गुरनूर की दोस्त, जो और कोई नही बल्कि रावी ही थी ने उसके पास आकर कहा, “मैं और प्रिया कबसे इंतज़ार कर रहे है तुम्हारा। खाना ठंडा हो रहा है। क्या कर रही हो तुम इतनी देर से यहाँ।”
“हाँ, चलते है रावी। एक मिनट दो बस मुझे।” कहकर गुरनूर ने श्रेयांश को गुस्से से घूरकर देखते हुए कहा, “तुम्हारे पास एक मिनट है। जल्दी से माजरत करो।”
श्रेयांश को उसकी बात समझ नहीं आई तो उसने विवेक और ऋतिक की तरफ देखा। उनको भी गुरनूर की बात समझ नही आई थी इसलिए दोनों ने श्रेयांश को देखकर अपने कंधे उचका दिए। श्रेयांश को कन्फ्यूज देखकर रावी ने उसे समझाते हुए कहा, ‘‘ये आपको सॉरी बोलने के लिए कह रही है उर्दू में। इसे उर्दू लैंग्वेज काफी पसंद है न।’’
उसने फिर गुरनूर को देखकर पूछा, ‘‘सॉरी किस बात के लिए लेकिन। क्या किया है इन्होंने तुम्हारे साथ।’’
‘‘क्या किया इन्होंने। ये देखो, इनकी वजह से सारा जूस गिर गया हमारा।’’ गुरनूर ने रावी को दिखाते हुए कहा।
‘‘आइ एम रेयली वेरी सॉरी मिस।’’ श्रेयांश ने कहा तो गुरनूर उसे घुरते हुए रावी के साथ वहाँ से चली गई।
उसे जाते देख श्रेयांश ने मन ही मन में कहा, “गुरनूर, सच में ही जान से मारकर जा चुकी हो तुम मुझे। तुम्हारी खूबसूरती ने मेरे दिल के अंदर जो थोड़ी सी मोहब्बत पैदा कर दी है, उसके तीर सीधा दिल पर लगे है।’’
उन तीनों ने वहीं पर खाते पीते हुए खूब एन्जॉय किया और फिर घर आकर सो गए।
अगली सुबह श्रेयांश विवेक के साथ ओपन माइक शो में जाने के लिए निकल गया। ऋतिक को अपनी जॉब पर जाना था इसलिए वो उनके साथ नहीं गया।
वहीं गुरनूर ने भी अपने छोटे से बैग में अपनी डायरी और पेन डाला और अपने पापा, विक्रम और मम्मी, शीतल को बाय बोलकर रावी के साथ ओपन माइक शो में जाने के लिए निकल गई।
वो दोनों थोड़ी ही देर में वेन्यू पर पहुँच गई। स्कूटी पार्क कर वो दोनों बातें करते हुए अंदर जा ही रही थी की तभी गुरनूर की टक्कर दूसरी तरफ से आते हुए श्रेयांश से हो गई। वो गिरने ही वाली थी लेकिन श्रेयांश ने उसे कमर से पकड़कर गिरने से बचा लिया। श्रेयांश उसकी ब्राउन आँखों में खो गया।
उसे वहाँ देखकर गुरनूर को फिर से गुस्सा आ गया। उसने सीधा खड़ा होकर श्रेयांश के हाथ अपनी कमर से हटाते हुए उसके ऊपर चिल्लाकर कहा, ‘‘तुमने मुझसे टकराने का कान्ट्रैक्ट लिया हुआ है क्या किसी से और तुम यहाँ क्या कर रहे हो। पीछा कर रहे हो मेरा।’’
उसकी बातें सुन अब श्रेयांश को भी गुस्सा आ गया और उसने कहा, “लिस्टेन मैडम, मुझे कोई शौंक नहीं है तुमसे टकराने का और तुम्हारा पीछा करने का। श्रेयांश को एक ही काम दोबारा दोबारा करना बिल्कुल नहीं पसंद और कल रात मेरी गलती थी इसलिए सॉरी बोल दिया मैंने तुम्हें। इस बार नहीं बोलूँगा क्योंकि यहाँ मेरे साथ साथ तुम्हारी भी गलती है।’’
गुरनूर उसे बिना कुछ कहे रावी का हाथ पकड़कर अंदर चली गई और हमेशा की तरह अपनी फेवरेट जगह पर जाकर बैठ गई। श्रेयांश भी अंदर आ गया। वो यहाँ परफॉर्म करने आया था लेकिन गुरनूर हर बार की तरह यहाँ पर सिर्फ कविताएं सुनने और लिखने के लिए आई थी। गुरनूर ने अपने बैग में से अपनी डायरी और पेन निकालकर लिखना शुरू किया। ओपन माइक शो शुरू हो गया। श्रेयांश की नजर गुरनूर के ऊपर गई तो वो उसे देखने लग गया। गुरनूर चेहरे पर मुस्कान के साथ लिखे जा रही थी। जब वो पेन होठों में दबाकर कुछ सोचने लगती तो और भी ज्यादा प्यारी लगती। शो से ध्यान हटाकर श्रेयांश गुरनूर में पूरी तरह से खो गया। कुछ लोगों के परफॉर्म करने के बाद होस्ट ने उसका नाम अनाउन्स किया लेकिन उसे तो जैसे कुछ सुनाई ही नहीं दे रहा था। वहीं गुरनूर उसका नाम सुनकर हैरान हो गई और उसने श्रेयांश को देखते हुए खुद से कहा, “ये भी पोएटरी करता है। वेरी इम्प्रेसिव!’’
