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Wednesday, 22 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 35



अयांश राकेश से मिला और उन्हें आहना का ख्याल रखने के लिए कहा क्योंकी वो जानता था इस बार आहना उसके दूर जाने के ख्याल से काफी डरी हुई है और इसलिए भी क्योंकि उसका अपना दिल किसी अनहोनी के डर में था। राकेश ने उसे यकीन दिलाया की वो आहना का ख्याल रखेंगे। अयांश आहना के माथे को चूम कर एयरपोर्ट के अंदर चला गया। आहना की आँखों में आँसू आ गए। 


राकेश ने पीछे से आकर उसके कंधे पर हाथ रखा और कहा, “घर चले बेटा।” 


आहना ने अपने आँसू पोंछे और राकेश के साथ चल दी। 


अयांश के जाने के अगले दिन ही नुपुर आहना से मिलने उसके घर पहुँची। कबीर को उसे वहाँ देखकर बहुत ज्यादा गुस्सा आया पर आहना ने उन्हें शांत रहने के लिए कहा। कबीर बिना कुछ कहे अपने कमरे में चले गए।


“क्या चाहिए तुम्हें मुझसे?” आहना ने नुपुर के सामने सोफे पर बैठते हुए पूछा।


“मैंने अयांश से सुना है की तुम पेंटिंग बहुत अच्छी करती हो। मुझे एक पेंटिंग बनवानी है तुमसे अपने मॉम डैड की। उन्हें गिफ्ट करने के लिए।” नुपुर ने मुस्कुराते हुए कहा। आहना को कुछ अजीब लग रहा था क्योंकि नुपुर उससे कभी भी ऐसे मुस्कुराते हुए बात कर ही नही सकती थी। उसने उसे देखते हुए कहा, “मैं अभी ऐसे वर्क नही लेती हूं। तुम किसी और पेंटर को ढूंढ लो।” 


“प्लीज आहना। मान जाओ ना।” नुपुर ने कहा पर आहना नही मानी क्योंकि वो नुपुर के लिए कोई काम नही करना चाहती थी तो उसने कहा, “अच्छा, ठीक है। पर मैं तुम्हारी बनाई हुई पेंटिंग्स तो देख सकती हूँ ना।” 


आहना इसके लिए मान गई तो नुपुर खुश हो गई की वो अब अपने प्लैन को अंजाम दे पाएगी। आहना उसे अपने कमरे में ले गई जहाँ बहुत सारी पेंटिंग्स रखी हुई थी। आहना ने सबसे पहले अयांश की पेंटिंग को छुपा दिया और फिर सारी पेंटिंग्स के ऊपर से पेपर्स हटाने लगी। जब आहना ये सब कर रही थी, नुपुर उसके पूरे कमरे में अपनी नज़रे दौड़ा रही थी और आखिरकार उसकी नजरें आहना के बेड के पास रखे स्टूल पर गई, जिसके ऊपर आहना की दवाईयां रखी हुई थी। 


सारे कागज़ हटाकर आहना ने उससे कहा, “तुम अब पेंटिंग्स को देख सकती हो।” 


आहना की आवाज सुनकर नुपुर ने उसे देखा और कहा, “मुझे एक ग्लास पानी मिलेगा।” 


आहना ने हाँ में सिर हिलाया और उसके लिए पानी लेने कमरे से बाहर चली गई जिसका फायदा उठाते हुए नुपुर ने जल्दी से आहना की दवाईयों को अपनी लाई हुई दवाईयों के साथ बड़े ही ध्यान से बदल दिया। वो मुस्कुराते हुए सोचने लगी, “अब इन दवाईयों को लेने से धीरे धीरे तुम्हारी तबियत खराब होती जाएगी।”


नुपुर पेंटिंग्स के पास आकर खड़ी हो गई। आहना उसके लिए पानी लेकर आई और ग्लास उसे दे दिया। नुपुर ने पानी पीकर ग्लास आहना को दिया और कहा, “तुम बहुत अच्छी पेंटिंग्स बनाती हो। मुझे अच्छा नही लग रहा की तुमने मेरे लिए पेंटिंग बनाने के लिए मना कर दिया पर कोई बात नही। अब मुझे चलना चाहिए।” 


आहना उसे गेट तक छोड़ने आई और उसके जाते ही दरवाजा बंद कर दिया। आहना को नुपुर का इस तरह आना सही नही लगा था। उसे इतना तो पता था की नुपुर यहाँ पेंटिंग के लिए नही आई थी। नुपुर के आने का इरादा कुछ और ही था जिसे वो समझ नही पाई थी। 


आहना ने नुपुर के द्वारा बदली हुई दवाईयां लेना शुरू कर दिया था जिसकी वजह से उसकी तबियत धीरे धीरे बिगड़ने लगी। उसे हर वक्त थकान और चक्कर आने जैसा लगता रहता था पर आहना ने इस पर ध्यान नही दिया क्योंकी उसे लगता था की ये सब उसके ज्यादा काम करने की वजह से हो रहा है क्योंकि इन दिनों वो ऑफिस और घर में बहुत काम करती थी जिसकी वजह से उसे आराम करने का वक्त सिर्फ रात में मिलता था। 


अयांश भी अपना काम पेरिस में अच्छी तरह से संभाल रहा था। वहाँ पर दूसरी कम्पनी जिसके साथ राकेश की कम्पनी काम कर रही थी, के मैनेजर ने अयांश को सब कुछ अच्छे से समझाया। अयांश अपने काम से बहुत खुश था पर उसे आहना की याद आती रहती थी। काम में व्यस्त रहते हुए और अलग अलग वक्त की वजह से वो दोनों बहुत मुश्किल से एक दूसरे के साथ बात कर पाते थे। 


आहना अपनी तबियत के चलते अकेले ही डॉक्टर से मिलने गई क्योंकि कबीर ऑफिस में व्यस्त थे। उसने डॉक्टर को वो दवाईयां भी दिखाई जो वो ले रही थी। डॉक्टर ने जैसे ही दवाईयों को ध्यान से देखा वो हैरान रह गई और आहना से पूछा, “ये दवाईयां आपने कहाँ से ली है?” 


“आपके हॉस्पिटल के बाहर जो मेडिकल है। वहाँ से ली है मैंने ये दवाईयां। इस एवरीथिंग फाइन डॉक्टर?” आहना ने पूछा। 


“इंपॉसिबल। वो मेडिकल वाला आपको ये दवाईयां नही दे सकता। आपकी दवाईयां किसी ने चेंज की है और दिक्कत की बात ये है की आप ये काफी ज्यादा ले चुकी है इसलिए आपके साथ ये सब कुछ हो रहा है।” डॉक्टर ने आहना से परेशान होते हुए कहा।


आहना ने घबराते हुए डॉक्टर से पूछा, “पर ये दवाईयां किस लिए है डॉक्टर?” 


“ये दवाईयां नही है। ये स्लो पॉइजन है।” डॉक्टर की बात सुनकर आहना हैरान रह गई और उसे अचानक से वो दिन याद आ गया जब अयांश के जाने के अगले दिन ही नुपुर उसके घर आई थी और जब वो उसे अपने कमरे में पेंटिंग्स दिखाने के लिए लेकर गई थी तो कैसे उसने पानी के बहाने उसे कमरे से बाहर भेज दिया था। आहना समझ गई की नुपुर ने उसी वक्त उसकी सारी दवाईयां बदल दी थी पर उसे ये समझ नही आया की नुपुर को ये कैसे पता था की वो दवाईयां लेती है क्योंकि ये बात सिर्फ कबीर जानते थे। 


“आहना।” डॉक्टर की आवाज सुनकर आहना अपने ख्यालों से बाहर आई तो डॉक्टर ने कहा, “आप घबराओ मत आहना। पहले तो अब आपको ये नही लेनी है और दूसरा, मैं आपको दवाईयां लिखकर दे रही हूं। आप वो लेना शुरू करना। आप धीरे धीरे ठीक होने लगेंगी।” 


“थैंक यू, डॉक्टर।” आहना ने कहा। डॉक्टर ने दवाईयां लिखकर कागज़ आहना को थमा दिया। आहना अस्पताल से बाहर आ गई और मेडिकल से दवाईयां लेकर अपने घर चली गई।


***


अयांश के वापिस आने से एक हफ्ता पहले नुपुर राकेश से मिलने उनके ऑफिस आई थी। वो उनके केबिन में बैठकर उनके साथ कुछ बात कर रही थी। आहना को एक फाइल को लेकर राकेश से बात करनी थी इसलिए वो भी उनके केबिन की तरफ आई। वो अंदर जाने के लिए दरवाजा खटखटाने ही वाली थी की तभी उसने नुपुर को कहते हुए सुना, “मैंने आहना को मरवाने के लिए एक इंसान को हायर किया है।” 


आहना ने दरवाजे का हैंडल कसकर पकड़ लिया और वहीं खड़ी सब कुछ सुनने लगी। वो जानना चाहती थी की नुपुर उसे मरवाना क्यों चाहती है और वो इस बारे में राकेश को क्यों बता रही है। 


“तुम ये मुझे क्यों बता रही हो?” राकेश ने पूछा। 


नुपुर हँसने लगी और उसने कहा, “मैं आपको ये बात इसलिए बता रही हूँ क्योंकि आपको पता होना चाहिए की आपकी प्यारी बेटी के साथ मैं क्या करने वाली हूँ।” 


“देखो, तुम जो चाहती थी वो मैंने कर दिया था। तुम चाहती थी मैं अयांश को किसी भी बहाने से यहाँ से दूर भेज दूं जिससे वो आहना को बचा न सके और ये मैंने कर दिया। अब मुझे इन सब से दूर रखो।” राकेश की बात सुनकर आहना को एक पल के लिए अपने कानों पर यकीन ही नही हुआ। उसका इस बात पर यकीन कर पाना बेहद मुश्किल था की उसे हमेशा अपनी बेटी मानने वाले राकेश आज उसे मारने की बातें कर रहे है। 


आहना वहाँ और नही रुकना चाहती थी इसलिए वो जल्दी से अपने केबिन की तरफ आकर अपना सारा समान बैग में डालने लगी। उसी वक्त नुपुर भी राकेश के केबिन से बाहर आई और उसे देख लिया।


