नाश्ता करने के बाद गुरनूर रावी के साथ कमरे में आई और शाम को पहनने के लिए कपड़े देखने लगी। उसने दो टॉप उठाकर रावी को दिखाते हुए कहा, “रावी, बता ना मैं इन दोनों में से कौन सा टॉप पहनू आज रात।”
रावी ने उन दोनों टॉप्स को देखा। एक टॉप गुलाबी रंग का था जिसके ऊपर बस फूलों वाला प्रिंट था और दूसरा नीले रंग का टॉप था जिसके गले पर हल्के नीले और सफेद रंग के फूलों से डिज़ाइन बना हुआ था। रावी ने नीले टॉप को पसंद कर दिया। उसके बाद गुरनूर ने रावी से पूछा, “इसके साथ जींस कौन सी पहनू। ब्लू या ब्लैक?”
“ब्लैक कलर की।” रावी ने कहा और अपने पहनने के लिए भी कपड़े देखने लगी।
श्रेयांश गुरनूर को छह बजे लेने आने वाला था इसलिए उसने रावी के साथ चार बजे से तैयार होना शुरू कर दिया। तैयार होने के बाद वो दोनों श्रेयांश के फोन का इंतज़ार करने लगी क्योंकि वो विवेक के साथ उन दोनों को लेने आने वाला था।
थोड़ी देर बाद ही गुरनूर को श्रेयांश का फोन आ गया और वो सबसे मिलकर रावी के साथ घर से बाहर आ गई। वो दोनों चलकर कॉलोनी से बाहर आ गई जहाँ श्रेयांश और विवेक उन दोनों का इंतज़ार कर रहे थे।
श्रेयांश की नज़र जब गुरनूर पर गई तो वो उसे देखता ही रह गया। गुरनूर बहुत ही ज्यादा खूबसूरत लग रही थी। गुरनूर श्रेयांश के करीब आकर उसके गले लग गई। विवेक ने ये देखा तो उसने श्रेयांश को मुस्कुराकर देखते हुए आँख मार दी जैसे कहना चाहता हो की ये होते है गर्लफ्रेंड होने के मज़े पर श्रेयांश ने उसके ऊपर ध्यान नहीं दिया क्योंकि उसे पता था की गुरनूर ने उसे मोहब्बत में गले लगाया है और यही वजह थी जो गुरनूर के गले लगते ही उसे सुकून और घबराहट एक साथ महसूस होती थी। गुरनूर की मोहब्बत उसके लिए सुकून तो थी पर इसी मोहब्बत के एहसासों से उसे घबराहट भी होती थी ये सोचकर की वो गुरनूर के जज़्बातों के साथ खेल रहा है।
गुरनूर ने श्रेयांश से दूर होकर विवेक को हेलो कहा। श्रेयांश ने भी रावी को हेलो कहा। गुरनूर श्रेयांश के पीछे उसकी बाइक पर बैठ गई। उसने रावी को देखा और कहा, “तुम भी विवेक के पीछे बैठ जाओ।”
रावी भी विवेक के पीछे आकर बैठ गई और उसने विवेक को कमर से पकड़ लिया। रावी के ऐसा करने से विवेक को बहुत अलग सा एहसास हुआ। विवेक, जो लड़कियों के साथ प्यार के नाम पर सिर्फ टाइमपास करता था, आज उसे रावी के साथ कुछ अलग ही एहसास महसूस हो रहा था। ये एहसास इतना मजबूत था की उसके मन में इश्क़ के ख्याल आने लगे। श्रेयांश ने बाइक स्टार्ट कर आगे बढ़ा दी। उसे जाते हुए देख विवेक ने अपने मन में चल रहे सारे ख्यालों को झटका और बाइक स्टार्ट कर आगे बढ़ा दी।
वो सभी पार्टी में पहुँचे। ये पार्टी इंदौर के बहुत ही फेमस क्लब के अंदर थी। गुरनूर और रावी जैसे ही श्रेयांश और विवेक के साथ अंदर गई, दोनों ही हैरान रह गई। क्लब में कुछ लड़के लड़कियाँ नाच रहे थे तो कुछ साथ बैठे हुए ड्रिंक्स कर रहे थे। लड़कियाँ भी ड्रिंक कर रही थी जिसे देखकर गुरनूर और रावी को और ज्यादा हैरानी हुई। वो दोनों हैरानी से अपने चारों तरफ देख रही थी क्योंकि दोनों ही ऐसी किसी जगह पर पहली बार आई थी।
