पर उसने खुद को रोक लिया और वहाँ से जाने लगा। 


आहना ने जब उसे देखा तो जल्दी से उठी और उसे रोकते हुए कहा, “अयांश, मुझे तुमसे एक बार बात करनी है बस।” 


अयांश चेहरे पर गुस्से वाले भाव के साथ पलटा और कहा, “मुझे तुमसे कोई बात नही करनी। तुम क्यों मेरे पीछे पड़ी हुई हो।” 


“तुम एक बार मेरी बात सुन लो, प्लीज़।” आहना ने कहा।


ये सुनकर अयांश हँसने लगा और उसने कहा, “देखा आहना, एक वक्त था जब ऐसे ही मैं तुम्हारे पीछे था की तुम एक बार मेरी बात सुन लो क्योंकि उस वक्त मुझे तुम्हारी सबसे ज्यादा जरूरत थी और मैं चाहता था कि उस वक्त तुम मेरे साथ रहो और आज देखो, तुम मेरी जगह पर हो बल्कि तुम्हें तो मेरी जरूरत भी नही है।” 


उसकी बात सुनकर आहना की आँखों से आँसू बहने लगे और उसने कहा, “ऐसा नही है अयांश।” 


अयांश उसके करीब आया और उसने कहा, “पता है आहना, मुझे चोट मेरी गाड़ी को टक्कर लगने से नही लगी और न ही जहाँ दिख रही है वहाँ लगी है।” उसने आहना का हाथ पकड़ कर अपने दिल पर रखा और फिर कहा, “असली चोट तो यहाँ लगी है जो तुम्हारे मुझे अपने आप से दूर करने पर लगी है जिसे कोई भी नही देख सकता। शुरू से ही तुम मुझे खुद से दूर करती आई हो। किसी ने हल्का सा कुछ कह दिया तो तुम मुझे अपने आप से दूर कर देती थी तो अब दूर ही रहो मुझसे।” 


अयांश वहाँ से जाने लगा तो आहना ने कहा, “तुम तो कहते थे की कभी मुझे खुदको तुमसे दूर करने ही नही दोगे तो फिर आज खुद क्यों दूर हो रहे हो।” 


अयांश ने मुड़कर उसे देखा और कहा, “हाँ, चाहता था तुम्हारे करीब रहना और मैंने कोशिश भी की पर तुम मुझसे दूरियां ही बनाती रही तो अब मैं खुद ये दूरियां बनाना चाहता हूँ।” 


अयांश ऑफिस से घर वापिस आ गया। नुपुर और रिद्धिमा लिविंग रूम में बैठी थी। अयांश भी वहाँ सोफे पर आकर बैठा ही था की नुपुर ने कहा, “मुझे तुमसे कुछ बात करनी है।” 


अयांश ने उसपर ध्यान न देते हुए अपना फोन निकाला और उसपर कुछ देखने लगा। नुपुर अयांश का इस तरह उसे नजर अंदाज करना बर्दाश्त नही कर पाई और उसने कहा, “तुमसे बात कर रही हूँ मैं।” 


अयांश ने उसे देखा और कहा, “बोलो।” 


“हमारी शादी को इतना वक्त हो गया है और हम अभी तक मेरे घर नही गए है इसलिए इस संडे हम मेरे घर जा रहे है। मेरे पेरेंट्स ने इनवाइट किया है हमें लंच पर।” नुपुर ने कहा। अयांश मना करने वाला था पर फिर कुछ सोचकर उसने हाँ कह दिया।


Continued In जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 28

Sunday, 12 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 26


 

आहना की उँगली से अँगूठी गिरकर टेबल के पास जा गिरी जिसे देखकर उसका मन घबराने लगा। उसने अँगूठी उठाकर वापिस अपनी हाथ में कसकर पकड़ ली। उसने राकेश को देखा और कहा, “अंकल, मैं भी आपके साथ हॉस्पिटल जाऊंगी।” 


राकेश ने हाँ में सिर हिलाया। वो आहना और कबीर को साथ लेकर अस्पताल के लिए निकल गए। रास्ते में उन्होंने रिद्धिमा और नुपुर को भी इस बारे में बताया। 


