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Sunday, 23 August 2026

आर्ज-ए-इश्क - 17


 

गुरनूर को जब महसूस हुआ की उसे कोई छू रहा है तो उसने अपने साइड में देखा। वो उस लड़के पर चिल्ला पाती, इससे पहले श्रेयांश ने पीछे से जाकर उस लड़के की शर्ट की कॉलर को पकड़कर उसे अपनी तरफ किया और जोर से एक मुक्का उसके चेहरे पर मारा। 


श्रेयांश ने उस लड़के को इतनी जोर से मारा था की वो लड़का जमीन पर गिर गया। क्लब में जो गाने बज रहे थे वो बंद हो चुके थे। क्लब में मौजूद सभी लोगों की नज़रें श्रेयांश और उस लड़के पर थी। विवेक और श्रेयांश के सारे दोस्त उस तरफ आ गए थे। गुरनूर भी श्रेयांश को ऐसे देखकर घबरा गई थी। उसने कसकर रावी का हाथ पकड़ लिया। श्रेयांश ने एक नजर गुरनूर को देखा और फिर नीचे झुककर उस लड़के को थोड़ा और पीटने लगा। उस लड़के को पिटता हुआ देखकर उसके दोस्त ने उसे बचाने के लिए आगे आना चाहा पर उसे विवेक और श्रेयांश के बाकी दोस्तों ने रोक लिया। श्रेयांश ने उस लड़के की कॉलर पकड़कर उसकी आँखों में देखते हुए कहा, “इस बार सिर्फ थोड़ा सा पीटा है। अगर इसे अगली बार छूने की हिम्मत की तो मैं तेरा वो हश्र करूँगा की तेरी रूह कापेगी किसी को भी हाथ लगाने से पहले। गुरनूर कौर ता कयामत तक सिर्फ श्रेयांश शर्मा की है।” 


गुरनूर इस वक्त श्रेयांश को देखकर डरी और घबराई हुई थी फिर भी उसने इस बात पर ध्यान दिया की श्रेयांश ने ये बात उर्दू में कही है। 


श्रेयांश ने खड़े होकर गुरनूर का हाथ पकड़ा और उसे क्लब से बाहर ले जाने लगा। उसे बाहर जाता देखकर विवेक ने रावी को इशारा किया और वो दोनों भी उनके पीछे पीछे बाहर आ गए। 


श्रेयांश का मूड खराब हो चुका था। उसने अपनी बाइक स्टार्ट की तो गुरनूर बिना कुछ कहे उसके पीछे बैठ गई। श्रेयांश बाइक चलाने लगा। विवेक ने भी बाइक स्टार्ट कर रावी को बैठने के लिए कहा और श्रेयांश के पीछे जाने लगा।


थोड़ी देर बाद वो सभी एक पार्क में आकर बैठे हुए थे। गुरनूर श्रेयांश के साथ बैठी हुई थी। विवेक और रावी बेंच पर बैठे हुए उन दोनों को देख रहे थे। गुरनूर श्रेयांश को देखकर मुस्कुरा रही थी। श्रेयांश ने उसे देखते हुए पूछा, “मुस्कुराते हुए यही सोच रही हो ना की किस गुंडे से प्यार कर लिया है तुमने?” 


श्रेयांश की ये बात सुनकर गुरनूर हँसने लगी। उसने अपनी हँसी कंट्रोल की और कहा, “अपना हाथ दिखाओ। ज्यादा तो नही लगी।” 


“कुछ नही हुआ है।” श्रेयांश ने अपने हाथ को देखते हुए कहा। 


“तुमने मेरे लिए उर्दू कब सीखी?” गुरनूर ने पूछा। उसका सवाल सुनकर श्रेयांश ने उसे हैरानी से पूछा, “तुमने नोटिस किया?” 


इसपर गुरनूर ने शरारत से कहा, “मैंने तो ये भी नोटिस किया की तुमने कैसे उस लड़के को करांटे के मूव्स यूज करके मारा।” 


“इंटरनेशनल लेवल चैंपियन हूँ मैं करांटे का। मैंने पाँच साल तक करांटे किया है।” श्रेयांश ने कहा तो पहले गुरनूर ने हैरानी से उसे देखा और फिर खुशी और हैरानी के मिले जुले भावों के साथ पूछा, “क्या सच में?” 


