Ibtidaa-E-Ishq
Saturday, 20 June 2026
जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 8
Friday, 19 June 2026
जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 7
लेक्चर के दौरान अयांश आहना का हाथ पकड़कर बैठा हुआ था। निखिल ने जब ये देखा तो उसे गुस्सा आने लगा क्योंकि वो भी आहना को पसंद करता था। लेक्चर के बाद अयांश आहना के साथ कैंटीन चला आया। निखिल भी उनका पीछा करते हुए कैंटीन पहुँचा। वो उसी टेबल पर बैठ गया जहाँ अयांश और आहना बैठे थे और कहा, “हैलो, लव बर्ड्स। क्या मैं तुम दोनों को डिस्टर्ब तो नही कर रहा?”
“निखिल, तु ठीक तो है?” अयांश ने पूछा।
“मैं तो ठीक हूँ लेकिन तुम दोनों को क्या हुआ है?” निखिल ने गंभीर होकर पूछा।
"तुम किस बारे में बात कर रहे हो, निखिल ?" अयांश ने ऐसा जताते हुए पूछा जैसे उसे कुछ भी समझ नहीं आ रहा हो पर वो समझ चुका था की निखिल क्या कहना चाहता है।
निखिल मुस्कुराया और कहा, “तुम दोनों को नही लगता की तुम दोनों एक दूसरे के साथ कुछ ज्यादा ही टाइम स्पेंड कर रहे हो।”
“निखिल, ऐसा कुछ नही है जैसा तू सोच रहा है। हम बस बेस्ट फ्रेंड्स है इसलिए साथ रहते है।” अयांश ने कहकर आहना की तरफ देखा और कहा, “आहना, अब हमें चलना चाहिए। मुझे कुछ जरूरी काम भी है।”
आहना ने हाँ में सर हिलाया और उठ खड़ी हुई। वो दोनों निखिल को बाय कहकर कैंटीन से निकल गए। उन्हें साथ जाता देख निखिल ने सोचा, “इससे पहले की देर हो। मुझे आहना को बता देना चाहिए की मैं उससे प्यार करता हूँ पर पहले ये पता लगाना होगा की आहना और अयांश के बीच क्या चल रहा है और ये बात मुझे सिर्फ आहना ही बता सकती है।”
कुछ वक्त इंतजार करने के बाद, निखिल ने आहना का नंबर डायल किया। आहना अयांश के साथ गाड़ी में थी जब उसका फोन बजा। उसने अपना फोन देखा तो स्क्रीन पर निखिल का नाम देख उसे बहुत अजीब लगा क्योंकी अभी थोड़ी देर पहले ही वो उससे मिलकर कॉलेज से निकली थी।
“किसका फोन है?” अयांश ने रोड पर ध्यान लगाते हुए पूछा।
आहना ने बिना कुछ कहे अपना फोन अयांश के सामने कर दिया। उसके फोन की स्क्रीन पर निखिल का नाम देखकर अयांश हैरान रह गया और कहा, “ये तुम्हें क्यों फोन कर रहा है?”
“मुझे कैसे पता होगा, अयांश?” आहना ने परेशान होते हुए कहा।
“फोन को स्पीकर पर लगाके बात करो। मैं सुनना चाहता हूँ ये तुमसे क्या कहता है।” अयांश ने कहा।
“ठीक है।” कहते हुए आहना ने कॉल उठाई और फोन स्पीकर पर लगाकर कहा, “हैलो।”
“हैलो आहना, क्या तुम अयांश के साथ हो?” निखिल ने जल्दी से पूछा।
आहना ने पहले गाड़ी चला रहे अयांश की तरफ देखा और कहा, “नही, मैं अकेली हूँ।”
“आहना, मैं तुम्हारा सबसे अच्छा दोस्त हूँ और अयांश का भी तो तुम मुझे बता सकती हो ना की अयांश और तुम्हारे बीच क्या चल रहा है। क्या तुम दोनों को प्यार हो गया है एक दूसरे से?” निखिल ने पूछा।
“ऐसा कुछ भी नही है, निखिल।” आहना ने कहा पर निखिल को उसकी बात पर यकीन नही हुआ और उसने कहा, “आहना, मैं समझ चुका हूँ कुछ तो है तुम दोनों के बीच में। कहीं अयांश ने तुम्हें इस बारे में किसी को भी बताने के लिए मना तो नही किया।”
“अयांश ने मुझसे कुछ भी नही कहा है निखिल। जब ऐसा कुछ है ही नही तो क्या बताऊं तुम्हें मैं।” आहना ने कहा।
“तो फिर तुम दोनों एक साथ इतना ज्यादा क्यों रहते हो? प्यार करते हो ना तुम दोनों एक दूसरे से?” निखिल ने पूछा।
अयांश समझ चुका था की निखिल इस बारे में जानकर ही रहेगा इसलिए उसने अपना सिर हिलाकर आहना को हाँ बोलने के लिए कहा।
“हाँ, हम एक दूसरे से प्यार करते है।” आहना ने धीरे से कहा जिससे निखिल का दिल टूट गया।
“आहना, ये…” निखिल अपनी बात पूरी कह पाता इससे पहले ही आहना ने उसे पूछा, “तुम क्या चाहते हो, निखिल ?”
“आहना, मैं भी तुमसे प्यार करता हूँ।” निखिल ने कहा जिसे सुनते ही अयांश ने गुस्से में अपनी मुट्ठी भींच ली जैसे कि वह कॉल पर ही निखिल को मार देगा। आहना अयांश को इस तरह देखकर घबरा गई।
“निखिल , सबसे ज्यादा ज़रुरी ये है कि मैं किसे पसंद करती हूँ।” आहना ने कहा और जल्दी से कॉल काट दी।
उसने अयांश का हाथ पकड़ा जैसे वो अयांश से कहना चाह रही हो की वो सिर्फ उसकी है और उसकी ही रहेगी। अयांश ने उसकी ओर देखा और कहा, "निखिल के साथ ध्यान से रहना।”
“अयांश, जब तक तुम मेरे साथ हो कोई मेरे साथ कुछ गलत नही कर सकता।” आहना ने अयांश को समझाने के लिए कहा लेकिन अयांश का दिल यह समझने के लिए तैयार नही था और उसे यकीन था कि निखिल आहना के साथ कुछ गलत करने की कोशिश करेगा।
अयांश ने गाड़ी आहना के घर के सामने रोकी और कार से बाहर निकल गया। आहना भी गाड़ी से नीचे उतरी। अयांश ने उसे गले लगाया और कहा, "मेरे टेडी बियर का ध्यान रखना और याद रखना जो मैंने तुमसे कहा है। निखिल के आसपास ध्यान से रहना।”
आहना ने मुस्कुराते हुए उसके गाल को छुआ और फिर अपने घर के अंदर जाने लगी। अयांश तब तक वहीं खड़ा रहा जब तक आहना उसकी आँखों से ओझल नही हो गई।
दिन बीतने लगे और कबीर पूरी तरह से ठीक हो गए। अयांश का बर्थडे आने वाला था इसलिए आहना छुट्टी वाले उसके लिए गिफ्ट लेने कबीर के साथ मार्केट के लिए निकल गई। कबीर को अपने किसी दोस्त से मिलने जाना था इसलिए वो आहना को मार्केट में छोड़कर वहाँ चले गए। जिस वक्त आहना अयांश के लिए गिफ्ट लेकर दुकान से बाहर आई उसी वक्त अयांश भी साइड वाली ज्वेलर्स की दुकान के अंदर गया पर आहना की नजर उस पर नही गई और वो घर आ गई।
मार्केट से आने के बाद वो आराम से हाल में जूस पीते हुए कोई नोवेल पढ़ने लगी। आहना जूस का एक और ग्लास लेने के लिए उठी ही थी की तभी दरवाजे की बेल बजी।
“पापा इतनी जल्दी वापिस आ गए। उन्होंने तो कहा था उन्हें आने में देर हो जाएगी।” सोचते हुए आहना दरवाजे की ओर बढ़ गई और दरवाजा खोला तो देखा कि सामने निखिल खड़ा था। उसे देखकर आहना घबरा गई। निखिल उसकी घबराहट का अंदाजा ना लगा सके इसलिए उसने मुस्कुराते हुए कहा, "निखिल , तुम यहाँँ। अंदर आओ ना। ”
निखिल अंदर आया और हॉल में सोफे पर बैठ गया। आहना उसके सामने बैठ गई और पूछा, "तुम्हें कोई जरूरी काम था?”
