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Saturday, 25 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 38


 

अयांश जल्दी ही कबीर के साथ अपने घर पहुँच गया। राकेश, रिद्धिमा और नुपुर उस वक्त लिविंग रूम में बैठे हुए थे। जैसे ही उन सबने अयांश को देखा, वो सब एक पल के लिए खुश हो गए ये सोचकर की अयांश वापिस आ गया है पर जब उन्होंने अयांश के चेहरे पर गुस्से को देखा तो वो सब घबरा गए। 


अयांश के पीछे कबीर भी खामोशी के साथ खड़े थे। अयांश राकेश के सामने गया और कहने लगा, “आपको मैंने आहना का ख्याल रखने के लिए कहा था। उसकी जान लेने के लिए नही।” 


राकेश ने जैसे ही ये सुना उन्होंने हैरानी से अयांश को देखा ये सोचते हुए की उसे इस बारे में कैसे पता चला। उन्हें ऐसे देखकर अयांश ने कहा, “मैं आपसे सच जानना चाहता हूँ की क्यों किया आपने ऐसा।” 


राकेश अयांश से नजरें नही मिला पा रहे थे। अयांश को गुस्सा आने लगा तो उसने कहा, “मैंने आपसे कुछ पूछा है पापा। आखिर आपकी ऐसी कौन सी मजबूरी थी की आपने नुपुर का साथ दिया आहना को मारने के लिए।” 


“अपने बिज़नेस के लिए।” राकेश ने अचानक से कहा तो अयांश और कबीर चौंक गए। राकेश ने आगे कहा, “तुम्हारे मामा ने रिद्धिमा के कहने पर एक लेटर ऑफिस में भिजवाया था जिसमें लिखा था की जो बिजनेस तुम्हारे मामा ने मुझे दिया था, वो उसे वापिस लेना चाहते है। कबीर के सामने की ही बात है ये। मुझे पता था ये सब तुम्हारी माँ ने किया है इसलिए मैं उससे पूछने घर आया की उसने ये क्यों किया। उस वक्त इसने मुझसे कहा की ये मेरे बिज़नेस को कुछ नही होने देगी बस मुझे आहना को मारने में इनकी मदद करनी थी। तुम्हें कुछ भी करके दूर भेजना था आहना से जिससे तुम उसे बचा न पाओ। मैं उस बिज़नेस को जाने नही देना चाहता था क्योंकि ये मेरी मेहनत है और तुम्हारा फ्यूचर। इसलिए मैंने आहना और अपने बिजनेस में से बिजनेस को चुना।” 


“एक बिज़नेस के लिए आपने आहना की जान ले ली। इतना-सा भी मेरा ख्याल नही आया आपके मन में की मुझे ये सब पता चलेगा तो मेरे ऊपर क्या बीतेगी और क्या गलती थी उसकी, इतना प्यार करती थी वो आपसे।” अयांश ने कहा। 


“इसे कुछ फ़र्क नही पड़ता, अयांश।” कबीर अंदर आए और राकेश के सामने आकर कहने लगे, “सही कहा था तुमने आहना से राकेश। लोग बिजनेस और पैसे के लिए इंसानियत की हदें भी पार कर देते है। तुमने भी यही किया और मार डाला मेरी बच्ची को। उस बच्ची को जिसने तुम्हें अपना पिता माना था।” 


राकेश ने अपनी नजरें झुका ली क्योंकि उन्हें बहुत ज्यादा पछतावा हो रहा था। अयांश नुपुर के सामने आया और उससे कहा, “और तुम, नुपुर। तुमसे तो कुछ कहना ही सही नही है। आखिरकार, तुम जो चाहती थी वो कर ही लिया तुमने।” 


नूपुर ने उसे देखा और गुस्से से कहा, “वो आहना यही डिजर्व करती थी। बहुत शौक था ना उसे मेरे और तुम्हारे बीच आने का इसलिए मैंने उसे हमेशा हमेशा के लिए तुमसे दूर भेज दिया।” 


“तुम आहना के लिए मेरा प्यार खत्म नही कर पाई इसलिए तुमने उसे ही मुझसे दूर कर दिया क्योंकि मेरी आहना मुझसे किसी भी हालत में दूर नही जाना चाहती थी और वो जिंदा रहने के लिए लड़ती भी पर शायद उसे पता लग गया था की ये दुनिया मुझे उसके साथ नही देख सकती और उसे मुझसे दूर करने के लिए बार बार सब उसे तकलीफ पहुँचाएंगे इसलिए उसने हार मान ली जिंदगी से और चली गई वो मुझे छोड़कर पर वो मुझसे दूर जाकर भी कभी मुझसे दूर नही होगी। वो मेरे अंदर हमेशा जिंदा रहेगी। मेरे दिल में, मेरी सांसों में और मेरी आँखों में भी। कभी भी अलग नही होगी वो मुझसे।” अयांश की ये बातें सुनकर नुपुर ने गुस्से से उसे देखा तो अयांश ने कहा, “पर तुम्हें खुद से अलग करने जा रहा हूँ मैं। मैं अपनी आहना के बिना रहूंगा और तुम मेरे बिना रहना।” 


अयांश ने राकेश और रिद्धिमा को देखा और उनसे कहा, “मैं कुछ दिनों बाद हमेशा के लिए अमेरिका चला जाऊंगा आप दोनों को छोड़कर मॉम डैड क्योंकि आप दोनों भी मेरी नज़रों में आहना के उतने ही गुनहगार है जितनी नुपुर।” 


“अयांश बेटा, तुम…,” राकेश ने अयांश को देखकर कहना चाहा पर अयांश ने उनकी बात बीच में ही काटते हुए कहा, “मैं कुछ नही सुनना चाहता पापा। चाहूँ तो आप सबको अरेस्ट करवा सकता  हूँ। प्रूफ भी है मेरे पास पर जाते जाते आहना ने ये वादा लिया था की किसी के साथ कुछ भी नही करना है क्योंकि वो खुद तकलीफ सह सकती है पर अपनी वजह से किसी को तकलीफ में नही देख सकती इसलिए अब आपकी सजा यहीं है की आपको मुझसे दूर होना होगा। जा रहा हूँ मैं हमेशा हमेशा के लिए अमेरिका। आपका वो बिजनेस जिसके लिए आपने मेरी आहना को मुझसे दूर कर दिया, आप ही रखेंगे अब उसे। मुझे नही चाहिए वो।” 


अयांश वहाँ से चला गया। कबीर भी उसके पीछे पीछे घर से बाहर आ गए। उसके जाने के बाद नुपुर को घर लौटना पड़ा क्योंकि अयांश ने उसे डायवोर्स दे दिया था पर अंबर ने उसे अपने घर में रहने की परमिशन नही थी। नुपुर को डायवोर्स देने के कुछ दिनों बाद ही अयांश अमेरिका जाने के लिए निकल गया। वो फ्लाइट में बैठे हुए खिड़की से आसमान को देख रहा था की तभी उसे वो पल याद आ गया जब अपने बर्थडे के एक दिन पहले वो आहना के साथ उसके कमरे में बैठा हुआ था और आहना ने उसे एक नॉवेल के बारे में बताते हुए उससे कहा था की, “हमारी कहानी तो बहुत खूबसूरत है क्योंकि हमारा प्यार तो पूरा होगा ना।” 


ये याद करते ही अयांश की आँख में से आँसू निकलकर गाल पर बह गया। उसने उसे जल्दी से पोंछा। 


“हमारी कहानी बेशक दुनिया की नजरों में अधूरी है पर मैं इस कहानी को पूरा करूंगा आहना। हमारी कहानी अधूरी रहकर भी पूरी होगी। दुनिया के लिए तुम मेरी जिंदगी से गई हो पर मैं तुम्हें अपनी जिंदगी में हमेशा रखूंगा।” अयांश ने अपने मन में कहा जैसे की वो आहना से ही ये सब कह रहा हो।


अमेरिका, वर्तमान समय


आहना का उसको छोड़ कर जाना याद करते हुए अयांश की आँखें आँसूओं से भरी हुई थी। वो खड़े होकर आहना की तस्वीर के पास गया और छूते हुए कहने लगा, “मैंने अपना वादा निभाया आहना। तुम मुझमें हमेशा जिंदा रहोगी और मैं अपनी आखिरी सांस तक सिर्फ तुम्हारा रहूंगा। किस्मत की मर्जी थी तुम्हें मुझसे दूर करना पर मेरी मर्जी है तुम्हारे साथ जीना। अपनी आखिरी सांस तक तुम्हारी उन यादों के साथ जीना जो हमने बहुत सारे खूबसूरत लम्हों को जीकर बनाई थी। आई लव यू, आहना।” 


अपने आँसू पोंछते हुए अयांश जैसे ही मुड़ा, हैरान रह गया क्योंकि उसके सामने आहना खड़ी थी जो मुस्कुराते हुए उसे देख रही थी। उसने सफेद रंग का गाउन पहन रखा था जिसमें वो बहुत खूबसूरत लग रही थी। अयांश उसे देखकर मुस्कुराने लगा। उसने आहना के करीब आने की कोशिश की तो आहना ने कहा, “रूक जाओ, अयांश।” 


अयांश वहीं रुक गया तो आहना ने कहा, “तुम मुझे देख सकते हो और मेरे करीब होने के एहसास को महसूस कर सकते हो पर मुझे छू नही सकते क्योंकि मैं अब बस एक परछाई हूँ। तुमसे कहा था ना की खुदको कभी भी अकेला मत समझना क्योंकि मेरे पास होने का एहसास तुम्हें होता रहेगा। जैसे तुमने मुझे जिंदा रखा हुआ है वैसे ही मैं भी हमेशा एक परछाई बनकर तुम्हारे साथ रही  हूँ।”


“तुम्हें नही छोड़कर जाना चाहिए था मुझे आहना।” अयांश ने कहा। उसकी आवाज में एक दर्द था।


“ये मेरे हाथ में नही था अयांश। मैं तुम्हें इस हालत में छोड़कर कभी नही जाना चाहती थी पर शायद हमारी किस्मत में यही लिखा था। अयांश, तुमने मुझसे एक बार कहा था की अगर हम किसी से प्यार करते है तो उस प्यार को जिंदा रखते हुए उसे खुशी से याद करना चाहिए। उदास होकर नही। तो तुम भी मुझे खुशी से याद किया करो। इन आँसूओं के साथ नही क्योंकि मैं कहीं नही गई  हूँ। तुमने हमारे प्यार को जिंदा रखा हुआ है ना। उस प्यार के साथ मैं भी तुम्हारे अंदर जिंदा हूँ।” आहना ने कहा। अयांश खामोशी से आँखों में आँसूओं के साथ उसे देखता रहा। 


“अयांश, आज मैं तुमसे फिर से एक वादा लेना चाहती हूँ। मुझसे वादा करोगे?” आहना ने पूछा तो अयांश ने हाँ में सिर हिला दिया। 


“वापिस चले जाओ अयांश। वहाँ जहाँ हमारी यादें रहती है और माफ करदो अब सबको। किसी और के लिए नही अपने लिए। अगर तुम सबको माफ करदोगे न तो खुदको भी इस दर्द से रिहा कर पाओगे जिसे तुम हर रात महसूस करते हो। वो दर्द जिसकी वजह से मुझे भी तकलीफ होती है क्योंकि मैं तुम्हें ऐसे नही देख सकती।” आहना ने कहा तो अयांश ने उससे ये वादा कर दिया की वो वापिस चला जाएगा। 


आहना ने उसकी तरफ मुस्कुरा देखते हुए “आई लव यू” कहा और फिर अयांश की आँखों के सामने से ओझल हो गई। 


“आई लव यू, टेडी बियर।” अयांश ने कहा और आहना की तस्वीर को देखकर मुस्कुरा उठा।


दो दिन बाद अयांश इंडिया वापिस आ गया। वो सबसे पहले आहना के घर जाकर कबीर से मिला जो उसे देखकर बहुत खुश थे। कबीर आजतक राकेश को माफ नही कर पाए थे पर उनकी अयांश से कोई नाराज़गी नही थी। 