आहना अपना सारा सामान लेकर कबीर को बिना बताए ही घर जाने के लिए ऑफिस से बाहर गई। ये देखकर नुपुर ने किसी को फोन लगाया। जैसे ही दूसरी तरफ से किसी ने फोन उठाया, नुपुर ने कहा, “वो अभी अभी ऑफिस से बाहर निकली है। तुम्हें पता है ना तुम्हें क्या करना है।” 


दूसरी तरफ से किसी ने हाँ कहकर फोन काट दिया। नुपुर अपने फोन को देखकर मुस्कुराने लगी और उसने कहा, “अब तुम सिर्फ मेरे होगे अयांश। अब आहना हमारे बीच कभी नही आएगी।” 


आहना जब भी कहीं अकेले आया जाया करती थी तो अक्सर पैदल जाती थी या फिर ऑटो ले लिया करती थी क्योंकी उसे लगता था गाड़ी की जरूरत उससे ज्यादा कबीर को है और घर ऑफिस से ज्यादा दूर नही था। आज भी आहना पैदल ही घर जा रही थी। चलते हुए उसके मन में बहुत से ख्याल आ जा रहे थे। उसे यकीन ही नही हो रहा था की राकेश इतना बदल सकते है। 


आहना को रोड पार करना था तो वो बिना सोचे समझे फुटपाथ से उतरकर रोड पर चलने लगी। वो अपनी सोच में खोए हुए रोड पार कर ही रही थी की तभी एक गाड़ी तेज स्पीड से उसकी तरफ आई और उसे जोर से टक्कर मारते हुए उसके ऊपर से चढ़कर निकल गई।


Continued In जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 36


Tuesday, 21 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 34



रिद्धिमा ने आहना को मारने में उनका और नुपुर का साथ देने के लिए राकेश को तैयार कर लिया था जिससे नुपुर बहुत ज्यादा खुश थी लेकिन राकेश को अपने इस फैसले पर रोना आ गया था क्योंकि उन्हें अपने बिजनेस को बचाने के लिए आहना जिसे वो अपनी बेटी मानते थे, उसकी जान लेनी थी। 


रिद्धिमा ने जब उन्हें ऐसे देखा तो उनके कंधे पर हाथ रखकर कहा, “राकेश, तुम क्यों परेशान हो रहे हो। हजारों जिंदगीयों को खुश रखने के लिए अगर एक जिंदगी लेनी पड़ रही है तो इसमें कुछ गलत नही है और वैसे भी ये बिजनेस वर्ल्ड है, यहाँ अपना अपना बिजनेस बचाने के लिए लोग सारी लिमिट्स क्रॉस करते है। टेंशन मत लो तुम।” 


राकेश ने कुछ नही कहा और उठकर अपने कमरे में चले गए। उन्हें वो पल याद आ गया जब उन्होंने आहना को बताया था की बिजनेस के लिए लोग इंसानियत की हदें भी पार कर देते है और आज वो भी यही करने जा रहे थे। उन्होंने अपने मैनेजर को फोन करके कह दिया की सभी एम्प्लॉय से कह दे की उन्हें किसी भी चीज की टेंशन लेने की जरूरत नही है क्योंकि कबीर को फोन करने की हिम्मत उनके अंदर नही थी। कैसे बताते वो कबीर को की सब कुछ ठीक उनकी बेटी की जिंदगी के बदले में हुआ है।


राकेश उसके बाद से सारा दिन ऑफिस ही नही गए और खुदको अपने कमरे में बंद रखा। अयांश ने जब रिद्धिमा से उनके बारे में पूछा तो उसने झूठ कह दिया की राकेश की तबियत ठीक नही है इसलिए वो आराम कर रहे है। अयांश ने भी उन्हें डिस्टर्ब करना ठीक नही समझा इसलिए वो डिनर करने के बाद अपने कमरे में चला गया। 


***


आहना को अपनी आँखों में ज्यादा ही तकलीफ महसूस होने लग गई थी जिसके लिए वो एक दिन अपॉइंटमेंट लेकर अकेले डॉक्टर के पास गई। डॉक्टर ने उसे कुछ दवाईयां और आईड्रॉप का नाम कागज़ पर लिखकर दे दिया। 


आहना डॉक्टर को थैंक यू कहकर जैसे ही बाहर आई, अस्पताल के अंदर आती हुई नुपुर ने उसे देख लिया। नुपुर ने देखा की आहना सामने बने हुए मेडिकल स्टोर की तरफ जा रही है तो वो भी अस्पताल के अंदर ना जाकर आहना के पीछे जाने लगी। चलते हुए ही उसने अपने स्कार्फ से अपना चेहरा ढक लिया। 


आहना ने अपने हाथ में पकड़ा कागज़ दुकानदार को दिया और इंतजार करने लगी। नुपुर भी उसके साथ आकर खड़ी हो गई और दुकानदार आहना के सामने जो भी दवाईयां रख रहा था उन्हें ध्यान से देखने लगी। आहना ने एक नजर उसे देखा पर उसे पहचान नही पाई क्योंकि नुपुर की सिर्फ आँखें ही दिखाई दे रही थी। 


दुकानदार ने आकर नुपुर से पूछा की उसे क्या चाहिए तो नुपुर ने जल्दी जल्दी में विक्स बोल दिया। दुकानदार ने आहना के सामने आई ड्रॉप और नुपुर को विक्स लाकर दे दिया। नुपुर ने ध्यान से आहना के सामने रखे हुए आई ड्रॉप और दवाईयों को देखा और फिर दुकानदार को विक्स के पैसे देकर वहाँ से चली गई।


आहना को दवाईयां लेते हुए देखकर ही उसके दिमाग में एक खतरनाक साजिश जन्म ले चुकी थी जिसे वो अब अंजाम देने वाली थी। 


रिद्धिमा राकेश को अपने और नुपुर के प्लैन के बारे में बता चुकी थी और उन्हें समझा चुकी थी की उन्हें क्या करना है इसलिए उसी रात राकेश ने अयांश को अपने स्टडी रूम में बुलाया और उससे कहा, “अयांश, तुम्हें अपनी पढ़ाई पूरी किए हुए काफी वक्त हो गया है। अब मैं चाहता हूँ की तुम ऑफिस पूरी तरह से ज्वॉइन करो और धीरे धीरे सब कुछ सीखना शुरू करो।” 


“जी पापा, मैं कल से रोज ऑफिस आया करूंगा।” अयांश ने कहा और थोड़ी देर बाद वहाँ से चला गया। 


अगले दिन से अयांश ने रोजाना ऑफिस जाना शुरू कर दिया। वो वहाँ पर सभी के साथ काम करते हुए धीरे धीरे सब कुछ सीखने लगा। साथ ही उसे आहना के साथ भी पहले से ज्यादा वक्त बिताने का मौका मिल गया था क्योंकि ज्यादातर वो दोनों एक साथ ही काम करते थे। 


अयांश को ऑफिस में काम करते हुए पूरे तीन महीने हो चुके थे और इन तीन महीनों में उसने सबके साथ काम करते हुए बहुत सारा एक्सपीरियंस लिया और बिजनेस के बारे में काफी कुछ सीख लिया। 


एक दिन आहना और अयांश केबिन में एक साथ बैठे कुछ फाइलों पर काम कर रहे थे की तभी वहाँ एक लड़के ने आकर अयांश से कहा, “अयांश सर, आपको सर बुला रहे है।” 


“ठीक है। मैं जाता हूँ। थैंक यू।” अयांश ने कहा तो लड़का वहाँ से चला गया। अयांश ने मुस्कुराते हुए आहना के माथे को अपने होठों से छुआ और केबिन से निकलकर राकेश के केबिन की तरफ चल पड़ा। 


उसने केबिन के बाहर आकर धीरे से दरवाज़ा खोला और अंदर चला गया। उसने सामने कुर्सी पर बैठते हुए कहा, “पापा, आपने मुझे बुलाया।” 


राकेश ने अपने लैपटॉप स्क्रीन से नजरें हटाकर उसे देखा और फिर कहा, “हाँ, वो मैं तुमसे एक बात करना चाहता था।” 


“जी पापा, कहिए।” अयांश ने कहा। 


राकेश ने अपना चश्मा उतारकर टेबल पर रखा और कहा, “हमारा एक होटल का प्रोजेक्ट है पेरिस में। वहाँ की एक कम्पनी हमारे साथ मिलकर वहाँ एक होटल खोलना चाहती है। तुम्हें यहाँ काम करते हुए तीन महीने हो चुके है और मैंने देखा है की तुमने काफी जल्दी सब कुछ सीख लिया है इसलिए मैं चाहता हूँ की इस प्रोजेक्ट के लिए तुम पेरिस जाओ।” 


राकेश की बात सुनकर अयांश को थोड़ी हैरानी हुई क्योंकि वो अच्छे से जानता था की इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए राकेश उससे ज्यादा एक्सपीरियंस वाले इंसान को भेजते क्योंकि राकेश के लिए उनका काम ही उनका सब कुछ था और वो अपने काम के साथ कोई रिस्क नही ले सकते थे। ऐसे में राकेश का इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए उसे भेजने की बात करना अयांश को कुछ ठीक नही लगा क्योंकि उसका एक्सपीरियंस तो अभी काफी कम था। वो तो ये समझता था कि आहना का एक्सपीरियंस उससे कहीं ज्यादा है। उसने राकेश को देखा और कहा, “पापा, इसके लिए आप मुझे क्यों भेजना चाहते है। मेरा एक्सपीरियंस तो अभी बहुत कम है। आप किसी और को भेजिए न इसके लिए जो मुझसे ज्यादा एक्सपीरियंस्ड हो।” 