“नही, आहना।”, कहते हुए निखिल उठा और आहना के पास आकर बैठ गया। ये देख आहना उठने लगी तो निखिल ने उसका हाथ पकड़ लिया। आहना ने अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश की लेकिन निखिल की पकड़ बहुत मजबूत थी।
“निखिल, मेरा हाथ छोड़ो।” आहना ने चिल्लाते हुए कहा।
“नही छोड़ूंगा मैं तुम्हारा हाथ। तुम्हें पता है कि मैं भी तुमसे प्यार करता हूँ फिर भी तुम हर वक्त अयांश के साथ रहना चाहती हो। उसमें ऐसा क्या खास है जो मुझमें नही है?” निखिल ने उसके हाथ पर अपनी पकड़ और मजबूत करते हुए कहा जिससे आहना को दर्द हुआ और वो रोने लगी।
अचानक से अयांश वहाँ आ गया। जब उसने देखा की निखिल ने आहना का हाथ कसकर पकड़ रखा है और वो रो रही है तो गुस्से में उसने अपनी मुट्ठी भींच ली पर निखिल का उसपर कोई ध्यान नही जाता। आहना जो की लगातार अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश कर रही थी, जैसे ही उसने अयांश को वहाँ देखा वो मुस्कुराने लगी। अयांश ने अपनी पलके झपकाकर उसे एहसास दिलाया कि वह अब सुरक्षित है।
निखिल ने जब महसूस किया कि आहना अपना हाथ छुड़ाने की कोशिश नही कर रही है तो उसने आहना को देखा जो सामने देखते हुए मुस्कुरा रही थी। आहना को ऐसे मुस्कुराता देख निखिल ने भी उस तरफ देखा जहाँ वो देख रही थी। अयांश को वहाँ देखकर निखिल हैरान हो गया और उसने जल्दी से आहना का हाथ छोड़ते हुए उसके बारे में कहा, “देख अयांश, ये तेरे साथ प्यार करने का सिर्फ नाटक करती है। अभी ये मेरे करीब आना चाह रही थी।”
निखिल की बात सुनकर अयांश को गुस्सा आया क्योंकि निखिल आहना के बारे में गलत बोल रहा था। अयांश ये बात कैसे बर्दाश्त कर सकता था की आहना के बारे में कोई कुछ गलत बोले इसलिए उसने पूछा, "सच में, फिर तूने इसका हाथ क्यों पकड़ रखा था?” निखिल अयांश की आँखों में गुस्सा साफ देख पा रहा था।
“जा यहाँँ से नही तो मैं तुझे मार दूंगा।” निखिल कुछ कहता इससे पहले ही अयांश ने उससे गुस्से में कहा। निखिल ने उन दोनों को देखा और वहाँ से चला गया।
Continued in जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 8
Thursday, 18 June 2026
जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 6
अयांश के घर में दिवाली की पार्टी रखी गई थी। शाम होते ही मेहमान आने लगे तो सभी उनमें बिजी हो गए। राकेश के दोस्त और कुछ ऑफिस के लोग आए हुए थे। राकेश और कबीर उनके साथ बिजी हो गए। अयांश ने भी अपने स्कूल और कॉलेज के दोस्तों को बुलाया था जिनमें निखिल भी शामिल था। निखिल ने जब आहना को देखा तो देखता ही रह गया क्योंकि वो भी कहीं ना कहीं आहना को पसंद करने लगा था। अयांश और आहना अपने दोस्तों साथ पार्टी एंजॉय कर रहे थे। वहीं रिद्धिमा ने भी अपने बचपन की दोस्त टीना को बुलाया था। रिद्धिमा टीना से मिली और कहा, “कितना अच्छा लग रहा है तुमसे इतने टाइम के बाद मिलके।”
“मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा है।” टीना ने मुस्कुराकर कहा।
“जीजाजी और नुपुर नही आए तुम्हारे साथ।” रिद्धिमा ने टीना से पूछा।
“नही, तुम्हें तो पता है उन्हें कहीं भी ज्यादा आना जाना नही पसंद और नुपुर को अपनी फ्रेंड के घर जाना पड़ा।” टीना ने कहा।
“कोई बात नही। चलो पार्टी एंजॉय करते है।” कहकर रिद्धिमा टीना के साथ गार्डन में आ गई जहाँ पार्टी चल रही थी। उसने टीना को राकेश और अयांश से मिलवाया और फिर उसके साथ बैठकर बातें करने लगी।
अयांश आहना और अपने दोस्तों के साथ मिलकर पटाखे जलाने लगा। आहना को बड़े पटाखों से डर लगता था इसलिए वो सिर्फ फुलझड़िया जला रही थी। सभी पार्टी को अच्छे से एंजॉय कर रहे थे।
देर होने लगी तो मेहमान खाना खाकर जाने लगे। अयांश और आहना भी एक साथ बैठकर अपने दोस्तों के साथ खाना खा रहे थे। निखिल भी वही बैठा था। सबकी नजर आहना और अयांश पर थी क्योंकी वो दोनों ही खाते हुए बीच बीच में एक दूसरे को देख रहे थे। निखिल को ये अच्छा नही लग रहा था पर वो चुप रहा।
रात बहुत हो चुकी थी इसलिए सभी अपने अपने घर चले गए। आहना और कबीर भी राकेश से मिलकर गाड़ी में बैठ गए। इस बार राकेश का ड्राइवर उन्हें घर छोड़ने जा रहा था जबकि अयांश जाना चाहता था पर राकेश ने उसे मना कर दिया।
एक सुबह आहना सात बजे उठकर अपने घर के हॉल में आई तो देखा कबीर तैयार होकर सोफे पर बैठे हुए थे। वो उनके पास आई और पूछा, “आप कहीं जा रहे है, पापा?”
“मैं ऑफिस जा रहा हूँ। घर में रहते हुए बोर हो चुका हूँ मैं।” कबीर ने कहा।
“पापा, आप ऑफिस नही जा सकते।” आहना ने कहा पर कबीर जाना चाहते थे इसलिए उन्होंने आहना को मनाते हुए कहा, “आहना बच्चे, तुम ऐसे ही परेशान हो रही हो मेरे लिए। मैं अब ठीक हूँ और मेरी बात को समझो ना। तीन महीने से ऊपर हो चुके है मुझे घर में रहते रहते। अब मैं बोर होने लगा हूँ।”
आहना ने एक गहरी सांस ली और कहा, “मुझे पता है अब आप पूरी तरह से ठीक है और कुछ दिन पहले जो डॉक्टर ने टेस्ट किए थे उनमें आपकी सारी रिपोर्ट्स सही आई है पर अभी भी आपको रेस्ट की जरूरत है।”
“मैं अपना ख्याल रखूंगा, बेटा।” कबीर ने कहा। आहना को पूरे दस मिनिट तक मनाने के बाद उसने कबीर को ऑफिस जाने की परमिशन दे दी ये कहकर की वो ऑफिस में ज्यादा काम नही करेंगे और दवाइयां टाइम पर ले लेंगे जिससे कबीर खुश हो गए और सोफे से उठते हुए कहा, “ठीक है, फिर मैं चलता हूँ ऑफिस। मैं अपना ख्याल रखूंगा। तुम भी अपना ख्याल रखना।”
“अभी सिर्फ सात बजे है। आप इतनी जल्दी चले जाएंगे।” आहना ने हैरानी से कहा।
“अरे पूरे तीन महीने बाद ऑफिस ज्वाइन करने जा रहा हूँ। इतनी जल्दी जाना तो बनता है।” कबीर ने एक्साइटेड होकर कहा।
“नाश्ता तो करके जाइए और अगर आज आप ऑफिस जा ही रहे है तो मुझे कॉलेज भी छोड़ देना। मेरे साथ ही निकलना आप भी।” आहना ने कहा।
“बेटा, तुम्हें कॉलेज वही ले जाएगा न अपने साथ जो अब तक ले जा रहा था।” कबीर की बात सुनकर आहना उलझन में पड़ गई और पूछा, “आप किसकी बात कर रहे हो?”