कबीर से मिलने के बाद अयांश अपने घर गया। उसके यहाँ से जाने के बाद उसके घर में पहले जैसा कुछ भी नही रहा था। राकेश ने आहना के साथ जो भी किया था, उसके पछतावे में जीते हुए वो बीमार रहने लगे थे और रिद्धिमा अयांश का जाना बर्दाश्त नही कर पाई थी इसलिए वो डिप्रेशन में रहने लगी थी। 


राकेश और रिद्धिमा लिविंग रूम में बैठे थे की तभी उन्हें घर के बाहर एक गाड़ी के रुकने की आवाज आई। उन दोनों ने बाहर आकर देखा तो उनकी आँखों में आँसू आ गए। अयांश उनके सामने खड़ा उनकी तरफ ही देख रहा था। रिद्धिमा आकर उसके गले लग गई और रोने लगी। उन्होंने उसके चेहरे को अपने हाथों में थामा और उसे ध्यान से देखने लगी। राकेश भी उनके पास आए और अयांश को गले से लगा लिया। उनके आँसू बता रहे थे की उन्होंने अयांश के लौटकर आने का कितना इंतजार किया था। 


वो दोनों उसे घर के अंदर ले गए। जब अयांश ने उनसे कहा की उसने उन्हें माफ कर दिया है तो वो दोनों खुश हो गए। वो दोनों इतने वक्त के बाद मुस्कुरा रहे थे। उन दोनों ने अयांश के साथ बहुत सारी बातें की। रिद्धिमा ने उस दिन सारा खाना अयांश की पसंद का बनाया। जैसे ही अयांश अपने कमरे में गया, उसने देखा की उसका कमरा पहले जैसा ही था। कुछ भी नही बदला था। 


रिद्धिमा और राकेश ने खाने के बाद उसे सोने के लिए कहा क्योंकि वो सफर से काफी थक चुका था। 


अगली सुबह घर में सब लोग हैरान थे क्योंकी उन्हें इतने वक्त के बाद राकेश पहले जैसे देखने के लिए मिल रहे थे क्योंकि अयांश के जाने के बाद राकेश ने खुद को पूरी तरह से बदल लिया था लेकिन आज वो पहले की ही तरह सुबह सुबह बाहर लॉन में आकर बैठ गए थे और रिद्धिमा जो उनसे पहले हर वक्त लड़ती रहती थी, वो अब उनकी चाय खुद लेकर आ रही थी। रिद्धिमा ने आकर चाय की ट्रे टेबल पर रखी और वो दोनों हँसते हुए चाय पीने लगे। कुछ वक्त के बाद अयांश भी आ गया और उनसे बातें करने लगा। अयांश के आ जाने से तो जैसे उनके घर में खुशियां लौट आई थी। 


दिवाली आने वाली थी इसलिए रिद्धिमा और राकेश ने तय किया की इस बार वो फिर से दिवाली धूम धाम से मनाएंगे। अयांश भी उन्हें खुश देखना चाहता था इसलिए वो भी मान गया। सभी कुछ दिन पहले से ही दिवाली की तैयारियों में लग गए और रिद्धिमा ने अच्छे से पूरे घर को दिवाली के लिए सजवाया। 


दिवाली की शाम को उनके घर जितने मेहमान आए थे, सभी एंजॉय कर रहे थे पर अयांश अकेला खड़ा सबको देख रहा था। जब उसकी नज़र अपने घर के बाहर बनी सीढ़ियों पर गई तो वो मुस्कुराने लगा। उसे वो पल याद आ गया जब दिवाली पर उसने और आहना ने वहाँ एक साथ बैठकर दीए जलाए थे और उसने आहना के साथ फ्लर्ट भी किया था। इतने दिनों में पहली बार वो आहना को खुश होकर याद कर रहा था। वो ये सब सोचते हुए मुस्कुरा रहा था की तभी उसे किसी ने बुलाया। 


अयांश ने आवाज वाली दिशा में देखा तो हैरान रह गया। वहाँ कबीर खड़े थे। अयांश ने उन्हें इनवाइट किया था पर उसे उम्मीद नही थी की कबीर आएंगे। वो जल्दी से उनके पास गया और उनके पैर छूकर उन्हें हैप्पी दिवाली कहा। राकेश ने कबीर को वहाँ देखा तो उन्हें अपनी आँखों पर यकीन ही नही हुआ। कबीर ने आगे बढ़कर राकेश को गले लगा लिया। 


राकेश उनसे अलग होकर रोने लगे तो कबीर ने कहा, “क्या कर रहे हो, राकेश। खुशी का मौका है ये। जो कुछ भी हुआ उसे भुलाकर एक नई शुरुआत करते है।” 


राकेश ने हाँ में सिर हिलाते हुए कबीर को फिर से गले लगा लिया। अयांश भी उन्हें साथ देखकर बहुत खुश था। वो दोनों जब अलग हुए तो अयांश को उनके सामने खड़ी आहना दिखाई दी जो उन सबको देखकर मुस्कुरा रही थी। 


“खुश हो ना अब आहना तुम।” अयांश ने मन ही मन में उससे पूछा तो आहना ने मुस्कुराते हुए हाँ में सिर हिला दिया और फिर अयांश की नज़रों के सामने से ओझल हो गई। 


दिवाली के बाद कबीर ने राकेश के साथ उनके घर आकर रहना शुरू कर दिया था क्योंकि राकेश और अयांश दोनों ही नही चाहते थे की कबीर अकेले रहे। रिद्धिमा भी इसके लिए खुशी खुशी मान गई। 


अयांश ने राकेश का बिजनेस संभालना शुरु कर दिया था और अब राकेश घर में रहकर आराम करते थे। रिद्धिमा चाहती थी की अयांश शादी करके सेटल हो जाए और उन्होंने उससे इस बारे में बात भी की पर अयांश ने ये कहकर मना कर दिया की वो सिर्फ आहना का है। रिद्धिमा ने उसके बाद उससे इस बारे में कोई बात नही की क्योंकि वो अयांश को कोई भी तकलीफ नही पहुँचाना चाहती थी। 


एक दिन ऑफिस के बाद शाम में अयांश उसी पार्क में आया, जिसमें वो और आहना बचपन से आया करते थे और बैंच पर जाकर बैठ गया। वो सामने खेलते हुए बच्चों को देख ही रहा था की तभी उसे ऐसा लगा की किसी ने उसके हाथ को पकड़ा है। उसने देखा तो उसके साथ आहना बैठी हुई थी जो मुस्कुराते हुए प्यार से उसकी आँखों में देख रही थी। तभी अयांश का ध्यान उनके साइड वाली बैंच पर गया और उसने अपने आप को और आहना को वहाँ बैठे हुए देखा जब वो दोनों ही कॉलेज के बाद अकसर इसी पार्क में आकर बैठा करते थे और बहुत सारी बातें किया करते थे। अयांश उस बैंच की तरफ देखकर मुस्कुराया और कहने लगा, “सच ही है ये की इस दुनिया से प्यार करने वाले तो जा सकते है पर जिंदा रहती है हमेशा, मोहब्बतें।” 

समाप्त!


(जल्द ही मुलाक़ात होगी नई कहानियों के साथ).



Friday, 24 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 37



आहना के हाथ को अपने हाथ से छूटता हुआ देखकर अयांश ने उसके चेहरे को पकड़ा और उसे जगाने की कोशिश करने लगा, "आहना, आहना उठो। तुम... तुम मुझे ऐसे छोड़कर नही जा सकती हो। आहना, उठो ना।” 


अयांश ने आहना को कंधे से पकड़कर अपने सीने से लगा लिया और रोने लगा। उसकी आवाज सुनकर कबीर भी अंदर आ गए और दरवाज़े पर ही रुक गए। डॉक्टर अंदर आए।  उन्होंने आहना को देखकर कबीर से कहा, “आई एम सॉरी। शी इज नो मोर।” 


ये सुनते ही कबीर रोने लगे। आखिरकार उन्होंने अपनी बेटी को खो ही दिया। अयांश ने आहना के माथे को चूमा और उसके चेहरे को देखने लगा। उसे अभी भी उम्मीद थी की आहना उसे देखकर मुस्कुरा देगी क्योंकि उसका दिल अभी भी ये मान नही पा रहा था की उसकी आहना उसे छोड़कर जा चुकी है। 


हॉस्पिटल के स्टाफ ने आहना की बॉडी को कबीर और अयांश को सौंप दिया। अयांश कबीर के साथ आहना को घर ले आया। अयांश ने आहना को अपनी बाहों में उठाया हुआ था। एक पल के लिए उसे लगा की आहना अपनी बाहों को उसके गले में लपेट देगी पर अब ऐसा कुछ भी नही होने वाला था क्योंकि उसकी आहना उसे छोड़कर जा चुकी थी। 


उसने आहना को हॉल में लेटा दिया। जैसे ही आस पड़ोस के लोगों को आहना के बारे में पता चला, सभी वहाँ धीरे धीरे आकर कबीर से अफसोस जताने लगे। कबीर ने अयांश को कपड़े बदलकर थोड़ा आराम करने के लिए कहा। अयांश के पास उसका सामान था क्योंकि वो जबसे वापिस लौटा था, अपने घर गया ही नही था। वो अपना सामान लेकर इस बार गेस्ट रूम में ना जाकर आहना के कमरे में चला गया जहाँ आहना के होने का एहसास वो महसूस कर पा रहा था। 


उसने बाथरूम में जाकर अपना चेहरा धोया, कपड़े बदले और जो लेटर उसे आहना ने दिया था उसे संभालकर अपने पर्स में रख लिया। वो कमरे से बाहर आया तो देखा की राकेश, रिद्धिमा और नुपुर घर के अंदर आ रहे थे जिन्हें ड्राइवर ने राकेश के पूछने पर बताया था की अयांश कहाँ है क्योंकि जब वो घर नही पहुँचा तो उन्हें उसकी फिक्र होने लग गई थी। कबीर ने जब उन्हें वहाँ देखा तो उन्हें गुस्सा आ गया पर ऐसे मौके पर लोगों के सामने वो कोई तमाशा नही करना चाहते थे। अयांश को भी नुपुर को वहाँ देखकर बहुत गुस्सा आने लगा पर उसने कुछ नही कहा। 


रात होने लगी थी तो धीरे धीरे सभी लोग कबीर से मिलकर अपने अपने घर चले गए। अब कबीर का मन कर रहा था की वो राकेश, नुपुर और रिद्धिमा को वहाँ से जाने के लिए कह दे और वो ऐसा करने भी वाले थे लेकिन फिर उन्हें आहना से किया हुआ वादा याद आ गया और वो रुक गए।


नुपुर आहना को देखकर बहुत ही खुश हो रही थी पर राकेश बहुत ही ज्यादा दुखी थे क्योंकि उन्होंने सपने में भी नही सोचा था की उनकी वजह से आहना ये दुनिया छोड़कर चली जाएगी। 


पुलिस ने उस गाड़ी को ढूंढने की बहुत कोशिश की जिससे आहना का एक्सीडेंट हुआ था पर उन्हें वो गाड़ी कहीं नही मिली इसलिए कबीर ने पुलिस को आगे कुछ भी करने से मना कर दिया ये कहते हुए की उन्हें किसी के ऊपर कोई केस नही करना है।


अगली सुबह आहना का अंतिम संस्कार कर दिया गया। अयांश ने आहना की जलती हुई चिता को देखकर मन ही मन में कहा, “जिस हाथ को मैं जिंदगी भर के लिए थाम कर रखना चाहता था वही हाथ मेरे हाथ से छूट गया। काश मैं तुम्हें छोड़कर न गया होता और यहाँ रहकर तुम्हारा ख्याल रखता तो आज तुम मेरे साथ होती, आहना।” 