“जब मैंने ये बिजनेस नया नया शुरू किया था, उस वक्त मेरे पास भी कोई एक्सपीरियंस नही था। बस थोड़ी सी नॉलेज, हिम्मत और मेहनत थी मेरे पास। मैंने गलतियां की, उनसे सीखा और धीरे धीरे बढ़ता गया। तुम फिर भी खुशकिस्मत हो जो तुम्हें वो सब नही देखना पड़ रहा जो मैंने देखा था। अगर हम ये प्रोजेक्ट खो भी देते है तो मुझे कोई दुख नही होगा क्योंकि मुझे पता है, इससे तुम्हें कुछ न कुछ सीखने को मिलेगा ही, बेशक गलती करके ही सही। इसलिए मैं चाहता हूँ की तुम जाओ और तुम ही जाओगे। कोई और नही।” राकेश ने अयांश को समझाकर अपना फैसला सुनाते हुए कहा पर अयांश को कुछ ठीक नही लग रहा था क्योंकि वो जानता था की राकेश कभी भी उसे कुछ भी ऐसा करने के लिए नही कहेंगे जो वो न करना चाहता हो। राकेश को भी ये सब करने में बहुत तकलीफ हो रही थी पर उन्होंने खुद को मजबूत बना रखा था।


अयांश नही जाना चाहता था जिसकी वजह थी आहना। वो एक बार आहना से दूर गया था तो उसके और आहना के साथ कितना कुछ हुआ था। उसे फिर से यही डर लग रहा था की अगर वो फिर से आहना से दूर गया तो फिर से कहीं कुछ गलत न हो जाए। किसी अनहोनी के डर की वजह से वो जाना नही चाहता था पर वो राकेश को ना भी नही कह सकता था इसलिए वो पेरिस जाने के लिए मान गया लेकिन उसका दिल अभी भी तैयार नही था। वो राकेश के केबिन से बाहर आ गया। उसके जाते ही राकेश ने कहा, “मुझे माफ कर देना, अयांश पर इस कम्पनी पर तुम्हारा फ्यूचर भी डिपेंड है। इस कम्पनी के लिए मुझे आहना को मारना होगा जिसके लिए तुम्हारा दूर जाना बहुत जरूरी है।” 


उसने केबिन में वापिस आकर आहना को इस बारे में बताया तो आहना को भी बहुत हैरानी हुई और उसने कहा, “मुझे कुछ सही नही लग रहा, अयांश। अंकल तुम्हें कभी भी किसी ऐसी बात के लिए फोर्स नही करेंगे जो तुम ना करना चाहो।” 


“वही तो मैं सोच रहा हूँ, आहना। पापा मुझे ही क्यों भेजना चाहते है।” कहते हुए अयांश ने आहना को देखा जो इस बात से परेशान लग रही थी। उसने आहना का हाथ पकड़ा और कहा, “सब ठीक होगा, आहना।” 


“मुझे डर लग रहा है, अयांश। एक बार तुम दूर गए थे तो देखा ना क्या हुआ था। इस बार भी अगर कुछ…” इससे पहले कि आहना अपनी बात खत्म करती, अयांश ने उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया और कहा, “कुछ नही होगा। डरो मत।” 


आहना का अब ऑफिस में मन नही लग रहा था इसलिए उसने अयांश से कहा की वो उसे घर छोड़ दे। अयांश आहना को लेकर ऑफिस से बाहर आ गया। कुछ ही देर बाद उसने आहना को घर छोड़ा और उसे परेशान न होने का कहकर अपने घर के लिए निकल गया। 


राकेश ने अपने मैनेजर से कहकर अयांश की सन्डे की फ्लाईट बुक कर दी थी। अयांश अपने कमरे में पैकिंग करने में लगा हुआ था। नुपुर बेड पर बैठकर फोन चलाते हुए उसे ही देख रही थी। वो बहुत ही ज्यादा खुश थी ये सोचकर की आखिरकार वो दिन आने ही वाला था जब वो आहना को अयांश की जिंदगी से बहुत दूर भेज देगी और फिर अयांश सिर्फ उसका होगा। अयांश को पेरिस में पूरे एक महीने के लिए रुकना था इसलिए नुपुर के पास आहना को मारने के लिए बहुत वक्त था। 


सन्डे की शाम को अयांश आहना और राकेश के सामने एयरपोर्ट पर खड़ा था। आहना अयांश को रोकना चाहती थी पर उसने अयांश से कुछ भी नही कहा। राकेश उन दोनों से दूर खड़े थे जिससे अयांश और आहना को एक दूसरे के साथ कुछ वक्त मिल सके क्योंकि सिर्फ उन्हें ही पता था की ये मुलाकात शायद अयांश और आहना की आखिरी मुलाकात हो एक दूसरे के साथ।


Continued In जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 35

Monday, 20 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 33



नुपुर आहना को अयांश के साथ नही देख पा रही थी इसलिए उसने फैसला किया की वो अब आहना को नही छोड़ेगी। उसे ऐसे देखकर रिद्धिमा ने कहा की उसे परेशान होने की जरूरत नही है क्योंकि आहना को नुकसान पहुँचाने में उनकी मदद अब वही इंसान करेगा जो उसे सबसे ज्यादा पसंद करता है जिससे नुपुर थोड़ा हैरान हो गई और उसने कहा, “ये आप क्या कह रही है, मॉम। भला अयांश हमारी हेल्प क्यों करेगा आहना को हार्म करने के लिए।” 


“अयांश नही बेटा, राकेश। मैं राकेश की बात कर रही हूँ।” रिद्धिमा ने कहा।


“पर वो भी क्यों तैयार होंगे ये करने के लिए और कैसे?” नुपुर ने पूछा। 


रिद्धिमा हसीं और उन्होंने कहा, “बड़े से बड़े इंसान की भी कोई एक कमजोरी होती है नुपुर। राकेश की भी है और इसी कमज़ोरी का फायदा उठाकर मैं राकेश को ये सब करने के लिए तैयार करूंगी। बस तुम देखती जाओ।” 


रिद्धिमा ने अपना फोन टेबल से उठाकर किसी को फोन मिलाया। जैसे ही सामने वाले इंसान ने फोन उठाया, रिद्धिमा ने कहा, “मैं आपसे मिलना चाहती  हूँ। आप कल घर आ जाना।” 


रिद्धिमा वहाँ से उठकर किचन की तरफ चली गई और नुपुर वहीं बैठे हुए उन्हें जाता हुआ देखकर सोचने लगी की रिद्धिमा क्या करने वाली है। 


अगले दिन शाम में रिद्धिमा से मिलने एक आदमी आया। रिद्धिमा ने उसके गले लगते हुए उससे पूछा, “कैसे है भैया, आप?” 


“ठीक हूँ, मेरी प्यारी बहना। तुम ये बताओ तुमने मुझे कैसे याद किया?” रिद्धिमा के भाई, प्रतीक ने पूछा। रिद्धिमा कुछ कहने ही वाली थी की तभी वहाँ एक सर्वेंट चाय की ट्रे लेकर आया। उसने चाय टेबल पर रखी और वहाँ से चला गया।


“भैया, मैं चाहती हूँ की आप राकेश से वो वापिस ले लीजिए जो आपका है।” सर्वेंट के जाते ही रिद्धिमा ने कहा पर प्रतीक उसकी बात का मतलब नही समझ पाया इसलिए उसने पूछा, “तुम किस बारे में बात कर रही हो, रिद्धिमा।” 


रिद्धिमा ने प्रतीक को देखा और कहा, “मैं उस बिज़नेस के बारे में बात कर रही हो जो आपने राकेश को दिया है।” 


“क्या तुम मजाक कर रही हो, रिद्धिमा? हाँ, मैंने राकेश की मदद जरूर की थी वो बिजनेस शुरू करने में पर राकेश ने उसे अपनी मेहनत और लगन से इतना बड़ा किया है और जो पैसे मैंने राकेश के बिजनेस में लगाए थे, उन्हें तो वो मुझे कब का लौटा चुका है। अब मेरा कोई हक नही बनता उसके बिजनेस पर और ये बात तुम भी अच्छे तरीके से जानती हो।” प्रतीक ने रिद्धिमा को समझाते हुए कहा पर रिद्धिमा को कुछ भी करके प्रतीक को अपने काम के लिए मनाना था इसलिए उसने कहा, “जानती हूँ भाई ये सब मैं पर अगर आप नही होते तो क्या राकेश वो बिज़नेस शुरू भी कर पाता। मैं कुछ नही जानती इतने सालों में मैंने आपसे पहली बार कुछ मांगा है। आपको मेरे लिए ये करना ही होगा।” 


प्रतीक ने एक गहरी सांस ली और कहा, “क्या हो गया है रिद्धिमा तुम्हें? क्यों करना चाहती हो तुम ये सब? अपने ही पति से उसकी मेहनत छीनना चाहती हो तुम। ये सब तो हमने तुम्हें नही सिखाया था।” 


“भाई, आपको क्या लगता है। राकेश अपनी बरसों की मेहनत इतनी आसानी से जाने देगा। उसका बिजनेस उसका सपना था और अब उसकी कमजोरी है। इसी कमज़ोरी का फायदा उठाकर मैं उससे अपना एक काम करवाना चाहती हूँ बस जो मैं आपको नही बता सकती और राकेश को भी इस बारे में पता नही चलना चाहिए।” रिद्धिमा ने कहा। 


प्रतीक ने थोड़ी देर रिद्धिमा को ध्यान से देखा और पूछा, “तुम फिर से कुछ गलत करने की तो नही सोच रही हो ना, रिद्धिमा? मुझे इंडिया वापिस आकर कहीं से पता चला की तुमने अयांश की शादी जबरदस्ती किसी और के साथ करवाई है जिसे वो चाहता तक नही है। कहीं तुम फिर से अयांश के साथ कुछ गलत करने का तो नही सोच रही?” 