कबीर मुस्कुराए और कहा, “मैं अयांश की बात कर रहा हूं। उसे फोन कर देना। वो आ जाएगा तुम्हें लेने।”
“पापा, मैं कब तक अयांश को परेशान करूं इन सब के लिए।” आहना की कहा।
“इसमें उसे क्या परेशान होगी। उसकी जिम्मेदारी हो तुम। आगे चलकर ये सब उसे ही करना है तो अभी से क्यों नही। मैं जा रहा हूँ तुम उसे बुला लेना।” कहते हुए कबीर जल्दी से घर से निकल गए। आहना उनके पीछे गई और उन्हें आवाज लगाई रोकने के लिए पर कबीर गाड़ी में बैठकर निकल गए।
कॉलेज के लिए तैयार होकर और नाश्ता करने के बाद उसने अयांश को फोन लगाया। अयांश ने पहली रिंग पर ही फोन उठाया और कहा, “हेलो, टेडी बियर।”
“अयांश, क्या तुम मुझे लेने आ सकते हो। वो पापा को आज पता नही क्या हो गया। अचानक से ऑफिस जाने का बोलने लगे। मैंने उनसे कहा की अब ऑफिस जा ही रहे है तो मुझे कॉलेज भी छोड़ते जाए पर वो सुबह सुबह ही निकल गए ऑफिस के लिए ये कहकर की मैं तुम्हें बुला लूं।” आहना की बात सुनकर अयांश हंसने लगा और कहा, “अंकल बोर हो गए होंगे घर में रहकर। डोंट वरी, मैं तुम्हारे पास ही आ रहा था। दस मिनिट में पहुँच जाऊंगा।”
अयांश ने फोन काट दिया। आहना किचन में जाकर कबीर के लिए नाश्ता पैक करने लगी ये सोचकर की उन्हें रास्ते में नाश्ता ऑफिस जाकर दे देगी।
अयांश आ गया तो आहना उससे गले मिली और फिर अपना बैग कंधे पर डालने के बाद कबीर के लिए जिस डिब्बे में उसने नाश्ता पैक किया था, उसे उठाते हुए कहा, “चलो, निकलते हैं कॉलेज के लिए।”
अयांश ने देखा की आहना ने कोई स्वेटर या जैकेट नही पहन रखा था। आहना बस जींस और फुल स्लीव्स का ऊन से बना स्टाइलिश टॉप पहने हुए थी। उसने आहना को जैकेट पहनने को कहा क्योंकि बाहर बहुत ही ठंड थी।
“मुझे कुछ नही होगा, अयांश। मैं ठीक हूँ।” आहना ने कहा पर अयांश ने उसकी बात नही मानी और कहा, “मुझे पता है तुम बहुत स्ट्रॉन्ग हो पर तुम्हें जुखाम बहुत जल्दी होता है इसलिए जाकर जैकेट पहनकर आओ।”
आहना मुंह बनाते हुए अंदर जैकेट पहनने चली गई। वो अपनी हल्के नीले रंग की जैकेट पहन आई और फिर अयांश उसे लेकर कॉलेज के लिए निकल गया।
“अयांश, कॉलेज से पहले गाड़ी अपने ऑफिस की तरफ लेलो।” आहना ने कहा।
“ऑफिस क्यों जाना है तुम्हें? कहीं तुमने ऑफिस ज्वाइन करने का तो नही सोच लिया।” अयांश ने हंसते हुए कहा।
“ऐसा कुछ नही है। मुझे पापा को उनका नाश्ता देना है इसलिए ऑफिस जाना है पहले।” आहना ने कहा तो अयांश ने ओके कहकर गाड़ी ऑफिस जाने वाले रास्ते की तरफ मोड़ दी।
गाड़ी ऑफिस के सामने आकर रूकी और वो दोनों गाड़ी से उतरकर अंदर राकेश के केबिन की ओर चले आए। अयांश ने राकेश के केबिन का दरवाजा खोला तो वहाँ का नजारा देखने लायक था। राकेश अपनी चेयर पर बैठे थे और उनके ठीक सामने जो कुर्सियां थी, उनमें से एक कुर्सी पर कबीर उनके सामने बैठे हुए थे जिनके सामने टेबल पर प्लेटों में छोले भटूरे, छोले कुल्चे, ब्रेड पकोड़े के साथ और भी खाने पीने का सामान रखा हुआ था।
कबीर ने छोले भटूरे का एक टुकड़ा तोड़कर अपने मुंह में रखा और कहा, “ये कितना टेस्टी है वरना पिछले दो महीनों से नाश्ते में आहना के बनाए हुए हेल्थी सैंडविच और ओट्स खा खाकर थक गया था। पता नही क्या क्या डालती है आहना उस सैंडविच में। बहुत ही ज्यादा बेकार लगता है वो खाने में।”
राकेश ने मुस्कुराते हुए कुछ कहने के लिए जैसे ही कबीर को देखा, उनकी नजर दरवाजे पर खड़े आहना और अयांश पर गई। आहना गुस्से से कबीर को देख रही थी।
“बच्ची, इतना ख्याल रखती है तुम्हारा। ऐसा तो मत बोलो उसके बारे में।” राकेश ने आहना को देखकर कहा और कबीर को पीछे देखने का इशारा किया पर कबीर का सारा ध्यान तो सामने पड़े खाने में था।
“ये तो सच है की वो ख्याल रखती है मेरा पर वो सैंडविच खिलाकर बिल्कुल टॉर्चर करती है मेरे साथ ख्याल रखने के नाम पर।” कबीर ने मुंह बनाते हुए कहा और उसी वक्त आहना केबिन के अंदर आकर बोली, “और इसी सैंडविच वाले टॉर्चर से बचने के लिए आप इतनी सुबह सुबह यहाँँ आ गए।”
“हाँ, इसलिए ही मैं यहाँँ आ गया नाश्ता किए बिना।” कबीर ने कहा बिना इस पर ध्यान दिए की ये बात किसने कही है पर जब उन्होंने आवाज पर गौर किया, तो जल्दी से कुर्सी से खड़े होकर पीछे मुड़े और देखा की आहना उनके सामने गुस्से में खड़ी उन्हे ही देख रही थी। आहना के पीछे खड़ा अयांश अपनी हँसी को रोकने की कोशिश कर रहा था।
आहना को ऐसे देखकर कबीर ने जल्दी से कहा, “सैंडविच खाने तो अच्छे होते है और वो भी आहना के बनाए हुए सैंडविच।”
आहना मुस्कुराते हुए उनके पास आई।
“रहने दीजिए पापा, अभी थोड़ी देर पहले ही बहुत तारीफ सुनी है मैने अपनी और अपने सैंडविचेस की, और अब जब आप उनकी इतनी ही तारीफ कर चुके है तो आज भी नाश्ते में वही खाने चाहिए आपको, है ना।” कहकर आहना ने अपने हाथ में पकड़ा हुआ लंच बॉक्स खोलकर कबीर के आगे रख दिया जिसके अंदर वही सैंडविच रखे हुए थे।
कबीर ने चिड़ते हुए आहना को देखा और कहा, “बेटा, मैं ये सैंडविच नही खाना चाहता। तुम ही सोचो मेरे सामने इतना अच्छा अच्छा खाना रखा हुआ है ऐसे में मुझसे ये सैंडविच खाए जाएंगे क्या।”
“सब पता है मुझे पापा पर आप भी ये जानते है कि आपको अभी डॉक्टर ने ये सब खाने की परमिशन नही दी है।” कहते हुए उसने राकेश को देखा और कहा, “अंकल, आपने भी इन्हें नही रोका ये सब खाने से।”
“सॉरी बेटा, मैंने कोशिश की थी इसे रोकने की पर इसने मेरी बात सुनी ही नही।” राकेश ने कहा।
“पापा, ये रहे आपके सैंडविच। इन्हें खाइए आप।” आहना ने कहा।
कबीर ने आस भरी नजरों से सामने टेबल पर रखी प्लेटों में रखे खाने को देखा और पूछा, “तो फिर ये सब कौन खायेगा?”