अयांश अपने घर ना जाकर कबीर के साथ उनके घर चला गया क्योंकि वो कुछ दिनों के लिए आहना के कमरे में रहकर उसके एहसासों के साथ रहना चाहता था। 


वो आहना के बेड पर आँखें बंद करकर आराम से लेटा हुआ था। आहना के साथ बिताया हुआ एक एक लम्हा उसकी आँखों के सामने आ रहा था जिससे अयांश दर्द में भी मुस्कुरा उठा। वो ये याद कर ही रहा था की तभी उसे आहना के दिए हुए लेटर का ख्याल आया। उसने जल्दी से वो लेटर अपने पर्स से निकाला और खोलकर पढ़ने लगा जिसमें लिखा था, 


अयांश, 


जब तक तुम ये लेटर पढ़ोगे, मैं तुमसे बहुत दूर जा चुकी होयूंगी क्योंकि मुझे पता लग चुका है की मेरे पास अब ज्यादा वक्त नही है और हमारे पास भी नही। तुमसे वादा किया था की जिंदगी भर तुम्हारे साथ रहूंगी पर शायद जिंदगी ही अब सिर्फ कुछ मिनटों के लिए हमें साथ रहने देगी। मैं तुमसे बस इतना कहना चाहती हूँ की आई लव यू और मेरे चले जाने के बाद खुद को कभी अकेला मत समझना। मेरे पास होने का एहसास हमेशा तुम्हें होता रहेगा और मैं तुम्हारे अंदर जिंदा रहूंगी और हमारी उन यादों में भी जो हमने मिलकर बनाई है। 


एक और बात तुम्हें बतानी है। पता नही तुम यकीन कर पाओगे या नही पर फिर भी। मेरी मौत को एक्सीडेंट का नाम दे देंगे सब लोग पर ये एक्सीडेंट नही है। ये सब नुपुर की प्लैनिंग है जिसमें उसके साथ राकेश अंकल भी शामिल है। मैं अपनी आई साइट के लिए कुछ दवाईयां लेती थी जिन्हें नुपुर ने मेरे घर आकर स्लो पॉइजन के साथ बदल दिया था। वो मेरी पेंटिंग्स देखने के बहाने से मेरे कमरे में मेरे साथ आई थी और फिर मुझे किसी बहाने से बाहर भेजकर उसने ये काम किया। शायद उस स्लो पॉइजन का भी असर हो रहा है मेरे ऊपर इस वक्त। मैंने नुपुर और राकेश अंकल की बातें भी सुनी थी ऑफिस में जहाँ से मुझे पता चला की वो भी मुझे मरवाना चाहते है और देखो, उनका प्लान कामयाब भी हो गया। जा रही हूँ मैं। 


अयांश, मैं जानती हूँ मैं अच्छी नही हूँ। अच्छा नही लग रहा होगा न तुम्हें गुस्सा आ रहा होगा मेरे ऊपर क्योंकि मैं तुम्हें छोड़कर चली गई। मुझे माफ कर देना अयांश। आई विल ऑलवेज लव यू। अपना ख्याल रखना। 


तुम्हारी टेडी बियर


अयांश की आँखें आँसूओं से भरी हुई थी। उसे नुपुर और राकेश के ऊपर बहुत ही ज्यादा गुस्सा आ रहा था इस वक्त। उसने नज़रे उठाकर देखा तो कबीर दरवाज़े पर खड़े हुए उसे ही देख रहे थे। अयांश ने जल्दी से अपने आँसू पोंछे और लेटर को अपनी जेब में डाल लिया। कबीर कमरे के अंदर आए। उनके हाथ में एक ट्रे थी जिसपर दो कॉफी से भरे हुए कप रखे हुए थे और प्लेट में कुछ सैंडविच रखे हुए थे। उन्होंने ट्रे टेबल पर रखी और अयांश के सामने बैठते हुए पूछा, “तुमने ये लेटर पढ़ लिया है तो तुम्हें सब कुछ पता चल गया होगा की आहना के साथ क्या हुआ था?” 


अयांश कबीर की बात सुनकर हैरान रह गया। उसे ऐसे देखकर कबीर ने कहा, “तुम्हें हैरान होने की जरूरत नही है बेटा। ये लेटर आहना ने मुझसे ही लिखवाया था हॉस्पिटल में। मुझे भी ये सब जानकर उतना ही गुस्सा आया था जितना तुम्हें आ रहा है लेकिन मैं कुछ नही कर सकता क्योंकि आहना ने मुझसे ये वादा लिया था की मैं कुछ न करूं। शायद वो अपनी वजह से किसी को भी तकलीफ नही पहुँचाना चाहती थी।” 


“क्या नुपुर आहना से मिलने यहाँ आई थी?” अयांश ने पूछा तो कबीर ने हाँ में सिर हिला दिया तो अयांश ने कहा, “इन लोगों ने मेरी आहना के साथ जो कुछ भी किया, उसका फैसला आज ही होगा।” 


“पहले तुम ये कॉफी पीलो और ये सैंडविच खालो। जबसे पेरिस से लौटे हो कुछ खाया नही है तुमने।” कबीर ने अयांश को सैंडविच देते हुए कहा। अयांश ने बड़ी मुश्किल से एक सैंडविच खाया और कॉफी पी। वो जल्द से जल्द जानना चाहता था कि उसकी आहना के साथ सबने ये सब क्यों किया इसलिए वो कबीर के साथ अपने घर जाने के लिए निकल गया।


Continued In जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 38

Thursday, 23 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 36



आहना का एक्सीडेंट हो गया था और वो खून से लथपथ हो गई थी। आहना की आँखों के सामने अयांश का चेहरा आता है और फिर वो बेहोश हो गई। उसके आसपास लोगों की भीड़ जमा हो गई। उन्हीं में से किसी ने जल्दी से एंबुलेंस को फोन किया। जल्दी ही एंबुलेंस वहाँ पहुँच गई और दो वार्ड बॉयज ने आहना को उठाकर स्ट्रैचर पर लेटा दिया। उसके साथ जो सामान था, वो भी किसी ने एंबुलेंस के अंदर रख दिया। उसकी नब्ज़ बहुत ही धीमे चल रही थी पर उसका काफी खून बह चुका था। 


जल्द ही उसे हॉस्पिटल में एडमिट कर दिया गया। आहना का सारा सामान भी खून से सना हुआ था। हॉस्पिटल के स्टाफ को आहना के परिवार को उसके एक्सीडेंट के बारे में बताना था इसलिए एक नर्स ने आहना के सामान को देखना शुरू कर दिया। उस नर्स को आहना की डायरी मिल गई जो बिल्कुल ठीक थी। उसने उसे खोलकर देखा तो पहले पेज पर आहना का नाम लिखा हुआ था। उसने आगे के पेज देखे तो उनपर कुछ नम्बर लिखे हुए थे जिनमें सबसे पहला नम्बर पापा का था। उसने जल्दी से वो नम्बर मिलाया। 


कबीर बहुत देर से ऑफिस के मैनेजर के साथ बैठे हुए काम में व्यस्त थे। उन्हें ये भी नही पता था की आहना ऑफिस से जा चुकी है। वो मैनेजर को कुछ बता रहे थे की तभी उनका फोन बजने लगा। उन्होंने जैसे ही फोन उठाया, नर्स ने कहा, “सर, मैं सिटी लाइफ हॉस्पिटल से बात कर रही हूँ। आपकी बेटी, आहना का एक्सीडेंट हो गया है और वो यहाँ एडमिट है। आप प्लीज जल्दी आ जाइए।” 


कबीर ने जैसे ही ये सुना, वो जल्दी से कुर्सी से खड़े हुए और केबिन से बाहर निकलकर राकेश के केबिन में आए। राकेश ने जब उन्हें ऐसे देखा तो एक पल के लिए वो हैरान रह गए। उन्होंने कबीर से पूछा, "क्या बात है, कबीर?” 


“आहना...आहना का एक्सीडेंट हो गया है। वो हॉस्पिटल में है इस वक्त।” राकेश ने जैसे ही कबीर की बात सुनी, वो जल्दी से खड़े हुए और कबीर के साथ हॉस्पिटल जाने के लिए निकल गए। 


वो लोग जब हॉस्पिटल के अंदर आकर आहना के कमरे के सामने पहुँचेे तो वहाँ पर पुलिस खड़ी थी जो डॉक्टर से कुछ बात कर रहे थे। राकेश ये सोचकर परेशान थे की वो आहना को कैसे देखेंगे क्योंकि वो जानते थे की कहीं न कहीं आहना की इस हालत के जिम्मेदार वो भी थे। 


कबीर डॉक्टर के पास आए और उनसे पूछा, “डॉक्टर, मेरी बेटी कैसी है?” 


“आप कौन है?” पुलिस इंस्पेक्टर ने कबीर से पूछा। 


राकेश ने जब शीशे से आहना को देखा तो वो मुड़ गए क्योंकी उनसे आहना की वो हालत देखी ही नही गई। उसका सिर पर पट्टी बंधी हुई थी, मुंह पर ऑक्सीजन मास्क लगा हुआ था और दाएं हाथ पर ड्रिप लगी हुई थी। उसके चेहरे पर चोट के निशान भी थे। 


"मैं आहना का पिता हूँ।” कबीर ने कहा जिससे राकेश ने आहना से नजरें हटाकर उनकी तरफ देखा। 


“आपकी बेटी का एक्सीडेंट हुआ है। आपको किसी के ऊपर शक है। कोई ऐसा जिससे आहना को खतरा हो।” इंस्पेक्टर ने पूछा। 


“नही सर। ऐसा तो कोई नही है।” कबीर ने कहा। राकेश खामोशी से उनकी बातें सुन रहे थे।


"ठीक है। जिसने भी ये किया है हम उसका पता जल्दी ही लगा लेंगे और उसे गिरफ्तार कर लेंगे।” इंस्पेक्टर की बात सुनकर राकेश थोड़ा सा डर गए पर उन्होंने कुछ नही कहा। पुलिस वहाँ से चली गई। उनके जाते ही कबीर ने डॉक्टर से पूछा, “मेरी बेटी ठीक है ना डॉक्टर?” 

