इंदौर के एमरल्ड हाई स्कूल में इस वक्त पेरेंट्स टीचर्स मीटिंग चल रही थी। स्कूल में पेरेंट्स अपने बच्चों के साथ आ जा रहे थे लेकिन मिस्टर एंड मिसेज शर्मा अकेले ही आए थे। जैसे ही वो अपने बेटे की टीचर से मिलकर उनके सामने बैठे, टीचर ने कहा, “मिस्टर एंड मिसेज शर्मा, श्रेयांश पढ़ाई में बहुत अच्छा है। इस बात पर तो कोई डाउट ही नही है लेकिन उसकी बस एक कंप्लेंट है। वो ये है की जब भी हम कोई टॉपिक क्लास में बच्चों के लिए रिपीट करते है तो उसे वो बोरिंग लगता है और वो उस वजह से क्लास में अटेंटिव होकर नही बैठता। हम पूछे तो कहता है की वो टॉपिक वो पहले ही पढ़ चुका है।”
“आप टेंशन मत लीजिए मैम। मैं बात करती हूॅं श्रेयांश से आज ही।” मिसेज शर्मा ने कहा।
एक कमरे में एक लड़का, जिसकी उम्र लगभग तेरह साल के करीब होगी, चुपचाप अपनी माँ, ज्योति और अपने पिता, शिवम के सामने नज़रे झुकाए खड़ा था। उसके खड़े होने के अंदाज से ही पता चल रहा था की उसे इस वक्त बहुत ज्यादा डांट पड़ रही है।
“श्रेयांश, ऐसे चुपचाप खड़े रहोगे या बताओगे की ये सब क्या है?” ज्योति ने उससे तेज आवाज़ में पूछा।
श्रेयांश ने नज़रें उठाकर ज्योति को देखा और कहा, “मुझसे अब पढ़ाई नही होती है, मम्मा।”
उसकी बात सुनकर ज्योति ने हैरान होकर कहा, “क्या मतलब पढ़ाई नही होती है। तुम तो इतने इंटेलिजेंट हो। इतने अच्छे मार्क्स आते है तुम्हारे।”
“मम्मा मुझे सेम टॉपिक्स बार बार पढ़ना बोरिंग लगता है और मैं पढ़ाई के लिए नही, स्पोर्ट्स के लिए बना हूँ बाकी एग्जाम्स की टेंशन आप न करें। मैं क्लियर करलूॅंगा।” श्रेयांश ने कॉन्फिडेंस के साथ कहा। उसकी बात सुनकर ज्योति ने अपने साथ बैठे शिवम को देखा और उनसे कहा, “आप भी कुछ कह दीजिए इससे। सबकुछ मैं ही बोलती रहूॅं।”
“मैं अभी क्या कह सकता हूँ। इसकी उम्र ही ऐसी चल रही है कि अभी इसे हम कुछ भी कह दे, इसे बिल्कुल समझ नही आएगा।” शिवम ने कहा।
ज्योति ने श्रेयांश को वापिस देखा और कहा, “तुम स्पोर्ट्स के लिए बने हो। सिर्फ कुछ ट्रॉफीज और मेडल्स से तुम कोई इतने बड़े एथलीट नही बन गए हो। पढ़ाई के टॉपिक्स रिपीट करना भी जरूरी है। अभी से ये हाल है। पता नही आगे क्या क्या दिखाओगे तुम हमें।”
उस दिन श्रेयांश ने अच्छे से ज्योति से अपना डांट का कोटा पूरा किया।
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वो अपने हाथों में कोई स्टोरी बुक पकड़े हुए आराम से उसे पढ़ने में खोई हुई थी। बारह साल की उस लड़की को उस वक्त कोई भी देखता तो यही सोचता की उस स्टोरी बुक के अंदर की दुनिया ही उसकी हकीकत की दुनिया है जो काफी हद तक उसके खुद के लिए सही भी था। वो अपनी हकीकत को नजर अंदाज कर सबसे ज्यादा कहानियों की दुनिया में रहना पसंद करती थी।
“गुरनूर, तुम्हें क्या मिलता है ये कहानियाँ पढ़कर। ये सब तो हकीकत भी नही है?” उसकी सबसे अच्छी दोस्त, रावी ने उसके पास बैठते हुए पूछा।