“ये सब हम खालेंगे, अंकल।” कहते हुए अयांश छोले कुल्चे खाने लगा। बस फिर क्या था राकेश, अयांश और आहना मिलकर वो सब कुछ खाने लगे और बेचारे कबीर मुंह बनाकर सैंडविच खाते हुए उन सबको अपना पसंदीदा खाना खाते हुए देखते रहे। राकेश और अयांश को ये देखकर बहुत हँसी आ रही थी जिसे वो दोनों ही कंट्रोल किए हुए थे।
कबीर को उनका नाश्ता खिलाने के बाद आहना अयांश के साथ वहाँ से कॉलेज के लिए निकल गई। कॉलेज पहुँचकर वो दोनों अपनी क्लास में आ बैठे। टीचर अभी आए नही थे इसलिए वो दोनों बाते करने लगे।
थोड़ी देर बाद टीचर ने आकर लेक्चर शुरू किया। लेक्चर के दौरान अयांश ने आहना का हाथ पकड़ रखा था। निखिल का ध्यान जब उनके हाथों पर गया तो उसे गुस्सा आने लगा। वो भी आहना को पसंद करने लगा था और यही कारण था कि वो अयांश को इस तरह आहना का हाथ पकड़े हुए नही देख पा रहा था।
Continued In जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 7
Wednesday, 17 June 2026
जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 5
अयांश आहना को छोड़कर अपने घर पहुँचा तो देखा उसकी मां, रिद्धिमा अभी तक जाग रही थी। अयांश ने उनसे अभी तक जागने की वजह पूछी तो उन्होंने बताया कि वो उससे कुछ बात करना चाहती है इसलिए जाग रही है। अयांश सोचने लगा की ऐसी क्या बात है जिसके लिए रिद्धिमा अभी तक जाग रही है। वो उनके सामने सोफे पर बैठ गया तो रिद्धिमा ने उसे देखकर पूछा, “आज तुम्हारे साथ जो लड़की थी। वो कौन थी?”
ये सुनकर अयांश ने हैरानी से रिद्धिमा को देखा और पूछा, “आप मुझ पर नज़र रख रही है।”
“मेरे सवाल का जवाब दो, अयांश।” रिद्धिमा ने गुस्से में कहा।
“मैं आहना के साथ था।" अयांश ने उनके सवाल का जवाब देते हुए कहा।
“अयांश, तुम्हें पता है ना कि मुझे वो लड़की नही पसंद। फिर भी तुम उसके साथ थे।” रिद्धिमा ने अयांश को गुस्से से देखते हुए कहा।
“मम्मी, मैं उससे प्यार करता हूँ और एक बार जब आप उसे अच्छी तरह से जान जाएंगी तो आप भी उसे पसंद करेंगी। मैं नही जानता आपको आहना से क्या प्रॉब्लम है पर मेरी खुशी आहना है और मैं उम्मीद करता हूँ की आप उसे मेरे लिए तो एक्सेप्ट कर ही लेंगी।” अयांश ने कहा और उठकर ऊपर अपने कमरे में जाने लगा।
“मैं उस आहना को कभी एक्सेप्ट नही करूंगी।” रिद्धिमा ने अयांश को जाते देख गुस्से में दबी आवाज में कहा।
अयांश ने अपने कमरे में आकर कपड़े बदले और बिस्तर पर लेट गया। उसने रिद्धिमा की बातों के बारे में ज्यादा नही सोचा और आहना के साथ बिताए समय के बारे में सोचने लगा। उसने अपने फोन से आहना का नंबर मिलाया।
“हेलो।” आहना की प्यारी सी आवाज़ उसके कान में पड़ी।
“क्या कर रही हो, मेरी टेडी बियर?" अयांश ने मुस्कुराते हुए पूछा।
“तुम्हें याद कर रही थी।" आहना ने प्यार से कहा।
वो दोनों देर रात तक एक दूसरे से बातें करते रहे।
आहना और अयांश अब साथ में सबसे ज्यादा वक्त बिताने लगे। कॉलेज में दोनों क्लासरूम में एक साथ बैठते थे और दोनों एक साथ खुश रहने लग गए थे।
दिवाली वाले दिन अयांश नाश्ता करने के बाद अपने कमरे में जाकर तैयार होने लगा। उसने लाल रंग का कुर्ता पहना और सफेद रंग का पाजामा, बाल सेट किए, परफ्यूम लगाया और खुदको आईने में देखकर कमरे से बाहर आ गया। वो नीचे आया तो देखा की सब अपने अपने कामों में लगे है। रिद्धिमा सबसे कहकर घर सजवा रही थी और राकेश लिविंग रूम में बैठे किसी से फोन पर बात कर रहे थे।
अयांश उनकी तरफ आया और सोफे पर बैठ गया। राकेश ने फोन काटा और अयांश को देखते हुए कहा, “अयांश, जाओ जाकर कबीर अंकल और आहना को ले आओ।”
“जी पापा।” कहते हुए अयांश उठा और गाड़ी की चाबी लेकर घर से बाहर आया। उसने गाड़ी स्टार्ट की और आहना के घर जाने के लिए निकल गया।
जल्दी ही वो आहना के घर पहुँच गया। वो गाड़ी से नीचे उतरकर अंदर जाने ही वाला था पर उसके कदम वही रुक गए क्योंकि उसके सामने ही आहना थी जो स्टूल पर खड़े होकर दरवाजे पर फूलों की माला लगा रही थी।
आहना ने लाल रंग का सूट पहन रखा था। हाथो में लाल रंग की चूड़ियां, कानों में झुमके, होठों पर रेड लिपस्टिक, माथे पर छोटी सी बिंदी में वो बहुत ही प्यारी लग रही थी। साथ ही हल्का सा मेक अप और उसके लंबे खुले बाल उसकी खूबसूरती को और भी ज्यादा बड़ा रहे थे। अयांश मुस्कुराते हुए उसे ही देखता जा रहा था और फिर बहुत खुश हो गया जब उसे एहसास हुआ की उसने और आहना ने एक ही रंग के कपड़े पहने हुए थे।
आहना की नजर उसपर पड़ी तो उसने उसे आवाज लगाते हुए कहा, “अयांश, तुम वहाँ क्यों खड़े हो? अंदर आ जाओ।”
अयांश की तंद्रा टूटी और वो उसकी तरफ चला आया। आहना स्टूल से नीचे उतरने लगी पर उसका पैर मुड़ गया। इससे पहले की वो नीचे गिरती, अयांश ने उसे पकड़कर गिरने से बचा लिया।
कबीर आहना को बुलाने बाहर आए तो बाहर का नजारा देखकर हैरान रह गए। अयांश आहना को अपनी बाहों में थामे खड़ा था। उसके दोनो हाथ आहना की कमर पर थे और आहना ने अपने दाएं हाथ को उसके सीने पर रखा हुआ था और अपने बाएं हाथ से उसके कंधे को पकड़ रखा था।
कबीर ने उन दोनों को आवाज लगाई पर अयांश और आहना पूरी दुनिया से बेखबर एक दूसरे को आँखों में देखे जा रहे थे।
इस बार कबीर ने उनके पास आकर खांसने का नाटक किया तो अयांश और आहना ने उनकी तरफ देखा। कबीर को देखकर अयांश ने हड़बड़ाते हुए आहना को संभालकर सीधा खड़ा किया।
आहना शरमाते हुए नीचे देखने लगी। अयांश कबीर के पास गया और उनके पैर छूते हुए कहा, “हैप्पी दिवाली, अंकल।”
“हैप्पी दिवाली, बेटा। तुम इतनी जल्दी यहाँँ?” कबीर ने पूछा।
“वो पापा ने भेजा है आपको और आहना को ले जाने के लिए।” अयांश ने कहा।
“पर दिवाली पार्टी तो शाम में हैं।” कबीर ने कहा तो अयांश मुस्कराने लगा और कबीर को छेड़ते हुए कहा, “अंकल क्या पता पापा का आपके बिना मन न लग रहा हो।”