“भाई अयांश मेरा बेटा है और मैं जो भी करूंगी उसके अच्छे के लिए ही करूंगी। आप उसकी चिंता न करे। बस मेरा ये काम कर दीजिए प्लीज।” इस बार रिद्धिमा ने रिक्वेस्ट करते हुए कहा। 


“ठीक है पर अगर मुझे पता चला की तुमने कुछ गलत किया है तो भूल जाऊंगा की मेरी कोई बहन भी है।” प्रतीक की ये बात सुनकर रिद्धिमा थोड़ा घबरा गई और उसने कहा, “नही भाई मैं पक्का कुछ गलत नही करूंगी।” 


“तुम्हें मैं बहुत अच्छे से जानता हूँ रिद्धिमा। अपने ख्वाहिशों को पाने के लिए तुम किसी भी हद तक जा सकती हो। तुम्हारा काम हो जाएगा। भेज दूंगा मैं राकेश को एक नोटिस पर याद रखना इस बार मेरे बेटे को कोई तकलीफ नही होनी चाहिए। वैसे अयांश है कहाँ?” प्रतीक ने पूछा। 


“वो इस वक्त अपने दोस्तों से मिलने गया हुआ है।” रिद्धिमा ने कहा तो प्रतीक ने उसे देखा और फिर पूछा, “और तुम्हारी बहु? उससे भी नही मिला हूँ मैं अभी तक।” 


“वो अपने मायके गई हुई है।” रिद्धिमा ने कहा। 


“ठीक है, उनसे मिलने फिर मैं किसी और दिन आ जाऊंगा। अभी चलता हूँ। अपना ख्याल रखना तुम।” कहते हुए प्रतीक उठे ही थे कि तभी बाहर एक गाड़ी के रुकने की आवाज आई। 


गाड़ी में से उतरकर राकेश अंदर आए और प्रतीक को देखकर मुस्कुरा उठे। वो प्रतीक से मिले और पूछा, “कैसे है आप भाई?” 


“ठीक हूँ। तुम कैसे हो?” प्रतीक ने उनसे पूछा। 


“मैं भी ठीक हूँ, भाई। आप खड़े क्यों है? आइए अंदर चलकर बैठते है।” राकेश की बात सुनकर प्रतीक ने कहा, “तुम्हारे साथ बातें करने के लिए हम किसी दिन अच्छे से वक्त निकालकर डिनर पर आएंगे सबको लेकर। अभी इजाजत चाहूंगा क्योंकि मुझे कहीं और भी जाना है एक जरूरी काम से।” 


“जी भाई, जरूर। आपका ही घर है ये।” राकेश ने कहा। प्रतीक रिद्धिमा और राकेश से मिलकर वहाँ से चले गए। 


एक दिन राकेश जब ऑफिस पहुँचेे तो ऑफिस में सभी लोग काफी परेशान लग रहे थे। कबीर और वहाँ का मैनेजर, महेश जल्दी से उनके पास आए और कबीर ने कहा, “राकेश, एक प्रॉब्लम हो गई है।” 


राकेश उनके साथ अपने केबिन में आ गए और अपनी कुर्सी पर बैठ गए। कबीर ने एक एनवेलप राकेश को दिया जिसमें एक लेटर था। राकेश ने एनवेलप में से लेटर को निकालकर पढ़ना शुरू किया। जैसे जैसे वो लेटर पढ़ रहे थे, उनके चेहरे पर कई भाव आ जा रहे थे। उन्हें समझने में ज्यादा देर नही लगी की इसके पीछे किसका हाथ है। 


कबीर ने उन्हें देखा और कहा, “राकेश, सारा स्टाफ इस लेटर की वजह से बहुत परेशान है। हमें जल्दी ही इस मैटर को सॉल्व करना होगा। वो तो अच्छा है की आहना और अयांश यहाँ नही है। अगर उन्हें पता लग जाता इस बारे में तो अच्छा नही होता।” 


राकेश उठे और कबीर से कहा, “टेंशन मत लो। ये मैटर मैं सॉल्व कर लूंगा। तुम यहाँ सब कुछ संभालो। मुझे कहीं जाना होगा।” 


कबीर ने राकेश को तसल्ली दी की वो सब कुछ संभाल लेंगे। राकेश ऑफिस से बाहर आकर अपनी गाड़ी में बैठे और अपने घर पहुँचे। वो गुस्से से घर के अंदर आए और लिविंग रूम में आकर उन्होंने वो लेटर रिद्धिमा के सामने फैंकते हुए कहा, “ये सब तुम्हारा किया धरा है ना।” 


रिद्धिमा जो आराम से सोफे पर बैठकर मैगजीन पढ़ रही थी, उसने मैगजीन से नज़रे हटाकर राकेश को देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “ओह ये तुम्हें मिल गया। कैसा लगा सरप्राईज तुम्हें।” 


नुपुर जो उनके पास बैठकर अपना कुछ काम कर रही थी, उसे कुछ समझ नही आ रहा था की वो दोनों किस बारे में बात कर रहे है और वो सोच रही थी की उस लेटर में ऐसा क्या है जिसकी वजह से राकेश रिद्धिमा पर ऐसे गुस्सा कर रहे है पर उसने उन दोनों से कुछ नही पूछा और चुपचाप उनकी बातें सुनने लगी।


“इसलिए तुमने अपने भाई को घर पर बुलाया था?” राकेश ने गुस्से में पूछा।


“पता है तो पूछ क्यों रहे हो।” रिद्धिमा ने कहा। 


राकेश रिद्धिमा के इरादों को अच्छे से जानते थे इसलिए उन्होंने पूछा, “क्या चाहती हो तुम इस बार रिद्धिमा मुझसे?” 


रिद्धिमा ने राकेश को मुस्कुराते हुए देखा और कहा, “वाह राकेश, कितना समझने लगे हो तुम मुझे। अब जब तुम्हें पता चल गया है की मैं तुमसे क्या चाहती हूँ तो सुनो। मैं चाहती हूँ की तुम हमारी मदद करो आहना को जान से मारने में क्योंकि हम उसे अयांश से बहुत दूर भेज देना चाहते है।” 


जैसे ही राकेश ने ये सुना, वो हैरानी से रिद्धिमा को देखने लगे। वहीं नुपुर ये जानकर खुश हो रही थी पर अगले ही पल उसकी खुशी गायब हो गई जब राकेश ने कहा, “मैं ऐसा कभी नही करूंगा। मेरी बेटी की तरह है आहना। तुमने सोच भी कैसे लिया की अपनी बेटी की जान लूंगा मैं और फिर मैं अयांश और कबीर से क्या कहूंगा कि मार दिया मैंने आहना को। कभी भी नही।” 


“तो फिर अपना बिज़नेस खोने के लिए तैयार रहो।” रिद्धिमा ने बिना किसी भाव के कहा। राकेश बिना कुछ कहे उसे देखते रहे तो रिद्धिमा ने कहा, “क्या हुआ? जाओ यहाँ से अब तुम और जाकर देखो की तुमसे तुम्हारा बिजनेस अब कैसे दूर होता है। वो बिजनेस जो तुम्हारा सपना है। वो बिजनेस जो तुम्हारी मेहनत है और जिससे सिर्फ एक नही, उन हज़ारों लोगों का घर चलता है जिनके जीने के लिए उनकी एक जरूरत है तुम्हारा बिजनेस और हमारे बेटे का फ्यूचर भी है वो बिज़नेस। याद रखना राकेश उस बिज़नेस को तुम सिर्फ एक आहना के लिए खो रहे हो। सिर्फ एक आहना के लिए तुम हज़ारों लोगों की जिंदगी के साथ गलत करोगे। ध्यान से सोच लो अभी भी मेरी बात को।” 


राकेश सोफे पर बैठ गए और सोचने लगे। एक तरफ उन्हें आहना का हँसता हुआ चेहरा नज़र आ रहा था और दूसरी तरफ उनका सपना और उनके सारे एम्प्लॉय, जिनकी मेहनत की वजह से उनका बिजनेस बढ़ा था और वो रोज खुशी खुशी ऑफिस में आकर काम किया करते थे। 


उन्होंने रिद्धिमा को देखा और कहा, “मैं… मैं तुम…तुम्हारा साथ देने के लिए तैयार हूँ।” 


एक आँसू उनकी आंख में से निकलकर उनके गाल पर बह गया।


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Sunday, 19 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 32

 


नुपुर अयांश का इंतजार करते करते जब थक गई तो अपने कमरे में जाकर सो गई। 


सुबह अयांश की नींद खुली तो वो मुस्कुरा उठा। आहना उसके सीने पर अपना सिर रखकर आराम से सो रही थी और उसके होठों पर मुस्कान थी। उसने आहना के बालों पर एक किस किया। उसने धीरे से आहना को खुद से अलग किया जिससे वो जाग न जाए और उठकर बाथरूम में चला गया। 


बाथरूम से बाहर आने के बाद उसने देखा कि आहना अभी भी सो रही है और उसके सारे बाल उसके चेहरे पर आ गए है। अयांश उसके पास आकर बैठ गया। उसने प्यार से अपनी उंगलियों से आहना के चेहरे से सारे बाल हटाए और उसके माथे पर किस करते हुए कहा, “उठ जाओ, टेडी बियर।” 


“उम्म, उठती हूँ थोड़ी देर में।” आहना ने नींद में कहा और अयांश का हाथ अपने हाथ में लेकर उसकी गोद में सिर रखकर फिर से सो गई। अयांश मुस्कुरा दिया और उसके बालों को सहलाने लगा। 


थोड़ी देर बाद आहना उठी और तैयार होने चली गई। उसके तैयार होने के बाद, उसने और अयांश ने वहीं नाश्ता किया और फिर वहाँ से निकल गए। अयांश जैसे ही अपने घर पहुँचा, उसका सामना सबसे पहले नुपुर से हुआ, जो गुस्से से उसे घूरे जा रही थी। 


“कहाँ थे तुम कल सारी रात?” नुपुर ने उसके पास आकर गुस्से में पूछा। 


अयांश ने उसे देखा और कहा, “तुम ये सवाल पूछने का कोई हक नही रखती मुझसे?” 


“ओह रियली, मैं तुम्हारी वाइफ हूँ और मुझे ये जानने का राइट है की तुम कहाँ थे।” नुपुर ने चिल्लाते हुए कहा।


“जबरदस्ती के रिश्ते को नाम देना बंद करो तुम और जानना चाहती हो ना मैं कहाँ था तो सुनो। तुम मेरी वाइफ हो पर आजतक मैंने तुम्हें इसका असली हक नही दिया है। वही हक मैं किसी और को देकर आया हूँ कल रात। अब इतनी समझदार तो तुम हो की ये जान सको की मैं कहाँ था।” कहकर अयांश ऊपर अपने कमरे में चला गया। 


नुपुर हैरानी और गुस्से से उसे देखती रही और उसने कहा, “मैं तुम्हें छोडूंगी नही आहना।” 


रात को डिनर के बाद राकेश ने अयांश को अपने स्टडी रूम में आने के लिए कहा। नुपुर जानना चाहती थी की राकेश अयांश से क्या बात करना चाहते है इसलिए वो भी थोड़ी देर बाद अयांश के पीछे पीछे आ गई और स्टडी रूम में बाहर आकर रुक गई। 


अयांश राकेश के सामने कुर्सी पर बैठा था। राकेश अयांश के सामने आकर बैठा और पूछा, “आहना के साथ अब तुम्हारा रिश्ता ठीक है ना।” 


“जी पापा। सब ठीक है। फिर से सब कुछ पहले जैसा हो गया है।” अयांश ने कहा। आहना का नाम सुनते ही बाहर रूम के बाहर खड़ी नुपुर को गुस्सा आ गया पर राकेश की अगली बात ने उसे और गुस्सा दिला दिया जब उन्होंने अयांश से पूछा, “नुपुर को डायवोर्स कब दे रहे हो तुम?” 