डॉक्टर ने एक गहरी सांस ली और कहा, "उनकी कंडीशन बहुत क्रिटिकल है। बॉडी में कई जगह फ्रैक्चर है और बहुत ज्यादा खून भी बह चुका है। गाड़ी से टक्कर लगकर गिरने की वजह से सिर में भी चोट लगी है। आज ही हम उनके फ्रैक्टर्स के लिए उनका ऑपरेशन करेंगे पर हमें नही लगता वो जिन्दा बच पाएंगी।”


ये सुनकर कबीर को एक गहरा सदमा लगा। आहना का हँसता मुस्कुराता हुआ चेहरा उनकी नज़रों के सामने आ गया। उन्होंने शीशे से आहना को देखा तो रो पड़े। एकलौती बेटी को खो देने के ख्याल से ही उन्हें तकलीफ होने लग गई थी। बेशक आहना उनकी अपनी बेटी नही थी पर उसके बचपन से कबीर ने ही उसकी परवरिश की थी और उन्होंने आहना को हमेशा सगी बेटी की तरह ही प्यार दिया था। राकेश ने उन्हें संभालकर कुर्सी पर बैठाया। नर्स ने आहना का सारा सामान कबीर को सौंप दिया। 


उसी दिन आहना का ऑपरेशन हुआ जो की ठीक से हो गया था पर उसके बाद दो दिन तक आहना को होश नही आया था जिसकी वजह से डॉक्टर बहुत ही ज्यादा परेशान थे क्योंकी अभी तक आहना को होश आ जाना चाहिए था। कबीर भी आहना को देखकर बहुत परेशान थे। उधर पेरिस में अयांश भी परेशान हो गया था क्योंकि आहना, राकेश और कबीर में से कोई भी उसका फोन नही उठा रहा था। 


ऑपरेशन हो जाने के बाद तीसरे दिन आहना को आखिरकार होश आ ही गया। एक नर्स उसके हाथ में लगी ड्रिप बदल रही थी की तभी उसने देखा की आहना धीरे धीरे अपनी आँखें खोल रही है। नर्स ने ये देखकर जल्दी से डॉक्टर को बुलाया। कबीर ने जब ये सुना की आहना को होश आ गया है, उनकी परेशानी थोड़ी सी कम हो गई। कबीर इतने दिनों में एक बार भी घर नही गए थे। वो आहना के वॉर्ड के बाहर बैठे शीशे से उसे देखते रहते थे क्योंकि किसी का भी वॉर्ड के अंदर जाना मना था। राकेश ही उनके लिए खाना लेकर आते और उन्हें कुछ भी करके खिला दिया करते। उन्हें इस बात का पछतावा था की उनकी वजह से आहना की जिंदगी बर्बाद हो गई थी। वो ये भी सोचकर परेशान थे वो अयांश का सामना कैसे करेंगे। क्या होगा अगर उसे गलती से भी पता चल गया की आहना की इस हालत के जिम्मेदार उसके पापा है। वो पापा जिन्हें उसने आहना का ख्याल रखने के लिए कहा था और उन्होंने उसकी आहना को मौत के करीब पहुँचा दिया।


डॉक्टर ने अंदर जाकर आहना को चेक किया। आहना चुपचाप कमरे की छत को देखे जा रही थी। डॉक्टर उसे अच्छे से चेक करकर और नर्स को कुछ कहकर वॉर्ड से बाहर आए तो कबीर ने उन्हें बहुत ही उम्मीद से पूछा, “मेरी आहना ठीक है ना अब डॉक्टर।” 


डॉक्टर ने कबीर के कंधे पर हाथ रखा और कहा, “देखिए, मैं आपकी तकलीफ को समझ सकता हूँ। एक पिता के लिए बहुत मुश्किल होता है अपने बच्चे को इस हालत में देखना पर मैं आपको कोई झूठी उम्मीद भी नही दे सकता। आहना को होश बेशक आ गया है पर अभी भी उसकी हालत नाजुक है। हमारी दी हुई दवाईयां भी उसके ऊपर असर नही कर रही है पता नही क्यों। हम उसे अभी दो दिन अंडर ऑब्जर्वेशन रखेंगे और पूरी कोशिश करेंगे आहना को ठीक करने की। आप हिम्मत रखे बस। दो दिन बाद हम आपको आहना से मिलने भी देंगे।” 


कबीर के मन में जो उम्मीद जगी थी आहना के ठीक हो जाने की, डॉक्टर की बात सुनकर उनकी वो उम्मीद टूट गई। 


आहना को दो दिन ऑब्जर्वेशन में रखा गया पर उसकी हालत में कोई सुधार नही था। दो दिन बाद कबीर को आहना से मिलने दिया गया। कबीर ने आहना के हाथ को थामा और रो पड़े। आहना उस वक्त जागी हुई थी। कबीर को ऐसे देखकर उसकी आँख में से भी आँसू निकलकर बह गया। ऑक्सीजन मास्क अभी भी उसके मुंह पर लगा हुआ था फिर भी उसने बोलने की कोशिश करते हुए कहा, “पापा, आई...आई लव यू।” 


कबीर ने प्यार से उसकी सिर पर हाथ फिराया तो उसने कहा, “पापा, आप मेरी लिए एक काम करेंगे। एक लेटर लिख दीजिए मेरी तरफ से अयांश के लिए अभी और अगर मैं उसे वो नही दे पाई तो आप दे देना। मेरे पास अब और वक्त नही है। मैं बस अयांश का इंतजार कर रही हूँ क्योंकी वो अब कभी भी यहाँ आ सकता है। प्लीज पापा।” 


“तुम्हें कुछ नही होगा, बेटा। क्यों कर रही हो तुम ऐसी बातें।” कबीर ने तकलीफ में कहा पर आहना ने उनसे एक और बार रिक्वेस्ट की तो वो उसके सामान से उसकी डायरी और पेन ले आए। 


आहना ने अपना ऑक्सीजन मास्क हटाया और जो कुछ भी वो अयांश से कहना चाहती थी, उसने वो सब बोलना शुरू किया और कबीर वो सब लिखने लगे। आहना की कुछ बातों ने कबीर को बहुत हैरान किया और उन्हें वो सब जानकर बहुत गुस्सा भी आया। उन्होंने आहना से कहा, “बेटा ये सब तुमने मुझे क्यों नही बताया। मैं इन सब को छोडूंगा नही।” 


“आप कुछ नही करेंगे, पापा। वादा कीजिए मुझसे।” आहना ने कहा तो कबीर ने मजबूरन उससे वादा कर दिया। आहना ने कबीर से वो लेटर मांगा तो कबीर ने डायरी का पेज फाड़कर आहना को दे दिया। आहना को सांस लेने में दिक्कत होने लगी तो कबीर ने उसे ऑक्सीजन मास्क पहना दिया। वो आहना से कुछ कहने ही वाले थे की तभी नर्स ने आकर कहा, “सर, अब आप इन्हें आराम करने दीजिए प्लीज।” 


कबीर आहना के माथे को चूमकर वॉर्ड से बाहर चले गए। अब बस आहना को अयांश का इंतजार था। वहीं नुपुर बहुत खुश थी जबसे उसे पता चला था की इतने दिन हॉस्पिटल में रहकर भी आहना नही बचने वाली थी। 


पेरिस में सारा काम अच्छे से कर कर अयांश वापिस आ गया था। उसे एयरपोर्ट पर उसका नया ड्राइवर लेने आया था। वो आहना से मिलने के लिए इतना एक्साइटेड था की उसने अपने घर न जाकर ड्राइवर से गाड़ी सीधा आहना के घर ले जाने के लिए कहा। उसने रास्ते से आहना के लिए लाल गुलाबों का एक गुलदस्ता भी लिया। 


आहना के घर पहुँचकर उसने गाड़ी से उतरकर तीन चार बार घर की बैल बजाई पर किसी ने भी दरवाज़ा नही खोला। अयांश को काफी अजीब लगा क्योंकि सन्डे होने की वजह से आहना को आज घर में ही होना चाहिए था। वो ये सब सोच ही रहा था की तभी वहाँ साथ वाले घर में रहने वाली एक औरत अपने घर से बाहर आई। उस औरत ने जब अयांश को देखा तो उससे पूछा, “बेटा, आप आहना से मिलने आए हो क्या?” 


अयांश ने उन्हें देखा और कहा, “जी आंटी।” 


“उससे मिलने के लिए तो आपको हॉस्पिटल जाना चाहिए बेटा।” उस औरत के मुंह से हॉस्पिटल का नाम सुनते ही अयांश का मन घबराने लगा और उसने पूछा, “हॉस्पिटल में क्यों? क्या हुआ आहना को?” 


"बेटा, आहना का बहुत बुरा एक्सीडेंट हुआ है। वो सिटी लाइफ हॉस्पिटल में एडमिट है। उसके पापा इतने दिनों बाद आज घर आए थे तब हमने पूछा तो पता चला। कबीर जी ने बताया की डॉक्टर का कहना है की उसका बच पाना बेहद मुश्किल है।” ये सुनते ही अयांश को डर लगने लगा की वो आहना को खो देगा। जो फूल वो आहना के लिए लाया, वो उसके हाथ से गिरकर जमीन पर बिखर गए। अयांश जल्दी से अपनी गाड़ी की तरफ आया और अंदर बैठकर ड्राइवर से हॉस्पिटल चलने के लिए कहा। 


हॉस्पिटल पहुंचकर अयांश ने रिसेप्शन से आहना के बारे में पूछा और उसके वॉर्ड की तरफ आ गया, जहाँ कबीर अकेले ही बाहर बैठे हुए थे। वो उनकी तरफ आया और उनसे पूछा, “ये सब कैसे हुआ, अंकल?” 


कबीर अयांश को सब कुछ बता देना चाहते थे पर उन्होंने आहना से वादा किया हुआ था इसलिए उन्होंने अयांश को कुछ नही बताया और बात बदलते हुए कहा, “आहना इंतजार कर रही है तुम्हारा। जाओ उससे मिल लो जाकर।” 


अयांश वॉर्ड के अंदर चला गया। जैसे ही उसने आहना को देखा, उसे बहुत तकलीफ हुई। वो धीरे से आहना के पास आया और उसके हाथ को अपने हाथ में पकड़ लिया। आहना ने अपनी आँखें खोलकर उसे देखा। आहना की आँखों से आँसू बहने लगे और उसने कहा, “अयांश, मैं तुम्हें छोड़कर नही जाना चाहती पर मेरे पास अब ज्यादा वक्त नही है।  मैं... मैं बस तुम्हारा इंतजार कर रही थी की तुमसे आखिरी बार मिल सकू। मुझे माफ कर देना अयांश और ये तुम्हारे लिए है।” उसने अपने दाएं हाथ में पकड़ा हुआ लेटर अयांश को दिया और कहा, “मेरे जाने के बाद इसे पढ़ना एंड आई विल ऑलवेज लव यू और तुम कभी भी खुद को अकेला महसूस मत करना। अपना ख्याल रखना और मेरे जाने के बाद खुश रहना। उदास नही वरना मैं भी खुश नही रह पाऊंगी।” 


अयांश ने आहना का दिया हुआ लेटर अपनी पॉकेट में रखा और उसके चेहरे को अपने हाथों में थामते हुए कहा, “तुम क्यों ऐसी बातें कर रही हो, आहना। कुछ नही होगा तुम्हें। तुमने मुझसे वादा किया था ना की तुम जिंदगी भर मेरे साथ रहोगी। तुम ऐसे छोड़कर नही जा सकती मुझे अब।” 


“मुझे जाना होगा अयांश। बस तुम मुझसे वादा करो की खुश रहोगे तुम मेरे बिना।”  आहना ने अयांश के हाथ को थामते हुए कहा। 


“आहना, तुम क्यों...” अयांश ने इतना ही कहा और उसकी आँखों से आँसू बहने लगे। 


“वादा करो, अयांश।” आहना ने फिर कहा। 


“मैं वादा करता हूँ।” जैसे ही अयांश ने ये कहा, आहना ने मुस्कुराते हुए उसे देखा और फिर अचानक से मशीन से बीप की आवाज आने लगी। अयांश ने मशीन की तरफ देखा जिसमें हार्टबीट वाली लाइन बिल्कुल सीधी हो चुकी थी। उसने आहना को देखा। उसकी आँखें बंद हो चुकी थी और उसका बेजान हाथ अयांश के हाथ से छूटकर बेड पर गिर गया।


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Wednesday, 22 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 35



अयांश राकेश से मिला और उन्हें आहना का ख्याल रखने के लिए कहा क्योंकी वो जानता था इस बार आहना उसके दूर जाने के ख्याल से काफी डरी हुई है और इसलिए भी क्योंकि उसका अपना दिल किसी अनहोनी के डर में था। राकेश ने उसे यकीन दिलाया की वो आहना का ख्याल रखेंगे। अयांश आहना के माथे को चूम कर एयरपोर्ट के अंदर चला गया। आहना की आँखों में आँसू आ गए। 


राकेश ने पीछे से आकर उसके कंधे पर हाथ रखा और कहा, “घर चले बेटा।” 


आहना ने अपने आँसू पोंछे और राकेश के साथ चल दी। 


अयांश के जाने के अगले दिन ही नुपुर आहना से मिलने उसके घर पहुँची। कबीर को उसे वहाँ देखकर बहुत ज्यादा गुस्सा आया पर आहना ने उन्हें शांत रहने के लिए कहा। कबीर बिना कुछ कहे अपने कमरे में चले गए।