कबीर की यही बात अयांश को सबसे ज्यादा पसंद थी की वो बच्चो के साथ बहुत फ्रेंडली रहते थे। अब जब अयांश ने उन्हें छेड़ ही दिया था तो वो भी कहा पीछे रहने वाले थे इसलिए उन्होंने कहा, “राकेश का तो मेरे बिना मन नहीं लग रहा था इसलिए उसने तुम्हे यहाँँ हमे अपने साथ ले जाने के लिए भेज दिया। तुम्हारा किसके बिना मन नही लग रहा था जो तुम राकेश के कहने पर यहाँँ चले भी आए।”
कबीर की बात सुनकर अयांश इधर उधर देखने लगा। वो समझ चुका था की कबीर उसके और आहना के बारे में बात कर रहे है। आहना जो अब तक चुपचाप उनकी बातें सुन रही थी, कबीर की बात सुनकर वो भी शर्मा गई और उसने कहा, “मैं चेंज करके आती हूं, पापा। फिर चलते है अयांश के साथ।”
“अरे इतनी तो प्यारी लग रही हो तुम और देखो हम मैचिंग भी कर रहे है।” अयांश ने कहा तो कबीर ने उसे फिर से छेड़ते हुए कहा,“ये कही तुमने पहले से तो पता नही लगा लिया था की आहना भी लाल रंग पहनने वाली है इसलिए तुम भी लाल रंग पहनकर आए हो।”
“क्या अंकल आप भी।” कहते हुए अयांश झेप गया और नीचे देखने लगा तो आहना ने कहा, “अयांश, मुझे लहंगा पहनना है पार्टी के लिए इसलिए चेंज करने जा रही हूं। तुम अंदर आके बैठ जाओ।”
“तुम जाके तैयार हो जाओ। मैं यहीं ठीक हूं।” अयांश ने कहा। कबीर भी तैयार होने चले गए। अयांश वही खड़ा आहना की बनाई हुई रंगोली को देखने लगा जो आहना ने फूलों से बनाई थी। कबीर तैयार होकर आए तो उन्होंने उसे अंदर बुला लिया।
अयांश कबीर से बाते करने लगा की पंद्रह मिनिट बाद पायल बजने की आवाज उसके कानों में पड़ी। उसने सामने देखा जहाँ से आहना चली आ रही थी। उसने नीले रंग का लहंगा पहना हुआ था। साथ ही उसने झुमके और चूड़ियां भी बदल ली थी। वो अयांश को लहंगे में और भी ज्यादा प्यारी लग रही थी। कबीर ने ध्यान दिया की अयांश आहना को ही देखे ही जा रहा था पर इस बार उन्होंने कुछ नही कहा क्योंकि वो पहले ही अयांश को काफी छेड़ चुके थे।
आहना अपना दुप्पटा संभालते हुए उनके पास आई और कहा, “चले, पापा।”
“हां बेटा, चलो।” कहते हुए कबीर खड़े हुए। अयांश भी खड़ा हुआ और सभी घर से बाहर आ गए। कबीर के घर लॉक किया और उन दोनों के साथ गाड़ी में आ बैठे। कबीर आगे वाली सीट पर अयांश के साथ बैठे थे और आहना पीछे वाली सीट पर।
अयांश ने गाड़ी के अंदर लगे शीशे को सही किया जिससे वो पीछे बैठी आहना को शीशे में देख सके। कुछ ही देर बाद, उसने गाड़ी अपने घर के अंदर लाकर रोकी। उसने गाड़ी से उतरकर आहना के लिए गाड़ी का दरवाजा खोला। आहना मुस्कुराते हुए गाड़ी से नीचे उतरी और सभी अंदर आ गए। राकेश खुश होकर उनसे मिले पर रिद्धिमा उनसे बिना मिले अपने कमरे में चली गई।
आहना ने राकेश के पैर छुए और उन्हें हैप्पी दिवाली कहा। सभी लिविंग रूम में आ बैठे और बातें करने लगे। थोड़ी देर सबसे बाते करने के बाद अयांश अपने कमरे में चला आया। वो आहना को भी अपने साथ लाना चाहता था पर राकेश और कबीर के सामने आहना से कुछ नही कह पाया।
शाम होते ही घर पर लगाई हुई सभी लाइटें जला दी गई जिससे घर बहुत ही सुंदर लगने लगा। जैसे ही अयांश नीचे आया, उसकी नजर आहना के ऊपर चली गई जो सबके साथ मिलकर घर के बाहर बनी रंगोली में लगे दीए जला रही थी। आहना की पीठ उसकी तरफ थी इसलिए वो अयांश को नही देख पाई।
अयांश घर से बाहर आया और आहना के सामने बैठकर उसे देखने लगा। आहना का चेहरा लाइटों और दीयों की रोशनी से जगमगा रहा था। उसके अयांश को देखा और फिर वापिस से दीए जलाते हुए पूछा, “तुम यहाँँ ऐसे क्यों बैठे हो?”
“उस लड़की को देख रहा हूं जो मेरी लाइफ में दीया… नही दीया नही, चाँद… जो मेरी लाइफ में चाँद बनकर अपनी रोशनी से मेरी अंधेरे जैसे लाइफ में खुशियों और प्यार की रोशनी करती है।” अयांश ने अपने गाल पर हाथ रखकर मुस्कुराते हुए आहना के चेहरे को देखते हुए कहा।
उसकी बातें सुनकर आहना मुस्कुराने लगी और पूछा, “तुम मेरे साथ फ्लर्ट कर रहे हो?”
“फ्लर्ट नही, रोमांस कहते है इसे।” कहते हुए अयांश भी उसके साथ वही बैठा दीए जलाने लगा और दोनों मिलकर वही बैठे हँसते हुए बाते करने लगा।
राकेश और कबीर लिविंग रूम से बाहर आए। उन दोनों की नजर जब अयांश और आहना पर पड़ी तो वो दोनों एक दूसरे को देखकर मुस्कुरा उठे। दीए जलाकर अयांश और आहना अंदर आ गए।
Continued In जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 6
Tuesday, 16 June 2026
जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 4
Monday, 15 June 2026
जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 3
अयांश आहना से मिलने उसके घर आया था। जब उसने आहना से उसकी लाइफ के बारे में पूछा तो आहना उदास हो गई और उसने फिर कहा, “तुम जानते ही हो कि मेरी लाइफ कैसी चल रही है। मैं बहुत खुश थी की मेरी लाइफ बदलने वाली है और अब मैं अपने पेंटर बनने के सपने को सच करने के लिए उसपर ध्यान दे पाऊंगी। मुझे लगता था कि अब मैं लाइफ को खुलकर जीना शुरू करूंगी पर अब ऐसा लगता है कि वो सब सिर्फ मेरे सपने थे। हकीकत बहुत अलग है। पिछले एक महीने में मैनें वो लाइफ जी है जिसके बारे में मैनें कभी सोचा भी नही था।”
“आहना, लाइफ इसी का नाम है। यह हमें हमेशा वही चीजें दिखाएगी जो हम नही देखना चाहते।” अयांश ने उसका हाथ पकड़ कर कहा।
“अयांश, क्या तुम हमेशा मेरे साथ ऐसे ही रहोगे?" आहना ने उसके दूसरे हाथ को अपने हाथ में लेते हुए पूछा।
“मैं तुम्हारे साथ हमेशा रहूँगा, आहना। तुम्हारे हर एक कदम में तुम्हारी परछाई की तरह रहूँगा मैं और तुम्हें हमेशा खुश रखूंगा।” अयांश ने उसकी तरफ प्यार भरी नजरों से देखते हुए कहा।
अगले दिन,
"दवाई ले लिजिए पापा।" आहना ने कबीर को उनकी दवाइयां और पानी का गिलास थमाते हुए कहा।
दवाइयां लेकर कबीर ने आहना को देखा और पूछा, “आहना, मैं तुमसे अपने ऑपरेशन के खर्च के बारे में पूछना चाहता था। हमारे पास पैसे कहाँ से आए बेटा?”
