लंबे सफर के बाद वो सभी दिल्ली पहुँच गए। गुरनूर ने अपना बैग खुद उठा लिया क्योंकि नील अर्पिता के बैग्स उठाना चाहता था। वो सभी स्टेशन से बाहर आ गए। गुरनूर रावी के साथ एक जगह जाकर खड़ी हो गई और नील ने अर्पिता के बैग्स थोड़ी दूरी पर नीचे रखे। अर्पिता को आखिरी बार देखकर नील गुरनूर और रावी के पास आ गया। जैसे ही वो उन दोनों के पास आया, रावी ने उसे देखकर कहा, “अब उनसे इतनी बातें कर ली है तो स्पेशल वाला बाय बोलना तो उन्हें बनता है। जाइए, स्पेशल वाला बाय बोल दीजिए भैया।”
रावी की बात सुनकर नील के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई। वो मुस्कुराते हुए अर्पिता के पास जाने के लिए जैसे ही मुड़ा, हैरान रह गया क्योंकि अर्पिता उसके पास आ रही थी। उसे आता हुआ देखकर गुरनूर ने नील से कहा, “लीजिए नील, आप क्या जायेंगे। वही आपके पास आ रही है।”
अर्पिता ने उनके पास आकर नील से कहा, “वो मैं बाय बोलने आई थी और थैंक यू भी। आपने बहुत हेल्प की है आज मेरी।”
“बाय क्यों कह रही है, आप। अब बातें और मुलाकातें तो होती ही रहेंगी।” नील ने अर्पिता को देखते हुए कहा, जिसे सुनकर रावी और गुरनूर ने एक दूसरे को देखा। अर्पिता भी इंदौर से ही थी बस कुछ वक्त के लिए दिल्ली में होस्टल में रहकर पढ़ने आई थी।
अर्पिता से मिलकर वो सभी घर आ गए। विक्रम और शीतल ने जैसे ही उन तीनों को देखा, वो खुश हो गए। विक्रम ने प्यार से गुरनूर को गले लगाकर उसके माथे पर किस करते हुए पूछा, “ठीक है मेरी प्रिंसेस?”
“जी, पापा।” गुरनूर ने कहा और फिर शीतल के गले लग गई। विक्रम ने नील को भी गले लगाया और प्यार से रावी के सिर पर हाथ फेरा।
विक्रम और शीतल चाहते थे की रावी और नील थोड़े दिन रूके लेकिन नील के काम की वजह से उन्हें अगले दिन ही इंदौर वापिस जाना पड़ा।
गुरनूर श्रेयांश के साथ फिर से लॉन्ग डिस्टेंस निभाने लग गई और इस बीच श्रेयांश को भी अपने करियर का सबसे बड़ा मौका मिला जिसमें उसे पूरे तीन साल तक एक कंपनी के लिए भारत से बाहर परफॉर्म करना था। वो किसी भी हालत में ये मौका छोड़ना नहीं चाहता था।
जब उसने गुरनूर को बताया की उसे आगे बढ़ने का इतना अच्छा मौका मिल रहा है तो गुरनूर बहुत ही ज्यादा खुश हो गई।
एक शाम गुरनूर ओपन माइक इवेंट से वापिस आई तो उसने देखा कि घर पर उसकी बुआ, नीत आई हुई है और घर पर ऐसे तैयारिययाँ हो रही हैं जैसे कोई खास मेहमान आने वाला है। नीत से मिलकर उसने किचन में काम कर रही शीतल के पास आकर पूछा, “ये सब क्या हो रहा है, मम्मा?”