विवेक ने जब श्रेयांश को गुरनूर को देखते हुए पाया तो धीरे से उसके हाथ पर चुटी काटकर कहा, “भाई, थोड़ी देर के लिए गुरनूर से ध्यान हटा ले। तेरा नाम अनाउन्स हो रहा है स्टेज पर।’’
श्रेयांश गुरनूर से नजरे हटाकर स्टेज की तरफ गया। उसकी पोएटरी सुनने के लिए गुरनूर ने अपने हाथ में पकड़ा हुआ पेन डायरी पर रखा और उसे देखने लगी लेकिन जब श्रेयांश ने कॉमेडी करनी शुरू की तो गुरनूर को चिढ़ सी महसूस हुई जिसकी वजह उसे समझ नहीं आई।
“यार, ये कितना हॉट है।’’ रावी ने कहा तो गुरनूर ने उसे घूरकर देखा।
परफॉर्म करने के बाद श्रेयांश वापिस अपनी जगह पर आकर बैठ गया और फिर से गुरनूर को देखने लगा। ये देख विवेक ने उससे कहा, “भाई, तू इसे ऐसे देखे जा रहा है। पसंद आ गई क्या।’’
“ये कितनी खूबसूरत है, यार। मन तो कर रहा है अब इससे एक बार और टकराऊँ जिससे इस बार हमारे साथ साथ हमारे नैन से नैन भी टकरा जाएँ।’’ श्रेयांश ने कहा।
“बनाले फिर गर्लफ्रेंड इसे।’’ विवेक ने कहा। कुछ और लोगों के परफॉर्म करने के बाद इवेंट खत्म हो गया। श्रेयांश गुरनूर के पास आया तो गुरनूर ने गुस्से में कहा, “दोबारा टकराना है मुझसे तुम्हें।”
“इरादा तो यही है।” श्रेयांश ने खोए हुए कहा जिसे सुन गुरनूर ने हैरानी से कहा, “क्या?”
श्रेयांश को जब एहसास हुआ की उसने क्या कहा है तो वो अपनी बात संभालते हुए बोला, “मैं देखे जा रहा हूॅं की तुम सिर्फ लिखे जा रही हो। कुछ सुनाया नही तुमने। ये पूछने आया था मैं तो तुमसे।”
रावी श्रेयांश को ही देखे जा रही थी लेकिन उसका सारा ध्यान तो गुरनूर में था। गुरनूर ने हल्का सा मुस्कुराकर कहा, “मैं सिर्फ सुनने आती हूँ और सिर्फ अपने लिए लिखती हूँ।”
“कभी तो मेरे लिए भी लिखोगी ही।” श्रेयांश ने मुस्कुराते हुए कहा तो गुरनूर ने उसे देखते हुए कहा, “क्या मैं आपको इतने अच्छे से जानती हूँ, मिस्टर और मैं कॉमेडी नही लिखती।”
“तो अब जान लो।” कहकर श्रेयांश ने गुरनूर को अपना परिचय दिया और फिर पूछा, “आप क्या लिखती है, गुरनूर?”
गुरनूर ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “इश्क़।”
Continued In आर्ज-ए-इश्क - 6

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