श्रेयांश ने मुस्कुराते हुए हाँ में सिर हिला दिया। वहीं दूसरी तरफ रावी ने श्रेयांश और गुरनूर को देखते हुए विवेक से पूछा, “क्या यही सब तुम दोनों की लाइफ है जिसे देखने के लिए गुरनूर इतनी एक्साइटेड थी?”


“येस, यही हम दोनों की लाइफ है। बाइक एण्ड पार्टीज।” विवेक ने रावी को देखते हुए कहा तो रावी ने कहा, “बेकार है काफी।”


“लेकिन हम इसे एन्जॉय करते है और तुम्हारी दोस्त ने तो शायद इसे एक्सेपट भी कर लिया है।” कहकर विवेक फिर से श्रेयांश और गुरनूर को देखने लगा। 


रावी ने मुस्कुराते हुए कहा, “ऐसा इसलिए है क्योंकि वो इस वक़्त श्रेयांश की मोहब्बत में है और उसकी मोहब्बत की डेफनिशन यही है। किसी की मोहब्बत में उसका सब कुछ अपना बना लो। बुरी आदतें भी। अगर वो भी तुमसे मोहब्बत करता होगा तो अपनी बुरी आदतें सुधार लेगा।” 


विवेक ने उसकी बातों में दिलचस्पी दिखाते हुए पूछा, “और तुम्हारे लिए मोहब्बत क्या है?”


“ये तो अभी मुझे भी नहीं पता पर मैं मोहब्बत के नाम किसी की बुरी आदतों को एक्सेपट नहीं करूॅंगी। मैं ये ऐसे अपने बॉयफ्रेंड का क्लब में जाना, ड्रिंक्स करना और ऐसे किसी को भी पीटना बर्दाश्त नहीं करूँगी। मेरे बॉयफ्रेंड में अगर ऐसी कोई भी बुरी आदत हुई तो उसे वो सुधारनी पड़ेगी।” रावी ने कहा। उसकी बातें सुनकर विवेक ने दबी आवाज़ में कहा, “तुम मोहब्बत करके तो देखो। मैं खुद को पूरी तरह से सुधार लूँगा।”


विवेक को अपनी इस बात पर हैरानी हुई। कहाँ वो श्रेयांश को गुरनूर के लिए सीरियस न होने के लिए कहता था और कहाँ इस वक्त वो रावी ने साथ मोहब्बत के बारे में सोच रहा था। रावी ने भी उसे हैरानी से देखकर पूछा, “क्या कहा तुमने?”


विवेक को एक पल के लिए लगा की रावी ने उसकी बात सुन ली है इसलिए उसने अपनी बात संभालते हुए कहा, “मैंने कहा की श्रेयांश ने तुम्हारी दोस्त के लिए ही उस लड़के को इतना मारा पीटा। बाकी अब उसे गुरनूर से मोहब्बत है तो जैसा तुमने कहा, सुधार लेगा वो खुद को।” 


रावी ने हाँ में सिर हिलाया और अपनी घड़ी में टाइम देखा। अभी थोड़ा वक्त था उसके और गुरनूर के पास इसलिए उसने सोचा की गुरनूर को श्रेयांश के साथ थोड़ा और वक्त बिताने देना चाहिए। 


श्रेयांश ने प्यार से गुरनूर को देखते हुए पूछा, “कैसी लगी मेरी दुनिया, तुम्हें?” 


गुरनूर ने मुस्कुराते हुए कहा, “अच्छी है। एटलीस्ट तुम इसी से अपनी लाइफ एन्जॉय तो कर लेते हो।” 


“तुम्हें सच में अच्छी लगी?” श्रेयांश ने हैरानी से पूछा।


“जब हम किसी से इश्क करते हैं ना तो उसका सब कुछ अच्छा लगता है।” गुरनूर ने प्यार से उसकी आँखों में देखते हुए कहा। 


श्रेयांश हल्का सा मुस्कुराया और उसने कहा, “मेरे लिए तो ये एक्सटेसी है। एक्सटेसी इन फन।” 


“एक्सटेसी इन फन तो तुम अच्छे से जानते हो। ये बताओ की एक्स्टेसी इन लव क्या है तुम्हारे लिए?” गुरनूर ने पूछा तो श्रेयांश खामोशी से उसे देखने लगा क्योंकि उसने तो दिल से आजतक गुरनूर के लिए मोहब्बत को महसूस ही नहीं किया था। बल्कि गुरनूर की वजह से उसका दिल उसके दिमाग से लड़ता रहता था।


Continued In आर्ज-ए-इश्क - 18

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