“तुम तैयार हो जाओ जाकर अच्छे से।” शीतल ने नीत के लिए चाय बनाते हुए कहा।
“पर क्यों मम्मा? बुआ के आने पर मुझे तैयार होने की क्या जरूरत है?” गुरनूर ने हैरानी से पूछा तो शीतल ने उसे देखकर कहा, “तुम्हें लड़के वाले देखने आ रहे है। तुम्हारी बुआ रिश्ता लाई है तुम्हारे लिए।”
ये सुनकर गुरनूर की आँखों के सामने श्रेयांश का चेहरा आ गया। उसे हैरानी के साथ साथ गुस्सा भी आने लगा और उसने कहा, “पर मम्मी मेरा करियर बनाना रहता है अभी।”
शीतल कुछ कहती उससे पहले ही नीत ने अंदर आते हुए कहा, “ये करियर का रोना सही है तुम लड़कियों का जबकि इसका फायदा कुछ नही है। घर तो तुम्हें फिर भी संभालना पड़ेगा तो अच्छा है तुम इसी पर ध्यान दो और अपनी मम्मी से घर संभालना सीखो।”
नीत की बातों ने गुरनूर ने गुस्से को बढ़ा दिया और उसने नीत को देखते हुए कहा, “ये करियर का फायदा और नुकसान तो आप मुझे मत ही बताए क्योंकि आपको अगर इसका फायदा पता होता तो आप अपनी बेटी के करियर पर ध्यान ज़रूर देती जिससे वो अपनी दर्दनाक शादीशुदा जिंदगी से आज़ाद हो पाती लेकिन अफ़सोस आपने उसके घर संभालने पर ज्यादा तवज्जो दी जिससे अब वो उसी लायक रह गई है बस। खुद की बेटी की तो वो हालत कर दी है, दूसरो की बेटी की भी अब वैसी ही हालत चाहती है आप।”
गुरनूर की बातों से नीत को कहीं न कहीं ये एहसास हो गया था की उसने अपनी बेटी के साथ क्या किया है। गुरनूर की कही बातें कड़वी ज़रूर थी पर सच थी। शीतल ने जब देखा की गुरनूर नीत के आगे ज्यादा बोल रही है तो उसने गुरनूर को शांत करते हुए कहा, “गुरनूर, बुआ से ऐसे बात नही करते। अब हमने उन्हें बुला लिया है ना तो तुम बस एक बार उस लड़के से मिल लो। मिलने में क्या जाता है। पसंद आया अगर हमें तो ही शादी की बात होगी ना। जाओ जाकर तैयार हो जाओ।”
“सही कहा मम्मी आपने ऐसे बात नही करते बड़ो से पर कई बार न अपने लिए बड़ो को जवाब देना ज़रूरी हो जाता है वरना वो हमारी जिंदगी को अपना बनाकर हमारे लिए खुद से फैसले करने लग जाते है ये सोचते हुए की हम तो बच्चे है, जो वो कहेंगे, हम उसे चुपचाप मान लेंगे।” गुरनूर ने नीत को देखते हुए कहा और फिर तैयार होने ऊपर अपने कमरे में चली गई।
उसके जाते ही नीत ने शीतल से कहा, “ये सिखाया है भाभी आपने इसे। जुबान चलाना। ससुराल में जाकर यही करेगी क्या।”
शीतल ने कुछ नही कहा क्योंकि उसे पता था गुरनूर भी गलत नहीं है। शीतल भी नीत की बातों में कम आती थी क्योंकि उसे मालूम था की नीत बस अपने भाई के घर में भी अपनी हुकुमत चाहती है और पूरे घर में एक विक्रम ही है जो नीत की बातों में आ जाता है।
गुरनूर ने गुस्से से अपने कमरे में आकर अपना बैग बेड पर फैंका और उसपर बैठ गई। उसने अपना गुस्सा थोड़ा सा शांत करने की कोशिश की। थोड़ी देर ऐसे ही बैठे रहने के बाद गुरनूर ने उठकर अलमारी से अपने लिए अनारकली सूट निकाला और उसे पहनकर ये दुआ करते हुए तैयार होने लगी की वो उस लड़के और उसके परिवार को बिल्कुल भी पसंद न आए।
Continued In आर्ज-ए-इश्क - 22

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