श्रेयांश गुरनूर का हाथ पकड़कर उसे ड्रिंक्स वाले एरिया की तरफ ले आया। विवेक ने भी ऐसा ही किया और रावी ने उसे रोका भी नहीं क्योंकि अपनी हैरानी के चलते उसने इस बात पर ध्यान ही नहीं दिया था की विवेक ने इसका हाथ पकड़ा है।
श्रेयांश ने बार टेंडर से कुछ कहा और वहीं खड़े होकर इंतजार करने लगा। विवेक भी रावी को लेकर उसके पास आकर खड़ा हो गया। रावी सामने देख रही थी लेकिन गुरनूर ने पीछे मुड़कर क्लब में नाच रहे लड़के लड़कियों को देखा जो एक दूसरे से चिपक पर नाच रहे थे। गुरनूर ने उनसे नज़रें हटाकर सामने देखा तो श्रेयांश उसके लिए ड्रिंक लेकर खड़ा हुआ था। उस ड्रिंक को देखकर गुरनूर ने कहा, “मैं ड्रिंक नहीं करती।”
श्रेयांश ने गुरनूर और रावी, दोनों को देखकर कहा, “दोनों अनकंफर्टेबल मत हो। मैं और विवेक हैं यहाँ तुम्हारे साथ और मैं जानता हूँ तुम दोनों ड्रिंक नहीं करती इसलिए ये सॉफ्ट ड्रिंक्स है। इन्हें पी सकती हो तुम दोनों।”
रावी के हाथ में तो पहले से ही गिलास था। गुरनूर ने श्रेयांश के हाथ से गिलास ले लिया और धीरे धीरे पीने लगी। श्रेयांश ने भी अपनी ड्रिंक उठाते हुए गुरनूर को देखकर कहा, “मैं विवेक के साथ अपने दोस्तों से मिलने जा रहा हूँ। तुम रावी के साथ यहीं खड़ी रहना। इधर उधर मत जाना।”
गुरनूर ने हाँ में सिर हिला दिया। श्रेयांश विवेक के साथ अपने दोस्तों के पास चला गया। गुरनूर रावी से थोड़ी बहुत बातें करने लगी। विवेक ने जब अपने दोस्तों को दूर से ही गुरनूर को दिखाया तो सभी श्रेयांश को छेड़ने लगे और उसके दोस्त रवि ने उससे कहा, “भाई, तू हम सबको मिलवाएगा नही उससे। बस दूर से दिखा दी कौन है।”
“नही, वो पहली बार यहाँ आई है इसलिए थोड़ी अनकंफर्टेबल है। तुम लोगों को ऐसे उसके पास लेकर जाऊॅंगा तो वो और ज्यादा अनकंफर्टेबल हो जाएगी।” श्रेयांश ने कहा तो विवेक ने उसे शक भरी नज़रों से देखते हुए कहा, “तुझे बड़ी फिक्र है उसकी और तू इतना तक समझ गया की वो अनकंफर्टेबल है।”
“फीलिंग जो भी हो। इस वक्त वो मेरी रिस्पांसिबिलिटी है।” श्रेयांश ने कहा तो विवेक खामोश हो गया।
श्रेयांश अपने दोस्तों से बातें कर रहा था पर उसकी नज़रें गुरनूर के ऊपर ही थी। बातें करते हुए उसकी नज़र क्लब के कोने में खड़े दो लड़कों पर गई। उनमें से एक लड़का गुरनूर को ही देख रहा था। श्रेयांश ने एक नज़र गुरनूर को देखा और फिर उसने वापिस से उस लड़के को देखा तो इस बार वो लड़का गुरनूर को देखते हुए अपनी गर्दन पर हाथ फेर रहा था।
ये देख श्रेयांश को गुस्सा आ गया पर उसने अपने गुस्से को काबू में रखने की कोशिश की क्योंकि वो वहाँ कोई तमाशा नहीं करना चाहता था।
गुरनूर को बिल्कुल अकेला समझकर वो लड़का उसके करीब गया और उसने साइड से अपने हाथ को गुरनूर के हाथ से छुआ। ये देखकर श्रेयांश को अब और ज्यादा गुस्सा आ गया और वो गुस्से से उस लड़के की तरफ बढ़ गया।
Continued In आर्ज-ए-इश्क - 17






