लड़के वाले आ गए तो विक्रम और नीत ने अच्छे से उनका स्वागत किया। थोड़ी देर बातें करने के बाद विक्रम ने शीतल से कहा, “जाओ गुरनूर को ले आओ।”
शीतल ऊपर गुरनूर के कमरे में आई तो देखा गुरनूर अपनी डायरी में कुछ लिख रही थी। उसने बस सूट पहनकर अपने बालों को सही किया हुआ था। उसके चेहरे पर कोई मेकअप नही था और न ही उसने अपने कानों या हाथों में कुछ पहना हुआ था। उसे ऐसे देखकर शीतल ने कहा, “गुरनूर, लड़के वालों के सामने जाने के लिए कोई ऐसे तैयार होता है। कानों में तो कम से कम कुछ पहन लो।”
“मम्मी, मैं कोई खरीदा या बेचे जाने वाला सामान नही हूँ जिसे आप किसी के सामने बिना मेंटेन किए प्रेसेंट करदेंगी तो वो खरीदने से मना करदेंगे। इंसान हूँ मैं और मुझे ऐसे ही रहना पसंद है। मैं नीचे जा रही हूँ ना आपके साथ। यही बहुत है। पहले ही कह रही हूँ मुझसे और कोई उम्मीद मत रखना।” गुरनूर ने अपनी डायरी बंद कर उसे बेड पर रखते हुए गुस्से में कहा।
“ठीक है। चलो।” कहते हुए शीतल गुरनूर को नीचे ले आई। गुरनूर ने बेमन से सबको नमस्ते कहा और एक कुर्सी पर बैठ गई। उसने किसी को भी आँख उठाकर देखा तक नही। उसे देखकर लड़के की माँ ने नीत से कहा, “लगता है इसे ज्यादा सजने संवरने का शौंक नही है।”
नीत ने शीतल को गुस्से से देखा और फिर लड़के की माँ से कहा, “जी, इसे सादगी ज्यादा पसंद है।”
“मेरे बेटे को तो गुरनूर तस्वीर देखते ही पसंद आ गई थी। आप गुरनूर से उसकी मर्जी पूछ लीजिए। अगर उसे भी मेरा बेटा पसंद है तो आज ही रिश्ता पक्का कर देते है।” लड़के की माँ ने मुस्कुराते हुए कहा।
“जी, ज़रूर।” कहते हुए विक्रम खड़े हुए और शीतल के साथ गुरनूर को वहाँ से अपने कमरे में ले आए। उन्होंने गुरनूर से उसकी मर्ज़ी पूछी तो गुरनूर ने गुस्से में कहा, “पापा, मैंने नही करनी शादी। आप मना कर दीजिए सबको। बुआ को भी।”
गुरनूर कमरे से बाहर निकलकर ऊपर अपने कमरे में चली गई। नीत ने उसे ऊपर जाते हुए देखा तो उसने विक्रम के कमरे में आकर पूछा, “क्या कहा गुरनूर ने?”
“वो अभी शादी के लिए तैयार नही है, दीदी।” विक्रम ने कहा तो नीत ने उसके कंधे पर हाथ रखकर उसे समझाते हुए कहा, “विक्रम, वो तो बच्ची है। मना करेगी ही। तुम तो समझदार हो ना। उसे समझाओ। इतना अच्छा लड़का और परिवार है। उसकी जिंदगी बन जाएगी। वो लोग रोके की तैयारी करके आए है। मैं तो कहती हूँ अभी रोका करदो। एक बार रोका हो जाएगा तो अपने आप मान जाएगी तुम्हारी गुरनूर।”
विक्रम ने कुछ सोचा और कहा, “शायद आप ठीक कह रही है, दीदी। रोका कर देते है। गुरनूर मान जाएगी।”
विक्रम की बात सुनकर शीतल हैरान रह गई। नीत ने मुस्कुराते हुए शीतल को देखा और कमरे से बाहर चली गई। उसके जाते ही शीतल ने गुस्से में विक्रम से कहा, “आपका दिमाग तो नही खराब हो गया, विक्रम। आप देख पा रहे है की मेरी बेटी ये शादी नही करना चाहती, फ़िर भी आप अपनी बहन की बातों में आकर मेरी बेटी का रोका करने की बात कर रहे है। अरे आपकी ये बहन तो चाहती ही यही है कि इस घर में जितने फैसले हो, वो वही ले। उन्हें बस अपने भाई के घर में भी अपनी हुकुमत चाहिए और आप उनकी बातों में आ भी जाते है।”