“पापा, क्या ये ज़रूरी है? आप मेरे साथ है और यही बात है जो इंपोर्टेंट है।” आहना ने कहा।
“पैसे कहाँ से आए ऑपरेशन के लिए आहना?” कबीर ने फिर से पूछा।
“राकेश अंकल ने हमारी हेल्प की, पापा।” आहना ने धीरे से कहा।
“तुमने उनसे पैसे क्यों लिये? वह मेरे बॉस हैं।” कबीर चिल्लाए और इससे पहले की आहना उनसे कुछ कहती, उनके कानों में एक आवाज पड़ी। "मैं तुम्हारे बॉस से पहले तुम्हारा दोस्त हूँ।"
आहना ने मुड़कर देखा तो वहाँ राकेश और अयांश खड़े थे। वो जल्दी से उनके पास गई और उसने मुस्कुराकर कहा, "अंकल, आईये ना। आओ अयांश।”
अयांश उसे देखकर मुस्कुराया और हाल में लगे सोफे पर बैठ गया। राकेश भी कबीर के साथ बैठ गए। आहना उनके लिए चाय बनाने किचन के अंदर चली गई। वो अयांश को देखकर बहुत खुश थी।
“थैंक यू, राकेश।” कबीर ने भावुक होकर कहा।
“आहना मेरी बेटी की तरह है और मैं अपनी बेटी को परेशान कैसे देख सकता था।” कहते हुए राकेश ने अयांश की तरफ देखा और उससे कहा, "अयांश, बेटा मुझे कबीर से अकेले में कुछ बात करनी है। तुम आहना के पास जाओ।”
अयांश मुस्कुराकर वहाँ से किचन की तरफ चला गया और दरवाजे पर जाके रूक गया। जब आहना ने अयांश को दरवाजे पर खड़ा देखा तो वह मुस्कुराई और उसे अंदर आने के लिए कहा।
***
उधर हॉल में,
“मुझे उम्मीद है कि तुम्हें अपना वादा याद होगा।” अयांश के जाते ही राकेश ने कबीर से पूछा।
कबीर ने हाँ में अपना सिर हिलाया और कहा, “मुझे अपना वादा याद है लेकिन आहना की मर्जी के बिना मैं कुछ भी नही करूंगा। अगर वो तैयार होगी तो मैं भी तैयार हूँ। तुम्हें भी अयांश से बात करनी होगी इस बारे में।”
“मुझे पता है कि वो दोनों तभी तैयार होंगे जब उनकी पढ़ाई पूरी हो जाएगी पर मैं उन्हें जल्द से जल्द इस बारे में बता देना चाहता हूँ जिससे वो दोनों अपनी जिंदगी में किसी और को ना लाए। तुम समझ रहे हो ना कबीर मैं क्या कहना चाह रहा हूँ।” कहकर राकेश ने कबीर की तरफ देखा।
जब आहना की माँ की मौत हुई थी, तब कबीर अपनी बेटी के भविष्य के बारे में सोचकर बहुत परेशान थे की वो उसकी माँ के बिना उसे कैसे संभालेंगे और कैसे उसकी शादी करवा पाएंगे। उस समय राकेश ने उनकी बहुत मदद की थी और उनसे कहा था कि जब अयांश बड़ा हो जाएगा तब वो अयांश की शादी आहना से करना चाहते है हालाकि अयांश की माँ, रिद्धिमा आहना से नफरत करती है लेकिन फिर भी राकेश चाहते है कि आहना ही उनकी बहू और अयांश की पत्नी बने।
“मैं समझ रहा हूँ। मैं आज ही आहना से इस बारे में बात करूंगा।” कहते हुए कबीर हल्का सा मुस्कुरा दिए।
***
किचन में आहना सबके लिए चाय बना रही थी और अयांश उसे बड़े ही प्यार से चाय बनाते हुए देख रहा था। आहना ने उसे देखा और पूछा, “तुम यहाँँ ऐसे क्यों खड़े हो। तुम्हें कुछ चाहिए क्या?”
“हाँ, तुम्हारा टाइम चाहिए।” अयांश ने बड़ी सी मुस्कराहट के साथ कहा।
“और तुम्हें मेरा टाइम क्यों चाहिए?” आहना ने प्लेट में बिस्किट रखते हुए शरारत से पूछा।
“आहना, मैं तुम्हें सन्डे को डेट पर ले जाना चाहता हूँ।” अयांश ने अचानक कहा जिसकी वजह से आहना ने उसकी तरफ हैरान होकर देखा।
“चा…चाय तैयार है। चलो।” आहना ने चाय के कप ट्रे में रखे, ट्रे पकड़ी और हाल में चली आई जहाँ राकेश और कबीर बैठे बाते कर रहे थे। उसने ट्रे टेबल पर रखी और एक कप राकेश को दे दिया। राकेश ने चाय का एक घूंट भरा और मुस्कुराकर कहा, “चाय बहुत अच्छी बनी है, आहना।”
“थैंक यू, अंकल।” आहना ने कहा। राकेश ने उसे अपने पास ही बैठा लिया।
“अच्छा कबीर, अगले महीने दिवाली है और इस बार दिवाली मैं आहना के साथ मनाना चाहता हूँ। घर पर दिवाली की पार्टी रखी है। तुम अभी गाड़ी नही चला सकते क्योंकि तुम अभी पूरी तरह से ठीक नही हुए हो इसलिए मैं अयांश को भेज दूंगा की तुम्हें लेने आ जाए। तुम आ जाना आहना के साथ।” राकेश ने कहा।
“जरूर अंकल, हम आएंगे। मुझे भी अच्छा लगेगा दिवाली आपके साथ मनाकर।” आहना ने खुश होते हुए कहा।
थोड़ी देर बाते करने के बाद राकेश और अयांश चले गए। उनके जाने के बाद आहना रात के खाने की तैयारी करने लगी। रात के खाने के बाद और कबीर को दवा देने के बाद, वह अपने कमरे में जाने ही वाली थी कि कबीर ने उसे रोक लिया और अपने पास बैठने को कहा।
“आपको कुछ चाहिए, पापा?” आहना ने बैठते हुए पूछा।
“तुमसे एक बात करनी है बेटा।” कबीर ने आहना के हाथ को अपने हाथ में लेकर कहा।
आहना हल्का सा मुस्कुराई और कहा, "कहिए पापा, क्या बात है?"
कबीर ने उसे देखा और पूछा, “तुम्हें अयांश कैसा लगता है, बेटा?”
“पापा, आप अचानक से ये सवाल क्यों पूछ रहे है?” वह हैरान थी क्योंकि आज शाम में ही अयांश ने उसे अपने साथ डेट पर चलने के लिए कहा था और अब कबीर उससे ये सवाल पूछ रहे थे।
“मेरे सवाल का जवाब दो, बेटा। क्या तुम उसे पसंद करती हो?” कबीर ने बड़े ही प्यार से पूछा।
“वो मेरा सबसे अच्छा दोस्त है, पापा। मैं उसे क्यों पसंद नही करूंगी।” आहना ने असमझ की स्थिति में कहा।
कबीर ने एक गहरी सांस ली और कहा, “मैं तुमसे यह बात छिपाना नही चाहता। मैं चाहता हूँ कि तुम अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद अयांश से शादी कर लो। तुम्हारे राकेश अंकल भी यही चाहते है की तुम उनकी बहू बनो क्योंकि अयांश उनका एक लौता बेटा है और उन्हें लगता है कि अयांश को सिर्फ तुम संभाल सकती हो इसलिए वो किसी और लड़की को अपनी बहु नही बनाना चाहते।”
अब आहना को सब कुछ समझ आ रहा था। क्यों अयांश हमेशा उसकी चिंता करता था? क्यों उसने कबीर के ऑपरेशन में उनकी मदद की? राकेश आज यहाँँ क्यों आए और अयांश ने उसे डेट पर चलने के लिए क्यों कहा? उसे इस वक्त बहुत गुस्सा आ रहा था ये सोचते किए कि किसी ने भी उससे नही पूछा कि वो क्या चाहती है फिर भी उसने कबीर के आगे खुदको शांत रखा।
वो बचपन से अयांश को पसंद करती है और उससे शादी भी करना चाहती है लेकिन वो चाहती है कि अयांश उसे प्रपोज करे, ताकि उसे पता चल सके कि अयांश भी उसके लिए वैसा ही महसूस करता है जैसा वो महसूस करती है अयांश के लिए पर अब उसे लग रहा था कि अयांश उसे डेट पर सिर्फ इसलिए लेकर जाना चाहता है और उससे शादी भी सिर्फ इसलिए करेगा क्योंकि राकेश ऐसा चाहते है जिसका मतलब होगा कि उनकी शादी में प्यार की कोई जगह नहीं होगी।
आहना ने खुदको शांत रखने के लिए एक गहरी सांस ली और कबीर को कंबल ओढ़ाते हुए कहा, “पापा, मैं अभी शादी के बारे में बिल्कुल नही सोचना चाहती हूँ भले ही आप चाहे कि मैं पढ़ाई पूरी करने के बाद ही शादी करूं इसलिए आप आराम करे और किसी भी चीज के बारे में न सोचे अभी।”