अस्पताल ऑफिस से बहुत दूर था और रास्ते में उन सबको ट्रैफिक भी मिला इसलिए उन्हें वहाँ पहुँचने में बहुत वक्त लग गया। राकेश ने गाड़ी जैसे ही अस्पताल के बाहर रोकी, आहना ने जल्दी से गाड़ी का दरवाज़ा खोला और उतरकर अस्पताल के अंदर भाग गई। रिसेप्शन पर अयांश के बारे में पूछकर वो उसके वार्ड के सामने आई। वो दरवाजा खोलने ही वाली थी की तभी उसने दरवाजे के बीच लगे गोल आकार के शीशे से नुपुर को देखा, जो अयांश के करीब खड़ी होकर उसे पानी पिला रही थी। उसके हाथ वही रूक गए और वो बस उसी शीशे से अयांश को देखती रही, जिसके सिर और बाएं हाथ पर पट्टी बंधी हुई थी। 


राकेश ने गाड़ी पार्क की और कबीर के साथ अंदर आए। रिसेप्शन पर अयांश के बारे में पूछकर वो कबीर के साथ वार्ड की तरफ जा ही रहे थे की तभी उन्हें रिद्धिमा दिखाई दी। वो डॉक्टर से बात कर रही थी। राकेश भी कबीर के साथ उनके पास पहुँचे और डॉक्टर से अयांश के बारे में पूछने लगे। 


अयांश आहना के उसके आसपास होने के एहसास को न पहचाने ऐसा हो ही नही सकता था। उसे ऐसा लगा कि आहना उसके आसपास ही है इसलिए उसने दरवाजे की तरफ देखा। अयांश को दरवाज़े की ओर देखता पाकर आहना जल्दी से दीवार वाली साइड हो गई। 


अयांश को दरवाज़े की तरफ देखता पाकर नुपुर ने भी दरवाज़े की तरफ देखा। वो समझ गई कि अयांश किसके इंतजार में है इसलिए उसने कहा, “तुम जिसके इंतजार में हो न वो नही आने वाली। यही प्यार है उसका तुम्हारे लिए। तुम इतनी तकलीफ में हो और उसे तुम्हारा ख्याल तक नही है तो बेहतर यही होगा कि छोड़ दो उसका इंतजार करना तुम अब और अपने मन को समझालो की वो लौटकर नही आने वाली तुम्हारी जिंदगी में क्योंकि उसे आना होता तो अबतक वो यहाँ होती पर वो यहाँ नही है और मुझे देखो, तुम मुझे चाहते भी नही हो फिर भी तुम्हारे पास हूँ और तुम्हारा ख्याल रख रही हूँ। एनीवेज, क्या फायदा तुमसे कुछ भी कहने का। प्यार तो तुम फिर भी उस आहना को ही करोगे। मैं अभी आती हूँ।” 


अयांश आहना के बारे में इतना सबकुछ सुनना तो नही चाहता था पर उस वक्त वो चुप रहा क्योंकि उसके दिमाग में और भी बहुत कुछ चल रहा था। बाहर खड़ी आहना ने नुपुर की सारी बातें सुन ली थी। जैसे ही उसे एहसास हुआ की नुपुर दरवाजे की तरफ आ रही है वो दूसरी तरफ घूमकर खड़ी हो गई। नुपुर दरवाजे से निकलकर दूसरी ओर चली गई। उसके जाते ही आहना जल्दी से अयांश के वॉर्ड में चली गई। 


अयांश किसी गहरी सोच में खोया हुआ था। दरवाज़ा खुलने की आवाज़ से उसकी तंद्रा टूटी। उसने दरवाज़े की ओर देखा तो आहना को वहाँ देखकर वो हैरान रह गया। आहना उसके पास आई और उसे देखने लगी। 


आहना को देखकर अयांश की आँख से आँसू बहकर गाल पर आ गया। ये देखकर आहना अयांश के आँसू को पोंछने के लिए जैसे ही अपने हाथ को उसके चेहरे के करीब लाई, उसने अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया। 


आहना उसके पास बैठ गई और उसने कहा, “अयांश, एक बार मेरी तरफ देखो।” 


अयांश ने उसे देखा और पूछा, “क्यों आई हो तुम यहाँ, आहना?” 