विक्रम खामोश रहा क्योंकि वो जानता था शीतल का गुस्सा जायज़ है क्योंकि वो झूठ नहीं बोल रही थी। उसे खामोश देख शीतल ने कहा, “आपको मेरी बेटी का जबरदस्ती रिश्ता तय करना है। कर दीजिए लेकिन अगर गुरनूर ने इस शादी से बचने के लिए कल को कोई भी ऐसा वैसा कदम उठाया तो मुझे मत कहना। इसके जिम्मेदार आप खुद होंगे और आपकी बहन।”
शीतल भी गुस्से से कमरे से निकल गई। नीत ने शीतल से गुरनूर को नीचे लाने के लिए कहा तो शीतल गुरनूर को समझाकर नीचे ले आई और देखते ही देखते गुरनूर का रोका हो गया। जिस लड़के से उसका रोका हुआ था, वो तो गुरनूर को ही देखे जा रहा था पर इस सबके बीच गुरनूर बस खामोशी से बैठी रही।
लड़के वालों के जाने के बाद गुरनूर ने अपने कमरे में जाकर गुस्से में वो सारा सामान ज़मीन पर फैंक दिया जो लड़के की माँ ने उसे दिया था। गुरनूर ने अपना कमरा बंद करके रावी को फोन लगाया और उसे इस बारे में सब कुछ बता दिया।
रावी को ये सब जानकर एक झटका सा लगा और उसने कहा, “विक्रम अंकल तुम्हारे साथ ऐसा नही कर सकते।
“पर ऐसा कर दिया है उन्होंने रावी।” गुरनूर ने गुस्से में कहा। उसकी आवाज़ में गुस्सा महसूस कर रावी ने कहा, “तुम शांत हो जाओ, गुरनूर।”
उसकी बात सुनकर गुरनूर ने कहा, “कैसे शांत हो जाऊॅं, रावी। तुम जानती हो ना मैं श्रेयांश…”
कहते कहते गुरनूर रुक गई तो रावी ने कहा, “मैं श्रेयांश को बताऊँ इस बारे में। वो जरूर कुछ करेगा तुम्हारे लिए।”
“नहीं, मैं श्रेयांश को नहीं बता सकती। वो शो का कॉन्ट्रैक्ट मिलने की वजह से इतना खुश है और अपने वीज़ा प्रोसेस वैगरह में बिजी है। मैं उसकी खुशी खराब नहीं करना चाहती।” गुरनूर ने कहा तो रावी ने कहा, “तो तुम्हारी खुशी भी तो श्रेयांश ही है गुरनूर।”
गुरनूर ने कुछ नही कहा और फोन काट दिया। रावी गुरनूर के लिए परेशान हो गई पर वो कुछ भी नहीं कर सकती थी। श्रेयांश को बताने के लिए भी उसे गुरनूर ने मना कर दिया था।
वहीं जब विक्रम ने शुभम और मधु को गुरनूर का रिश्ता पक्का हो जाने के बारे में बताया तो वो दोनों भी हैरान रह गए और मधु का दिल टूट गया। वो दोनों इस वक्त अपने कमरे में बैठे हुए थे। मधु ने रोते हुए शुभम से कहा, “आपने मुझसे कहा था की गुरनूर मेरी बहु बनकर मेरे पास आ जाएगी तो उसका रिश्ता कहीं और कैसे हो सकता है। आपने जब मुझसे कहा की हम गुरनूर को अपनी बहु बनाकर इस घर में हमेशा हमेशा के लिए ले आयेंगे तो कितना खुश थी मैं लेकिन अब देखिए, गुरनूर किसी और की बहु बनेगी।”
शुभम ने जैसे ही मधु को समझाने के लिए कुछ कहना चाहा, मधु ने कहा, “मुझे कुछ नहीं पता। आप अभी विक्रम भैया से बात करकर गुरनूर का रिश्ता माॅंगिए नील के लिए।”
शुभम जानते थे की मधु अब जिद्द कर रही है पर उन्हें ये भी समझ थी की मधु की जिद्द पूरी करने के लिए वो ऐसे ही विक्रम को फोन कर उन्हें गुरनूर का रिश्ता तोड़ने के लिए तो नही कह सकते थे। उन्हें बस इतना मालूम था की उन्हें इस वक्त मधु को कुछ भी करके समझाना पड़ेगा।
Continued In आर्ज-ए-इश्क - 23






