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Thursday, 10 September 2026

आर्ज-ए-इश्क - 20



श्रेयांश से मिलकर घर आने के बाद गुरनूर दिल्ली वापिस जाने के लिए पैकिंग कर रही थी की तभी रावी ने उसे पीछे से आकर गले लगा लिया और कहा, “मैं तुम्हें बहुत मिस करूँगी।” 

रावी की बात सुनकर गुरनूर बिना कुछ कहे मुस्कुरा उठी तो रावी ने बेड पर रखे हुए गुरनूर के कपड़ो को साइड कर वहाँ बैठते हुए कहा, “तुम मुझे मिस नहीं करोगी क्या या फिर तुम्हें बस श्रेयांश की याद ही आएगी?” 

गुरनूर ने उसके पास बैठकर अपनी दोनों बाहें साइड से उसके आसपास लपेटते हुए कहा, “मैं तुझे तो सबसे ज्यादा मिस करूँगी। तू मेरी बचपन की दोस्त ही नहीं, मेरी बहन भी है और तेरी जगह तो श्रेयांश भी नहीं ले सकता।”

“बस बस, ज्यादा मक्खन मत लगाओ मुझे।” रावी ने अपने दोनों हाथों से गुरनूर की बाजू को पकड़ते हुए कहा। वो दोनों वैसे ही बैठकर हँसते हुए बातें कर रही थी की तभी रावी के कमरे के बाहर से गुजरते हुए नील की नज़र उनके ऊपर गई। 

नील ने कमरे के अंदर आकर अपने हाथों से उनकी नज़र उतारते हुए कहा, “तुम दोनों बहनों में कितना प्यार है। किसी की नज़र ना लगे तुम दोनों को।” 

“हमें किसी की नज़र नही लगती।” रावी ने कहा। नील भी वहीं बैठ गया और गुरनूर उन दोनों से बातें करते हुए अपनी पैकिंग करने लग गई। 

अगली सुबह गुरनूर दिल्ली वापिस जाने के लिए तैयार थी। नील और रावी उसे छोड़ने जा रहे थे। गुरनूर जैसे ही मधु से मिली, मधु भावुक होकर रोने लगी क्योंकि ये पहली बार था जब गुरनूर इतने वक्त तक उनके साथ दिन रात रही थी। वैसे तो जब वो लोग दिल्ली में रहते थे तो बस गुरनूर दिन में एक बार कुछ वक्त के लिए ही आती थी। ज्यादातर रावी गुरनूर के घर पर उसके साथ रहती थी। अब जब मधु को गुरनूर को दिन रात देखने की आदत हो गई तो उसके वापिस जाने का समय आ गया। 

गुरनूर ने मधु को रोते हुए देखा तो उसे अच्छा नही लगा। उसने मधु के आँसू पोंछते हुए कहा, “आंटी, आप ऐसे रोने लगोगे तो मैं जा नहीं पाऊँगी। मैं आपसे वादा करती हूँ मैं बहुत जल्दी दोबारा आपके पास रहने आऊँगी।” 

मधु ने प्यार से गुरनूर के गाल को छूकर मुस्कुराते हुए हाँ में सिर हिला दिया। गुरनूर फिर शुभम से मिलकर नील और रावी के साथ घर से स्टेशन पहुँचने के लिए निकल गई। 

उसे जाता हुआ देखकर मधु फिर से थोड़ा इमोशनल हो गई। मधु को इमोशनल होता हुआ देखकर शुभम ने उसे कंधो से पकड़ा और कहा, “अरे भाग्यवान, इतना रोने की क्या जरूरत है। अगर तुम्हें गुरनूर से इतना ही प्यार है तो हम उसे हमेशा के अपना बनाकर इस घर में ले आते है। हम विक्रम से नील के लिए गुरनूर का हाथ माॅंग लेंगे।” 

“क्या सच में?” मधु ने खुश होकर कहा और फिर उदास होते हुए कहा, “पर अगर गुरनूर या नील नही माने तो?” 

“तुम अपने बेटे से पूछे बिना ही इस बात का अंदाजा कैसे लगा सकती हो। उससे उसकी पसंद पूछेंगे न हम। बस थोड़ा इंतजार करना होगा तुम्हें। नील की अभी अभी जॉब लगी है और गुरनूर भी अभी पूरी तरह से अपने करियर पर ध्यान दे रही है। एक बार उन दोनों को अपने अपने करियर में पूरी तरह से सैटल होने दो। उसके बाद मैं विक्रम से बात करूँगा।” शुभम ने कहा। उसकी बात सुनकर मधु ने मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है। अगर आप ये गारंटी दे की गुरनूर मेरी बहु बनकर इस घर में आएगी तो मुझे इंतजार करने में कोई दिक्कत नही।” 

“भगवान से प्रार्थना करो की ऐसा ही हो।” शुभम ने मधु के गाल को छूकर कहा और अपने काम पर जाने के लिए निकल गए। 