“मैं…मैं डर गई थी जब मुझे…मुझे पता चला की तुम्हारा एक्सीडेंट हो गया है। तुम्हें कुछ हो… हो जाता तो मैं…मैं तो जी ही नही पाती।” आहना ने रोते हुए कहा। 


“तुम्हें इससे क्या फ़र्क पड़ता है। तुम तो नफरत करने लग गई हो न मुझसे।” अयांश ने गुस्से में कहा। 


“ऐसा नही है, अयांश वो तो…” आहना ने कहना चाहा पर अयांश ने उसकी बात बीच में ही काटते हुए कहा, “तो फिर कैसा है हाँ। मेरे एक्सीडेंट की खबर सुनते ही तुम्हें ऐसा क्यों लगा की मुझे कुछ हो जाता तो तुम जी नही पाओगी।” 


“क्योंकि मैं तुम्हें तकलीफ में नही देख सकती।” आहना ने कहा। 


“और जो इतने वक्त से तुम मुझसे दूर रहकर हम दोनों को तकलीफ दे रही हो उसका क्या।” अयांश की बात सुनकर आहना रोने लगी। उसे ऐसे देखकर अयांश ने फिर कहा, “पता है आहना, मुझे लगता था की पूरी दुनिया मुझे गलत समझ सकती है और मुझे इन सब से कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि मेरी आहना मुझे हमेशा समझेगी पर मैं गलत था। तुम मुझे नही समझ नही पाई बल्कि तुमने तो ये समझ लिया की मैंने तुम्हें धोखा दिया है।” 


आहना ने अपने आँसू पोंछे और कहा, “अयांश, मैं तुमसे दूर नही रहना चाहती थी पर जब मैंने तुम्हें नुपुर का हाथ थामे देखा तो मुझे बहुत बुरा लगा। उस वक्त मुझे ऐसा लगा की तुम मुझसे दूर हो गए हो।” 


“मैं जानता हूँ की मुझसे बहुत बड़ी गलती हुई थी पर उस गलती की इतनी बड़ी सजा मिलेगी मुझे तुमसे, ये नही सोचा था मैंने। मुझे लगा था मैं तुम्हें समझाऊंगा तो तुम मुझे माफ करदोगी और हम दोनों साथ मिलकर सब कुछ ठीक करदेंगे पर मैं गलत था और शायद अब कुछ ठीक नहीं हो सकता।” अयांश ने कहा। 


अपनी बातों में उन दोनों ने ध्यान ही नही दिया की राकेश, नुपुर, रिद्धिमा और कबीर वहीं दरवाजे पर खड़े है। अयांश की बात सुनकर आहना ने  उसका हाथ पकड़ लिया जिसे देखकर नुपुर ने अंदर जाना चाहा पर राकेश ने अपना हाथ दरवाजे पर लगाकर न में सिर हिलाते हुए उसे रोक दिया। नुपुर वही खड़ी गुस्से से आहना को देखने लगी। 


आहना ने अयांश के हाथ को देखते हुए कहा, “अयांश, मैं बस गुस्से में थी जिसकी वजह से मैंने तुम्हें कहा की मैं तुमसे नफरत करती हूँ पर सच ये है की हर पल मैंने तुमसे सिर्फ प्यार किया है। तुम मुझे माफ करदो, अयांश। अभी भी सब कुछ ठीक हो सकता है। आई प्रॉमिस हम इन सब से मिलकर बाहर आएंगे।” 


अयांश ने उसके हाथ से अपने हाथ को छुड़वाया और कहा, “दूर रहो मुझसे। तुम शायद भूल रही हो की मैं मैरिड हूँ।” 


ये सुनकर नुपुर मुस्कुराने लगी। आहना ने अयांश को हैरानी से देखा और कहा, “अयांश…” 


