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Wednesday, 5 August 2026

आर्ज-ए-इश्क - 10

 



रावी ने गुरनूर को देखते हुए कहा, “गुरनूर, तुम्हें ये क्यों देखना है। तुम तो भगवान में इतना यकीन करती हो। वो किसी गलत इंसान को थोड़ी भेजेंगे तुम्हारी जिंदगी में।” 

“फिर भी मैं ये देखना चाहती हूँ।” गुरनूर ने कुछ सोचते हुए कहा। 

श्रेयांश अपने सभी दोस्तों के साथ पार्टी कर रहा था। बीयर पीने की वजह से वो सभी नशे में थे। श्रेयांश आराम से सोफे पर बैठा हुआ था। उसके सभी दोस्तों ने नशे में खुशी से चिल्लाकर कहा, “फाइनली, हमारे भाई की गर्लफ्रेंड बन गई।” 

उनकी ये बात सुनकर श्रेयांश भी मुस्कुराने लगा और थोड़ी देर बाद विवेक के साथ अपने घर जाने के लिए निकल गया। 

रात के एक बजे के करीब श्रेयांश अपने घर पहुँचा। उसने अपने कमरे में आने के बाद बेड पर लेटकर गुरनूर को कॉल किया। 

रावी तो सो चुकी थी पर गुरनूर को नींद नहीं आ रही थी। वो खिड़की के पास खड़े होकर आसमान में चाँद को देख रही थी की कभी उसके फोन पर किसी का कॉल आया। वो अच्छी तरह से जानती थी की इस वक्त बस श्रेयांश उसे कॉल कर सकता है इसलिए उसने जल्दी से बेड से फोन उठाकर कॉल उठाया जिससे रावी जाग न जाए। 

जैसे ही उसने फोन उठाया, श्रेयांश ने पूछा, “तुम सो तो नहीं रही थी?” 

गुरनूर ने मुस्कुराते हुए कहा, “तुम्हारे ख्याल सोने की इजाज़त नहीं दे रहे। लेट कैसे हो गए तुम?” 

ये सुनकर श्रेयांश के चेहरे पर एक मुस्कान आ गई और उसने कहा, “वो तुमने कहा था ना दोस्तों को पार्टी दे दो। उन्हें पार्टी दे रहा था।” 

गुरनूर ने भांप लिया की श्रेयांश इस वक्त नशे में है इसलिए उसने पूछा, “तुमने ड्रिंक क्यों की?” 

“वो दोस्तों के साथ थोड़ी सी ड्रिंक की। वो भी सिर्फ बीयर। अब पार्टी भी तो मैं दे रहा था ना। वो भी खुश हो गए जब उन्हें पता चला की तुमने मुझे हाँ कह दी और उन्हें पार्टी देने के लिए भी मुझे तुमने कहा है।” श्रेयांश ने कहा। 

गुरनूर हँसने लगी और उसने कहा, “मेरी वजह से पार्टी थी जो मैंने ही देने के लिए कहा था। वो भी तुमने मेरे बिना ही दे दी।” 

“तुम्हारे साथ मिलकर तो दोस्तों को हमारी शादी के वेडिंग रिसेप्शन की पार्टी दूंगा।” श्रेयांश ने उस बारे में सोचते हुए कहा।

“अच्छा जी। ये बात।” गुरनूर ने अदा से कहा। इस वक्त उसके चेहरे पर एक अलग ही नूर था। 

“तुम्हें अगर मेरा ड्रिंक करना नहीं पसंद तो मैं छोड़ दूंगा।” श्रेयांश ने मासूमियत से कहा जिसे सुन गुरनूर मुस्कुराने लगी। वो श्रेयांश की ये बात सुनकर उससे इंप्रेस हो गई थी इसलिए उसने कहा, “कभी कभी कर लिया करो पर ज्यादा नहीं।” 

“ओह गुरनूर, तुम कितनी अच्छी हो।” श्रेयांश ने खुश होते हुए कहा तो गुरनूर खिलखिलाकर हँस पड़ी जिसकी वजह से रावी की नींद खुल गई। वो तो शीतल और विक्रम का कमरा नीचे था वरना गुरनूर की हँसी सुन वो भी कमरे में आ सकते थे। 

रावी ने गुरनूर को देखा और कहा, “गुरनूर, बात करना ठीक है पर कम से कम इतने ज़ोर से हँसो तो मत की  किसी की नींद डिस्टर्ब हो और इस वक्त कौन बात करता है।” 

“जिन्हें प्यार में नींद न आए। तुम सो जाओ।” गुरनुर ने रावी से कहा तो दूसरी ओर से उसे श्रेयांश के हँसने की आवाज़ आई जिसे सुन गुरनूर भी हल्का सा हँसी। रावी ने उसे देखा और फिर कंबल से अपना चेहरा ढककर सो गई। 

श्रेयांश ने गुरनूर से पूछा, “गुरनूर, तुम प्यार के बारे में ही पोयम्स लिखती हो ना?” 

“मैं इश्क़ लिखती हूँ, श्रेयांश।” गुरनूर ने कहा जिसपर श्रेयांश ने पूछा, “क्या तुमने कभी किसी से इश्क़ किया है?” 