कबीर के कमरे की लाइट बंद कर वह अपने कमरे में चली आई। वो अपने बेड पर लेटकर कबीर की बातों और अयांश के बारे में सोचने लगी। कुछ देर बाद उसका फोन बजा। उसने फोन हाथ में लिया और देखा की स्क्रीन पर अयांश का नाम लिखा आ रहा था। जैसे ही उसने फोन उठाया, अयांश की खुशी से भरी आवाज उसके कान में पड़ी। “हैलो, आहना।”
“तुम मुझे इस वक्त क्यों फोन कर रहे हो, अयांश?” आहना ने हल्के से गुस्से में पूछा।
“तुम नाराज हो क्या?” अयांश ने धीरे से पूछा।
“अयांश, मुझे सच सच बताओ। तुम मुझे डेट पर क्यों लेकर जाना चाहते हो?” आहना ने पूछा।
“मैं तुम्हें डेट पर इसलिए ले जाना चाहता हूँ क्योंकि मैं तुम्हें पसंद करता हूँ।” अयांश ने कहा।
“क्यों झूठ बोल रहे हो, अयांश। तुम मुझे पसंद नही करते। तुम मुझे डेट पर सिर्फ इसलिए लेकर जाना चाहते हो क्योंकि राकेश अंकल चाहते है कि तुम मुझसे शादी करलो।” आहना ने गुस्से में कहा जिसे सुनकर अयांश हैरान हो गया।
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Sunday, 14 June 2026
जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 2
अयांश पिछले कुछ दिनों से आहना की ज्यादा ही परवाह करने लगा था। ऐसा क्यों था वो खुद भी नही समझ पा रहा था। उसने इस बारे में सोचते हुए खुद से सवाल किया की कहीं उसे आहना से प्यार तो नही हो गया। उसे अपने ऐसा सोचने पर हैरानी हुई। उसने आहना को देखा जो उसे ही देख रही थी। आहना को देख उसने खुदको अपने सवाल का जवाब देते हुए मन ही मन में कहा, “नही नही, मुझे इससे अब प्यार कैसे हो सकता है जबकि स्कूल में तो मुझे इसके साथ इतना ज्यादा रहना तक पसंद नही था। मैं बस दोस्त होने के नाते इसका ख्याल ही रख रहा हूँ जैसे स्कूल में रखा करता था। और कुछ भी नही है मेरे मन में इसके लिए।”
ये सोचते ही उसका मन थोड़ा सा शांत हुआ। उसे कुछ न कहता देखकर निखिल ने कहा, “ठीक है भाई, हम सब चलते है फिर अगर तूने पार्टी नही करनी। तू रख आहना का ख्याल। हम कल मिलते है।”
निखिल उसे बाय कहके बाकी सबके साथ वहाँ से चला गया। उसके जाने के बाद अयांश ने एक गहरी सांस ली। उसने आहना को गाड़ी में बैठने के लिए कहा और खुद भी गाड़ी में आ बैठा। अयांश ने गाड़ी चलानी शुरू की और थोड़ी देर बाद एक पार्क के सामने रोक दी। उसने अपनी सीट बेल्ट खोलते हुए आहना की तरफ देखकर कहा, “चलो, यहाँँ थोड़ी देर बैठते है। तुम्हें अच्छा लगेगा।”
आहना उसके साथ बिना कुछ कहे गाड़ी से नीचे उतर गई। अयांश ने उसका हाथ पकड़ लिया और पार्क के अंदर आकर उसके साथ एक लकड़ी की बेंच पर बैठ गया। अयांश ने अभी भी आहना का हाथ पकड़ा हुआ था। आहना ने कुछ नही कहा बस वो अयांश के हाथ में अपने हाथ को चुपचाप देखे जा रही थी। उसने अपना हाथ अयांश के हाथ से छुड़वाया तक नही।
“क्या तुम्हें ये पार्क याद है आहना? हम बचपन में कितनी बार यहाँँ आकर खेला करते थे।” अयांश ने मुस्कुराते हुए कहा।
"क्या हम यहाँँ इस बारे में बात करने आए हैं?" आहना ने अपने हाथ से ध्यान हटाके अयांश की तरफ देखते हुए पूछा।
“नही, मैं तुम्हारे साथ थोड़ा टाइम स्पेंड करना चाहता था।” अयांश ने धीरे से कहा।
आहना ने एक गहरी सांस ली और कहा, “अयांश, वो हमारा बचपन था। वो समय जब हमे किसी भी बात की टेंशन नही थी लेकिन अब सब कुछ बदल चुका है। वो बचपन तो अब बस एक याद बनके रह गया है। हमें अब प्रेजेंट में जीना है।”
अयांश को लगा कि वह ठीक कह रही है। सच में सब कुछ बदल चुका है। उसका आहना के लिए बिहेवियर भी। बचपन में उसने कभी आहना की इतनी परवाह नही की थी लेकिन इन कुछ दिनों में उसे पता नही क्या हो गया था की अब वह उसकी आँखों में आँसू तक नही देख पा रहा था।
अयांश ने आहना के गाल को छुआ और पूछा, “आहना, मैं तुम्हें सुबह से देख रहा हूँ। तुम इतनी परेशान किस वजह से हो?”
“मैंने तुमसे कहा था कि कुछ भी नही है। नही हूँ मैं परेशान। तुम ये बात बार बार पूछना बंद करो।” आहना ने अयांश के हाथ को अपने गाल से हटाते हुए कहा। उसकी आँखों से फिर से आँसू बहने लगे।
“तुम कह रही हो कुछ भी नही है पर तुम्हारे आँसू कह रहे है कि बहुत कुछ है।” अयांश के इतना कहते ही आहना ने उसकी तरफ देखा और उसके गले से लगकर रोने लगी। अयांश ने उसे खुद से दूर करके उसके आँसू पोंछे और उसका हाथ पकड़ कर कहा, "मुझे बताओ क्या परेशानी है? मैं हूँ ना तुम्हारे साथ।"
“पापा के हार्ट में प्राब्लम हैं। उन्हें रोज बहुत दर्द हो रहा था इसलिए, मैं उन्हें जबरदस्ती हॉस्पिटल लेकर गई। कल ही मुझे उनकी रिपोर्ट्स मिली और मुझे इस बारे में पता चला।” आहना ने उसे सब कुछ बता दिया।
“क्या अंकल को पता है इस बारे में?” अयांश ने पूछा ।
आहना ने ना में गर्दन हिला दी और रोते हुए कहा, “मैं उन्हें नहीं बता सकती।”
“तुम्हें उन्हें इस बारे में बताना होगा आहना।" अयांश ने उसे शांत करने की कोशिश करते हुए कहा।
“मुझे पता है। पापा को ऑपरेशन की जरूरत है लेकिन पापा इसके लिए तैयार नही होंगे। उन्हें पैसो की टेंशन होने लगेगी।” आहना ने अपने आँसू पोंछेते हुए कहा।
“पैसो की टेंशन मत लो। मैं हूँ ना तुम्हारे साथ। मैं तुम्हारी हेल्प करूंगा लेकिन तुम्हें उन्हें बताना होगा।” अयांश ने कहा।
“मैं बता दूंगी उन्हें आज रात पर मुझे बहुत डर लग रहा है। वो ठीक तो हो जाएंगे ना।” आहना ने उसकी तरफ देखकर आँसू भरी आँखों के साथ कहा। अयांश उसका सिर सहलाते हुए मुस्कुराया और हाँ में अपना सिर हिला दिया। वो दोनों पार्क से बाहर आ गए।
अयांश ने गाड़ी आहना के घर के सामने रोकी और उसका हाथ पकड़कर कहा, “तुम बिल्कुल भी टेंशन मत लेना। मैं हूँ तुम्हारे साथ।”
रात को आहना कबीर के लिए दूध गर्म करने जा रही थी कि तभी उसे कमरे से कबीर के जोर से चिल्लाने की आवाज आई। वह भागकर कमरे के अंदर आई तो देखा कि कबीर अपने सीने पर हाथ रखे हुए है और उन्हें बहुत ही दर्द हो रहा है।
"पापा।" वो चिल्लाते हुए कबीर के पास बैठी। उसकी आँखों से आँसू बहने लगे और हाथ डर से काँपने लगे। उसे कुछ समझ नही आ रहा था कि क्या करना है इसलिए उसने काँपते हाथों से अयांश का नंबर मिलाया। कुछ सेकेंड बाद कॉल कनेक्ट हो गई।
“आहना, तुमने इस वक्त फोन किया। सब ठीक है ना?” अयांश ने पूछा।
“अयांश, क्या तुम मेरे घर आ सकते हो?” उसकी घबराई हुई आवाज सुनकर अयांश परेशान हो गया और उसने जल्दी से पूछा, “क्या हुआ, आहना? तुम रो क्यों रही हो?”