“पापा, मैं नही दूंगा नूपुर को डायवोर्स।” अयांश ने जैसे ही ये कहा, नूपुर खुश हो गई पर राकेश ये सुनकर हैरान है इसलिए उन्होंने पूछा, “तुम्हारे कहने का मतलब क्या है, अयांश?” 


“पापा, मैं नुपुर को इतना ज्यादा परेशान करूंगा की वो खुद मुझे डायवोर्स देकर छोड़ देगी।” अयांश ने कहा जिसे सुनते ही नुपुर गुस्से में वहाँ से अपने कमरे में आ गई और उसने दीवार पर लगी अयांश की तस्वीर को देखते हुए कहा, “जितनी मर्जी कोशिश करलो अयांश। जितना मर्जी परेशान करो तुम मुझे। मैं तुम्हें कभी डायवोर्स नही दूंगी और न ही कभी छोडूंगी। अगर तुम्हें कोई छोड़कर जाएगा तो वो है आहना।” 


एक दिन आहना ऑफिस में बैठे कंप्यूटर स्क्रीन के आगे काम कर रही थी की तभी उसे महसूस हुआ की उसकी नज़र कमज़ोर हो रही है। उसने अपनी आँखें बंद करते हुए कहा, “ज्यादा कम्प्यूटर स्क्रीन पर काम करने की वजह से नजर कमज़ोर हो रही है।” 


वो आँखें खोलकर फिर से अपने काम में लग गई। वो इतनी व्यस्त हो गई की उसने ध्यान ही नही दिया की अयांश पिछले पाँच मिनिट से उसके पीछे खड़ा उसे ही देख रहा था। उसने हल्के से आहना के कंधे पर मारा जिससे आहना का ध्यान उसके ऊपर गया और उसने खड़े होते हुए कहा, “अयांश, तुम यहाँ?” 


“तुमसे मिलने आया था पर तुम तो बिजी हो बहुत। इतना कहाँ ध्यान लगा रखा है की मेरा ही ध्यान नही रहा तुम्हें।” अयांश ने कहा। 


आहना ने अपने सामने रखी कुछ फाइलों और कंप्यूटर की तरफ इशारा करते हुए कहा, “इन फाइलों और कंप्यूटर के साथ बिजी हूँ।” 


अयांश ने सारी फाइल्स को बंद किया और कहा, “मैं तुम्हें अपने साथ ले जाने आया था। तुम इसी वक्त मेरे साथ चल रही हो।” 


“पर कहाँ?” आहना ने फाइलों को बंद करता देखते हुए पूछा।


“हमारे बचपन वाले पार्क में।” अयांश ने आहना का हाथ पकड़कर उसे उठाते हुए कहा। 


वो दोनों ऑफिस से बाहर आ गए और गाड़ी में बैठ गए। जल्दी ही वो दोनों पार्क के अंदर आकर उसी बेंच पर बैठ गए जिसपर वो हमेशा बैठा करते थे और हमेशा की तरह आहना ने अपना सिर अयांश के कंधे पर रख रखा था। 


वो दोनों एक दूसरे का हाथ थामे हुए पार्क में खेल रहे बच्चों को देख रहे थे। अयांश ने आहना को देखा और पूछा, “क्या तुम्हें भी मेरी तरह हमारा बचपन याद आ गया। जब हम भी ऐसे ही यहाँ आकर खेला करते थे?” 


“हम्म, कितनी जल्दी बड़े हो गए न हम लोग। मुझे तो आज भी वो दिन फिर से जीने का मौका मिले न, तो मैं आसानी से तैयार हो जाऊंगी इसके लिए।” आहना ने कहा। 


“वैसे ये मौका तो हमें मिलेगा एक बार बहुत जल्दी।” अयांश ने कहा तो आहना ने उसे हैरानी से देखा और पूछा, “वो कैसे?” 


“हमारी शादी होगी। फिर हमारे बच्चे होंगे। छोटी आहना और छोटा अयांश। जिनमें हम अपना बचपन जीयेंगे और उनके साथ रोज यहाँ आया करेंगे।” अयांश ने मुस्कुराते हुए कहा और आहना को देखा। 


“तुमने बच्चों के बारे में भी अभी से ही सोच लिया।” आहना ने हैरानी से पूछा।


“येस, मुझे एक बेबी गर्ल एंड एक बेबी बॉय चाहिए जो बिल्कुल मेरे ऊपर जाएंगे।” अयांश ने खुश होकर कहा।


“वो तो होगा ही। हर वक्त तुम मेरी नज़रों के सामने जो रहा करोगे।” आहना ने प्यार से कहा तो अयांश भी प्यार से उसकी आँखों में देखने लगा।


जैसे ही अयांश आहना के साथ ऑफिस से निकला था, उसके कुछ वक्त बाद ही नुपुर ऑफिस में आई। जब उसे पता चला की अयांश ऑफिस में नही है तो उसे गुस्सा आने लगा जो और ज्यादा बढ़ गया जब उसे पता चला की आहना भी ऑफिस में नही है। उसे समझते देर नही लगी की पक्का अयांश आहना के साथ कहीं गया है। 


वो गुस्से से घर आ गई और अयांश के आने का इंतजार करने लगी। रिद्धिमा भी वहीं बैठी उसे देख रही थी। शाम में सात बजे के करीब अयांश घर पहुँचा। 


“कहाँ थे तुम इतने वक्त से?” नुपुर ने उसे गुस्से में पूछा। 


अयांश ने उसे देखा और कहा, “ऑफिस में था मैं।” 


नुपुर ने उसे देखा और कहा, “झूठ। तुम ऑफिस में नही थे। गई थी मैं ऑफिस आज। न तुम वहाँ थे और न वो आहना। उसी के साथ थे न तुम?” 


“सही कहा तुमने। आहना के साथ ही था मैं।” अयांश ने कहा और बिना नुपुर कि बात सुने वहाँ से ऊपर अपने कमरे में चला गया।


नुपुर ने रिद्धिमा को देखा और कहा, “देखा आपने। वो आहना अयांश को मुझसे छीनकर ही रहेगी।” 


“शांत रहो, नुपुर।” रिद्धिमा ने कहा।


“कैसे शांत, रहूं? आपको पता है राकेश अंकल चाहते है की अयांश जल्द से जल्द मुझे डायवोर्स दे और आहना से शादी करले।” नुपुर ने गुस्से में चिल्लाते हुए कहा।


“क्या? वो तुम्हें डायवोर्स नही दे सकता।” रिद्धिमा ने कहा।


“अब मैं उस आहना को नही छोडूंगी, मॉम। मैं उस आहना को अयांश के साथ और बर्दाश्त नही कर सकती।” नुपुर ने गुस्से में अपने दांत भींचते हुए कहा।


रिद्धिमा ने नुपुर को देखा और एक शैतानी मुस्कान के साथ कहा, “डोंट वरी, बेटा। आहना को नुकसान पहुँचाने में अब वही इंसान हमारी मदद करेगा, जो उसे सबसे ज्यादा पसंद करता है।” 


Continued In जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 33

Saturday, 18 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 31


 
अयांश आहना के साथ रहना चाहता था इसलिए उसने आहना से पूछा की क्या वो दोनों पूरी रात एक साथ रह सकते है जिससे आहना जो अभी कुछ वक्त पहले मुस्कुरा रही थी, उसे गुस्सा आने लगा जो उसके चेहरे पर साफ नजर आ रहा था। 

अयांश आहना को ऐसे देखकर घबरा गया था और उसके मन में बहुत से ख्याल आने लगे क्योंकि उसे भी समझ नही आ रहा था की आहना को एकदम से उसकी बात पर इतना गुस्सा क्यों आ गया क्योंकी वो अच्छे से जानता था की आहना कभी सपने में भी उसपर कभी गुस्सा नही कर सकती थी। 

अयांश आहना को देखकर परेशान था पर आहना को उसे ऐसे देखकर बहुत ही ज्यादा हँसी आ रही थी जिसे वो उससे छुपाने की पूरी कोशिश कर रही थी अपना गुस्सा अच्छे से दिखाने के लिए क्योंकि उसे अयांश को थोड़ा और परेशान करना था। 

“आहना तुम…तुम ऐसे गुस्सा क्यों कर…” अयांश ने घबराते हुए इतना ही कहा था की आहना ने उसे देखते हुए हँसना शुरू कर दिया जिससे अयांश समझ गया की आहना उसे परेशान कर रही थी।

“ये क्या था आहना। पता है कितना घबरा गया था मैं तुम्हें ऐसे देखकर। मुझे लगा तुम फिर से मुझसे नाराज़ हो गई हो।” अयांश ने कहा तो आहना उसके करीब आई और उसने हँसते हुए कहा, “सॉरी, मुझे नही पता था की तुम इतना परेशान हो जाओगे पर तुम बहुत क्यूट लग रहे थे।” 

अयांश ने मुस्कुराते हुए उसके माथे को अपने होठों से छू लिया। आहना ने उसके गाल को छुआ और कहा, “मैं पापा को बता देती हूँ फिर नीचे चलते है।” 

आहना ने फोन करके कबीर को इस बारे में बताया तो कबीर ने उसे अयांश के साथ रहने की परमिशन दे दी क्योंकि उन्हें अयांश पर पूरा भरोसा था। अयांश आहना को नीचे लेकर आया और रिसेप्शन की तरफ आकर वहाँ बैठी रिसेप्शनिस्ट से कहा, “प्रिपेयर अ सुइट रूम फोर मी।” 