गुरनूर ने कहा, “इश्क़ किया नहीं जाता। इश्क बस हो जाता है। जब इश्क की हवाएं छूती हैं ना, तो इन हवाओं को रोका नहीं जाता। ये बस तुम्हें छू जाती है और अपना एहसास तुम्हारे अंदर छोड़ जाती है। मुझे जब किसी से इश्क़ होगा ना तो मैं कयामत तक निभाऊंगी।

“मतलब अभी तुम्हें मुझसे इश्क़ हुआ नहीं है?” श्रेयांश ने पूछा।

गुरनूर ने कुछ सोचा और कहा, “अभी तो नहीं लेकिन जब होगा ना, तो इन इश्क़ की हवाओं को काबू करना ना मेरे बस में होगा ना तुम्हारे। बस छू लेंगी ये हमें बिना इजाजत के।” 

श्रेयांश ने ये सुनकर कहा, “तुम बहुत गहरी बातें नहीं करतीं।” 

“सब यही कहते हैं।” गुरनूर ने कहा और वो बेड पर आकर बैठ गई। थोड़ी देर बाद श्रेयांश के सांस लेने की आवाज़ गुरनूर के कानों में पड़ी जिससे उसे समझ आ गया की श्रेयांश उससे बात करते हुए ही सो चुका है। वो मुस्कुराते हुए लेट गई और ऐसे ही खामोशी से श्रेयांश की सांसों के शोर को सुनने लगी। थोड़ी देर बाद उसे भी नींद आ गई। 

सुबह श्रेयांश की अचानक ही पाँच बजे नींद खुली तो उसने देखा की उसके फोन पर अभी भी गुरनूर का कॉल चल रहा है जिसकी कॉल टाइमिंग पूरे चार घंटे की स्क्रीन पर दिख रही थी। श्रेयांश ने फोन कान पर लगाया तो गुरनूर की सांसों की धीमी आवाज़ उसे सुनाई दी जिसे सुनकर वो मुस्कुरा उठा। वो ऐसे ही फोन कान से लगाए बेड पर लेट गया और गुरनूर की सांसों के शोर को सुनने लगा।

श्रेयांश को थोड़ी देर बाद एक शरारत सूझी। उसने फोन काटा और गुरनूर को दोबारा फोन लगाया। 

जब गुरनूर का फोन वाइब्रेट हुआ तो उसने नींद में ही फोन उठाकर अधखुली आँखों से पहले स्क्रीन पर फोन करने वाले का नाम देखा और श्रेयांश का नाम देखकर फोन उठाते हुए नींद में कहा, “हेलो।” 

“तुम इतनी देर तक कैसे सो सकती हो, मिस गुरनूर।” श्रेयांश ने अपनी हँसी को कंट्रोल करते हुए कहा जिसे सुनकर गुरनूर ने कहा, “तुम भी इतनी सुबह सुबह कैसे उठ सकते हो, मिस्टर श्रेयांंश।” 

“मुझे इतनी सुबह उठने की ही आदत है, मैडम।” श्रेयांश ने कहा। 

गुरनूर ने भी अपनी नींद से भरी आवाज़ में कहा, “और मुझे इतनी सुबह उठने की आदत बिल्कुल नहीं है।” 

श्रेयांश मुस्कुराया और उसने कहा, “तो ये आदत तुम अब डाल लो क्योंकि शादी के बाद मैं तुम्हें सुबह सुबह ही उठाया करूंगा।”

“क्या?” गुरनूर ने हैरानी से कहा तो श्रेयांश ने कहा, “जी हाँ। अभी से उठना शुरू करो सुबह सुबह जिससे तुम्हें हमारी शादी तक आदत हो जाए।”

“कल से करूॅंगी। अभी मैं सो रही हूँ।” कहकर गुरनूर ने जल्दी से फोन काट दिया जिससे श्रेयांश हँसने लगा। 

जैसे जैसे दिन बीत रहे थे, गुरनूर श्रेयांश को अच्छे से जानने लगी और उसे एहसास होने लगा की श्रेयांश ही उसका हमसफर बन सकता है। 

श्रेयांश को उसकी जिंदगी में भेजने के लिए वो भगवान को शुक्रिया कहना चाहती थी इसलिए वो शीतल को बताकर घर से गुरुद्वारा साहिब जाने के लिए निकल गई। 

सबसे पहले वो रावी के घर पहुँची और उसकी मम्मी, मधु को नमस्ते कहकर उनसे रावी के बारे में पूछा तो मधु ने रावी को आवाज़ लगाकर नीचे बुला लिया। रावी नीचे आई तो गुरनूर को देखकर खुश हो गई। गुरनूर ने रावी को देखकर कहा, “गुरुद्वारा साहिब चलोगी मेरे साथ।” 

“थैंक यू बोलना है भगवान जी को।” रावी ने कहा तो गुरनूर ने मुस्कुराते हुए हाँ में सिर हिला दिया। 

रावी तैयार होकर गुरनूर के साथ गुरुद्वारा साहिब जाने के लिए निकल गई। वहाँ पहुँचकर गुरनूर ने हाथ जोड़कर भगवान जी को थैंक यू कहते हुए कहा, “थैंक यू, थैंक यू, थैंक यू सो मच भगवान जी की आपने श्रेयांश को मेरी जिंदगी में भेजा।” 

थोड़ी देर वहाँ बैठकर गुरनूर और रावी बाहर आ गई। रास्ते में मंदिर भी आता था पर गुरनूर कभी भी मंदिर के अंदर नहीं जाती थी। रावी जब भी जाती थी तो वो बाहर ही खड़े होकर रावी का इंतजार करती थी पर आज उसका मन मंदिर के अंदर जाने का भी कर रहा था। 


Continued In आर्ज-ए-इश्क - 11

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