वहीं स्टेशन पहुँचकर नील, रावी और गुरनूर ट्रेन में अपनी सीट पर आकर बैठ गए। उनकी सीट दरवाज़े के पास ही थी। नील ने सामान रखकर गुरनूर और रावी को देखते हुए कहा, “तुम दोनों बैठो। मैं अभी आता हूँ।” 

नील को चलती हुई ट्रेन के दरवाज़े पर खड़े होना अच्छा लगता था इसलिए वो दरवाज़े पर आकर खड़ा हो गया। वो वहाँ खड़े होकर आसपास देख ही रहा था की तभी एक लड़की उसके सामने आई जिसने अपने हाथ में दो भारी भारी बैग पकड़े हुए थे। वो लड़की बहुत ज्यादा हाफ रही थी। नील ने उसे देखकर अंदाजा लगाया की शायद उसे स्टेशन छोड़ने कोई नहीं आया है इसलिए उसे अकेले ही दो भारी भरकम बैग उठाने पड़े जिसकी वजह से वो अब हाफ रही थी और लंबी सांसें ले रही थी। 

नील ने उसे देखकर कहा, “क्या मैं आपकी हेल्प करूँ।” 

उस लड़की ने नील को देखकर हाफते हुए कहा, “येस, प्लीज़।” 

नील ने ट्रेन से उतरकर उस लड़की के दोनों बैग ट्रेन में चढ़ाए। गुरनूर और रावी अपनी ही बातों में लगी हुई थी इसलिए उन्होंने नील की तरफ ध्यान नहीं दिया। उस लड़की के ट्रेन पर चढ़ने के बाद नील भी ट्रेन पर वापिस चढ़ गया। उस लड़की ने अपने बैग से निकालकर पानी पीया। नील तो लगातार उसे देखे जा रहा था।

रावी से बातें करते हुए गुरनूर की नज़र नील और उस लड़की पर गई तो वो हैरान हो गई। उसने नील की तरफ इशारा करते हुए रावी से कहा, “जरा उधर देखो।” 

नील को किसी लड़की के साथ देखकर रावी को भी बहुत ज्यादा हैरानी हुई। उस लड़की ने थोड़ा सा रिलैक्स होकर नील की तरफ अपना हाथ बढ़ाते हुए कहा, “थैंक यू, मेरी हेल्प करने के लिए।” 

नील ने उससे हाथ मिलाते हुए कहा, “वेलकम। चलिए आपको आपकी सीट तक छोड़ देता हूँ।” 

उसने लड़की ने अपने हाथ में पकड़ी टिकट में अपना सीट नंबर देखा और उस सीट पर आ गई जहाँ गुरनूर और रावी बैठी हुई थी। नील उसके बैग लेकर वहाँ आया और उसने हैरानी से उस लड़की को पूछा, “ये आपकी सीट है।” 

उस लड़की ने मुस्कुराकर कहा, “येस, वो विंडो वाली।” 

“फिर तो आप मेरे साथ ही बैठेंगी। आपके साथ वाली सीट मेरी ही है।” नील ने भी मुस्कुराते हुए कहा। रावी और गुरनूर उसे ही देख रही थी। गुरनूर ने थोड़ा शरारत से रावी को देखते हुए नील को सुनाने के लिए कहा, “रावी, इन दिनों लोगों के साथ इत्तेफाक बहुत होते है।” 

उस लड़की को गुरनूर की बात समझ नहीं आई लेकिन नील समझ गया की गुरनूर क्या कहना चाह रही है। वो लड़की नील को देखकर अपनी सीट पर बैठ गई। नील ने ध्यान से उसके बैग ऊपर रख दिए और फिर उसके पास आकर बैठ गया। 

उस लड़की ने अपना नाम नील को बताते हुए कहा, “मेरा नाम अर्पिता है।” 

नील ने भी उस लड़की को अपना नाम बताया और फिर रावी और गुरनूर की तरफ इशारा करते हुए कहा, “ये मेरी बहन है रावी और ये इसकी दोस्त है, गुरनूर।” 

अर्पिता ने रावी और गुरनूर से हेलो कहा तो दोनों मुस्कुरा उठी। थोड़ी देर में ट्रेन चलने लगी। नील का ध्यान बार बार अर्पिता की तरफ जा रहा था। अर्पिता भी बीच बीच में नील को देख लेती क्योंकि उसे नील का केयरिंग नेचर अच्छा लगा था। 

अर्पिता नील के साथ बीच बीच में बातें भी कर रही थी और बातों ही बातों में उन दोनों ने अपने नम्बर भी एक दूसरे को दे दिए। गुरनूर का ध्यान जब इस बात पर गया तो उसने रावी से कहा, “लगता है तुम्हारे भाई की लव स्टोरी भी अब शुरू होने वाली है।” 

नील ने गुरनूर की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया क्योंकि उसका ध्यान अर्पिता में था। रावी ने नील और अर्पिता को देखकर गुरनूर से कहा, “मतलब अब मैं ही सिंगल बची हूँ।” 

रावी की ये बात सुनकर गुरनूर हँसने लगी। 

Continued In आर्ज-ए-इश्क - 21

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