रिसेप्शनिस्ट जिसका नाम सावी था, उसने अयांश को हैरानी से देखा क्योंकि उसे अयांश का लहजा ऑर्डर देने वाला लगा। उसने अयांश से पूछा, “सर, यू नीड टू हैव अ बुकिंग फोर रूम।” 

अयांश कुछ कहने ही वाला था की तभी वहाँ होटल का मैनेजर आया और अयांश को देखकर उसने मुस्कुराते हुए कहा, “सर, आप यहाँ।” 

अयांश ने हाँ में सिर हिलाया और कहा, “मुझे पाँच मिनिट में अपने लिए एक सुइट रूम तैयार चाहिए।” 

“जी सर। आप बैठिए। मैं अभी करवाता हूँ।” मैनेजर ने कहा तो अयांश आहना हाथ थामकर उसके साथ वहाँ लगे सोफे पर आकर बैठ गया। सावी ने मैनेजर को देखा और पूछा, “सर, ये रिक्वेस्ट भी तो कर सकते थे न। ये तो सीधा हमें ऑर्डर्स दे रहे है।” 

“क्या तुम्हें पता है ये है कौन?” मैनेजर ने पूछा तो सावी ने ना में सिर हिला दिया।  

“ये इस होटल के ओनर है। तुमने अगर उन्हें कुछ कहा है तो जाकर अपने बिहेवियर के लिए अपोलोजाईस करो। मैं जाकर जल्दी से रूम तैयार करवाता  हूँ।” कहकर मैनेजर वहाँ से चला गया। सावी ये जानकर हैरान थी की अयांश वहाँ का ओनर है क्योंकी वो अयांश को गेस्ट समझ रही थी। वो अयांश के पास जाने लगी। 

अयांश आहना के साथ कुछ बात कर रहा था की तभी सावी ने उसके पास आकर कहा, “एक्सक्यूज मी, सर।” 

अयांश और आहना ने उसकी तरफ देखा और अयांश ने कहा, “येस।” 

“सर, आई एम रियली सॉरी फोर माय बिहेवियर।  एक्चुअली, मैंने अभी अभी यहाँ काम करना शुरू किया है इसलिए मुझे पता नही था की आप कौन है।” सावी ने कहा।

अयांश ने उसे देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “इट्स ओके। आप सिर्फ अपना काम कर रही थी। ये अच्छी बात है की आप अपना काम अच्छे से कर रही है।” 

“थैंक यू, सर।” सावी ने कहा और अयांश को देखकर मुस्कुरा दी। मैनेजर वहाँ आया और अयांश से कहा, “सर, रूम रेडी है।” 

अयांश आहना का हाथ पकड़कर उसके साथ जाने के लिए सोफे से उठा तो सावी ने अयांश को देखकर मुस्कुराते हुए कहा, “सर, आपको किसी भी चीज की जरूरत हो तो प्लीज मुझे इनफॉर्म कर दीजिएगा।” 

आहना को सावी का ऐसे अयांश को देखना अच्छा नही लग रहा था। उसका मन कर रहा था की वो अभी सावी की आँखों पर पट्टी बांध दे। 

“हम्म्म।” कहते हुए अयांश आहना के साथ जाने लगा। 

“हैव अ प्लीसेंट स्टे, सर।” सावी ने कहा तो अयांश मुस्कुराते हुए थैंक यू कहकर जाने के लिए मुड़ गया।

“गुड नाईट, सर।” सावी ने फिर कहा और उसने ये बात बहुत ही अलग अंदाज में कही जिससे अब आहना को गुस्सा आ गया और उसने सावी को घूरते हुए कहा, “मुझे कुछ चाहिए।” 

“यस मैम।” सावी ने धीरे से कहा क्योंकि वो आहना के इस तरह उसे घूरने से थोड़ा घबरा गई थी पर अयांश समझ गया की आहना को सावी का उसे इस तरह देखना पसंद नही आया और उसे जलन हो रही है। 

“प्राइवेसी, मुझे प्राइवेसी चाहिए इनके साथ जो तुम लेने नही दे रही हो क्योंकि जैसे ही हम जाने लगते है तुम कुछ न कुछ बोलने लग जाती हो।” आहना ने उसे घूरते हुए कहा। 

अयांश मन ही मन में हँसने लगा। आहना सावी से कुछ और कहती, इससे पहले ही अयांश ने उसे वहाँ से ले जाना सही समझा। सावी हैरान खड़ी उन्हें जाता हुआ देखती रही और फिर मैनेजर से पूछा, “ये कौन थी सर के साथ?” 

“ये उनकी गर्लफ्रेंड और उनकी होने वाली वाइफ है। यहाँ ये बात सबको पता है क्योंकि सर इन्हें बहुत बार अपने साथ यहाँ लाते रहते है और राकेश सर भी इन्हें अपने साथ बहुत बार मीटिंग्स के लिए यहाँ लेकर आते थे जब इन्होंने उनके ऑफिस में काम करना शुरू किया था। राकेश सर की बेटी की तरह है ये। तुमने नया नया ज्वाइन किया है न इसलिए नही पता तुम्हें इस बारे में। अयांश सर की शादी वैसे तो किसी और से हो रखी है और उनका वेडिंग रिसेप्शन भी हुआ था पर मैंने सुना है कि अयांश सर उस शादी में खुश नही है क्योंकि वो शादी इनकी जबरदस्ती करवाई गई थी। ये आज भी आहना मैम से ही प्यार करते है।” मैनेजर ने सावी को बताया। 

“तो क्या इन्होंने अपनी वाइफ को डायवोर्स दे दिया है?” सावी ने पूछा। 

“ये सब मैं नही जानता बट सर लकी है की उनकी लाइफ में आहना मैम है जो उनके ऊपर इतना ट्रस्ट करती है और उन्हें समझती है। उनकी जगह कोई और लड़की होती तो कभी भी सर को माफ नही करती।” मैनेजर ने कहा और फिर सावी को वापिस काम करने का कहकर वहाँ से चला गया। सावी वापिस रिसेप्शन पर आकर काम में लग गई। 

अयांश आहना को कमरे में लेकर आया और दरवाज़ा बंद करने के बाद उसे अपनी बाहों में भरकर पूछा, “तुम्हें जलन हो रही है?” 

"हाँ, हो रही है जलन। वो मेरे सामने तुम्हारे साथ फ्लर्ट कर रही थी और तुम भी उसे देखकर मुस्कुरा रहे थे।” आहना ने कहा।

अयांश ने उसके माथे को अपने होठों से छुआ और कहा, “मेरी नजरों के सामने हजारों खूबसूरत लड़कियां भी आ जाए, फिर भी मेरी आँखों में सिर्फ तुम्हारा ही चेहरा रहेगा और मेरे दिल पर तुम्हारा पहरा।” 

आहना उसकी बात सुनकर हँसने लगी और उसने कहा, “तुम क्या अमेरिका में दो साल रहकर फ्लर्टिंग में मास्टर्स करकर आए हो।” 

“येस, आई मास्टरड द आर्ट ऑफ फ्लर्टिंग।” अयांश ने शरारत से कहा। 

आहना अयांश के साथ बेड पर बैठ गई। अयांश ने उसे अपनी बाहों में भर लिया। आहना उसके सीने पर सिर रखकर उसके दिल की धड़कने सुनने लगी। अयांश ने आहना के माथे पर किस किया और पूछा, “आहना, क्या मैं तुम्हें होठों पर किस कर सकता हूं?” 

आहना ने उसकी आँखों में देखा और पूछा, “तुम इतने शरीफ कैसे हो गए?” 

“मतलब?” अयांश ने पूछा।

“आज से पहले तो तुमने कभी पूछा नही किस करने के लिए तो अब कैसे?” आहना ने कहा तो अयांश ने अपने हाथ की उंगलियों को उसके हाथ की उंगलियों में फंसाते हुए कहा, “अमेरिका में थोड़ा सा कोर्स सुधरने का भी किया था।” 

उसकी बात सुनकर आहना हँसने लगी और उसने कहा, “ये बात है तो तुम मुझे कहीं भी किस कर सकते हो।” 

“क्या सच में?” अयांश ने खुश होते हुए कहा। 

“हाँ।” आहना ने मुस्कुराते हुए कहा जिससे अयांश की आँखों में एक चमक आ गई पर अगले ही पल आहना ने अयांश के अरमानों पर पानी फेर दिया जब उसने कहा, “पर शादी के बाद।” 

“आहना, ये तो चीटिंग हुई न।” अयांश ने झूठी नाराज़गी दिखाते हुए कहा। 

“फिर मेरा सारा प्यार भी तो तुम्हारे लिए ही है ना।” आहना ने कहा और फिर वो दोनों लेट गए। अयांश ने अपने दोनों हाथ आहना की कमर के आसपास लपेटे और उसे अपनी बाहों में भरकर सुकून से सो गया। आहना के चेहरे पर भी एक प्यारी सी मुस्कान थी। 

अयांश और आहना जहाँ सुकून से एक दूसरे के साथ वक्त बिता रहे थे वहीं नुपुर गुस्से से लिविंग में इधर उधर टहल रही थी। उसे घर आकर सिक्योरिटी गार्ड से पता चला था की अयांश आहना के साथ गया है जिसकी वजह से उसे इतना ज्यादा गुस्सा आया था की वो रिद्धिमा पर भी चिल्लाई थी की उसने अयांश को रोका क्यों नही, ऊपर से अयांश अभी तक घर नही पहुँचा था जिसकी वजह से नुपुर का गुस्सा हर बीतते हुए मिनट के साथ साथ बढ़ रहा था।

Continued In जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 32

Friday, 17 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 30



आहना अयांश को लेकर ऑर्फेनेज और ओल्ड एज होम पहुँंची। जब अयांश ने उससे पुछा की वो उसे वहाँ क्यों लेकर आई है तो आहना ने कहा, “अंदर चलो मेरे साथ तुम्हें सब पता चल जाएगा।” 


अयांश आहना के साथ अंदर जाने लगा पर उसने अपने मन में ये सोचना शुरू कर दिया था की आहना उसे लेकर यहाँ क्यों आई है और अब तक वो बहुत कुछ सोच चुका था। आहना को वहाँ देखकर वीर जल्दी से उनके पास आया और कहा, “आहना, आप यहाँ।” 