“क्या चाहिए तुम्हें मुझसे?” आहना ने नुपुर के सामने सोफे पर बैठते हुए पूछा।


“मैंने अयांश से सुना है की तुम पेंटिंग बहुत अच्छी करती हो। मुझे एक पेंटिंग बनवानी है तुमसे अपने मॉम डैड की। उन्हें गिफ्ट करने के लिए।” नुपुर ने मुस्कुराते हुए कहा। आहना को कुछ अजीब लग रहा था क्योंकि नुपुर उससे कभी भी ऐसे मुस्कुराते हुए बात कर ही नही सकती थी। उसने उसे देखते हुए कहा, “मैं अभी ऐसे वर्क नही लेती हूं। तुम किसी और पेंटर को ढूंढ लो।” 


“प्लीज आहना। मान जाओ ना।” नुपुर ने कहा पर आहना नही मानी क्योंकि वो नुपुर के लिए कोई काम नही करना चाहती थी तो उसने कहा, “अच्छा, ठीक है। पर मैं तुम्हारी बनाई हुई पेंटिंग्स तो देख सकती हूँ ना।” 


आहना इसके लिए मान गई तो नुपुर खुश हो गई की वो अब अपने प्लैन को अंजाम दे पाएगी। आहना उसे अपने कमरे में ले गई जहाँ बहुत सारी पेंटिंग्स रखी हुई थी। आहना ने सबसे पहले अयांश की पेंटिंग को छुपा दिया और फिर सारी पेंटिंग्स के ऊपर से पेपर्स हटाने लगी। जब आहना ये सब कर रही थी, नुपुर उसके पूरे कमरे में अपनी नज़रे दौड़ा रही थी और आखिरकार उसकी नजरें आहना के बेड के पास रखे स्टूल पर गई, जिसके ऊपर आहना की दवाईयां रखी हुई थी। 


सारे कागज़ हटाकर आहना ने उससे कहा, “तुम अब पेंटिंग्स को देख सकती हो।” 


आहना की आवाज सुनकर नुपुर ने उसे देखा और कहा, “मुझे एक ग्लास पानी मिलेगा।” 


आहना ने हाँ में सिर हिलाया और उसके लिए पानी लेने कमरे से बाहर चली गई जिसका फायदा उठाते हुए नुपुर ने जल्दी से आहना की दवाईयों को अपनी लाई हुई दवाईयों के साथ बड़े ही ध्यान से बदल दिया। वो मुस्कुराते हुए सोचने लगी, “अब इन दवाईयों को लेने से धीरे धीरे तुम्हारी तबियत खराब होती जाएगी।”


नुपुर पेंटिंग्स के पास आकर खड़ी हो गई। आहना उसके लिए पानी लेकर आई और ग्लास उसे दे दिया। नुपुर ने पानी पीकर ग्लास आहना को दिया और कहा, “तुम बहुत अच्छी पेंटिंग्स बनाती हो। मुझे अच्छा नही लग रहा की तुमने मेरे लिए पेंटिंग बनाने के लिए मना कर दिया पर कोई बात नही। अब मुझे चलना चाहिए।” 


आहना उसे गेट तक छोड़ने आई और उसके जाते ही दरवाजा बंद कर दिया। आहना को नुपुर का इस तरह आना सही नही लगा था। उसे इतना तो पता था की नुपुर यहाँ पेंटिंग के लिए नही आई थी। नुपुर के आने का इरादा कुछ और ही था जिसे वो समझ नही पाई थी। 


आहना ने नुपुर के द्वारा बदली हुई दवाईयां लेना शुरू कर दिया था जिसकी वजह से उसकी तबियत धीरे धीरे बिगड़ने लगी। उसे हर वक्त थकान और चक्कर आने जैसा लगता रहता था पर आहना ने इस पर ध्यान नही दिया क्योंकी उसे लगता था की ये सब उसके ज्यादा काम करने की वजह से हो रहा है क्योंकि इन दिनों वो ऑफिस और घर में बहुत काम करती थी जिसकी वजह से उसे आराम करने का वक्त सिर्फ रात में मिलता था। 


अयांश भी अपना काम पेरिस में अच्छी तरह से संभाल रहा था। वहाँ पर दूसरी कम्पनी जिसके साथ राकेश की कम्पनी काम कर रही थी, के मैनेजर ने अयांश को सब कुछ अच्छे से समझाया। अयांश अपने काम से बहुत खुश था पर उसे आहना की याद आती रहती थी। काम में व्यस्त रहते हुए और अलग अलग वक्त की वजह से वो दोनों बहुत मुश्किल से एक दूसरे के साथ बात कर पाते थे। 


आहना अपनी तबियत के चलते अकेले ही डॉक्टर से मिलने गई क्योंकि कबीर ऑफिस में व्यस्त थे। उसने डॉक्टर को वो दवाईयां भी दिखाई जो वो ले रही थी। डॉक्टर ने जैसे ही दवाईयों को ध्यान से देखा वो हैरान रह गई और आहना से पूछा, “ये दवाईयां आपने कहाँ से ली है?” 


“आपके हॉस्पिटल के बाहर जो मेडिकल है। वहाँ से ली है मैंने ये दवाईयां। इस एवरीथिंग फाइन डॉक्टर?” आहना ने पूछा। 


“इंपॉसिबल। वो मेडिकल वाला आपको ये दवाईयां नही दे सकता। आपकी दवाईयां किसी ने चेंज की है और दिक्कत की बात ये है की आप ये काफी ज्यादा ले चुकी है इसलिए आपके साथ ये सब कुछ हो रहा है।” डॉक्टर ने आहना से परेशान होते हुए कहा।


आहना ने घबराते हुए डॉक्टर से पूछा, “पर ये दवाईयां किस लिए है डॉक्टर?” 


“ये दवाईयां नही है। ये स्लो पॉइजन है।” डॉक्टर की बात सुनकर आहना हैरान रह गई और उसे अचानक से वो दिन याद आ गया जब अयांश के जाने के अगले दिन ही नुपुर उसके घर आई थी और जब वो उसे अपने कमरे में पेंटिंग्स दिखाने के लिए लेकर गई थी तो कैसे उसने पानी के बहाने उसे कमरे से बाहर भेज दिया था। आहना समझ गई की नुपुर ने उसी वक्त उसकी सारी दवाईयां बदल दी थी पर उसे ये समझ नही आया की नुपुर को ये कैसे पता था की वो दवाईयां लेती है क्योंकि ये बात सिर्फ कबीर जानते थे। 


“आहना।” डॉक्टर की आवाज सुनकर आहना अपने ख्यालों से बाहर आई तो डॉक्टर ने कहा, “आप घबराओ मत आहना। पहले तो अब आपको ये नही लेनी है और दूसरा, मैं आपको दवाईयां लिखकर दे रही हूं। आप वो लेना शुरू करना। आप धीरे धीरे ठीक होने लगेंगी।” 


“थैंक यू, डॉक्टर।” आहना ने कहा। डॉक्टर ने दवाईयां लिखकर कागज़ आहना को थमा दिया। आहना अस्पताल से बाहर आ गई और मेडिकल से दवाईयां लेकर अपने घर चली गई।


***


अयांश के वापिस आने से एक हफ्ता पहले नुपुर राकेश से मिलने उनके ऑफिस आई थी। वो उनके केबिन में बैठकर उनके साथ कुछ बात कर रही थी। आहना को एक फाइल को लेकर राकेश से बात करनी थी इसलिए वो भी उनके केबिन की तरफ आई। वो अंदर जाने के लिए दरवाजा खटखटाने ही वाली थी की तभी उसने नुपुर को कहते हुए सुना, “मैंने आहना को मरवाने के लिए एक इंसान को हायर किया है।” 


आहना ने दरवाजे का हैंडल कसकर पकड़ लिया और वहीं खड़ी सब कुछ सुनने लगी। वो जानना चाहती थी की नुपुर उसे मरवाना क्यों चाहती है और वो इस बारे में राकेश को क्यों बता रही है। 


“तुम ये मुझे क्यों बता रही हो?” राकेश ने पूछा। 


नुपुर हँसने लगी और उसने कहा, “मैं आपको ये बात इसलिए बता रही हूँ क्योंकि आपको पता होना चाहिए की आपकी प्यारी बेटी के साथ मैं क्या करने वाली हूँ।” 


“देखो, तुम जो चाहती थी वो मैंने कर दिया था। तुम चाहती थी मैं अयांश को किसी भी बहाने से यहाँ से दूर भेज दूं जिससे वो आहना को बचा न सके और ये मैंने कर दिया। अब मुझे इन सब से दूर रखो।” राकेश की बात सुनकर आहना को एक पल के लिए अपने कानों पर यकीन ही नही हुआ। उसका इस बात पर यकीन कर पाना बेहद मुश्किल था की उसे हमेशा अपनी बेटी मानने वाले राकेश आज उसे मारने की बातें कर रहे है। 


आहना वहाँ और नही रुकना चाहती थी इसलिए वो जल्दी से अपने केबिन की तरफ आकर अपना सारा समान बैग में डालने लगी। उसी वक्त नुपुर भी राकेश के केबिन से बाहर आई और उसे देख लिया।


आहना अपना सारा सामान लेकर कबीर को बिना बताए ही घर जाने के लिए ऑफिस से बाहर गई। ये देखकर नुपुर ने किसी को फोन लगाया। जैसे ही दूसरी तरफ से किसी ने फोन उठाया, नुपुर ने कहा, “वो अभी अभी ऑफिस से बाहर निकली है। तुम्हें पता है ना तुम्हें क्या करना है।” 


दूसरी तरफ से किसी ने हाँ कहकर फोन काट दिया। नुपुर अपने फोन को देखकर मुस्कुराने लगी और उसने कहा, “अब तुम सिर्फ मेरे होगे अयांश। अब आहना हमारे बीच कभी नही आएगी।” 


आहना जब भी कहीं अकेले आया जाया करती थी तो अक्सर पैदल जाती थी या फिर ऑटो ले लिया करती थी क्योंकी उसे लगता था गाड़ी की जरूरत उससे ज्यादा कबीर को है और घर ऑफिस से ज्यादा दूर नही था। आज भी आहना पैदल ही घर जा रही थी। चलते हुए उसके मन में बहुत से ख्याल आ जा रहे थे। उसे यकीन ही नही हो रहा था की राकेश इतना बदल सकते है। 


आहना को रोड पार करना था तो वो बिना सोचे समझे फुटपाथ से उतरकर रोड पर चलने लगी। वो अपनी सोच में खोए हुए रोड पार कर ही रही थी की तभी एक गाड़ी तेज स्पीड से उसकी तरफ आई और उसे जोर से टक्कर मारते हुए उसके ऊपर से चढ़कर निकल गई।


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Tuesday, 21 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 34



रिद्धिमा ने आहना को मारने में उनका और नुपुर का साथ देने के लिए राकेश को तैयार कर लिया था जिससे नुपुर बहुत ज्यादा खुश थी लेकिन राकेश को अपने इस फैसले पर रोना आ गया था क्योंकि उन्हें अपने बिजनेस को बचाने के लिए आहना जिसे वो अपनी बेटी मानते थे, उसकी जान लेनी थी। 


रिद्धिमा ने जब उन्हें ऐसे देखा तो उनके कंधे पर हाथ रखकर कहा, “राकेश, तुम क्यों परेशान हो रहे हो। हजारों जिंदगीयों को खुश रखने के लिए अगर एक जिंदगी लेनी पड़ रही है तो इसमें कुछ गलत नही है और वैसे भी ये बिजनेस वर्ल्ड है, यहाँ अपना अपना बिजनेस बचाने के लिए लोग सारी लिमिट्स क्रॉस करते है। टेंशन मत लो तुम।” 