“मेरे लिए तो यही हकीकत है। अगर असल हकीकत की दुनिया देखी तो वो बहुत बुरी है। कम से कम मेरी इस झूठी हकीकत में सुकून तो है।” गुरनुर ने मुस्कुराते हुए कहा।
“तुम अभी से ही बहुत गहरी बातें करती हो।” रावी ने कहा जिसे सुन गुरनूर मुस्कुरा उठी।
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उन्नीस साल का श्रेयांश आज पहली बार ओपन माइक के स्टेज पर अपना पहला स्टैंड अप कॉमेडी का परफॉर्मेंस देने जा रहा था क्योंकि पिछले कुछ दिनों में वो एक फेमस स्टैंड अप कॉमेडियन से काफी प्रभावित हुआ था। वैसे तो पिछले छह सालों में उसने स्कूल में बहुत सारी फील्ड्स जैसे पेंटिंग, म्यूज़िक, हर किस्म के स्पोर्ट्स जैसे बास्केटबॉल, टेनिस, गोल्फ और करांटे इत्यादि में अपना इंटरेस्ट दिखाया। इन सब में से उसने करांटे पूरे पाँच साल तक किया था। इन्हीं स्पोर्ट्स की वजह से उसका कमरा मेडल्स और ट्रोफीज से भरा पड़ा था लेकिन ये सब सिर्फ कुछ कुछ वक्त के लिए रहता था। वो करांटे को छोड़कर कभी किसी और फील्ड, और चीज को लेकर ज्यादा सीरियस नही हुआ लेकिन स्कूल से निकलते ही उसने वो भी छोड़ दिया। पढ़ाई उसे काफी हद तक बोरिंग लगती थी इसलिए वो हर टॉपिक को बस एक बार ही पढ़ा करता था और इसके बावजूद भी उसके अच्छे नंबर आते थे क्योंकि वो बहुत ज्यादा इंटेलिजेंट था। उसकी याद रखने की क्षमता इतनी अच्छी थी की एक बार अगर वो कुछ पढ़ लेता तो वो उसे याद रहता था।
उसने स्टैंड अप कॉमेडी शोज करते हुए ही साथ में अपनी ग्रेजुएशन खत्म की थी जिससे उसके मां बाप को यकीन हो गया था की उनका बेटा अब इस चीज को लेकर सीरियस है क्योंकि उसने पूरे तीन साल ये करते हुए निकाल दिए थे।
स्टैंड अप कॉमेडी करते हुए उसे पूरे तीन साल हो चुके थे लेकिन उसे इतनी ज्यादा कामयाबी नही मिली थी जिसकी वजह से उसके पिता चाहते थे की वो किसी जॉब करने को लेकर सीरियस हो लेकिन उन्हें मालूम था की ऐसा कभी नही होने वाला है।
एक कमरे में कुछ लड़के बैठकर पार्टी कर रहे थे। उन्हीं के बीच श्रेयांश भी बैठा हुआ था। ये सभी लड़के श्रेयांश के दोस्त थे और इस वक्त अपनी अपनी गर्लफ्रेंड्स के बारे में बातें कर रहे थे। श्रेयांश को इन सब में कोई इंटरेस्ट नही था क्योंकि कॉलेज के पूरे तीन सालों में उसने कोई गर्लफ्रेंड् नही बनाई थी हालांकि कॉलेज में बहुत सारी लड़कियां उसकी गर्लफ्रेंड बनना चाहती थी जिसकी वजह थी उसकी पर्सनेलिटी। तेरह से बाइस साल का होने तक उसके लुक्स में काफी ज्यादा बदलाव आए थे। छह फीट के करीब की हाइट और उसके हैंडसम लुक्स ने उसे काफी आकर्षक बना दिया था।
बातें करते हुए श्रेयांश के सबसे अच्छे दोस्त, विवेक ने उसकी तरफ देखकर शरारत से कहा, “अपने ग्रुप में एक ही बंदा है जो सिंगल है।”
सभी ने श्रेयांश की तरफ देखा जो मजे से सोफे पर बैठे हुए बीयर पी रहा था। उसके अंदाज से ही लग रहा था की उन सबकी बातों का उसके ऊपर कोई असर नही हो रहा है।
Continued In आर्ज-ए-इश्क - 2

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