“पा…पापा को बहुत दर्द हो रहा है। मुझे कुछ समझ नही आ रहा मैं क्या करूं।” आहना ने अपनी घबराई हुई आवाज़ में कहा।
“आहना, घबराओ मत। रिलैक्स हो जाओ। मैं आ रहा हूँ।" अयांश ने जल्दी से फोन काटा और अपने पिता, राकेश को सब कुछ बता दिया।
“तुमने मुझे शाम को घर आते ही क्यों नहीं बताया इस बारे में। चलो आहना के घर।” राकेश ने कहा और वो दोनों आहना के घर जाने के लिए निकल गए।
वह जल्दी से उसके घर पहुँचे। अंदर पहुँचते ही उन्होंने देखा की आहना कबीर के पास बैठी हुई थी और उसके गालों से लगातार आँसू बहे जा रहे थे। अयांश ने उसे संभाला और कहा, “आहना रोना बंद करो। चलो अंकल को हॉस्पिटल लेकर चलते हैं।”
अयांश और राकेश ने कबीर को गाड़ी में बैठाया और जल्दी ही सब उन्हें लेकर हॉस्पिटल पहुँचे। डॉक्टरों ने कबीर को वार्ड में ले जाकर उन्हें चेक करना शुरू किया। आहना बाहर लगी कुर्सी पर बैठ गई। अयांश भी उसके पास आकर बैठा और कहा, “टेंशन मत लो, आहना। अंकल बिल्कुल ठीक हो जाएंगे।”
“मुझे बहुत डर लग रहा है। मम्मी के बाद, मेरे पास सिर्फ वही है।” आहना ने अयांश को देखते हुए कहा। उसकी आँखों से आँसू फिर से बहने लगे।
आहना पाँच साल की थी जब उसकी माँ, अंजलि की कैंसर से मौत हो गई थी। उस समय उसे कुछ भी महसूस नही हुआ क्योंकि वह बच्ची थी और कबीर ने उसे कभी यह एहसास नही होने दिया कि उसकी माँ अब इस दुनिया में नही रही।
अयांश ने प्यार से उसके आँसू पोंछे और उसे समझाने लगा की कबीर को कुछ नही होगा।
डॉक्टर बाहर आए और राकेश से कहा, “आप मेरे साथ आइए।”
अयांश आहना को भी अपने साथ डॉक्टर के केबिन में ले गया।
"क्या हुआ है उन्हे डॉक्टर?" राकेश ने गंभीर होकर पूछा।
डॉक्टर ने एक गहरी सांस ली और कहा, "हमें जल्दी ही उनका ऑपरेशन करना होगा वरना उनकी जान को खतरा हो सकता है।”
"डॉक्टर, आप किसी बात की चिंता किए बिना जल्द से जल्द ऑपरेशन करें।” राकेश ने आहना के हाथ को पकड़ते हुए कहा।
“क्या मैं पापा से मिल सकती हूं, डॉक्टर?” आहना ने उम्मीद भरी नजरो से डॉक्टर को पूछा।
“आप पाँच मिनिट के लिए मिल सकती है उनसे।” डॉक्टर ने कहा।
आहना बिना कुछ कहे डॉक्टर के केबिन से बाहर निकलकर कबीर के वार्ड में चली गई। उसने उनका माथा छुआ और रोने लगी। “पापा, आप मुझे छोड़ कर नही जा सकते। आपको मेरे लिए जीना होगा।”
अयांश भी उसके पीछे पीछे अंदर आ गया। जब उसने देखा कि वह रो रही है तो उसने उसके कंधे पर हाथ रख दिया ये बताने के लिए कि वो उसके साथ है। उसने अयांश की तरफ अपनी आँसूओं से भरी आँखों से देखा और कहा, “मैं इन्हें ऐसे नही देख सकती, अयांश।”
अयांश उसे वार्ड से बाहर ले आया। उसने उसे कुर्सी पर बैठाया और सबके लिए कॉफी लेने चला गया। कॉफी लाकर उसने एक कप राकेश को दिया और फिर आहना के पास आकर बैठ गया।
“कॉफी पीलो। तुम्हें अच्छा लगेगा।” उसने आहना को कॉफी देते हुए कहा।
“थैंक यू।” आहना ने कॉफी पीते हुए कहा।
पूरी रात अयांश और राकेश आहना के साथ अस्पताल में ही रहे। अगली सुबह, कबीर का ऑपरेशन हुआ। वे तीन घंटे उन सबको तीन साल के बराबर लगे। आहना ने चैन की सांस ली जब डॉक्टर ने कहा कि कबीर अब खतरे से बाहर है।
उसने राकेश और अयांश को थैंक्यू कहा। राकेश ने उसके गाल को छूआ और कहा, “कबीर अब ठीक है। अब परेशान मत होना।”
राकेश वहाँ से चले गए क्योंकि वो पूरी रात अस्पताल में रहकर थक गए थे। आहना ने अयांश को भी वहाँ से जाने के लिए कहा पर अयांश ने जाने से मना कर दिया। वो दोनों कबीर से मिलने उनके कमरे में आए। कबीर को अभी होश नही आया था। आहना वहाँ पड़े सोफे पर आ बैठी और अयांश उसके लिए कुछ खाने के लिए लेने चला गया। वापिस आकर उसने आहना को एक सैंडविच और जूस की बोतल दी और खुद भी सैंडविच खाने लगा।
एक घंटे बाद उन दोनों ने देखा कि कबीर धीरे-धीरे अपनी आँखें खोल रहे थे। अयांश डॉक्टर को बुलाने के लिए कमरे से बाहर चला गया। डॉक्टर ने कबीर का चेकअप किया और कहा, "अब घबराने की कोई बात नही है। सब कुछ ठीक है।"
डॉक्टर के जाने के बाद आहना कबीर के पास बैठ गई। कबीर कुछ बोलने की कोशिश कर रहे थे लेकिन उनके मुंह से कोई शब्द नही निकला।
“अंकल, आप बोलने की कोशिश ना करे।” अयांश ने आहना के पास खड़े होकर कहा।
कुछ वक्त के बाद राकेश भी कबीर से मिलने आए। जब वो कबीर से मिलकर कमरे से बाहर निकले तो आहना उनके पास पहुँची और कहा, “थैंक यू, अंकल। आपने हमारे लिए जो किया है, उसे मैं कभी नही भुलुंगी।”
“कैसी बात कर रही हो, आहना। तुम मेरी बेटी हो और मैं अपनी बेटी को तकलीफ में कैसे देख सकता हूँ।” राकेश कि बातों ने आहना को रुला दिया। राकेश हमेशा आहना को अपनी बेटी समझते थे और उन्होंने कबीर के मुश्किल समय में हमेशा उनकी मदद की थी। कबीर राकेश के लिए काम करते है फिर भी राकेश ने कबीर को हमेशा एक दोस्त माना है।
कुछ दिन अस्पताल में रहकर कबीर घर वापिस आ गए। आहना दिन रात कबीर का ख्याल रखती जिससे वह धीरे धीरे ठीक होने लगे पर इस बीच वो कॉलेज बहुत ही कम जा पाई इसलिए अयांश ने उसे अपने नोट्स दे दिए जिनसे वो उन लेक्चर्स को पढ़ पाए जिन्हें वो मिस कर चुकी थी। धीरे धीरे आहना की लाइफ फिर से पहले जैसी होने लगी।
एक दिन, अयांश आहना से मिलने आया। वह अपने कमरे में थी इसलिए कबीर ने अयांश को आहना के कमरे में भेज दिया। अयांश ने उसके कमरे के बाहर आकर दरवाजा खटखटाया और कहा, “आहना, क्या मैं अंदर आ सकता हूँ?”
आहना ने उसे देखा और मुस्कुराकर कहा, “अयांश, तुम्हें पूछने की जरूरत कब से पड़ने लगी। आ जाओ।”
अयांश बेड पर आके बैठ गया और पूछा, "तो कैसी चल रही है लाइफ?"
Continued In जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 3