राकेश ने कुछ नही कहा और उठकर अपने कमरे में चले गए। उन्हें वो पल याद आ गया जब उन्होंने आहना को बताया था की बिजनेस के लिए लोग इंसानियत की हदें भी पार कर देते है और आज वो भी यही करने जा रहे थे। उन्होंने अपने मैनेजर को फोन करके कह दिया की सभी एम्प्लॉय से कह दे की उन्हें किसी भी चीज की टेंशन लेने की जरूरत नही है क्योंकि कबीर को फोन करने की हिम्मत उनके अंदर नही थी। कैसे बताते वो कबीर को की सब कुछ ठीक उनकी बेटी की जिंदगी के बदले में हुआ है।


राकेश उसके बाद से सारा दिन ऑफिस ही नही गए और खुदको अपने कमरे में बंद रखा। अयांश ने जब रिद्धिमा से उनके बारे में पूछा तो उसने झूठ कह दिया की राकेश की तबियत ठीक नही है इसलिए वो आराम कर रहे है। अयांश ने भी उन्हें डिस्टर्ब करना ठीक नही समझा इसलिए वो डिनर करने के बाद अपने कमरे में चला गया। 


***


आहना को अपनी आँखों में ज्यादा ही तकलीफ महसूस होने लग गई थी जिसके लिए वो एक दिन अपॉइंटमेंट लेकर अकेले डॉक्टर के पास गई। डॉक्टर ने उसे कुछ दवाईयां और आईड्रॉप का नाम कागज़ पर लिखकर दे दिया। 


आहना डॉक्टर को थैंक यू कहकर जैसे ही बाहर आई, अस्पताल के अंदर आती हुई नुपुर ने उसे देख लिया। नुपुर ने देखा की आहना सामने बने हुए मेडिकल स्टोर की तरफ जा रही है तो वो भी अस्पताल के अंदर ना जाकर आहना के पीछे जाने लगी। चलते हुए ही उसने अपने स्कार्फ से अपना चेहरा ढक लिया। 


आहना ने अपने हाथ में पकड़ा कागज़ दुकानदार को दिया और इंतजार करने लगी। नुपुर भी उसके साथ आकर खड़ी हो गई और दुकानदार आहना के सामने जो भी दवाईयां रख रहा था उन्हें ध्यान से देखने लगी। आहना ने एक नजर उसे देखा पर उसे पहचान नही पाई क्योंकि नुपुर की सिर्फ आँखें ही दिखाई दे रही थी। 


दुकानदार ने आकर नुपुर से पूछा की उसे क्या चाहिए तो नुपुर ने जल्दी जल्दी में विक्स बोल दिया। दुकानदार ने आहना के सामने आई ड्रॉप और नुपुर को विक्स लाकर दे दिया। नुपुर ने ध्यान से आहना के सामने रखे हुए आई ड्रॉप और दवाईयों को देखा और फिर दुकानदार को विक्स के पैसे देकर वहाँ से चली गई।


आहना को दवाईयां लेते हुए देखकर ही उसके दिमाग में एक खतरनाक साजिश जन्म ले चुकी थी जिसे वो अब अंजाम देने वाली थी। 


रिद्धिमा राकेश को अपने और नुपुर के प्लैन के बारे में बता चुकी थी और उन्हें समझा चुकी थी की उन्हें क्या करना है इसलिए उसी रात राकेश ने अयांश को अपने स्टडी रूम में बुलाया और उससे कहा, “अयांश, तुम्हें अपनी पढ़ाई पूरी किए हुए काफी वक्त हो गया है। अब मैं चाहता हूँ की तुम ऑफिस पूरी तरह से ज्वॉइन करो और धीरे धीरे सब कुछ सीखना शुरू करो।” 


“जी पापा, मैं कल से रोज ऑफिस आया करूंगा।” अयांश ने कहा और थोड़ी देर बाद वहाँ से चला गया। 


अगले दिन से अयांश ने रोजाना ऑफिस जाना शुरू कर दिया। वो वहाँ पर सभी के साथ काम करते हुए धीरे धीरे सब कुछ सीखने लगा। साथ ही उसे आहना के साथ भी पहले से ज्यादा वक्त बिताने का मौका मिल गया था क्योंकि ज्यादातर वो दोनों एक साथ ही काम करते थे। 


अयांश को ऑफिस में काम करते हुए पूरे तीन महीने हो चुके थे और इन तीन महीनों में उसने सबके साथ काम करते हुए बहुत सारा एक्सपीरियंस लिया और बिजनेस के बारे में काफी कुछ सीख लिया। 


एक दिन आहना और अयांश केबिन में एक साथ बैठे कुछ फाइलों पर काम कर रहे थे की तभी वहाँ एक लड़के ने आकर अयांश से कहा, “अयांश सर, आपको सर बुला रहे है।” 


“ठीक है। मैं जाता हूँ। थैंक यू।” अयांश ने कहा तो लड़का वहाँ से चला गया। अयांश ने मुस्कुराते हुए आहना के माथे को अपने होठों से छुआ और केबिन से निकलकर राकेश के केबिन की तरफ चल पड़ा। 


उसने केबिन के बाहर आकर धीरे से दरवाज़ा खोला और अंदर चला गया। उसने सामने कुर्सी पर बैठते हुए कहा, “पापा, आपने मुझे बुलाया।” 


राकेश ने अपने लैपटॉप स्क्रीन से नजरें हटाकर उसे देखा और फिर कहा, “हाँ, वो मैं तुमसे एक बात करना चाहता था।” 


“जी पापा, कहिए।” अयांश ने कहा। 


राकेश ने अपना चश्मा उतारकर टेबल पर रखा और कहा, “हमारा एक होटल का प्रोजेक्ट है पेरिस में। वहाँ की एक कम्पनी हमारे साथ मिलकर वहाँ एक होटल खोलना चाहती है। तुम्हें यहाँ काम करते हुए तीन महीने हो चुके है और मैंने देखा है की तुमने काफी जल्दी सब कुछ सीख लिया है इसलिए मैं चाहता हूँ की इस प्रोजेक्ट के लिए तुम पेरिस जाओ।” 


राकेश की बात सुनकर अयांश को थोड़ी हैरानी हुई क्योंकि वो अच्छे से जानता था की इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए राकेश उससे ज्यादा एक्सपीरियंस वाले इंसान को भेजते क्योंकि राकेश के लिए उनका काम ही उनका सब कुछ था और वो अपने काम के साथ कोई रिस्क नही ले सकते थे। ऐसे में राकेश का इतने बड़े प्रोजेक्ट के लिए उसे भेजने की बात करना अयांश को कुछ ठीक नही लगा क्योंकि उसका एक्सपीरियंस तो अभी काफी कम था। वो तो ये समझता था कि आहना का एक्सपीरियंस उससे कहीं ज्यादा है। उसने राकेश को देखा और कहा, “पापा, इसके लिए आप मुझे क्यों भेजना चाहते है। मेरा एक्सपीरियंस तो अभी बहुत कम है। आप किसी और को भेजिए न इसके लिए जो मुझसे ज्यादा एक्सपीरियंस्ड हो।” 


“जब मैंने ये बिजनेस नया नया शुरू किया था, उस वक्त मेरे पास भी कोई एक्सपीरियंस नही था। बस थोड़ी सी नॉलेज, हिम्मत और मेहनत थी मेरे पास। मैंने गलतियां की, उनसे सीखा और धीरे धीरे बढ़ता गया। तुम फिर भी खुशकिस्मत हो जो तुम्हें वो सब नही देखना पड़ रहा जो मैंने देखा था। अगर हम ये प्रोजेक्ट खो भी देते है तो मुझे कोई दुख नही होगा क्योंकि मुझे पता है, इससे तुम्हें कुछ न कुछ सीखने को मिलेगा ही, बेशक गलती करके ही सही। इसलिए मैं चाहता हूँ की तुम जाओ और तुम ही जाओगे। कोई और नही।” राकेश ने अयांश को समझाकर अपना फैसला सुनाते हुए कहा पर अयांश को कुछ ठीक नही लग रहा था क्योंकि वो जानता था की राकेश कभी भी उसे कुछ भी ऐसा करने के लिए नही कहेंगे जो वो न करना चाहता हो। राकेश को भी ये सब करने में बहुत तकलीफ हो रही थी पर उन्होंने खुद को मजबूत बना रखा था।


अयांश नही जाना चाहता था जिसकी वजह थी आहना। वो एक बार आहना से दूर गया था तो उसके और आहना के साथ कितना कुछ हुआ था। उसे फिर से यही डर लग रहा था की अगर वो फिर से आहना से दूर गया तो फिर से कहीं कुछ गलत न हो जाए। किसी अनहोनी के डर की वजह से वो जाना नही चाहता था पर वो राकेश को ना भी नही कह सकता था इसलिए वो पेरिस जाने के लिए मान गया लेकिन उसका दिल अभी भी तैयार नही था। वो राकेश के केबिन से बाहर आ गया। उसके जाते ही राकेश ने कहा, “मुझे माफ कर देना, अयांश पर इस कम्पनी पर तुम्हारा फ्यूचर भी डिपेंड है। इस कम्पनी के लिए मुझे आहना को मारना होगा जिसके लिए तुम्हारा दूर जाना बहुत जरूरी है।” 


उसने केबिन में वापिस आकर आहना को इस बारे में बताया तो आहना को भी बहुत हैरानी हुई और उसने कहा, “मुझे कुछ सही नही लग रहा, अयांश। अंकल तुम्हें कभी भी किसी ऐसी बात के लिए फोर्स नही करेंगे जो तुम ना करना चाहो।” 


“वही तो मैं सोच रहा हूँ, आहना। पापा मुझे ही क्यों भेजना चाहते है।” कहते हुए अयांश ने आहना को देखा जो इस बात से परेशान लग रही थी। उसने आहना का हाथ पकड़ा और कहा, “सब ठीक होगा, आहना।” 


“मुझे डर लग रहा है, अयांश। एक बार तुम दूर गए थे तो देखा ना क्या हुआ था। इस बार भी अगर कुछ…” इससे पहले कि आहना अपनी बात खत्म करती, अयांश ने उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया और कहा, “कुछ नही होगा। डरो मत।” 


आहना का अब ऑफिस में मन नही लग रहा था इसलिए उसने अयांश से कहा की वो उसे घर छोड़ दे। अयांश आहना को लेकर ऑफिस से बाहर आ गया। कुछ ही देर बाद उसने आहना को घर छोड़ा और उसे परेशान न होने का कहकर अपने घर के लिए निकल गया। 


राकेश ने अपने मैनेजर से कहकर अयांश की सन्डे की फ्लाईट बुक कर दी थी। अयांश अपने कमरे में पैकिंग करने में लगा हुआ था। नुपुर बेड पर बैठकर फोन चलाते हुए उसे ही देख रही थी। वो बहुत ही ज्यादा खुश थी ये सोचकर की आखिरकार वो दिन आने ही वाला था जब वो आहना को अयांश की जिंदगी से बहुत दूर भेज देगी और फिर अयांश सिर्फ उसका होगा। अयांश को पेरिस में पूरे एक महीने के लिए रुकना था इसलिए नुपुर के पास आहना को मारने के लिए बहुत वक्त था। 


सन्डे की शाम को अयांश आहना और राकेश के सामने एयरपोर्ट पर खड़ा था। आहना अयांश को रोकना चाहती थी पर उसने अयांश से कुछ भी नही कहा। राकेश उन दोनों से दूर खड़े थे जिससे अयांश और आहना को एक दूसरे के साथ कुछ वक्त मिल सके क्योंकि सिर्फ उन्हें ही पता था की ये मुलाकात शायद अयांश और आहना की आखिरी मुलाकात हो एक दूसरे के साथ।


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Monday, 20 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 33



नुपुर आहना को अयांश के साथ नही देख पा रही थी इसलिए उसने फैसला किया की वो अब आहना को नही छोड़ेगी। उसे ऐसे देखकर रिद्धिमा ने कहा की उसे परेशान होने की जरूरत नही है क्योंकि आहना को नुकसान पहुँचाने में उनकी मदद अब वही इंसान करेगा जो उसे सबसे ज्यादा पसंद करता है जिससे नुपुर थोड़ा हैरान हो गई और उसने कहा, “ये आप क्या कह रही है, मॉम। भला अयांश हमारी हेल्प क्यों करेगा आहना को हार्म करने के लिए।” 


“अयांश नही बेटा, राकेश। मैं राकेश की बात कर रही हूँ।” रिद्धिमा ने कहा।


“पर वो भी क्यों तैयार होंगे ये करने के लिए और कैसे?” नुपुर ने पूछा। 


रिद्धिमा हसीं और उन्होंने कहा, “बड़े से बड़े इंसान की भी कोई एक कमजोरी होती है नुपुर। राकेश की भी है और इसी कमज़ोरी का फायदा उठाकर मैं राकेश को ये सब करने के लिए तैयार करूंगी। बस तुम देखती जाओ।” 


रिद्धिमा ने अपना फोन टेबल से उठाकर किसी को फोन मिलाया। जैसे ही सामने वाले इंसान ने फोन उठाया, रिद्धिमा ने कहा, “मैं आपसे मिलना चाहती  हूँ। आप कल घर आ जाना।” 


रिद्धिमा वहाँ से उठकर किचन की तरफ चली गई और नुपुर वहीं बैठे हुए उन्हें जाता हुआ देखकर सोचने लगी की रिद्धिमा क्या करने वाली है। 


अगले दिन शाम में रिद्धिमा से मिलने एक आदमी आया। रिद्धिमा ने उसके गले लगते हुए उससे पूछा, “कैसे है भैया, आप?” 