अयांश ने उसकी बात बीच में ही काट दी और गुस्से से कहा, “क्या अयांश हाँ, क्या अयांश…? तुमने ही मुझे याद दिलाया था ना की मैं मैरिड हूँ तो अब ये बात मैं खुद मान रहा हूँ की मैं मैरिड हूँ।” 


आहना रोने लगी और उसने कहा, “अयांश, प्लीज़।” 


अयांश ने उसे देखते हुए अपना सिर हिलाया और कहा, “प्यार के बाद अगर किसी वजह से नफरत हो जाए न, आहना तो उस नफरत के बाद प्यार दोबारा होना मुश्किल होता है।” 


आहना ने इस बार कुछ नही कहा तो अयांश ने कहा, “जाओ यहाँ से। मुझे रेस्ट करना है।” 


आहना ने अयांश को आखिरी बार देखा और वहाँ से बाहर जाने के लिए जैसे ही मुड़ी, उसने देखा कि सब दरवाजे पर खड़े हुए उसे ही देख रहे थे। उसकी नज़र रिद्धिमा और नुपुर पर गई जो कि मुस्कुरा रही थी। अयांश ने भी उन सबको देखा पर वो खामोश रहा। 


आहना जैसे ही वहाँ से जाने लगी, राकेश ने उसका हाथ पकड़ कर उसे रोकने चाहा पर आहना वहाँ नही रुकना चाहती थी इसलिए अपना हाथ छुड़वाकर वहाँ से चली गई। कबीर भी उसके साथ चले गए। राकेश भी आहना के पास जाना चाहते थे पर अयांश को देखते हुए उन्होंने खुद को रोक लिया और वार्ड के अंदर आ गए। उनके साथ रिद्धिमा और नुपुर भी चली आई। राकेश ने प्यार से अयांश के गाल को छूते हुए पूछा, “कैसे हो तुम?” 


अयांश को उस वक्त यकीन नही हुआ की राकेश उससे बात कर रहे है फिर भी उसने कहा, “मैं ठीक हूँ, पापा।” 


राकेश ने अयांश से आहना के बारे में कोई बात नही की क्योंकि वो नुपुर के सामने आहना के बारे में कोई बात नही करना चाहते थे। 


***


कबीर आहना को अस्पताल से घर ले आए। घर पहुँचकर आहना सीधे अपने कमरे में गई। वो दरवाजा बंद करके वहीं दरवाजे के सहारे बैठ गई और अपने घुटनों को पकड़कर रोने लगी। रोते हुए उसकी नज़र अयांश की उस पेंटिंग पर गई जिसे उसने बनाया था। 


वो उठकर उस पेंटिंग के पास आई और उसे अपने हाथ में पकड़कर रोते हुए कहने लगी, “मैं जानती हूँ तुम मुझसे नफरत नही कर सकते। तुम बस नाराज हो मुझसे पर कोई नही, मैं मना लूंगी तुम्हें। जानती हूँ गलती हम दोनों से हुई है और अब हम इसे मिलकर ठीक करेंगे। हम मिलकर सब कुछ ठीक करदेंगे।” 


उसने उस पेंटिंग को अपने गले से लगा लिया और बेड पर बैठकर अयांश के बारे में सोचने लगी। 


***


अयांश को अपना ध्यान रखने का कहकर राकेश रिद्धिमा के साथ अस्पताल से घर जाने के लिए निकल गए। उनके जाते ही नुपुर अयांश के सामने बैठी और उसने कहा, “याद है मैंने तुमसे रिसेप्शन वाले दिन कहा था की तुम अभी आहना से जितना प्यार करते हो एक दिन उतनी ही नफरत करोगे और देखो, आज तुम्हें आहना से नफरत हो ही गई।” 


अयांश ने नुपुर से कुछ नही कहा और उसे देखते हुए मन ही मन में सोचा, “गलतफहमी है ये तुम्हारी नुपुर। अयांश अपनी आहना से नाराज़ जरूर रह सकता है पर उससे नफरत कभी नही कर सकता।”


Continued In जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 27