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Monday, 28 September 2026

आर्ज-ए-इश्क - 24

 



गुरनूर ने फैसला तो कर लिया था कि वो घर भाग जाएगी पर ये उसके लिए इतना आसान नही था क्योंकि नीत उसके ऊपर कड़ी नज़र रखती थी। शादी का दिन आने में ज़्यादा वक़्त नहीं बचा था इसलिए नीत के कहने पर शीतल ने जल्दी जल्दी उसे उसकी शादी की शॉपिंग करवायी और शादी की सारी तैय्यारियाँ भी कर ली। जब विक्रम ने शुभम को जल्दी ही गुरनूर की शादी करने के बारे में बताया और उन्हें शादी में आने के लिए कहा तो शुभम को काफी हैरानी हुई क्योंकि वो अच्छे से जानते थे की गुरनूर इस शादी के लिए तैयार नहीं होगी इसके बावजूद विक्रम उसकी जबरदस्ती शादी कर रहे हैं। वो विक्रम से इस बारे में कुछ नही कहना चाहते थे इसलिए उन्होंने विक्रम से कहा कि नील और अपने काम की वजह से वो चार दिन पहले पहुँच जाएंगे। रावी भी गुरनूर के लिए काफ़ी परेशान थी लेकिन वो भी कुछ नही कर सकती थी। रावी की नज़रों में अगर गुरनूर को इस शादी से कोई बचा सकता था तो वो श्रेयांश था लेकिन गुरनूर ने उसे श्रेयांश को इस बारे में कुछ भी बताने के लिए मना किया था। 


वहीं श्रेयांश इन सबसे बेख़बर विवेक के साथ लंदन जाने के लिए शॉपिंग खत्म करने में बिजी था। गुरनूर से उसकी बात तो होती थी मैसेज पर लेकिन गुरनूर ने खुद ही उसे इस बात का एहसास नहीं होने दिया कि वो किस प्रॉब्लम में है।


गुरनूर के घर में शादी के लिए कुछ करीबी मेहमान आ चुके थे। नीत भी गुरनूर को लेकर उनके साथ बैठी हुई थी और शीतल उनके लिए खाने की तैयारी में लगी हुई थी। गुरनूर के पास यही सही मौका था की वो अपने कमरे में जाकर घर से भागने के लिए पैकिंग कर सके इसलिए वो बहाना बनाकर ऊपर अपने कमरे में आ गई और अपने कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद कर भागने के लिए पैकिंग करने में लग गई। जैसे ही उसने पैकिंग खत्म की, किसी ने उसके कमरे का दरवाज़ा खटखटाया। गुरनूर ने जल्दी से बैग को साइड में छुपाकर दरवाजा खोला तो देखा सामने नीत की छोटी बेटी, रूही खड़ी हुई थी। रूही ने उसे देखकर कहा, “दीदी, आप यहाँ क्या कर रही है? नीचे सब आपके बारे में पूछ रहे है।” 


“वो मैं अपने कपड़े सही करने आई थी। चलो नीचे चले।” कहते हुए गुरनूर ने अपने कमरे का दरवाज़ा बंद किया और रूही के साथ नीचे आकर सबके बीच चुपचाप बैठ गई। 


शादी के फंक्शनस की शुरुआत होने के दिन गुरनूर पाँच बजे उठ गई। उसने अपने पास में रूही को सोते हुए देखा तो थोड़ा परेशान हो गई लेकिन फिर बहुत ही ध्यान से बेड से उतरकर वो अपना बैग लेकर कमरे से बाहर आ गई। देर रात सोने की वजह से पूरे घर में अभी कोई भी नहीं जगा था जिसका फ़ायदा उठाकर गुरनूर बहुत ही ध्यान से घर से भाग गई। 


शीतल सुबह उठकर गुरनूर को फंक्शन के लिए उठाने के लिए आई तो   गुरनूर उसे पूरे कमरे में कहीं भी दीखाई नहीं दी। उसने रूही को उठाते हुए पूछा, “रूही, गुरनूर कहाँ है?” 