“जी, मैं इन्हें यहाँ लाना चाहती थी।” कहकर आहना ने वीर और अयांश को एक दूसरे से मिलवाया। अयांश ने वीर से हाथ मिलाया और फिर आहना से पूछा, “आहना मुझे बताओ ना तुम मुझे यहाँ क्यों लाई हो। कहीं तुमने किसी बच्चे को एडॉप्ट करने का फैसला तो नही ले लिया। अगर ऐसी कोई बात है तो मुझे नही लगता हमें इसकी जरूरत है। हम शादी के बाद अपना बच्चा पैदा कर सकते है।” 


अयांश को एहसास ही नही हुआ की अभी अभी उसने क्या बोला था पर आहना उसकी बात सुनकर चौंक गई थी। वहीं वीर अपनी हँसी को रोकने की कोशिश कर रहा था। आहना ने अयांश का हाथ पकड़ा और कहा, “मेरी चॉकलेट, तुम न बहुत ज्यादा सोचते हो।” 


“आहना, मुझे कुछ काम है। आप अंदर जाकर सबसे मिल सकती है।” उन्हें ऐसे देखकर वीर ने कहा और वहाँ से चला गया। 


“मैंने कुछ गलत बोला क्या आहना?” अयांश ने मासूमियत से पूछा। 


आहना ने उसे देखा और कहा, “माना की हमें लेकर तुम बहुत एक्साइटेड रहते हो पर इस एक्साइटमेंट को कंट्रोल करना सीखो दूसरो के आगे।” 


“अच्छा ठीक है, अब बताओ हम यहाँ क्यों आए है?” अयांश ने पूछा। 


“अयांश ये वहीं ऑर्फेनेज है जो मम्मा ने खोली थी। बताया था ना तुम्हें मैंने। मैं यहाँ तुम्हें सबसे मिलवाने लाई हूं। देखना तुम्हें बहुत अच्छा लगेगा।” आहना ने कहा। 


“हाँ, याद आ गया पर आंटी के पास ऑर्फेनेज बनवाने के लिए जमीन खरीदने के पैसे कहाँ से आए।” अयांश ने पूछा तो आहना ने कहा, “पापा ने मुझे बताया था की मेरे नाना जी ने उनकी मदद की थी।” 


वो अयांश को ये पता नही लगने देना चाहती थी की कबीर उसके असली पिता नही है इसलिए उसने झूठ बोल दिया। वो दोनों अंदर चले गए। उन्हें वहाँ देखकर सभी बच्चे उनके पास आ गए। अयांश सब कुछ देख रहा था। उसने वहाँ वृद्ध लोगों को देखा तो आहना से पूछा, “आहना, मुझे तो बाहर से देखकर लगा था की ये सिर्फ ऑर्फेनेज है पर यहाँ तो वृद्ध लोग भी है। ऐसा क्यों।” 


आहना मुस्कुराई और उसने कहा, “ये मम्मी का आइडिया था। उनका कहना था की इससे जिन बच्चो के माँ बाप नही है उन्हें माँ बाप का प्यार मिल जायेगा और जिन माँ बाप को उनके बच्चो ने छोड़ दिया है उन्हें बच्चो का प्यार मिल जाएगा।” 


“वाव, हम यहाँ हर संडे आया करेंगे, आहना इन बच्चों के साथ खेलने के लिए और वृद्ध लोगों के साथ वक्त बिताने के लिए।” अयांश ने कहा तो आहना ने मुस्कुराते हुए हाँ में सिर हिला दिया। वो दोनों सबके साथ वक्त बिताने लगे और बच्चों के साथ खेलने लगे। 


शाम होते ही सबको बाय बोलकर अयांश और आहना बाहर आए तो आहना ने कहा, “चलो तुम्हें घर छोड़ देती हूँ अब।” 


“आहना, थोड़ा और टाइम साथ में स्पेंड करते है ना।” अयांश ने कहा तो आहना ने उसे देखा और मुस्कुराते हुए पूछा, “अयांश, क्या बात है?”


“वो मैंने तुम्हारे लिए एक सरप्राईज प्लैन किया हुआ है। मैं तुम्हें रात को उसके लिए लेने आने वाला था पर तुम मुझे लेने आ गई।” अयांश ने कहा। 


“सच में सरप्राईज है मेरे लिए।” आहना ने एक्साइटेड होकर पूछा। 


“येस माय टेडी बियर।” अयांश ने आहना के गाल खींचते हुए कहा।


“तो फिर जल्दी से चलो। वैसे भी पूरे दो साल और चार महीने बाद तुमसे कोई सरप्राईज मिल रहा है मुझे।” आहना ने अयांश का हाथ पकड़कर उसे गाड़ी की तरफ ले जाते हुए कहा।


इस बार गाड़ी अयांश चलाने लगा। आहना साथ वाली सीट पर बैठे हुए प्यार से उसे देखे जा रही थी। अयांश का ध्यान उस पर गया तो उसने पूछा, “तुम मुझे ऐसे क्यों देख रही हो, टेडी बियर?” 


“ऐसे ही। इतने दिनों बाद तुम्हें जी भरकर देखने का मौका मिला है। अच्छा लग रहा है।” आहना ने कहा तो अयांश मुस्कुराने लगा। उसने गाड़ी अपने होटल के अंदर लाकर रोकी और वो दोनों गाड़ी से नीचे उतर गए। 


इस बार अयांश आहना को गार्डन में न ले जाकर होटल की छत पर लेकर गया जहाँ से पूरा शहर दिखाई दे रहा था। पूरी छत दिल के आकार के लाल और सफेद रंग ने गुब्बारों से भरी हुई थी। छत के एक कोने में एक टेबल लगी हुई थी जिसपर एक केक रखा हुआ था। 


अयांश आहना को उस टेबल के पास लेकर आया। आहना केक को देखकर खुश हो गई क्योंकि वो आहना का फेवरेट चॉकलेट केक था। अयांश ने उसके माथे को चूमा और फिर उसके पीछे खड़े होकर उसे अपनी बाहों में भरा और उसके साथ केक काटते हुए कहा, "ये पिछली सारी बातें भुलाकर हमारी एक नई शुरुआत के लिए।” 


आहना उसकी तरफ पलटी तो वो दोनों एक दूसरे की आँखों में खो गए और फिर आहना उसके गले लग गई। अयांश ने कसकर आहना को अपनी बाहों में समेट लिया और उसके बालों को सहलाने लगा। उससे अलग होकर अयांश ने उसके होठों को अपने होठों से छुआ और कहा, “चलो, अब खाना खाते है। फिर एक और सरप्राईज है मेरे पास तुम्हारे लिए।” 


आहना मुस्कुराते हुए कुर्सी पर बैठ गई और वो दोनों खाना खाने लगे। खाना खाने के बाद अयांश आहना को छत के दूसरी साइड लेकर गया जहाँ बहुत सारी मोमबत्तियां जल रही थी और उन्हीं के बीच फूलों से लिखा हुआ था, “आई लव यू, आहना।”


आहना आगे बढ़कर ये सब देखने लगी। वो इस वक्त बहुत खुश थी। अयांश मुस्कुराते हुए अपनी जेब से एक छोटा सा डिब्बा निकालकर उसके पीछे एक घुटने पर बैठ गया। 


“अयांश, ये सब…” आहना कहते हुए जैसे ही पलटी, अपने साथ अयांश को ऐसे देखकर हैरान रह गई। 


“ज्यादा कुछ नही कहूँगा, आहना बस इतना ही की पिछली सारी बातों को भुलाकर फिर से एक नई शुरुआत करते है हमेशा साथ रहने के वादे के साथ। चाहे गलतियां ही क्यों न करे, फिर भी एक दूसरे पर भरोसा रखते हुए और एक दूसरे को समझते हुए साथ रहना।” कहकर अयांश ने अपने हाथ में पकड़ा हुआ डिब्बा खोला जिसके अंदर एक पेंडेंट था जिसमें इनफिनिटी के साथ दो ए बने हुए थे। उसने वो पेंडेंट डिब्बे में से निकाला और खड़े होकर आहना को पहना दिया। 


आहना ने उस पेंडेंट को देखा और मुस्कुरा उठी। अयांश ने उसके साथ बहुत सारी तस्वीरें ली और दोनों छत पर खड़े होकर आसमान में चमक रहे चांद और तारों को देखने लगे। आहना अयांश की बाहों में सिमटी उसकी धड़कनों का शोर सुनते हुए चांद को देख रही थी कि तभी अयांश ने उसे बुलाया तो आहना ने उसकी आँखों में देखते हुए पूछा, “तुम कुछ कहना चाहते हो ना मुझसे?” 


“तुम्हें कैसे पता?” अयांश ने हैरानी से पूछा। 


“तुम्हारे दिल की धड़कनों से। बहुत जोर से धड़क रहा है।” आहना ने मुस्कुराते हुए कहा और फिर पूछा, “क्या कहना चाहते हो तुम मुझसे?” 


“हम क्या आज की पूरी रात एक साथ रह सकते है? मैं घर नही जाना चाहता। तुम्हारे साथ रहना चाहता हूँ।” अयांश के पूछा तो आहना जो अभी कुछ वक्त पहले मुस्कुरा रही थी अब उसके चेहरे पर गुस्सा साफ नजर आ रहा था। 


अयांश आहना को ऐसे देखकर बिलकुल घबरा गया और मन ही मन में सोचने लगा, “कहीं मैंने इससे ये पूछकर इसे हर्ट तो नही कर दिया जो ये ऐसे गुस्से से मेरी तरफ देख रही है। कहीं इसके मन में ये बात तो नही आ गई की नुपुर के साथ अभी भी मेरी शादी चल रही है, फिर भी मैं इसके साथ रात…” उसने अपनी सोच को अपने दिमाग से निकाला और खुद से कहा, "नही नही, आहना मुझ पर गुस्सा नही कर सकती। पर फिर इसे अचानक से क्या हो गया?” 


अयांश ये सोचकर अब परेशान हो गया और आहना को चुपचाप देखने लगा जो इस वक्त गुस्सा करते हुए बहुत प्यारी लग रही थी।


Continued In जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 31

Thursday, 16 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 29


 

अयांश आहना के पास बैठकर उसकी चोट पर दवाई लगाने लगा। आहना के मुंह से एक आह निकली तो अयांश ने उसकी ओर देखा और पूछा, “ज्यादा तकलीफ हो रही है?” 