“ठीक हूँ, मेरी प्यारी बहना। तुम ये बताओ तुमने मुझे कैसे याद किया?” रिद्धिमा के भाई, प्रतीक ने पूछा। रिद्धिमा कुछ कहने ही वाली थी की तभी वहाँ एक सर्वेंट चाय की ट्रे लेकर आया। उसने चाय टेबल पर रखी और वहाँ से चला गया।


“भैया, मैं चाहती हूँ की आप राकेश से वो वापिस ले लीजिए जो आपका है।” सर्वेंट के जाते ही रिद्धिमा ने कहा पर प्रतीक उसकी बात का मतलब नही समझ पाया इसलिए उसने पूछा, “तुम किस बारे में बात कर रही हो, रिद्धिमा।” 


रिद्धिमा ने प्रतीक को देखा और कहा, “मैं उस बिज़नेस के बारे में बात कर रही हो जो आपने राकेश को दिया है।” 


“क्या तुम मजाक कर रही हो, रिद्धिमा? हाँ, मैंने राकेश की मदद जरूर की थी वो बिजनेस शुरू करने में पर राकेश ने उसे अपनी मेहनत और लगन से इतना बड़ा किया है और जो पैसे मैंने राकेश के बिजनेस में लगाए थे, उन्हें तो वो मुझे कब का लौटा चुका है। अब मेरा कोई हक नही बनता उसके बिजनेस पर और ये बात तुम भी अच्छे तरीके से जानती हो।” प्रतीक ने रिद्धिमा को समझाते हुए कहा पर रिद्धिमा को कुछ भी करके प्रतीक को अपने काम के लिए मनाना था इसलिए उसने कहा, “जानती हूँ भाई ये सब मैं पर अगर आप नही होते तो क्या राकेश वो बिज़नेस शुरू भी कर पाता। मैं कुछ नही जानती इतने सालों में मैंने आपसे पहली बार कुछ मांगा है। आपको मेरे लिए ये करना ही होगा।” 


प्रतीक ने एक गहरी सांस ली और कहा, “क्या हो गया है रिद्धिमा तुम्हें? क्यों करना चाहती हो तुम ये सब? अपने ही पति से उसकी मेहनत छीनना चाहती हो तुम। ये सब तो हमने तुम्हें नही सिखाया था।” 


“भाई, आपको क्या लगता है। राकेश अपनी बरसों की मेहनत इतनी आसानी से जाने देगा। उसका बिजनेस उसका सपना था और अब उसकी कमजोरी है। इसी कमज़ोरी का फायदा उठाकर मैं उससे अपना एक काम करवाना चाहती हूँ बस जो मैं आपको नही बता सकती और राकेश को भी इस बारे में पता नही चलना चाहिए।” रिद्धिमा ने कहा। 


प्रतीक ने थोड़ी देर रिद्धिमा को ध्यान से देखा और पूछा, “तुम फिर से कुछ गलत करने की तो नही सोच रही हो ना, रिद्धिमा? मुझे इंडिया वापिस आकर कहीं से पता चला की तुमने अयांश की शादी जबरदस्ती किसी और के साथ करवाई है जिसे वो चाहता तक नही है। कहीं तुम फिर से अयांश के साथ कुछ गलत करने का तो नही सोच रही?” 


“भाई अयांश मेरा बेटा है और मैं जो भी करूंगी उसके अच्छे के लिए ही करूंगी। आप उसकी चिंता न करे। बस मेरा ये काम कर दीजिए प्लीज।” इस बार रिद्धिमा ने रिक्वेस्ट करते हुए कहा। 


“ठीक है पर अगर मुझे पता चला की तुमने कुछ गलत किया है तो भूल जाऊंगा की मेरी कोई बहन भी है।” प्रतीक की ये बात सुनकर रिद्धिमा थोड़ा घबरा गई और उसने कहा, “नही भाई मैं पक्का कुछ गलत नही करूंगी।” 


“तुम्हें मैं बहुत अच्छे से जानता हूँ रिद्धिमा। अपने ख्वाहिशों को पाने के लिए तुम किसी भी हद तक जा सकती हो। तुम्हारा काम हो जाएगा। भेज दूंगा मैं राकेश को एक नोटिस पर याद रखना इस बार मेरे बेटे को कोई तकलीफ नही होनी चाहिए। वैसे अयांश है कहाँ?” प्रतीक ने पूछा। 


“वो इस वक्त अपने दोस्तों से मिलने गया हुआ है।” रिद्धिमा ने कहा तो प्रतीक ने उसे देखा और फिर पूछा, “और तुम्हारी बहु? उससे भी नही मिला हूँ मैं अभी तक।” 


“वो अपने मायके गई हुई है।” रिद्धिमा ने कहा। 


“ठीक है, उनसे मिलने फिर मैं किसी और दिन आ जाऊंगा। अभी चलता हूँ। अपना ख्याल रखना तुम।” कहते हुए प्रतीक उठे ही थे कि तभी बाहर एक गाड़ी के रुकने की आवाज आई। 


गाड़ी में से उतरकर राकेश अंदर आए और प्रतीक को देखकर मुस्कुरा उठे। वो प्रतीक से मिले और पूछा, “कैसे है आप भाई?” 


“ठीक हूँ। तुम कैसे हो?” प्रतीक ने उनसे पूछा। 


“मैं भी ठीक हूँ, भाई। आप खड़े क्यों है? आइए अंदर चलकर बैठते है।” राकेश की बात सुनकर प्रतीक ने कहा, “तुम्हारे साथ बातें करने के लिए हम किसी दिन अच्छे से वक्त निकालकर डिनर पर आएंगे सबको लेकर। अभी इजाजत चाहूंगा क्योंकि मुझे कहीं और भी जाना है एक जरूरी काम से।” 


“जी भाई, जरूर। आपका ही घर है ये।” राकेश ने कहा। प्रतीक रिद्धिमा और राकेश से मिलकर वहाँ से चले गए। 


एक दिन राकेश जब ऑफिस पहुँचेे तो ऑफिस में सभी लोग काफी परेशान लग रहे थे। कबीर और वहाँ का मैनेजर, महेश जल्दी से उनके पास आए और कबीर ने कहा, “राकेश, एक प्रॉब्लम हो गई है।” 


राकेश उनके साथ अपने केबिन में आ गए और अपनी कुर्सी पर बैठ गए। कबीर ने एक एनवेलप राकेश को दिया जिसमें एक लेटर था। राकेश ने एनवेलप में से लेटर को निकालकर पढ़ना शुरू किया। जैसे जैसे वो लेटर पढ़ रहे थे, उनके चेहरे पर कई भाव आ जा रहे थे। उन्हें समझने में ज्यादा देर नही लगी की इसके पीछे किसका हाथ है। 


कबीर ने उन्हें देखा और कहा, “राकेश, सारा स्टाफ इस लेटर की वजह से बहुत परेशान है। हमें जल्दी ही इस मैटर को सॉल्व करना होगा। वो तो अच्छा है की आहना और अयांश यहाँ नही है। अगर उन्हें पता लग जाता इस बारे में तो अच्छा नही होता।” 


राकेश उठे और कबीर से कहा, “टेंशन मत लो। ये मैटर मैं सॉल्व कर लूंगा। तुम यहाँ सब कुछ संभालो। मुझे कहीं जाना होगा।” 


कबीर ने राकेश को तसल्ली दी की वो सब कुछ संभाल लेंगे। राकेश ऑफिस से बाहर आकर अपनी गाड़ी में बैठे और अपने घर पहुँचे। वो गुस्से से घर के अंदर आए और लिविंग रूम में आकर उन्होंने वो लेटर रिद्धिमा के सामने फैंकते हुए कहा, “ये सब तुम्हारा किया धरा है ना।” 


रिद्धिमा जो आराम से सोफे पर बैठकर मैगजीन पढ़ रही थी, उसने मैगजीन से नज़रे हटाकर राकेश को देखा और मुस्कुराते हुए कहा, “ओह ये तुम्हें मिल गया। कैसा लगा सरप्राईज तुम्हें।” 


नुपुर जो उनके पास बैठकर अपना कुछ काम कर रही थी, उसे कुछ समझ नही आ रहा था की वो दोनों किस बारे में बात कर रहे है और वो सोच रही थी की उस लेटर में ऐसा क्या है जिसकी वजह से राकेश रिद्धिमा पर ऐसे गुस्सा कर रहे है पर उसने उन दोनों से कुछ नही पूछा और चुपचाप उनकी बातें सुनने लगी।


“इसलिए तुमने अपने भाई को घर पर बुलाया था?” राकेश ने गुस्से में पूछा।


“पता है तो पूछ क्यों रहे हो।” रिद्धिमा ने कहा। 


राकेश रिद्धिमा के इरादों को अच्छे से जानते थे इसलिए उन्होंने पूछा, “क्या चाहती हो तुम इस बार रिद्धिमा मुझसे?” 