“यहीं कहीं होगी, मामी।” रूही ने अलसाई सी आवाज में उठते हुए कहा। शीतल गुरनूर को ना पाकर परेशानी हो गई। 


वहीं गुरनूर इस वक्त इंदौर जाने वाली ट्रेन में अकेली बैठी हुई थी। वो डरी हुई तो काफी थी लेकिन श्रेयांश का प्यार उसे कहीं ना कहीं हिम्मत भी दे रहा था। 


शीतल ने विक्रम और नीत को गुरनूर के भाग जाने के बारे में बताया। उन्होंने गुरनूर को कई बार फोन किया लेकिन गुरनूर ने अपना फोन स्विच ऑफ कर लिया था। विक्रम को भी अब गुस्सा आ रहा था जिसे देख शीतल ने कहा कि उन्हें गुरनूर का इंतजार करना चाहिए। नीत ने शीतल को देखकर हल्के गुस्से में कहा, “आप अपनी बेटी पर ठीक से नज़र नही रख सकती थी, भाभी।” 


“ये बात आप मुझसे न ही कहे तो बेहतर होगा। एक तो मेरी बेटी की मर्ज़ी के खिलाफ आपने उसकी शादी तय की और जब वो आपके इस जबरदस्ती के फैसले से बचने के लिए भाग गई तो इल्जाम मेरे ऊपर की मैंने उसपर ठीक से नज़र नही रखी। जरा पूछिए अपने भाई से। मैंने इन्हें पहले ही कह दिया था की अगर गुरनूर ने इस शादी से बचने के लिए कल को कोई भी ऐसा वैसा कदम उठाया तो मुझे मत कहे इसलिए बेहतर होगा मेरे ऊपर ये इल्जाम न लगाए आप। ये जो कुछ भी गुरनूर ने किया है ना इसके जिम्मेदार आप दोनों भाई बहन खुद है। अगर आप दोनों उसकी मर्ज़ी के बिना उसकी शादी न करवा रहे होते तो वो कभी नहीं भागती। ये जो इल्जाम है ना अपने और अपने भाई पर लगाइए आप, दीदी।” कहकर शीतल गुस्से में वहाँ से चली गई। 


सुबह के वक्त इंदौर में आकर गुरनूर ने सबसे पहले अपना फोन ऑन किया और श्रेयांश को फोन लगाया। जैसे ही श्रेयांश ने दूसरी तरफ से फोन उठाया, गुरनूर ने जल्दी से कहा, “इंदौर रेलवे स्टेशन पर मिलने आ जाओ अभी।” 


श्रेयांश ये सुनकर हैरान हो गया। उसे समझ नही आया की इतनी सुबह सुबह गुरनूर इंदौर रेलवे स्टेशन पर कर क्या रही है। वो गुरनूर के साथ इस रिश्ते में सीरियस नही होना चाहता था लेकिन उसके दिल में गुरनूर के लिए मोहब्बत थी जो उसे गुरनूर के पास जाने के लिए कह रही थी। श्रेयांश खुद को रोक नही पाया और अपने घर से बाहर आकर अपनी बाइक पर बैठ स्टेशन जाने के लिए निकल गया। 


जल्दी ही वो स्टेशन पहुँच गया। बाइक पार्किंग में लगाकर वो अंदर जाने लगा तो देखा की गुरनूर बाहर खड़ी हुई थी। वो उसके पास आया और उसने गुस्से में पूछा, “ये क्या पागलपन है अब तुम्हारा गुरनूर? अचानक से तुम यहाँ क्यों आ गई हो? वो भी बिल्कुल अकेले।” 


श्रेयांश गुरनूर के चेहरे को देखकर समझ रहा था की वो इस वक्त कितना डरी हुई है और वो बहुत ज्यादा रोई भी है क्योंकि उसकी आँखें रोने की वजह से सूजी हुई थी। गुरनूर की आँखों में फिर से आँसू आ गए और उसने कहा, “मैं भागकर आई हूॅं। पापा जबरदस्ती  मेरी शादी करवा रहे थे बुआ के कहने पर।” 


गुरनूर की शादी की बात सुनकर श्रेयांश बहुत ज्यादा हैरान हो गया।


Continued In आर्ज-ए-इश्क - 25

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