आहना मुस्कुराई और उसने कहा, “सारी तकलीफें दूर हो गई।” 


अयांश ने उसके गाल को प्यार से छुआ और उसकी चोट पर पट्टी बांधने लगा। पट्टी बांधकर उसने कहा, “चलो तुम्हें घर छोड़ आता हूँ।” 


“इतनी जल्दी। इतने दिनों तक नाराज और दूर रहे हो और अब जब आखिरकार नाराजगी खत्म हुई है तो इतनी जल्दी फिर से दूर जाने की बातें कर रहे हो।” आहना ने शिकायत करते हुए कहा। 


अयांश हँसने लगा और उसने पूछा, “कहाँ जाना है आपको मोहतरमा?” 


“पक्का मैं जहाँ लेके जाना चाहूँ वहाँ चलोगे मेरे साथ।” आहना ने पूछा। 


“हाँ, तुम्हारे पीछे पीछे तो कहीं भी चल सकता हूँ।” अयांश ने मुस्कुराते हुए कहा। 


“फिर से फ्लर्टिंग कर रहे हो तुम।” आहना ने हंसते हुए पूछा। 


“तो इतने दिन हो गए थे तुम्हारे साथ फ्लर्टिंग किए हुए। अब तो तुम्हारे रोकने से भी नही रुकूंगा।” अयांश ने आहना की आँखों में देखते हुए कहा। नुपुर छुपके से उन्हें देख रही थी। उन दोनों को हँसता देख उसका मन कर रहा था की अभी जाकर आहना की जान ले ले। 


अगले दिन ऑफिस में आहना आराम से बैठकर अपना काम कर रही थी की तभी किसी ने उसका कंधा थपथपाया। आहना ने फाइल से नज़रे हटाकर देखा तो पाया कि अयांश उसे मुस्कुराते हुए देख रहा था। आहना भी उसे देखकर मुस्कुराने लगी और खड़े होकर उससे पूछा, “तुम यहाँ?” 


“तुम्हारे लिए आया हूँ, जान। कहा था ना कल की तुम्हारे पीछे पीछे कहीं भी चल सकता  हूँ।” अयांश ने धीमी आवाज में उसकी आँखों में देखते हुए कहा।


“अयांश, ऑफिस है ये। यहाँ तो फ्लर्ट मत करो।” आहना ने कहा। शिप्रा उन दोनों को साथ देखकर जल रही थी। 


“तुम्हारी चोट कैसी है अब?” अयांश ने पूछा। 


“ठीक है। पापा ने दोबारा दवाई लगा दी थी।” आहना ने कहा। 


अयांश ने इधर उधर देखा और पूछा, "अंकल कहाँ है?” 


“वो राकेश अंकल के केबिन में है। किसी इंपोर्टेंट फाइल को लेकर कुछ डिस्कस करना था उन्हें अंकल के साथ।” आहना ने कहा। 


अयांश ने उसका हाथ पकड़ा और कहा, “आहना, मुझे अंकल और पापा से बात करनी थी हमारे बारे में। पिछले दिनों में मैंने जो कुछ भी किया है उससे तुम्हारे साथ साथ अंकल को भी तकलीफ हुई होगी। उसके लिए मैं उनसे माफी मांगना चाहता हूँ और फिर पापा और अंकल को बताना भी तो है की हमारे बीच अब सबकुछ ठीक हो गया है।” 


“उसमें अकेले तुम्हारी गलती नही थी, अयांश। मेरी भी थी। मुझे तुम्हें समझना चाहिए था।” आहना ने कहा। 


“छोड़ो अब इन बातों को और चलो, अंकल और पापा से बात करते है।” कहते हुए अयांश ने अपना हाथ उसकी और बढ़ाया। आहना ने मुस्कुराते हुए अपने हाथ को उसके हाथ पर रखा और वो दोनों राकेश के केबिन की तरफ बढ़ गए। 

राकेश कबीर से कुछ कह रहे थे की तभी उनके केबिन का दरवाजा खुला और वो बात करते करते रूक गए। राकेश को दरवाज़े की तरफ देखता पाकर कबीर ने भी पीछे मुड़कर देखा। वो दोनों आहना और अयांश को साथ देखकर हैरान थे। उनकी हैरानी और भी ज्यादा बढ़ गई जब उनकी नजर आहना और अयांश के हाथों पर गई क्योंकी दोनों ने ही एक दूसरे का हाथ कसकर पकड़ रखा था। 


आहना और अयांश समझ गए की राकेश और कबीर उन्हें साथ देखकर हैरान हो गए है इसलिए आहना ने कहा, “मैं जानती हूँ आप दोनों के मन में इस वक्त बहुत सारे सवाल है हमें ऐसे देखकर। पापा, अंकल, पिछले कुछ महीनों में जो कुछ भी हुआ वो सब एक मिसअंडरस्टैंडिंग थी और कुछ गलतियां भी। मुझे अयांश को समझना चाहिए था। अगर मैं अयांश की जगह होती तो मैं भी इसे बचाने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार हो जाती। अंकल, जो हुआ वो सब हम भुला देना चाहते है और सब कुछ पहले जैसा करना चाहते है। मैं और अयांश, हम दोनों फिर से पहले जैसे रहना चाहते है एक साथ।” 


“वो सब तो ठीक है, बेटा। अगर तुम दोनों में सब कुछ ठीक हो जाता है तो सबसे ज्यादा खुशी मुझे ही होगी पर अयांश अभी भी नुपुर के साथ शादी के बंधन में है।” राकेश ने कहा।


“मैं उसे डायवोर्स दे दूंगा, पापा मौका मिलते ही बस हमें आहना का ख्याल रखना होगा।” अयांश ने आहना के लिए परेशान होते हुए कहा। 


राकेश मुस्कुराए और उन्होंने कहा, “जब तुम अमेरिका में थे, आहना को हमने ही सबसे बचाया था और अभी भी हम ही इसका ख्याल रखेंगे।” 


“जी पापा।” अयांश ने कहा। 


“अच्छा अब तुम दोनों जाओ और एक दूसरे के साथ वक्त बिताओ। इतने दिनों बाद तुम दोनों के बीच सब कुछ ठीक हुआ है।” राकेश ने कहा तो अयांश आहना को लेकर ऑफिस से बाहर आ गया। 


अयांश आहना के साथ अपनी गाड़ी के पास आया और उससे पीठ लगाकर खड़ा होते हुए आहना को पूछा, “तो कहिए मोहतरमा, कहाँ जाना चाहेंगी आप।” 


"जहाँ आप ले चले।” आहना ने उसकी आँखों में देखते हुए कहा। 


“हम तो जहाँ आप जायेंगी, वहाँ आपके पीछे पीछे चलेंगे।” अयांश ने फिर से फ्लर्ट करते हुए कहा।


"अब बस भी करो। कल से ही तुम यहीं बोल बोलकर मेरे साथ फ्लर्ट किए जा रहे हो।” आहना ने हंसते हुए कहा। 


"ये सिर्फ फ्लर्ट नही, सच्चाई भी है। मैं तुम्हें जिंदगी भर फॉलो कर सकता हूँ बिना कुछ कहे। अब बताओ मिलेगा कहीं तुम्हें मेरे जैसा हसबैंड।” अयांश ने इतराते हुए कहा तो आहना ने कहा, "तो मिस्टर हसबैंड, कीजिए फिर मेरे ऑर्डर को फॉलो और लेकर चलिए हमें आइस क्रीम खिलाने के लिए।” 


“जो आपका हुकुम मल्लिका।” कहते हुए अयांश ने आहना के लिए गाड़ी का दरवाजा खोला। आहना हँसते हुए गाड़ी में बैठ गई और फिर वो दोनों आइस क्रीम खाने चले गए। अयांश ने खुशी खुशी पूरा दिन आहना के साथ बिताया जिससे आहना बहुत खुश थी। 


सन्डे वाले दिन आहना तैयार होकर अयांश के घर के सामने आई और उसे फोन लगाया। अयांश ने जैसे ही फोन उठाया, आहना ने जल्दी से कहा, “जल्दी से बिना कुछ पूछे अपने घर के बाहर आओ।” 


आहना ने अयांश की बात सुने बिना ही जल्दी से फोन काट दिया। नूपुर इस वक्त अपने घर गई हुई थी। अयांश जल्दी से घर से बाहर आया तो आहना अपनी गाड़ी के पास खड़ी थी। उसने नीले रंग का ड्रेस पहन रखा था जिसमें वो बहुत खूबसूरत लग रही थी। अयांश उसके पास आया और पूछा, "क्या हुआ, आहना? तुमने मुझे ऐसे बाहर क्यों बुलाया?” 

"तुम्हें कहीं लेकर जाना है।” आहना ने उसके लिए गाड़ी का दरवाजा खोलते हुए कहा। अयांश गाड़ी में बैठ गया। आहना ने भी गाड़ी के अंदर बैठकर गाड़ी चलानी शुरू की। 


अयांश ने उसकी तरफ देखा और कहा, "आहना, मुझे बताओ ना तुम मुझे कहाँ लेकर जा रही हो।” 


आहना ने उसे देखा और फिर रोड पर ध्यान लगाते हुए कहा, "तुम्हें पता चल जाएगा जब हम वहाँ पहुँचेंगे।” 


"मुझे अभी जानना है। तुम मुझे पहली बार कहीं लेकर जा रही हो इसलिए बहुत एक्साइटमेंट हो रही है मुझे।” अयांश ने कहा। 


"जानती हूँ पर मैं अभी तुम्हें नही बता सकती।” आहना ने कहा और मुस्कुराने लगी। अयांश चुपचाप खिड़की से बाहर देखने लगा। 


आधे घंटे बाद, आहना ने गाड़ी रोकी और अयांश को गाड़ी से उतरने का बोलकर खुद भी गाड़ी से नीचे उतर गई। अयांश गाड़ी से उतरकर आहना के पास आया और उसने सामने दीवार पर लगे बोर्ड को देखते हुए कहा, “आहना, हम इस ऑर्फनेज और ओल्ड एज होम में क्यों आए है?”


Continued In जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 30