रिद्धिमा ने राकेश को मुस्कुराते हुए देखा और कहा, “वाह राकेश, कितना समझने लगे हो तुम मुझे। अब जब तुम्हें पता चल गया है की मैं तुमसे क्या चाहती हूँ तो सुनो। मैं चाहती हूँ की तुम हमारी मदद करो आहना को जान से मारने में क्योंकि हम उसे अयांश से बहुत दूर भेज देना चाहते है।” 


जैसे ही राकेश ने ये सुना, वो हैरानी से रिद्धिमा को देखने लगे। वहीं नुपुर ये जानकर खुश हो रही थी पर अगले ही पल उसकी खुशी गायब हो गई जब राकेश ने कहा, “मैं ऐसा कभी नही करूंगा। मेरी बेटी की तरह है आहना। तुमने सोच भी कैसे लिया की अपनी बेटी की जान लूंगा मैं और फिर मैं अयांश और कबीर से क्या कहूंगा कि मार दिया मैंने आहना को। कभी भी नही।” 


“तो फिर अपना बिज़नेस खोने के लिए तैयार रहो।” रिद्धिमा ने बिना किसी भाव के कहा। राकेश बिना कुछ कहे उसे देखते रहे तो रिद्धिमा ने कहा, “क्या हुआ? जाओ यहाँ से अब तुम और जाकर देखो की तुमसे तुम्हारा बिजनेस अब कैसे दूर होता है। वो बिजनेस जो तुम्हारा सपना है। वो बिजनेस जो तुम्हारी मेहनत है और जिससे सिर्फ एक नही, उन हज़ारों लोगों का घर चलता है जिनके जीने के लिए उनकी एक जरूरत है तुम्हारा बिजनेस और हमारे बेटे का फ्यूचर भी है वो बिज़नेस। याद रखना राकेश उस बिज़नेस को तुम सिर्फ एक आहना के लिए खो रहे हो। सिर्फ एक आहना के लिए तुम हज़ारों लोगों की जिंदगी के साथ गलत करोगे। ध्यान से सोच लो अभी भी मेरी बात को।” 


राकेश सोफे पर बैठ गए और सोचने लगे। एक तरफ उन्हें आहना का हँसता हुआ चेहरा नज़र आ रहा था और दूसरी तरफ उनका सपना और उनके सारे एम्प्लॉय, जिनकी मेहनत की वजह से उनका बिजनेस बढ़ा था और वो रोज खुशी खुशी ऑफिस में आकर काम किया करते थे। 


उन्होंने रिद्धिमा को देखा और कहा, “मैं… मैं तुम…तुम्हारा साथ देने के लिए तैयार हूँ।” 


एक आँसू उनकी आंख में से निकलकर उनके गाल पर बह गया।


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Sunday, 19 July 2026

जिंदा रहती है हमेशा मोहब्बतें - 32

 


नुपुर अयांश का इंतजार करते करते जब थक गई तो अपने कमरे में जाकर सो गई। 


सुबह अयांश की नींद खुली तो वो मुस्कुरा उठा। आहना उसके सीने पर अपना सिर रखकर आराम से सो रही थी और उसके होठों पर मुस्कान थी। उसने आहना के बालों पर एक किस किया। उसने धीरे से आहना को खुद से अलग किया जिससे वो जाग न जाए और उठकर बाथरूम में चला गया। 


बाथरूम से बाहर आने के बाद उसने देखा कि आहना अभी भी सो रही है और उसके सारे बाल उसके चेहरे पर आ गए है। अयांश उसके पास आकर बैठ गया। उसने प्यार से अपनी उंगलियों से आहना के चेहरे से सारे बाल हटाए और उसके माथे पर किस करते हुए कहा, “उठ जाओ, टेडी बियर।” 


“उम्म, उठती हूँ थोड़ी देर में।” आहना ने नींद में कहा और अयांश का हाथ अपने हाथ में लेकर उसकी गोद में सिर रखकर फिर से सो गई। अयांश मुस्कुरा दिया और उसके बालों को सहलाने लगा। 


थोड़ी देर बाद आहना उठी और तैयार होने चली गई। उसके तैयार होने के बाद, उसने और अयांश ने वहीं नाश्ता किया और फिर वहाँ से निकल गए। अयांश जैसे ही अपने घर पहुँचा, उसका सामना सबसे पहले नुपुर से हुआ, जो गुस्से से उसे घूरे जा रही थी। 


“कहाँ थे तुम कल सारी रात?” नुपुर ने उसके पास आकर गुस्से में पूछा। 


अयांश ने उसे देखा और कहा, “तुम ये सवाल पूछने का कोई हक नही रखती मुझसे?” 


“ओह रियली, मैं तुम्हारी वाइफ हूँ और मुझे ये जानने का राइट है की तुम कहाँ थे।” नुपुर ने चिल्लाते हुए कहा।


“जबरदस्ती के रिश्ते को नाम देना बंद करो तुम और जानना चाहती हो ना मैं कहाँ था तो सुनो। तुम मेरी वाइफ हो पर आजतक मैंने तुम्हें इसका असली हक नही दिया है। वही हक मैं किसी और को देकर आया हूँ कल रात। अब इतनी समझदार तो तुम हो की ये जान सको की मैं कहाँ था।” कहकर अयांश ऊपर अपने कमरे में चला गया। 


नुपुर हैरानी और गुस्से से उसे देखती रही और उसने कहा, “मैं तुम्हें छोडूंगी नही आहना।” 


रात को डिनर के बाद राकेश ने अयांश को अपने स्टडी रूम में आने के लिए कहा। नुपुर जानना चाहती थी की राकेश अयांश से क्या बात करना चाहते है इसलिए वो भी थोड़ी देर बाद अयांश के पीछे पीछे आ गई और स्टडी रूम में बाहर आकर रुक गई। 


अयांश राकेश के सामने कुर्सी पर बैठा था। राकेश अयांश के सामने आकर बैठा और पूछा, “आहना के साथ अब तुम्हारा रिश्ता ठीक है ना।” 


“जी पापा। सब ठीक है। फिर से सब कुछ पहले जैसा हो गया है।” अयांश ने कहा। आहना का नाम सुनते ही बाहर रूम के बाहर खड़ी नुपुर को गुस्सा आ गया पर राकेश की अगली बात ने उसे और गुस्सा दिला दिया जब उन्होंने अयांश से पूछा, “नुपुर को डायवोर्स कब दे रहे हो तुम?” 


“पापा, मैं नही दूंगा नूपुर को डायवोर्स।” अयांश ने जैसे ही ये कहा, नूपुर खुश हो गई पर राकेश ये सुनकर हैरान है इसलिए उन्होंने पूछा, “तुम्हारे कहने का मतलब क्या है, अयांश?” 


“पापा, मैं नुपुर को इतना ज्यादा परेशान करूंगा की वो खुद मुझे डायवोर्स देकर छोड़ देगी।” अयांश ने कहा जिसे सुनते ही नुपुर गुस्से में वहाँ से अपने कमरे में आ गई और उसने दीवार पर लगी अयांश की तस्वीर को देखते हुए कहा, “जितनी मर्जी कोशिश करलो अयांश। जितना मर्जी परेशान करो तुम मुझे। मैं तुम्हें कभी डायवोर्स नही दूंगी और न ही कभी छोडूंगी। अगर तुम्हें कोई छोड़कर जाएगा तो वो है आहना।” 


एक दिन आहना ऑफिस में बैठे कंप्यूटर स्क्रीन के आगे काम कर रही थी की तभी उसे महसूस हुआ की उसकी नज़र कमज़ोर हो रही है। उसने अपनी आँखें बंद करते हुए कहा, “ज्यादा कम्प्यूटर स्क्रीन पर काम करने की वजह से नजर कमज़ोर हो रही है।” 


वो आँखें खोलकर फिर से अपने काम में लग गई। वो इतनी व्यस्त हो गई की उसने ध्यान ही नही दिया की अयांश पिछले पाँच मिनिट से उसके पीछे खड़ा उसे ही देख रहा था। उसने हल्के से आहना के कंधे पर मारा जिससे आहना का ध्यान उसके ऊपर गया और उसने खड़े होते हुए कहा, “अयांश, तुम यहाँ?” 


“तुमसे मिलने आया था पर तुम तो बिजी हो बहुत। इतना कहाँ ध्यान लगा रखा है की मेरा ही ध्यान नही रहा तुम्हें।” अयांश ने कहा। 


आहना ने अपने सामने रखी कुछ फाइलों और कंप्यूटर की तरफ इशारा करते हुए कहा, “इन फाइलों और कंप्यूटर के साथ बिजी हूँ।” 


अयांश ने सारी फाइल्स को बंद किया और कहा, “मैं तुम्हें अपने साथ ले जाने आया था। तुम इसी वक्त मेरे साथ चल रही हो।” 


“पर कहाँ?” आहना ने फाइलों को बंद करता देखते हुए पूछा।


“हमारे बचपन वाले पार्क में।” अयांश ने आहना का हाथ पकड़कर उसे उठाते हुए कहा। 


वो दोनों ऑफिस से बाहर आ गए और गाड़ी में बैठ गए। जल्दी ही वो दोनों पार्क के अंदर आकर उसी बेंच पर बैठ गए जिसपर वो हमेशा बैठा करते थे और हमेशा की तरह आहना ने अपना सिर अयांश के कंधे पर रख रखा था। 


वो दोनों एक दूसरे का हाथ थामे हुए पार्क में खेल रहे बच्चों को देख रहे थे। अयांश ने आहना को देखा और पूछा, “क्या तुम्हें भी मेरी तरह हमारा बचपन याद आ गया। जब हम भी ऐसे ही यहाँ आकर खेला करते थे?” 


“हम्म, कितनी जल्दी बड़े हो गए न हम लोग। मुझे तो आज भी वो दिन फिर से जीने का मौका मिले न, तो मैं आसानी से तैयार हो जाऊंगी इसके लिए।” आहना ने कहा। 


“वैसे ये मौका तो हमें मिलेगा एक बार बहुत जल्दी।” अयांश ने कहा तो आहना ने उसे हैरानी से देखा और पूछा, “वो कैसे?” 


“हमारी शादी होगी। फिर हमारे बच्चे होंगे। छोटी आहना और छोटा अयांश। जिनमें हम अपना बचपन जीयेंगे और उनके साथ रोज यहाँ आया करेंगे।” अयांश ने मुस्कुराते हुए कहा और आहना को देखा। 


“तुमने बच्चों के बारे में भी अभी से ही सोच लिया।” आहना ने हैरानी से पूछा।


“येस, मुझे एक बेबी गर्ल एंड एक बेबी बॉय चाहिए जो बिल्कुल मेरे ऊपर जाएंगे।” अयांश ने खुश होकर कहा।


“वो तो होगा ही। हर वक्त तुम मेरी नज़रों के सामने जो रहा करोगे।” आहना ने प्यार से कहा तो अयांश भी प्यार से उसकी आँखों में देखने लगा।


जैसे ही अयांश आहना के साथ ऑफिस से निकला था, उसके कुछ वक्त बाद ही नुपुर ऑफिस में आई। जब उसे पता चला की अयांश ऑफिस में नही है तो उसे गुस्सा आने लगा जो और ज्यादा बढ़ गया जब उसे पता चला की आहना भी ऑफिस में नही है। उसे समझते देर नही लगी की पक्का अयांश आहना के साथ कहीं गया है। 


वो गुस्से से घर आ गई और अयांश के आने का इंतजार करने लगी। रिद्धिमा भी वहीं बैठी उसे देख रही थी। शाम में सात बजे के करीब अयांश घर पहुँचा। 


“कहाँ थे तुम इतने वक्त से?” नुपुर ने उसे गुस्से में पूछा। 


अयांश ने उसे देखा और कहा, “ऑफिस में था मैं।” 


नुपुर ने उसे देखा और कहा, “झूठ। तुम ऑफिस में नही थे। गई थी मैं ऑफिस आज। न तुम वहाँ थे और न वो आहना। उसी के साथ थे न तुम?” 


“सही कहा तुमने। आहना के साथ ही था मैं।” अयांश ने कहा और बिना नुपुर कि बात सुने वहाँ से ऊपर अपने कमरे में चला गया।


नुपुर ने रिद्धिमा को देखा और कहा, “देखा आपने। वो आहना अयांश को मुझसे छीनकर ही रहेगी।” 


“शांत रहो, नुपुर।” रिद्धिमा ने कहा।


“कैसे शांत, रहूं? आपको पता है राकेश अंकल चाहते है की अयांश जल्द से जल्द मुझे डायवोर्स दे और आहना से शादी करले।” नुपुर ने गुस्से में चिल्लाते हुए कहा।


“क्या? वो तुम्हें डायवोर्स नही दे सकता।” रिद्धिमा ने कहा।


“अब मैं उस आहना को नही छोडूंगी, मॉम। मैं उस आहना को अयांश के साथ और बर्दाश्त नही कर सकती।” नुपुर ने गुस्से में अपने दांत भींचते हुए कहा।


रिद्धिमा ने नुपुर को देखा और एक शैतानी मुस्कान के साथ कहा, “डोंट वरी, बेटा। आहना को नुकसान पहुँचाने में अब वही इंसान हमारी मदद करेगा, जो उसे सबसे ज्यादा पसंद करता है।” 


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